hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • बयरी माँ

    बयरी माँ गुजर गईं ।
    उनके न रहने की खबर से धक्का सा लगा । यह खबर भी सीधे-सीधे नह...

  • रिश्ते

    सर्दियों की कुनकुनी धूप मुझे शुरू से ही बहुत पसंद है। रोज़ दोपहर को सोसाइटी...

  • शह और मात

    यह कहानी राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती के अप्रेल 2018 के अंक में प्र...

बयरी माँ By Govind Sen

बयरी माँ गुजर गईं ।
उनके न रहने की खबर से धक्का सा लगा । यह खबर भी सीधे-सीधे नहीं मिली थी । अनायास गाँव का एक मित्र मिला था । बातों ही बातों में उसने बयरी माँ की मृत्यु का जिक्र क...

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विद्रोहिणी - 12 By Brijmohan sharma

1 - विवेकानंद का आत्मज्ञान
2 - राम हनुमान प्रथम मिलन
3 - सुतीक्ष्ण प्रसंग
4 - फिर झगड़ा

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कहाँ जाना है, कहाँ जा रहे हैं? By Vijay Vibhor

आधुनिक मध्यम वर्गीय परिवारों में इतनी-सी सम्पन्नता तो आ ही गयी है कि वह विज्ञापनों से प्रभावित होकर बाजार के हवाले हो जाते हैं और अपने बच्चों को हर वह चीज/सुविधा उपलब्ध करवाना चाहत...

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बिराज बहू - 10 By Sarat Chandra Chattopadhyay

मागरा के गंज का पीतल का इतना पुराना कारखाना एकाएक बन्द हो गया। चांडाल जाति की उसकी परिचित लड़की यह समाचार सुनाने कि लिए आई। सांचो की बिक्री बन्द हो जाने के कारण, उसे क्या-क्या नुकस...

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दीवारें तो साथ हैं - 2 By Pradeep Shrivastava

‘नहीं दीदी सब इतना नहीं कर पाते। पांडे जी का घर देखिए न। उन्होंने तो जब बच्चों ने ज़्यादा परेशान किया, तो सब को अलग कर दिया। इसके बाद जब बेटों ने बैंक में जमा पैसों और पेंशन पर भी...

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दहन By Govind Sen

बच्चे खिलखिला रहे थे। उनके लिए अपनी ख़ुशी को संभालना मुश्किल था । ऊपर-नीचे सतत दौड़ लगा रहे थे । उन्होंने पूरे घर को आसमान पर उठा रखा था । वे सब उमंग, उत्साह और शरारत से लबालब थे । इ...

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रिश्ते By Dr. Vandana Gupta

सर्दियों की कुनकुनी धूप मुझे शुरू से ही बहुत पसंद है। रोज़ दोपहर को सोसाइटी के लॉन में बैठकर धूप सेंकना मेरा प्रिय शगल रहा है, बरसों से। कोई किताब पढ़ते हुए दोपहर गुजर जाती है।...

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कक्षा - ६ By महेश रौतेला

कक्षा ६ : मेरी उम्र तब लगभग ग्यारह वर्ष होगी।साल १९६५। ननिहाल पढ़ने गया था, कक्षा ६ में। पहले पहल घर से बाहर। जब बड़े भाई साहब छोड़ने गये थे तो खुश था लेकिन जब वे मुझे छोड़कर व...

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तक्सीम - 4 - अंतिम भाग By Pragya Rohini

‘‘हां भई हम पे भरोसा कहां था तुझे कि ख्याल रखेंगे तेरी बीवी का? अब संभाल ले तू।’’
बेटे का मजाक उड़ाते हुए अम्मा ने कहा तो जमील, अब्बा के सामने जरा शर्माया पर जबान तक आए उसके शब्द ब...

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मुख़बिर - 4 By राज बोहरे

दिन में समूह के बीच सुरक्षित चलते वक्त तक जरा-जरा सी आवाज पर हमारे बदन में फुरफुरी आ जाती थी, फिर तो इस वक्त रात के अंधेरे में असुरक्षित लेटे हम सब थे। मुझे ऐसे कई हादसे याद आ रहे...

