Jin ki Mohbbat - 6 in Hindi Horror Stories by Sayra Ishak Khan books and stories PDF | जिन की मोहब्बत - भाग 6

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जिन की मोहब्बत - भाग 6

रफीक कुछ समझ ना नहीं चाहता है बस उसके सर ज़ीनत की खूबसूरत का बुखार चढ़ा हुआ था।
रफीक ने ज़ीनत को फिर से छुने कि कोशिश की उसने ज़ीनत को कंधे पर हाथ रखना चाहा उसे जैसे करंट का झटका लगा हो वो ज़ीनत से दूर जा गिर...! अब आगे।


भाग 6


सबा ने कुछ आवाज़ सुनी , और बाहर आई l देखा कि रफीक ज़मीन पर गिरा हुआ है।
सबा ने आकर रफीक को उठाया l
ज़ीनत भी पास में आई , कहा l
"रफीक जी आप गिर कैसे गए ? कहीं चोट तो नहीं आई आपको?"
ज़ीनत को बड़ी हैरानी से देखा रफीक ने , ओर कहाl
"ज़ीनत तुम्हे कुछ याद नहीं में दूर जाकर कैसे गिरा?"
ज़ीनत - "नहीं मुझे तो नहीं पता, क्या हुआ आपको?
सबा बोली l "हुआ क्या था ?"
रफीक ने बात बनाते हुए कहा l
"बस वो मेरा पैर नीचे गिरे पानी पर पड़ गया ओर में फिसल के गिर गया ।"
रफीक सबा को लेकर वहा से चला गयाl
उसे अपने घर आज लौटना था।
शाम 7 बजे रफीक जाने के लिए उसने गाड़ी बुक किया थी l
गाड़ी उसे लेने आ पहुंची थी l रफीक सलाम दुआ कर के घर से निकल गया ।
उसे 5 से 6 घंटे का सफर करना था l गाड़ी अच्छी खासी रफ्तार से चल रही थी ।
उनकी गाड़ी एक सुनसान रास्ते से गुजरी l
वहा काफी अंधेरा भी था, सिर्फ गाड़ी की लाईट से रोशनी थी ।
एका एक तेज़ हवा चलने लगी, ओर कुछ जानवरो के रोने कि आवाज़ भी आने लगी l
रफीक ने गाड़ी वाले से कहा l
"भाई ये कहा से लें आए मुझे तो डर सा लग रहा है।"
ड्राइवर ने हस्ते हुए कहा l
" सर हमारा तो रोज़ का काम है ऐसे रोड से गुजरना, हा बस ये हवाएं आज कुछ ज़्यादा तेज़ चल रही है।"
कुछ दूरी पे बीच रास्ते में कोई शक्श खड़ा दिखाई दिया l
रफीक ने कहा l
" भाई देेख कर , रास्ते में कोई खड़ा है ।
ड्राइवर ने कहा l
" सर कोई लिफ्ट मांगने के लिए खड़ा हुआ है , आप बताएं गाड़ी रोकना है या नहीं..?
रफीक को लगा शायद कोई मदद मांगने के लिए गाड़ी रुकवाना चाहता होगा !
रफीक ने कहा l
"गाड़ी साइड में रोको, ओर पूछो क्या परेशानी है?
ड्राइवर ने गाड़ी रोकी!
गाड़ी का शीशा निचे किया ।
पूछा ! "भाई क्या परेशानी है ऐसे रास्ते में क्यू खड़े हो ?'
उस खड़ा शख्श जब रफीक की ओर घूम कर बोलाl
"मुझे थोड़ा आगे तक जाना है l आप मुझे अपनी गाड़ी में थोड़ी सी जगह देे तो मुझ पर एहेसान होगा l मेरी वाइफ हॉस्पिटल में है , यहा से कोई गाड़ी मिल नहीं रही मुझे ।
रफीक दिल का अच्छा इंसान था।
उसने उसकी मुश्किल समझते हुए कहाl
" ठीक है तुम अाजाओ हम छोड़ देते है तुम्हे ।"
तभी जोरो से बारिश होना शुरू हो गई l तेज़ बादल गरजने की आवाज आने लगी l
रफीक ने कहा l
"आज मौसम को ऐसा क्या हुआ है?"
बीन मौसम बारिश हो गई इतना खराब मौसम इस पहले नहीं देखा !
रफीक के पास बैठे उस शख्स ने रफीक को घूरते हुए कहा l
"आज से पहले वो सब भी ज़ीनत के साथ किसी ने नहीं किया जो तूने किया।"
रफीक ज़ीनत का नाम सुन कर हक्का बक्का रह गया l
" बोला कोन हो तुम मुझसे क्या चाहिए ?"
उस शख्स ने अपनी आवाज़ बदलते हुए कहा l
" में तेरी मौत हूं मुझे तेरी जान चाहिए?"
उसकी आवाज़ इतनी भयानक थी कि जैसे कोई शैतान सामने हो।"
"ज़ीनत को कोई ओर छुए ये में बरदश नहीं कर सकता समझा तू ।"
गाड़ी वाले ने घबरा कर गाड़ी बीच सड़क में रोक दी ओर गाड़ी से उतर के भागा ।
रफीक भी गाड़ी से बाहर निकल कर भागने लगा l पीछे खड़ा वो शक्श वहां से गायब हो चुका थाl रफीक ने पीछे पल्ट के देखा , कोई नहीं था वहां पर.. । उसका रोम रोम कांप रहा था...!

क्रमश: