hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Languages
Categories
Featured Books

मुख़बिर - 15 By राज बोहरे

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (15) ब्याह कृपाराम की याददास्त बड़ी तेज है । जब उसका ब्याह हुआ तब वह दस बरस का रहा होगा, लेकिन उस दिन जब किस्सा सुनाने बैठा तो आंख मूंद कर इस तरह राई-रत्ती ब...

Read Free

कौन दिलों की जाने! - 2 By Lajpat Rai Garg

कौन दिलों की जाने! दो रविवार को नित—प्रतिदिन की अपेक्षा रानी कुछ जल्दी उठी। आसमान साफ था। मौसम बड़ा सुहावना तथा खुशनुमा था। गुलाबी ठंड तन—मन को स्निग्धता तथा स्फूर्ति प्रदान कर रही...

Read Free

राहबाज - 4 By Pritpal Kaur

रोज़ी की राह्गिरी (4) मेरा नशा दिन के हर पहर की अपनी एक अलग तासीर होती है. रात की तासीर अँधेरे से उपजती है और नशे में ढलती है. मैं तो दिन रात एक नशे में रहती हूँ. मेरे होने का नशा....

Read Free

उस घर में एक दिन By Kailash Banwasi

उस घर में एक दिन कैलाश बनवासी पहली बार ! सचमुच पहलीबार इतना बड़ा और इतना नामी शहर देख रहा था मैं. मेरी दीदी भी पहली दफे देख रही थी. शायद हर बड़े शहर का अपना एक अलग आकर्षण होता है! उस...

Read Free

भगवान की भूल - 5 By Pradeep Shrivastava

भगवान की भूल प्रदीप श्रीवास्तव भाग-5 चित्रा आंटी की ऑयल पेंटिंग अभी इतनी बनी ही नहीं है कि मुझे कोई पहचान सके। मिनिषा वाली मांग लूंगी। फाड़ दूंगी उसे। लेकिन अगले दिन मेरा निर्णय धरा...

Read Free

ब्राह्मण की बेटी - 9 By Sarat Chandra Chattopadhyay

ब्राह्मण की बेटी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय प्रकरण - 9 ज्ञानदा ने कमरे में आकर एक बार भीतर से दरवाजा बन्द किया, तो फिर खोली ही नहीं। दासी और बूढ़ा ससुर विमूढ़ बनकर दोपहर तक बैठे रहे। वे...

Read Free

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख - 1 By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

Read Free

देखत जग बौराना, झूठे जग पतियाना……… By Vijay Vibhor

पांच सौ साल पहले कबीर ने साधु को पहचानने की यह निशानी बताई थी – “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय॥” त्याग, संयम, सादगी और सहजता को साधुता की कसौटी...

Read Free

आग में गर्मी कम क्यों है ? By Sudha Om Dhingra

आग में गर्मी कम क्यों है ? सुधा ओम ढींगरा अंत्येष्टि गृह के कोने में फ़र्श पर वह दीवार के सहारे बैठी अपनी हथेलियों को देख रही है... हर सुबह यही तो होता है....... बचपन में माँ ने कह...

Read Free

केशव एंड शर्मा - : EP 080 - Encounter By The Real Ghost

Keshav & Sharma is a cartoon series originally started by Men's HUB & Daaman Welfare Society with the help of Volunteers. Mr. Diljeet & Mr. Anupam Dubey are main artists of the...

Read Free

इस दश्‍त में एक शहर था - 1 By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

Read Free

उमस By Kailash Banwasi

उमस कैलाश बनवासी तांगेवाले ने घोड़े की लगाम खींच दी।तांगा रूक गया।जाने किस हड़बड़ी में पहले माँ नीचे उतरी।सूटकेस भी माँ ने संभाल लिया।तांगेवाले की ओर बढ़कर पूछा—कित्ता पैसा हुआ? —दो रू...

Read Free

मुक्ति By Renu Gupta

मौलश्री आज बेहद गमगीन थी। सांझ का सुरमई अंधेरा धीरे धीरे गहराने लगा था। जैसे जैसे रात्रि की कालिमा अपने पंख फैला रही थी, मौलश्री के अन्त:स्थल में अंतहीन निराशा का बियाबान शून्य पसर...