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शह और मात By Renu Gupta

यह कहानी राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती के अप्रेल 2018 के अंक में प्रकाशित हो चुकी है। ‘शादी वाले दिन मैं सुर्ख लाल रंग का जरी के काम वाला लंहगा पहनूँगी –बड़ी सी नथ ओ...

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कैदी नंबर 306 By The Real Ghost

कैदी नंबर 306 कई कहानियों का संग्रह है जोकि भारतीय समाज से जुड़ी हुई कानूनी समस्याओं को विशेष तौर पर उन समस्याओं को जिन्हें आम इंसान देखना ही नहीं चाहता या शायद देख कर भी इग्नोर कर...

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गूँगा होता घर By Govind Sen

मैं साइकिल समेत घर में घुसा। साइकिल की खड़खड़ाहट ने पूरे घर को मेरे आगमन की सूचना दे दी। वैसे सभी जानते थे कि हर शनिवार मैं घर आ जाता हूँ। रविवार की छुट्टी घर पर ही गुजारता हूँ।
घर...

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बेटा ही होगा... By Sarvesh Saxena

दोस्तों, कभी कभी मेरे दिमाग मे कई बार सवाल आते हैं, जिनका जवाब मैं समाज से पूछना चाहता हूं |दोस्तों आज मैं अपने इन प्रश्नों और विचारों को कहानी का रूप देकर आप लोगों के साथ शेयर कर...

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प्रायश्चित By Renu Gupta

हनी ने एयरपोर्ट पर भारी मन से अपनी मौम और डैड से हाथ हिला कर विदा ली थी। उनके एयरपोर्ट के भीतर जाते ही उसके मन का सारा संताप उसकी आँखों की राह अश्रुधारा के रूप में बह निकला था। बड़ी...

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‘बराबाद’ .... नहीं आबाद By Pragya Rohini

‘‘ क्या नाम लेती हो तुम अपने गांव का... हां याद आया गन्नौर न। सुनो आज गन्नौर में दो प्यार करने वालांे ने जान दे दी ट्रेन से कटकर।’’
‘‘हे मेरे मालिक क्या खबर सुणाई सबेरे- सबेरे म्ह...

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पछतावा By Satish Sardana Kumar

पछतावासतीश सरदानासुबह के सवा नौ बजे तीन जन इंछापुरी रेलवे स्टेशन पर उतरे।पैसेंजर ट्रेन की अधिकांश सवारी शिव मंदिर की तरफ मुड़ गई।ये तीन जन उनसे विपरीत खेतों के दरम्यान एक पगडंडी पर...

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सजायाफ्ता कौन By Dr. Vandana Gupta

'वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है.....'सुबह से गाने की पंक्तियाँ उसके जेहन में गूँज रहीं थीं। सिंधु परेशान थी क्योंकि दिल से दिल नहीं मिला था... जो हुआ था वह बहुत भय...

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मंझली दीदी - 8 - अंतिम भाग By Sarat Chandra Chattopadhyay

रात हेमांगिनी ने अपने पति को बुलाकर रुंधे गले से कहा, ‘आज तक तो मैंने तुमसे कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन आज इस बीमारी के समय एक भिक्षा मांगती हुं, दोगे?’
विपिन ने संदिग्ध स्वर में कह...

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समायरा की स्टूडेंट - 2 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

‘अरे यार यह तुम्हारी स्टूडेंट है कि कोई तमाशा।’
‘वह है तो स्टूडेंट ही है। एक इनोसेंट स्टूडेंट। जिसे शातिर बनाने वाली, सारी खुराफ़ात की जड़ रिंग मास्टर तो ज्योग्रॉफी की टीचर नासिरा...

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भवितव्य By महेश रौतेला

भवितव्य:शाम को कश्यप के यहाँ जाना हुआ। चाय पी रहे थे। मैंने कश्यप से पूछ लिया," आपकी उम्र कितनी हो गयी है?" वे बोले," अस्सी चल रहा है। दिसम्बर में अस्सी हो जायेंगे।" फिर वे अपनी बि...

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कुमकुम बिंदी कंगना By Renu Gupta

यह कहानी 25 सितंबर 2019 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है। कुमकुम बिंदी कंगना...

