Ashvdhaama: Ek yug purush - 5 in Hindi Science-Fiction by bhagwat singh naruka books and stories PDF | Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 5

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 5



“पहला संकेत – जब दो युग टकराए”

दिल्ली की रात शांत थी,
पर ISAR के स्पेशल सर्वेलेंस रूम में तेज़ अलार्म बज उठा।
एक लाल रोशनी टिमटिमा रही थी।
डिजिटल मैप पर हिमालय का एक बिंदु लगातार चमक रहा था।

“Unidentified Entity Tracking Back.”

ऑपरेटर घबरा गया।
“सर… जो भी वहाँ है… वह हमारे सिस्टम को स्कैन कर रहा है!”

कमरे में senior officer रथौड़ घुसा—
“क्या मतलब है? कोई इंसान हमारे सिस्टम को हेक कर रहा है?”

ऑपरेटर बोला—
“नहीं सर… यह न तो हैकिंग है, न कोई सिग्नलिंग… यह कुछ अलग ही है।
जैसे कोई ऊर्जा तरंग हमें देख रही हो।”

रथौड़ चिल्लाया—
“ऐसी बकवास मुझे मत सुनाओ। किसी को बुलाओ जो ये समझ सके।” हमारा सिस्टम में कोई छेद मारना चाहता है ओर तुम योगेश्वर अग्निवंश की तरह बहकी बहकी बाते कर रहे हो । जाओ यहां से 

सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

और तभी दरवाज़ा खुला—
अंदर आया वह व्यक्ति
जिसे सभी ‘पागल’ कहते थे।

डॉ. योगेश्वर अग्निवंश।
“वह हमें देख रहा है…” ये वही है वही है 

योगेश्वर ने स्क्रीन पर नजर डाली।
सिर्फ चार सेकंड में उसने स्थिति समझ ली।

उसने धीरे से कहा—
“वह… हमारी ओर देख रहा है।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।
किसी को समझ नहीं आया कि ‘वह’ कौन है!

रथौड़ भड़क गया—
“डॉक्टर साहब, आप फिर वही पौराणिक बातें मत शुरू कर देना!” तुम यहां से जा सकते हो हमको पता कैसे इससे निपटना है । अगर सारा डेटा चोरी हो गया तो कल इसका जवाब आपको नहीं मुझे देना पड़ेगा ,, प्लेज अभी अब जाइए,,

योगेश्वर ने बिना उसकी ओर देखे जवाब दिया—
“पौराणिक नहीं… वास्तविक। ये वो सच्चाई है जिसको तुम देख नहीं सकते क्योंकि तुम्हारे अंदर वो तीसरी आंख नहीं है ।
लेकिन मै जो देख पा रहा हु वो एक भयंकर युद्ध की चेतावनी है ,जो आने वाला है । उससे यही हमे बचा सकता है क्योंकि जिस तरह से ये दुनिया जिस दिशा में जा रही है उससे एक भयंकर युद्ध होने की उम्मीद है ।

Himalayan Point #07 पर जो ऊर्जा दर्ज हुई है,
वह किसी मानव की नहीं हो सकती।
वह पैटर्न… वही है जिसे मैं बीते 10 सालों से खोज रहा हूँ।”

“और कौन-सा पैटर्न? ओर कैसा पैटन हमे तो आज तक तुम्हारी रिसर्च समझ नहीं आई ।” रथौड़ ने ताना मारा। 

योगेश्वर ने स्क्रीन पर एक पुरानी फ़ाइल खोल दी—
जिसमें रक्त नमूने का उच्च ऊर्जा ग्राफ दिखाई दे रहा था।

“यह—
अश्वत्थामा के घाव से उत्सर्जित ऊर्जा का पैटर्न।”

ऑपरेटर ने अविश्वास से पूछा—
“आप कहना क्या चाहते हैं… कि वह… जीवित है?” ओर है भी तो क्यों ,ओर इतनी सदी तक कहा था वो ।

