राजा और रैंचो
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अध्याय 1 – एक अनोखी मुलाकात
मुंबई की हलचल भरी सड़कों पर, एक ऐसा इंसान रहता था जो समस्याओं को सुलझाने में उस्ताद माना जाता था—
डिटेक्टिव राजा।
राजा अपनी तेज दिमाग, शांत स्वभाव और गुस्से को काबू में रखने की कला के लिए मशहूर था।
लेकिन राजा की जिंदगी में असली मोड़ एक ऐसे साथी के आने से हुआ, जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता था।
वह दिन बारिश का था। राजा एक पुराने केस से लौट रहा था। तभी उसने बांद्रा के सिग्नल के पास देखा—
एक छोटा सा बंदर, जिसकी एक आँख चमकदार, समझदार और बेहद शरारती लग रही थी।
बंदर हाथ में किसी की पर्स लिए खड़ा था और आस-पास के लोग उससे पर्स छीनने की कोशिश कर रहे थे।
राजा ने उसे आवाज दी, “ए छोटू! यहाँ आ!”
सभी की हैरानी के बीच वह बंदर उछलता-कूदता राजा के कंधे पर आ बैठा और पर्स उसके हाथ में दे दिया—जैसे वह समझ रहा हो कि किसे देना है।
राजा आश्चर्य में—
“अरे ये बंदर… चोरी नहीं कर रहा था, बल्कि पर्स वापस कर रहा था!”
भीड़ ताली बजाने लगी।
राजा ने बंदर के सिर पर प्यार से हाथ फेरा।
“तेरा नाम क्या है छोटे?”
बंदर उछलकर पास की नाव पर गया, जिस पर एक नाम लिखा था—
“RANCHO”
राजा हँस पड़ा।
“तो तू रैंचो है! चल ठीक है… आज से तू मेरा दोस्त।”
जिस दिन से रैंचो उसकी जिंदगी में आया, राजा की जांच-पड़ताल की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू हो गया—
इंसान और बंदर की सबसे अनोखी जासूसी जोड़ी।
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अध्याय 2 – केस का पहला सुराग
एक सप्ताह बाद, सुबह 6 बजे, राजा के घर की घंटी जोर से बजी।
राजा: “इतनी सुबह कौन आया?”
बाहर एक बुजुर्ग महिला खड़ी थीं—रोती हुई।
“बेटा… मेरी पोती ‘स्वरा’ कल शाम से गायब है… पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही। लोगों ने कहा तुम बहुत बड़े डिटेक्टिव हो… मेरी मदद करो।”
राजा ने तुरंत रैंचो को देखा।
रैंचो ने अपनी पूँछ ठोककर इशारा किया—“चलो केस सॉल्व करते हैं!”
राजा ने पूछा, “आंटी, वह आखिरी बार कहाँ देखी गई थी?”
“गोकुल पार्क… झूले के पास।”
राजा और रैंचो बिना एक सेकंड गंवाए पार्क की ओर निकल पड़े।
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अध्याय 3 – गोकुल पार्क का रहस्य
गोकुल पार्क शांत था।
झूले धीरे-धीरे हवा से हिल रहे थे।
राजा तुरंत आसपास सुराग ढूँढने लगा।
रैंचो पेड़ों पर चढ़कर ऊपर से सारी जगह स्कैन कर रहा था।
राजा को अचानक झूले के पास जमीन पर एक गुलाबी हेयरपिन मिली।
“ये स्वरा का है?”
बुजुर्ग दादी ने कहा, “हाँ बेटा, यही उसका है!”
रैंचो अचानक एक पेड़ से कूदकर आया और राजा का हाथ खींचने लगा।
“कहाँ ले जा रहा है?” राजा चिल्लाया।
रैंचो उसे झाड़ियों के पीछे ले गया जहाँ मिट्टी पर अजीब-से कदमों के निशान थे।
छोटे–छोटे पैरों के साथ एक आदमी के पैर के निशान भी।
राजा ने बोला,
“मतलब स्वरा यहाँ से किसी के साथ गई है… ज़बरदस्ती भी हो सकती है।”
रैंचो ने नाक से सूंघकर इशारा किया—
“कुछ बदबू आ रही है… शायद वही व्यक्ति यहाँ रुका था।”
फिर रैंचो अचानक दीवार पर चढ़ गया और टंकी की तरफ दौड़ पड़ा।
राजा भी उसके पीछे गया।
टंकी के पीछे उन्हें एक छोटा सा लाल रंग का कपड़ा मिला।
दादी बोलीं, “ये भी स्वरा का ही है!”
अब राजा की आँखों में गंभीरता आ गई थी।
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अध्याय 4 – संदिग्ध व्यक्ति
राजा ने पार्क के वॉचमैन से पूछताछ शुरू की।
वॉचमैन डरते हुए बोला,
“साहब… मैं कुछ कहूँगा तो मुसीबत आ सकती है…”
राजा ने अपना बैज दिखाया,
“सच बोलो। किसी को छिपाने का मत सोचना।”
वॉचमैन बोला,
“कल शाम एक सफेद जैकेट वाला आदमी बच्ची के आस-पास घूम रहा था। उसके हाथ में एक काला बैग था। मैं जैसे ही उसकी तरफ गया, वह जल्दी-जल्दी बाहर निकल गया।”
राजा ने पूछा, “बाहर कहाँ गया?”