Read Free

इस समय चिड़ियों के बारे में By Kailash Banwasi

इस समय चिड़ियों के बारे में कैलाश बनवासी दीवाली का दिन था। ग्यारह बजने को आ रहे थे और मैं अपना बाजार जाना टाले हुआ था। लेकिन अब ज्यादा देर तक टालना संभव नहीं था। पत्नी के नाराज़ हो ज...

Read Free

स्पर्श By Bharti Kumari

कहानीस्पर्शविक्रम की नींद छोटे बच्चे के रोने की आवाज से खुली। आश्चर्य हुआ कि इतनी सुबह कौन आ गया? कमरे से बाहर निकला तो हॉल में एक-डेढ़ साल की बच्ची रो रही थी। गोरी चिट्टी सी बच्ची...

Read Free

चुपचाप By Satish Sardana Kumar

कहानीभोपाल एक्सप्रेस बड़ी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ी चली जा रही थी।ट्रैन के ए सी कोच में लेटी चालीस वर्ष की बेहद खूबसूरत गृहिणी वृंदा,जिसने अपना यौवन, लावण्य और देहयष्टि बड़े अतिरिक...

Read Free

जीवनसंध्या By Renu Gupta

'पापा, डाइनिंग रूम में आजाओ, आपका नाश्ता लग गया है. सबके साथ नाश्ता करलो, नहीं तो बाद में कहोगे, मुझे किसी ने नाश्ते के लिए नहीं बुलाया,' वर्मा साहब की सबसे बड़ी बहू मन्नत न...

Read Free

तोरा मन दर्पण कहलाये By Rita Gupta

दो बहनें, न कोई बड़ी न कोई छोटी। दरअसल जुड़वां, मालविका और मधुलिका। एक सी शक्लें, कद काठी और रंगत। बचपन में माँ ने खूब गलतियां की होंगी इन्हे पालने में। एक सी दिखने वाली इन बच्चियों...

Read Free

संयोग से हुआ रिश्ता By एमके कागदाना

् मैं वो दिन कैसे भूल सकती थी । जिस दिन ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी थी। वह दिन फिर से मेरी आंखों के सामने तैर गया। जब मैं अपनी बूआ के घर बूआ की बेटी की शादी मे आई थी। और सरजीत अप...

Read Free

विद्रोहिणी - 14 - अंतिम भाग By Brijmohan sharma

श्यामा का परिवार बड़े लंबे समय से जाति से निष्कासित था। मोहन ने अपने परिवार का नाम फिर से जाति में जुड़वाने के लिए अनेक प्रयत्न किए लेकिन उन्हे सफलता नहीं मिली। बाद में उसे मालूम पड़ा...

Read Free

मुट्ठी भर आसमां By Renu Gupta

केतकी बेहद खिन्नता का अनुभव कर रही थी. सामने के घर से आती शहनाई की मधुर स्वरलहरी भी आज उसे अप्रिय लग रही थी. मनन से विवाह के लिए ना कर तम्मा ने उसे निराश कर दिया था. बार बार एक कसक...

Read Free

बिराज बहू - 15 - अंतिम भाग By Sarat Chandra Chattopadhyay

पूंटी अपने भाई नीलाम्बर को एक पल भी चैन से नहीं बैठने देती थी। पूजा के दिनों से लेकर पूस के अन्त तक वे शहर-दर-शहर और एक तीर्थ से दूसरे तीर्थ घूमते रहे। वह अभी नवयौवना थी। उसके शरीर...

Read Free

स्टार्ट अप By Bharti Kumari

मुझे उसके हाव - भाव वैसे नहीं लगे जैसा मैं सोच कर गया था और उसका कमरा भी कोठे वाली जैसा नहीं। कमरे में टीवी, फ्रिज और एसी भी। जिस आत्मविश्वास से वो कांच के गिलास में पानी करते पर र...