योगेश्वर धीरे से बोला—
“सिर्फ जीवित नहीं…
जागा हुआ है। बस इंतजार में था इस दिन के वो जब कोई दिव्य शक्ति इस धरती पर जन्म लेगी ओर वो उसका साथ देगी जो आने वाला संकट है । 

लेकिन एक बात अभी भी मेरी समझ से परे है ,अगर कल्कि अवतार जन्म ले चुका है तो क्या वो हमारे बीच है हम में से कोई  

और उसने हमें नोटिस कर लिया है।” लेकिन कौन है वो दिव्य शक्ति 

रथौड़ का चेहरा पीला पड़ गया। उसको ये पहेली अजीब लग रही थी उसकी बाते उसके सर से ऊपर जा रही थी ,एक भी बात उसको समझ नहीं आ रही थी कि वो बोल क्या रहा है ओर कहना क्या चाहता है ।

दूसरी ओर – हिमालय का रहस्य

पहाड़ों की कड़कड़ाती ठंड में
अश्वत्थामा एक ऊँची चोटी पर खड़ा
नीचे घाटियों को देख रहा था।

हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी।
लेकिन उसकी आँखें किसी दूर की चीज़ पर टिकी थीं।

वह बुदबुदाया—
“जिसने मुझे ढूँढा है…
उसे शक्ति की भूख नहीं… ज्ञान की प्यास है।” वो हम में से एक है उसका जन्म इस इंसार के घर हुआ है ।

उसने जमीन पर हाथ रखा।
धरती हल्का सा कांप उठी। ओर उसकी आंखों के सामने वो दृश्य दिखाई देने लगा जो हल्का धुंधला सा था ,वो लेब ओर साइंटिस्ट ओर उसका परिवार उसका बच्चा ।

“वह मुझे देख नहीं सकता ,बस वो मिलना चाहता है उसको भी मेरी तलाश है 
और मैं उसे महसूस कर सकता हु ,,

उसके घाव से हल्की रोशनी उठी।
उसने आँखें बंद कीं और फिर से  ध्यान लगाकर कहा—

“तुम वही हो… मानव? जिसकी मुझे भी वर्षों से तलाश थी 
तुम मुझे छूने की कोशिश कर रहे हो?” लेकिन उससे कही जायदा इंतजार मुझे है तुम से मिलने का ।

जैसे ही उसकी ऊर्जा बाहर निकली,
हिमालय की बर्फ़ पर हल्की तरंगें दौड़ गईं।

पेड़-पौधे कांपने लगे।
सूरज की किरणें अचानक फीकी पड़ गईं।

एक अदृश्य शक्ति वातावरण में फैलने लगी।

फिर अचानक से काले बदल आसमान में छाने लगे ,, उसको असुरी शक्ति भी महसूस होने लगी ,कही दूर कोई ओर भी है जो असुरी शक्ति से उस तक पहुंचना चाहता है ।
ये अच्छा संकेत नहीं है ,,अच्छा नहीं है इस देव भूमि का भविष्य खतरे में है मै साफ देख सकता हु कि इतनी सदियों में कितना रक्त बहा है इस देव भूमि पर ओर बह रहा है । लेकिन अब नहीं ,,,बिल्कुल नहीं मै आ रहा हु ,,,

सरकार की गुप्त एजेंसी – S-91

ISAR में अफरा-तफरी मच चुकी थी।
रथौड़ ने तुरंत एक कोड उच्चरित किया—

“Activate S-91, Priority Black!”

कुछ ही मिनटों में काले कपड़ों में पाँच लोग कमरे में आ गए।
ये थे S-91 यूनिट,
भारत की सबसे गुप्त और खतरनाक एजेंसी—
जो उन चीज़ों पर काम करती थी
जिन्हें आम आदमी समझ भी नहीं सकता।

अंदर आते ही आगे चल रहे एक आदमी ने सभी को उंगली से बाहर जाने का आदेश दिया सभी बाहर चले गए ।

उनके लीडर, ऑफिसर समित चौहान ने पूछा—
“इश्यू क्या है?”