“ईस्ट वाली तरफ… जहाँ पुराना गोदाम है।”
रैंचो ने अचानक ताली बजाकर उछाल मारी—जैसे उसे वही सही दिशा लग रही हो।
राजा बोला,
“चलो रैंचो! गोदाम चलते हैं।”
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अध्याय 5 – पुराना गोदाम और छुपा हुआ खतरा
गोदाम में अँधेरा था।
टूटे हुए शीशों से हवा की सीटी डरावनी आवाज कर रही थी।
राजा टॉर्च लेकर अंदर गया।
रैंचो छत की बीमों पर चढ़कर चौकसी कर रहा था।
अचानक रैंचो ने ज़ोर से आवाज की—
“किक्क!! किक्क!!”— (यह उसकी खतरे की warning थी)
राजा समझ गया—
“कोई यहाँ है।”
टॉर्च की रोशनी में लकड़ी का एक पुराना बॉक्स दिखाई दिया।
राजा ने बॉक्स खोला—
अंदर से स्वरा की चप्पल मिली!
दादी रो पड़ी, “हे भगवान… मेरी बच्ची कहाँ है?”
रैंचो ने राजा का हाथ पकड़कर इशारा किया—उसे गोदाम की पिछली दीवार के पास कुछ मिला था।
दीवार पर काले कोयले से लिखा था:
“अगर बच्ची चाहिए तो कल रात 12 बजे पुराने पुल पर आना। अकेले!”
राजा ने गुस्से में दीवार पर मुक्का मारा—
“ये किडनैपर बेहद चालाक है।”
रैंचो ने राजा के कंधे पर हाथ रखा।
जैसे कह रहा हो—
“हम ढूँढ लेंगे।”
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अध्याय 6 – राजा और रैंचो की चाल
राजा ने अपनी टीम को बुलाना चाहा, लेकिन वह नोट कह रहा था कि अकेले जाना है।
राजा बोला,
“अगर हम ज्यादा पुलिस ले गए… तो वह स्वरा को नुकसान पहुँचा सकता है।”
रैंचो ने अपनी बड़ी आँखें झपकाईं—
जैसे कह रहा हो,
“तो हम दोनों ही काफी हैं!”
राजा मुस्कुराया,
“हाँ पार्टनर… तू और मैं।”
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अध्याय 7 – पुराना पुल और असली अपराधी
रात 12 बजते ही राजा और रैंचो पुराने पुल पर पहुँचे।
हवा तेज चल रही थी।
अचानक अंधेरे से एक आवाज आई—
“तुम अकेले आए हो राजा?”
राजा बोला, “हाँ।”
एक आदमी सफेद जैकेट में सामने आया।
उसके हाथ में स्वरा थी—डरी हुई।
वह बोला,
“मुझे पैसे चाहिए। नहीं दोगे तो बच्ची…”
इससे पहले वह पूरी बात कहता,
रैंचो पेड़ से छलांग मारकर उसकी पीठ पर चढ़ गया और कान नोचने लगा।
आदमी चिल्लाया—
“ओई हट! हट!”
राजा ने मौका देखकर उसकी बांह मरोड़ी और स्वरा को अपनी ओर खींच लिया।
रैंचो उसके सिर पर चढ़कर ऐसे थप्पड़ मार रहा था जैसे कह रहा हो—
“बच्चों को उठाता है? शर्म नहीं?”
आदमी गिर पड़ा।
राजा ने उसे पकड़कर जमीन पर धकेल दिया।
स्वरा रोते हुए राजा से चिपक गई।
दादी भी पीछे आ पहुँची थीं।
वह बच्ची को देखकर रो पड़ीं।
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अध्याय 8 – केस सॉल्व, पर कहानी जारी
पुलिस आई और किडनैपर को ले गई।
दादी राजा के पैरों में गिरने लगीं,
“बेटा, तुमने मेरी पोती की जान बचाई।”
राजा ने कहा,
“धन्यवाद मुझे नहीं… रैंचो को दो। असली हीरो वही है।”
रैंचो सीना तान कर खड़ा हो गया—
अपनी पूँछ हिलाते हुए।
स्वरा ने रैंचो को गले लगा लिया।
रैंचो ने खुशी में उसकी नाक खींच ली—
सब हँस पड़े।
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अंतिम दृश्य – एक नई शुरुआत
जब राजा और रैंचो घर लौट रहे थे, राजा बोला—
“तू बंदर है, लेकिन इंसानों से ज्यादा बहादुर है रैंचो।”
रैंचो ने राजा के गाल पर एक हल्की थपकी दी।
जैसे कह रहा हो—
“राजा… तुम भी कम नहीं।”
दोनों रात के अंधेरे में ओझल हो गए—
नई केस, नए रोमांच और नई जासूसी यात्रा की ओर।