Read Free

व्यर्थ जीवन By Satish Sardana Kumar

सिर्फ बीस साल पहले मैं एक ताकतवर शख्स था।मेरा बेटा मेरे साथ था।मेरा पहलवान बेटा, मेरा शारीरिक ताकत से लबालब,ठोस शरीर लिए मेरा बेटा मुझे जीसस ने दिया था।क्या नहीं चलाना जानता था वह।...

Read Free

कैरियर By Dr Fateh Singh Bhati

वो रात्रि एक बजे घर पहुंची | स्मरण हो आया कि बेटी से बात करनी थी पर अब वहां तो रात के तीन बज रहे होंगे | इस समय बात करूँ या ना ? दिन में उसका फ़ोन आया था | कितना चहक रही थी ? चहकती...

Read Free

मां मैं आ रहा हूं By Saroj Prajapati

इस यंत्र पर मेरी धड़कनों को घटते बढ़ते देख डॉक्टर मेरे जीवन का अनुमान लगा रहे थे।पर उन्हें क्या पता मुझमें जब जीने कि चाह ही नहीं बची तो इन सब उपकर्मों से क्या लाभ। अब तो वह घड़ी ध...

Read Free

नियति By Renu Gupta

पलाश......... पलाश........कहाँ जा रहे हो?.........अपनी केया को बीच राह में छोड़ कर..........वापिस आजाओ.........मत जाओ मुझसे दूर......पलाश........और एक ह्रदय विदारक चीख के साथ पलाश क...

Read Free

वर्दी By Govind Sen

ठो...ठो...ठो...। मकान की नींव हिलने लगती है। दीवारें काँपने लगती हैं। बाबूजी के मुख से पड़ोसी के लिए गालियाँ फूटने लगती है। ’ठोकी-ठोकी नऽ भीतड़ो ओदार दगा रे भई।’ माँ कुढ़ने लगती है। म...

Read Free

दीवारें तो साथ हैं - 3 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

‘देखो अगर तुम्हारी बात मान लें कि चलो लड़की के घर खाने पीने रहने में कोई संकोच हिचक नहीं करनी चाहिए। आखिर वह भी अपनी ही संतान है। मेरी समझ में लड़की की मदद तभी लेनी चाहिए जब कोई और र...

Read Free

मुख़बिर - 15 By राज बोहरे

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (15) ब्याह कृपाराम की याददास्त बड़ी तेज है । जब उसका ब्याह हुआ तब वह दस बरस का रहा होगा, लेकिन उस दिन जब किस्सा सुनाने बैठा तो आंख मूंद कर इस तरह राई-रत्ती ब...

Read Free

कौन दिलों की जाने! - 2 By Lajpat Rai Garg

कौन दिलों की जाने! दो रविवार को नित—प्रतिदिन की अपेक्षा रानी कुछ जल्दी उठी। आसमान साफ था। मौसम बड़ा सुहावना तथा खुशनुमा था। गुलाबी ठंड तन—मन को स्निग्धता तथा स्फूर्ति प्रदान कर रही...

Read Free

राहबाज - 4 By Pritpal Kaur

रोज़ी की राह्गिरी (4) मेरा नशा दिन के हर पहर की अपनी एक अलग तासीर होती है. रात की तासीर अँधेरे से उपजती है और नशे में ढलती है. मैं तो दिन रात एक नशे में रहती हूँ. मेरे होने का नशा....

Read Free

उस घर में एक दिन By Kailash Banwasi

उस घर में एक दिन कैलाश बनवासी पहली बार ! सचमुच पहलीबार इतना बड़ा और इतना नामी शहर देख रहा था मैं. मेरी दीदी भी पहली दफे देख रही थी. शायद हर बड़े शहर का अपना एक अलग आकर्षण होता है! उस...

Read Free

भगवान की भूल - 5 By Pradeep Shrivastava

भगवान की भूल प्रदीप श्रीवास्तव भाग-5 चित्रा आंटी की ऑयल पेंटिंग अभी इतनी बनी ही नहीं है कि मुझे कोई पहचान सके। मिनिषा वाली मांग लूंगी। फाड़ दूंगी उसे। लेकिन अगले दिन मेरा निर्णय धरा...