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पापा मर चुके हैं By Jaishree Roy

आज एकबार फिर अरनव को बिस्तर पर उसकी इच्छाओं के चरम क्षण में अचानक छोडकर मै उठ आयी थी। अब बाथरूम के एकांत में पीली रोशनी के वृत के नीचे खड़ी आईने में प्रतिबिंबित अपनी सम्पूर्ण विवस्त...

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बयरी माँ By Govind Sen

बयरी माँ गुजर गईं ।
उनके न रहने की खबर से धक्का सा लगा । यह खबर भी सीधे-सीधे नहीं मिली थी । अनायास गाँव का एक मित्र मिला था । बातों ही बातों में उसने बयरी माँ की मृत्यु का जिक्र क...

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विद्रोहिणी - 12 By Brijmohan sharma

1 - विवेकानंद का आत्मज्ञान
2 - राम हनुमान प्रथम मिलन
3 - सुतीक्ष्ण प्रसंग
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कहाँ जाना है, कहाँ जा रहे हैं? By Vijay Vibhor

आधुनिक मध्यम वर्गीय परिवारों में इतनी-सी सम्पन्नता तो आ ही गयी है कि वह विज्ञापनों से प्रभावित होकर बाजार के हवाले हो जाते हैं और अपने बच्चों को हर वह चीज/सुविधा उपलब्ध करवाना चाहत...

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बिराज बहू - 10 By Sarat Chandra Chattopadhyay

मागरा के गंज का पीतल का इतना पुराना कारखाना एकाएक बन्द हो गया। चांडाल जाति की उसकी परिचित लड़की यह समाचार सुनाने कि लिए आई। सांचो की बिक्री बन्द हो जाने के कारण, उसे क्या-क्या नुकस...

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दीवारें तो साथ हैं - 2 By Pradeep Shrivastava

‘नहीं दीदी सब इतना नहीं कर पाते। पांडे जी का घर देखिए न। उन्होंने तो जब बच्चों ने ज़्यादा परेशान किया, तो सब को अलग कर दिया। इसके बाद जब बेटों ने बैंक में जमा पैसों और पेंशन पर भी...

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दहन By Govind Sen

बच्चे खिलखिला रहे थे। उनके लिए अपनी ख़ुशी को संभालना मुश्किल था । ऊपर-नीचे सतत दौड़ लगा रहे थे । उन्होंने पूरे घर को आसमान पर उठा रखा था । वे सब उमंग, उत्साह और शरारत से लबालब थे । इ...

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रिश्ते By Dr. Vandana Gupta

सर्दियों की कुनकुनी धूप मुझे शुरू से ही बहुत पसंद है। रोज़ दोपहर को सोसाइटी के लॉन में बैठकर धूप सेंकना मेरा प्रिय शगल रहा है, बरसों से। कोई किताब पढ़ते हुए दोपहर गुजर जाती है।...

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कक्षा - ६ By महेश रौतेला

कक्षा ६ : मेरी उम्र तब लगभग ग्यारह वर्ष होगी।साल १९६५। ननिहाल पढ़ने गया था, कक्षा ६ में। पहले पहल घर से बाहर। जब बड़े भाई साहब छोड़ने गये थे तो खुश था लेकिन जब वे मुझे छोड़कर व...

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तक्सीम - 4 - अंतिम भाग By Pragya Rohini

‘‘हां भई हम पे भरोसा कहां था तुझे कि ख्याल रखेंगे तेरी बीवी का? अब संभाल ले तू।’’
बेटे का मजाक उड़ाते हुए अम्मा ने कहा तो जमील, अब्बा के सामने जरा शर्माया पर जबान तक आए उसके शब्द ब...

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मुख़बिर - 4 By राज बोहरे

दिन में समूह के बीच सुरक्षित चलते वक्त तक जरा-जरा सी आवाज पर हमारे बदन में फुरफुरी आ जाती थी, फिर तो इस वक्त रात के अंधेरे में असुरक्षित लेटे हम सब थे। मुझे ऐसे कई हादसे याद आ रहे...

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शह और मात By Renu Gupta

यह कहानी राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका मधुमती के अप्रेल 2018 के अंक में प्रकाशित हो चुकी है। ‘शादी वाले दिन मैं सुर्ख लाल रंग का जरी के काम वाला लंहगा पहनूँगी –बड़ी सी नथ ओ...

