A companion of memories - Ranjan Kumar Desai - (41) in Hindi Biography by Ramesh Desai books and stories PDF | यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (41)

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यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (41)

     

                 : : प्रकरण -41 : :

       फिल्मों का जमाना जारी था. साथ में टेलीविझन धारावाहिक की भी शुरुआत हो गई थी.

       दूर दर्शन पर ' हम लोग ' धारावाहिक शुरू हुई. जो अच्छी शुरुआत थी उस में कुछ अच्छा था, लोगो के सबक भी था. उस के बाद ' बुनियाद ' शुरू हुई थी. वह भी एक अच्छी धारावाहिक थी. फिर रामानंद सागर ने ' रामायण ' बनाई थी जिस को अच्छा प्रतिभाव संपादित हुआ था.

        उस के बाद 'महा भारत ' धारावाहिक शुरू हुई थी जो बी आर चोपडा ने बनाई थी जो उस युग की प्रथम लंबी धारावाहिक थी. महाभारत तो एक ग्रंथ का उसे पूरा करने के लिये कितने एपिसोड लग जाये यह कह कहना मुश्किल था लेकिन बी आर चोपड़ा ने उसे 78 एपिसोड में पूरी की थी.

       फिर तो लंबी धारावाहिक का दौर शुरू हो गया था, जिस में जूनून, किस्मत और ना जाने कितनी धारावाहिक बनी थी. जो भी हो यह सारी धारावाहिक देखने लायक थी उस में कुछ न कुछ अच्छा होता था. 

       बाद में ना जाने कितनी चैनल शुरू हुई थी, जिस में धारावाहिक की लंबी कतार लग गई थी. उस में अभिनेता जीतेन्द्र की बेटी का बड़ा योग दान था. उस ने एक के बाद एक धारावाहिक बनाई थी जो ' क' से शुरू होती थी.

          ' कहानी घर घर की ' ' क्यों की सास भी कभी बहू थी ' इत्यादि धारावाहिक शामिल थी.. जिस से लंबी धारावाहिक बनाने का मानो रोग शुरू हो गया था.

        दूर दर्शन के बाद ' कलर', सब टी वी, स्टार प्लस इत्यादि इत्यादि चेंनल्स का उदभव हुआ था.

        सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अंतिम दायके बहुत कुछ बदल गया था. पैसा कमाने की दौड़ में नकारात्मक किरदारों का प्रयोग कर के लोगो को गुमराह करने का नया दौर शुरू हुआ था. 

       उस में कुछ बाकी ऱह गया तो मोबाइल्स ने उसे पूरा किया था.

        पोर्न वेबसाइट के जरिये गंदी बातें दिखाना मानो एक रिवाज़, एक ट्रेंड नया फैशन बन गया था. 

        महिलाये भी इस दौड़ में पीछे नहीं थी.. फेस बुक इत्यादि एप्लीकेशन के जरिये फ्रेंड्स शिप की ओफर  करने लगे. तगडी राशि देने का वादा करने लगी. अपनी वेबसाइट बनाकर कुछ भी दिखाने को तैयार हो जाती हैं. 

     अब रिल्स का नया ट्रेंड शुरू हुआ हैं उस में ना जाने महिलाये क्या क्या कर्तब दिखाती हैं. 

     मुझे एक महिला ने ललचाते हुए अपना नग्न वीडियो भेजा था, और मुझ से भी कुछ गंदी डिमांड की थी.. उस की ऐसी बात से मेरा दिमाग़ वोश हो गया था. मैंने उस ने जो मांगा था वह भेज दिया था.

      कुछ भी साइबर क्राइम से मैसेज आया था. तुमने एक लड़की को गंदा वीडियो भेजा हैं जो एक अपराध है उस का आप को 31000 रुपया जुर्माना भरना पड़ेगा..

      पढ़कर मुझे झटका लगा था. डर भी लगा था. दिल का दौरा पड़ने की नौबत आती हुई नजर आई थी.

       एक पल तो मैं इस से बचने के लिये पैसे देने तैयार हो गया था.. उस अफसर ने पैसे ना देने की सूरत मेरी धर पकड़ करने की भी धमकी दी थी. 