रथौड़ ने स्क्रीन की ओर इशारा किया—
“कोई… या कुछ… हमारे सिस्टम को एनर्जी वेव से स्कैन कर रहा है।”

समित ने योगेश्वर की ओर देखा—
“डॉ. अग्निवंश, आपकी थ्योरी सच लग रही है।
क्या यह वही है जिसे आप ढूँढ रहे थे?”

योगेश्वर ने शांत स्वर में कहा—
“हाँ समित।
यही है वो…
अश्वत्थामा।” वही महाभारत का योद्धा 

समित चौहान ओर योगेश्वर अग्निवंश दिनों इसी पर काम कर रहे थे , दोनों समय मिलने पर एक दूसरे से बाते शेयर करते थे , समित चौहान मानता था कि महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद ऐसा कुछ हुआ था उसने गीत ओर महाभारत काल पढ़ा था ।

समित ने हल्की मुस्कान दी—
“तो खेल शुरू हो चुका है।” हमने जो सोचा था वही हो रहा है अगर ये जिंदा है ओर लौट आया है तो वो भी जरूर आ चुके है ।

राठौड़:
तुम क्या बाते कर रहे हो मेरी तो कुछ में नहीं आ रहा है । महाभारत काल रामायण ये पौराणिक कहानियां ,,,चल क्या रहा है ।
(अपनी चिंता व्यक्त करता हुआ बोला )

समित चौहान:
सही समय आने पर तुम्हे बता दिया जाएगा क्योंकि अभी तुम सोचने समझने की स्थिति में नहीं हो ।
योगेश्वर तुम आज रात यही रुकोगे सिर्फ अकेले ओर कोई यहां नहीं आना चाहिए ये मेरा आदेश है ।

ओर तुम राठौड़,तुम जल्दी जाओ और जल्दी आना जो काम कल दिया उसको पूरा करो हम सुबह यही मिलेगे ।

(अचानक सिगनल गायब होने लगे सभी की नजर उस पर गई )
ये तो होना ही था , खैर अभी भी टाइम है हमारे पास 
night शिप्ट में योगेश्वर जो भी तुम्हे जानकारी मिले मुझे तुरंत बताना ,


Night shift,,,,,,,,
योगेश्वर का पहला संकेत

रात होते ही योगेश्वर एक अलग कमरे में गया।
S-91 वालों ने उससे कहा था कि वह अकेला रहे।
क्योंकि सिस्टम लगातार असामान्य प्रतिक्रिया दे रहा था।

वह एक कुर्सी पर बैठा और धीमे स्वर में बोला—
“अगर तुम सच में हो…
तो यह मेरी आवाज़ जरूर सुन पाओगे।”

उसने माइक्रोफोन चालू किया
जो सीधे ऊर्जा लहरों में संदेश भेजता था।

“मैं हूँ—
डॉ. योगेश्वर अग्निवंश।
मैं तुम्हें खोज रहा हूँ।”

पूरा कमरा शांत।

एक मिनट… दो मिनट… तीन मिनट…

अचानक स्क्रीन झिलमिलाई।
लाइटें कांपने लगीं।

ऊर्जा लहरों में एक हल्की सी आवाज़ उभरी—

“…मानव…”

योगेश्वर उठकर खड़ा हो गया।
उसका दिल धड़क रहा था।
डर और उत्साह दोनों टकरा रहे थे।

फिर आवाज़ दूसरी बार उभरी—

“…क्यों… ढूँढ रहे हो… मुझे?”