Read Free

ब्राह्मण की बेटी - 9 By Sarat Chandra Chattopadhyay

ब्राह्मण की बेटी शरतचंद्र चट्टोपाध्याय प्रकरण - 9 ज्ञानदा ने कमरे में आकर एक बार भीतर से दरवाजा बन्द किया, तो फिर खोली ही नहीं। दासी और बूढ़ा ससुर विमूढ़ बनकर दोपहर तक बैठे रहे। वे...

Read Free

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख - 1 By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

Read Free

देखत जग बौराना, झूठे जग पतियाना……… By Vijay Vibhor

पांच सौ साल पहले कबीर ने साधु को पहचानने की यह निशानी बताई थी – “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय॥” त्याग, संयम, सादगी और सहजता को साधुता की कसौटी...

Read Free

आग में गर्मी कम क्यों है ? By Sudha Om Dhingra

आग में गर्मी कम क्यों है ? सुधा ओम ढींगरा अंत्येष्टि गृह के कोने में फ़र्श पर वह दीवार के सहारे बैठी अपनी हथेलियों को देख रही है... हर सुबह यही तो होता है....... बचपन में माँ ने कह...

Read Free

केशव एंड शर्मा - : EP 080 - Encounter By The Real Ghost

Keshav & Sharma is a cartoon series originally started by Men's HUB & Daaman Welfare Society with the help of Volunteers. Mr. Diljeet & Mr. Anupam Dubey are main artists of the...

Read Free

इस दश्‍त में एक शहर था - 1 By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

Read Free

उमस By Kailash Banwasi

उमस कैलाश बनवासी तांगेवाले ने घोड़े की लगाम खींच दी।तांगा रूक गया।जाने किस हड़बड़ी में पहले माँ नीचे उतरी।सूटकेस भी माँ ने संभाल लिया।तांगेवाले की ओर बढ़कर पूछा—कित्ता पैसा हुआ? —दो रू...

Read Free

मुक्ति By Renu Gupta

मौलश्री आज बेहद गमगीन थी। सांझ का सुरमई अंधेरा धीरे धीरे गहराने लगा था। जैसे जैसे रात्रि की कालिमा अपने पंख फैला रही थी, मौलश्री के अन्त:स्थल में अंतहीन निराशा का बियाबान शून्य पसर...

Read Free

इस समय चिड़ियों के बारे में By Kailash Banwasi

इस समय चिड़ियों के बारे में कैलाश बनवासी दीवाली का दिन था। ग्यारह बजने को आ रहे थे और मैं अपना बाजार जाना टाले हुआ था। लेकिन अब ज्यादा देर तक टालना संभव नहीं था। पत्नी के नाराज़ हो ज...

Read Free

स्पर्श By Bharti Kumari

कहानीस्पर्शविक्रम की नींद छोटे बच्चे के रोने की आवाज से खुली। आश्चर्य हुआ कि इतनी सुबह कौन आ गया? कमरे से बाहर निकला तो हॉल में एक-डेढ़ साल की बच्ची रो रही थी। गोरी चिट्टी सी बच्ची...

Read Free

चुपचाप By Satish Sardana Kumar

कहानीभोपाल एक्सप्रेस बड़ी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ी चली जा रही थी।ट्रैन के ए सी कोच में लेटी चालीस वर्ष की बेहद खूबसूरत गृहिणी वृंदा,जिसने अपना यौवन, लावण्य और देहयष्टि बड़े अतिरिक...

Read Free

जीवनसंध्या By Renu Gupta

'पापा, डाइनिंग रूम में आजाओ, आपका नाश्ता लग गया है. सबके साथ नाश्ता करलो, नहीं तो बाद में कहोगे, मुझे किसी ने नाश्ते के लिए नहीं बुलाया,' वर्मा साहब की सबसे बड़ी बहू मन्नत न...

Read Free

तोरा मन दर्पण कहलाये By Rita Gupta

दो बहनें, न कोई बड़ी न कोई छोटी। दरअसल जुड़वां, मालविका और मधुलिका। एक सी शक्लें, कद काठी और रंगत। बचपन में माँ ने खूब गलतियां की होंगी इन्हे पालने में। एक सी दिखने वाली इन बच्चियों...