       मुझे दूसरे अफसर का फोन नंबर दिया था.. मैंने  उसे फोन किया था. लेकिन उस ने अपना नंबर डिलीट कर दिया था. 

        साइबर काफे के नाम लड़की और अफसर मेरी साथ फ़्रॉड़ करना चाहते थे लेकिन उन का यह प्रयास विफल हो गया था. 

       दूसरी बार फिर मुझे एक अफसर का फोन आया था.

       " तुम्हारी इस उम्र में लड़की से ऐसी बातें करते हो? "

        " उस ने जिन शब्दों में बात की थी. वह सुनकर आप भी वही करते थे. और आप लड़की की पूछपाछ ना करते हुए सीधा क्यों मेरे साथ बात करते हो.. यह कौन सा तरीका हुआ. अगर दो बारा मुझे फोन किया तो मैं तुम्हारे खिलाफ शिकायत दर्ज कर दूंगा. "

        सेक्स स्कैण्डल में फ़साने में साइबर क्राइम सेल का बड़ा हाथ होता है.

        उस के बाद मुझे किसी ने फोन करके मुझे तंग नहीं किया.

         फेस बुक और इंस्टाग्राम में भी पारिवारिक रिश्तो में सेक्स होने के फोटोस पोस्ट किये जाते हैं. जिस माध्यम को लोगो को कुछ नया सिखाने वही लोग ऐसे वीडियोस, फोटोस और गंदी कहानिया मोबाइल के जरिये पेश करते हैं, जो छोटे बच्चे चोरी छुपी देखते हैं, उस पर क्या असर होता हैं, यह देखने, समझने की किसी को जरूरत नहीं.

      जैसे फिल्मों के लिये सेन्सर बोर्ड की नियुक्ति की गई हैं, उसी तरह टी वी धारावाहिक और मोबाइल की हर कंटेंट्स को देखकर, जांचकर उसे दिखाने की अनुमति देनी चाहिये.

        आज की टी वी धारावाहिक सारा परिवार किस तरह साथ रहा जा सकता हैं यह बताने के सिवा कैसे एक दूसरों को अलग करना हैं. वह धारावाहिक सिखाती हैं. उस की कई मिशाले हैं. हकीकत में हर एक टी वी धारावाहिक एक ही लाईन पर चलती हैं उस की मिशाल  हैं, ' यूनाइटेड स्टेट ओफ गुजरात', ' कंकु ' और  ' मोटी बा नी नानी वहु ' की मिशाल सामने आती हैं. वैसे तो आज की धारावाहिक लोगो को उलटे रास्ते घसीट ले जाती हैं.

      इन सब में एक ही धारावाहिक हैं जो सब को साथ रखने का संदेशा देती हैं, वह हैं ' तारक मेहता का उलटा चश्मा ' यह धारावाहिक 17 साल से अधिक समय से सब टी वी में प्रदर्शित की जा रही हैं. यह धारावाहिक गुजराती लेखक स्व. तारक मेहता की सामायिक धारावाहिक जो ':चित्र लेखा ' प्रकाशित होती थी उस से प्रेरित हैं. 

          एक टी वी इंटरव्यू इन सब बातों को लेकर आयोजित किया था. जिस में पारिवारिक रिश्तों में जातीय संबंध की बात छेड़ी गई तो एक महिला ने अपनी राय में कहां था. उस में बुरा क्या हैं.. उस के बारे में अमरिका का उदाहरण देते हुए कहां था

      " क्या अमरिका में ऐसी बातें नहीं होती हैं.?"  

      फेसबुक में हर तीसरी नारी अकेली होने का दावा करती हैं, कोई अपने को बेवा बताती है,  टी कोई कंवारी होने की बात कर के पुरुष का साथ चाहती हैं, कोई बच्चा चाहती हैं, उस के लिये मूंह मांगी किंमत देने को तैयार होती हैं.

       वीडियो भी ससुर बहू, देवर भाभी, दामाद सास और कहने को मन नहीं करता है बल्कि सगे भाई बहन के ऐसे रिश्तों के वीडियो बनाते हैं जिस में रक्षाबंधन के दिन ऐसी गंदी हरकते करते हैं. 

                          0000000000   ( क्रमशः)