Kaali Kitaab - 2 in Hindi Horror Stories by Mister Rakesh books and stories PDF | काली किताब - 2

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काली किताब - 2

कई वर्षों के बीतने के बाद गाँव में फिर से एक अजीब सी हलचल मच गई थी। लोग अब भी उस पुरानी हवेली के बारे में फुसफुसाते थे, जहाँ काली किताब की कहानियाँ पीढ़ियों से सुनाई जाती थीं। एक युवा मनोवैज्ञानिक, वरुण, जिसे अतीत की रहस्यमयी कथाएँ जानने का अत्यधिक शौक था, ने तय किया कि वह इन कहानियों के पीछे छिपे सच का पता लगाएगा। एक बरसाती रात, जब बूंदों की टपकन ने हवेली की टूटी-फूटी दीवारों पर एक नया संगीत बिखेर दिया, वरुण उस सुनसान हवेली के पास पहुँचा। 

हवेली का प्रवेशद्वार खुले दरवाजे की तरह उसे आमंत्रित कर रहा था, पर अंदर कदम रखते ही एक अजीब सी ठंडक ने उसे घेर लिया। हवेली के अंधकार में हर कंकड़ पर जैसे अतीत की यादें जिंदा हो उठीं हों। धीरे-धीरे वरुण एक पुराने दराज तक पहुँचा, जहाँ उसने देखा कि काली किताब फिर से वहीं मौजूद थी, जैसे किसी ने उसे समय के सन्नाटे से छुपा रखा हो। उसकी जिज्ञासा और थोड़ी सी घबराहट के बीच, उसने उस किताब को ध्यान से खोला। जैसे ही पन्ने खुलने लगे, एक धीमी फुसफुसाहट की आवाज ने हवेली के हर कोने में गुंजन भर दी, मानो कई आत्माएँ अपने दुःख का बयान कर रही हों।

वरुण ने किताब के पन्नों पर लिखे गूढ़ मंत्रों को पढ़ना शुरू किया। हर शब्द के साथ उसे ऐसा महसूस हुआ कि वह उन बंद आत्माओं की पीड़ा और आकांक्षा में खो रहा है, जिन्हें सालों पहले इस किताब में कैद कर लिया गया था। अचानक, हवेली की दीवारों से एक तेज हवा का झोंका आया और वरुण अपने पाँव पर ठोकर खा गया। जैसे ही वह उठने की कोशिश करने लगा, उसने देखा कि उसके चारों ओर हल्की-हल्की छाया मंडरा रही थीं – वे आत्माएँ थीं, जो अब भी इस किताब से जुड़ी थीं।

उस क्षण वरुण को याद आया कि गाँव के बुजुर्गों ने चेतावनी दी थी कि इस किताब को खोलने का दंड अत्यंत भयावह होता है। उसे यह समझ आया कि यदि उसे इस श्राप को तोड़ना है तो उसे एक विशेष मंत्र का उच्चारण करना पड़ेगा, जो केवल एक शुद्ध हृदय वाला ही कर सकता है। डर और संकल्प के बीच, वरुण ने गहरी सांस ली और मंत्र बोलना शुरू किया। उसके शब्द हवेली की सुनसान दीवारों में गूंजते हुए फैलने लगे। जैसे-जैसे वह मंत्र बोलता गया, आत्माओं का राग धीमा पड़ता गया और धीरे-धीरे हवेली में एक हल्की सी रोशनी फैल गई।

थोड़ी देर बाद, जैसे ही वरुण ने अंतिम शब्द उच्चारित किए, हवेली में अचानक सन्नाटा छा गया। चारों ओर की छाया एक-एक कर गायब हो गईं और काली किताब फिर से अपने गहरे अंधकार में समा गई। वरुण थक कर बाहर निकल आया, पर उसकी आँखों में अब भी उस रात के भयानक दृश्य की झलक साफ थी।

अगली सुबह गाँव में यह अफवाह फैल गई कि हवेली ने फिर से अपने रहस्यों को छिपा लिया है। लोग कहते थे कि अंधेरी रात में हवेली से दूर रहने वाले लोग काली किताब की पुकार सुनते हैं, मानो कोई खोई हुई आत्मा अपनी कहानी सुनाने आई हो। वरुण का अनुभव एक नई चेतावनी बन गया – कि कुछ रहस्य इतने गहरे होते हैं, जिन्हें उजागर करने की हिम्मत इंसान में नहीं होती। इस तरह काली किताब की कहानी सदियों से चलती रही, एक भयानक अध्याय के रूप में, जो आने वाले कल के लिए एक हमेशा की तरह चेतावनी बनकर रह गई।