Read Free

संयोग से हुआ रिश्ता By एमके कागदाना

् मैं वो दिन कैसे भूल सकती थी । जिस दिन ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी थी। वह दिन फिर से मेरी आंखों के सामने तैर गया। जब मैं अपनी बूआ के घर बूआ की बेटी की शादी मे आई थी। और सरजीत अप...

Read Free

विद्रोहिणी - 14 - अंतिम भाग By Brijmohan sharma

श्यामा का परिवार बड़े लंबे समय से जाति से निष्कासित था। मोहन ने अपने परिवार का नाम फिर से जाति में जुड़वाने के लिए अनेक प्रयत्न किए लेकिन उन्हे सफलता नहीं मिली। बाद में उसे मालूम पड़ा...

Read Free

मुट्ठी भर आसमां By Renu Gupta

केतकी बेहद खिन्नता का अनुभव कर रही थी. सामने के घर से आती शहनाई की मधुर स्वरलहरी भी आज उसे अप्रिय लग रही थी. मनन से विवाह के लिए ना कर तम्मा ने उसे निराश कर दिया था. बार बार एक कसक...

Read Free

बिराज बहू - 15 - अंतिम भाग By Sarat Chandra Chattopadhyay

पूंटी अपने भाई नीलाम्बर को एक पल भी चैन से नहीं बैठने देती थी। पूजा के दिनों से लेकर पूस के अन्त तक वे शहर-दर-शहर और एक तीर्थ से दूसरे तीर्थ घूमते रहे। वह अभी नवयौवना थी। उसके शरीर...

Read Free

स्टार्ट अप By Bharti Kumari

मुझे उसके हाव - भाव वैसे नहीं लगे जैसा मैं सोच कर गया था और उसका कमरा भी कोठे वाली जैसा नहीं। कमरे में टीवी, फ्रिज और एसी भी। जिस आत्मविश्वास से वो कांच के गिलास में पानी करते पर र...

Read Free

व्यर्थ जीवन By Satish Sardana Kumar

सिर्फ बीस साल पहले मैं एक ताकतवर शख्स था।मेरा बेटा मेरे साथ था।मेरा पहलवान बेटा, मेरा शारीरिक ताकत से लबालब,ठोस शरीर लिए मेरा बेटा मुझे जीसस ने दिया था।क्या नहीं चलाना जानता था वह।...

Read Free

कैरियर By Dr Fateh Singh Bhati

वो रात्रि एक बजे घर पहुंची | स्मरण हो आया कि बेटी से बात करनी थी पर अब वहां तो रात के तीन बज रहे होंगे | इस समय बात करूँ या ना ? दिन में उसका फ़ोन आया था | कितना चहक रही थी ? चहकती...

Read Free

मां मैं आ रहा हूं By Saroj Prajapati

इस यंत्र पर मेरी धड़कनों को घटते बढ़ते देख डॉक्टर मेरे जीवन का अनुमान लगा रहे थे।पर उन्हें क्या पता मुझमें जब जीने कि चाह ही नहीं बची तो इन सब उपकर्मों से क्या लाभ। अब तो वह घड़ी ध...

Read Free

नियति By Renu Gupta

पलाश......... पलाश........कहाँ जा रहे हो?.........अपनी केया को बीच राह में छोड़ कर..........वापिस आजाओ.........मत जाओ मुझसे दूर......पलाश........और एक ह्रदय विदारक चीख के साथ पलाश क...

Read Free

वर्दी By Govind Sen

ठो...ठो...ठो...। मकान की नींव हिलने लगती है। दीवारें काँपने लगती हैं। बाबूजी के मुख से पड़ोसी के लिए गालियाँ फूटने लगती है। ’ठोकी-ठोकी नऽ भीतड़ो ओदार दगा रे भई।’ माँ कुढ़ने लगती है। म...

Read Free

दीवारें तो साथ हैं - 3 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

‘देखो अगर तुम्हारी बात मान लें कि चलो लड़की के घर खाने पीने रहने में कोई संकोच हिचक नहीं करनी चाहिए। आखिर वह भी अपनी ही संतान है। मेरी समझ में लड़की की मदद तभी लेनी चाहिए जब कोई और र...

Read Free