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कैदी नंबर 306 By The Real Ghost

कैदी नंबर 306 कई कहानियों का संग्रह है जोकि भारतीय समाज से जुड़ी हुई कानूनी समस्याओं को विशेष तौर पर उन समस्याओं को जिन्हें आम इंसान देखना ही नहीं चाहता या शायद देख कर भी इग्नोर कर...

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गूँगा होता घर By Govind Sen

मैं साइकिल समेत घर में घुसा। साइकिल की खड़खड़ाहट ने पूरे घर को मेरे आगमन की सूचना दे दी। वैसे सभी जानते थे कि हर शनिवार मैं घर आ जाता हूँ। रविवार की छुट्टी घर पर ही गुजारता हूँ।
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बेटा ही होगा... By Sarvesh Saxena

दोस्तों, कभी कभी मेरे दिमाग मे कई बार सवाल आते हैं, जिनका जवाब मैं समाज से पूछना चाहता हूं |दोस्तों आज मैं अपने इन प्रश्नों और विचारों को कहानी का रूप देकर आप लोगों के साथ शेयर कर...

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प्रायश्चित By Renu Gupta

हनी ने एयरपोर्ट पर भारी मन से अपनी मौम और डैड से हाथ हिला कर विदा ली थी। उनके एयरपोर्ट के भीतर जाते ही उसके मन का सारा संताप उसकी आँखों की राह अश्रुधारा के रूप में बह निकला था। बड़ी...

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‘बराबाद’ .... नहीं आबाद By Pragya Rohini

‘‘ क्या नाम लेती हो तुम अपने गांव का... हां याद आया गन्नौर न। सुनो आज गन्नौर में दो प्यार करने वालांे ने जान दे दी ट्रेन से कटकर।’’
‘‘हे मेरे मालिक क्या खबर सुणाई सबेरे- सबेरे म्ह...

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पछतावा By Satish Sardana Kumar

पछतावासतीश सरदानासुबह के सवा नौ बजे तीन जन इंछापुरी रेलवे स्टेशन पर उतरे।पैसेंजर ट्रेन की अधिकांश सवारी शिव मंदिर की तरफ मुड़ गई।ये तीन जन उनसे विपरीत खेतों के दरम्यान एक पगडंडी पर...

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सजायाफ्ता कौन By Dr. Vandana Gupta

'वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है.....'सुबह से गाने की पंक्तियाँ उसके जेहन में गूँज रहीं थीं। सिंधु परेशान थी क्योंकि दिल से दिल नहीं मिला था... जो हुआ था वह बहुत भय...

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मंझली दीदी - 8 - अंतिम भाग By Sarat Chandra Chattopadhyay

रात हेमांगिनी ने अपने पति को बुलाकर रुंधे गले से कहा, ‘आज तक तो मैंने तुमसे कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन आज इस बीमारी के समय एक भिक्षा मांगती हुं, दोगे?’
विपिन ने संदिग्ध स्वर में कह...

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समायरा की स्टूडेंट - 2 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

‘अरे यार यह तुम्हारी स्टूडेंट है कि कोई तमाशा।’
‘वह है तो स्टूडेंट ही है। एक इनोसेंट स्टूडेंट। जिसे शातिर बनाने वाली, सारी खुराफ़ात की जड़ रिंग मास्टर तो ज्योग्रॉफी की टीचर नासिरा...

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भवितव्य By महेश रौतेला

भवितव्य:शाम को कश्यप के यहाँ जाना हुआ। चाय पी रहे थे। मैंने कश्यप से पूछ लिया," आपकी उम्र कितनी हो गयी है?" वे बोले," अस्सी चल रहा है। दिसम्बर में अस्सी हो जायेंगे।" फिर वे अपनी बि...

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कुमकुम बिंदी कंगना By Renu Gupta

यह कहानी 25 सितंबर 2019 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है। कुमकुम बिंदी कंगना...

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आज एकबार फिर अरनव को बिस्तर पर उसकी इच्छाओं के चरम क्षण में अचानक छोडकर मै उठ आयी थी। अब बाथरूम के एकांत में पीली रोशनी के वृत के नीचे खड़ी आईने में प्रतिबिंबित अपनी सम्पूर्ण विवस्त...

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