योगेश्वर की आँखों में आँसू भर आए।
उसने कंपकंपाती आवाज़ में कहा—

“क्योंकि…
तुम इतिहास हो।
तुम सत्य हो।
और मैं… सत्य खोजने वाला।”

ऊर्जा फिर से कांपी।
आवाज़ और स्पष्ट हुई—

“…सत्य नहीं… शाप हूँ मैं…
युगों का भार हूँ मैं…”

योगेश्वर की साँस रुक गई।


दूसरी ओर – अश्वत्थामा की प्रतिक्रिया

अश्वत्थामा वहीं बैठा था
एक विशाल चट्टान के ऊपर।
हवा तेज़ चल रही थी।

उसने आँखें खोलीं—

“ओ मानव…
तुम्हारी आवाज़ युगों बाद किसी तक पहुँची है।
तुम निडर हो…” योद्धा हो जरूर तुम्हारे पास मेरी वो वस्तु है जिसका इंतजार में युगों से कर रहा हु । 

फिर अचानक वह गुस्से में गुर्राया—

“लेकिन सावधान रहना…
मेरे पास मत आना।
मैं न दोस्त हूँ… न दुश्मन…
मैं सिर्फ़… श्राप हूँ।”

उसके घाव से तीखी रोशनी निकली।
आकाश में बिजली कड़की।
जंगल हिलने लगा।

योगेश्वर और अश्वत्थामा का पहला सीधा संपर्क

ISAR में कंप्यूटर अचानक बंद हो गया।
सभी स्क्रीन काली।
सभी उपकरण बंद।
पूरा सिस्टम एकदम मौन।

फिर…
एक ही स्क्रीन पर सिर्फ़ एक लाइन चमकी—

“तुम कौन हो, मानव?” सही से परिचय दो जिससे मेरे उभरे घाव में राहत मिले,,,या फिर मेरे सवालों के सही जवाब दो ,अगर ऐसा करते हो तो तुम यकीनन वही हो ।

इस लाइन के नीचे
एक हाथ का बना हुआ प्रतीक उभरा—
महाभारत के युग का पुराना निशान।

पूरे कमरे में सन्नाटा।
कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था।

योगेश्वर आगे बढ़ा और स्क्रीन को छू लिया—
“मैं… वही हूँ जो तुम्हें समझना चाहता है।
तुम्हारा दर्द… तुम्हारा श्राप… तुम्हारी कहानी।”

और तभी स्क्रीन हिल गई।
एक नई लाइन उभरी—

“कहानी नहीं… चेतावनी हूँ मैं।
मेरे पास आने की कोशिश मत करना।”
अभी भी मेरा सवाल है ,,
(योगेश्वर अग्निवंश ने उससे सवाल रखने को बोले दोनों के बीच महाभारत काल के संबंधिक सवाल जवाब हुए जिन में सभी सवालों के जवाब ठीक ठीक थे उससे वो बहुत खुश हुआ ओर उसको बिलीव भी हो गया उस योगेश्वर पर )

फिर कुछ सेकंड बाद—

“लेकिन तुम आओगे… मैं जानता हूँ।” क्योंकि मेरे सारे योगों की दवा सिर्फ तुम्हारे घर में है । जिसके तुम जन्म दाता हो आज से तुम मै हु मै ही तुम हु ।

और स्क्रीन पूर्णतः black हो गई।

योगेश्वर ने धीरे से कहा—
“यह संवाद…
इतिहास का पहला वैज्ञानिक-पौराणिक संपर्क था।”

उसी समय उसने समित चौहान को संपर्क किया वो कुछ ही मिनटों बाद उस लेब में पहुंच गया ओर साथ में राठौड़ भी ,जब वो अंदर आए तो योगेश्वर के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी जिसको देख कर समित चौहान ने अंदाजा लगा लिया कि कामयाबी मिल चुकी है ,लेकिन वो उसके मुंह से सुनना चाहता था वो कुछ वाक्य हुआ ।

धीरे धरे उसने सारी बातें समित चौहान के सामने रखी ओर ओर वो सब कुछ जो उन दोनों के बीच महाभारत काल के संबंध में सवाल पूछे गए । 

लेकिन एक बात थी जिसको उसने गुप्त रखा वो थी ,,जैसा कि उस Ashvdhama ने बोली ,,, तुम उसके जन्म दाता हो वो तुम्हारे घर में 

समित ने उसकी ओर देखा—
“डॉक्टर साहब…
अब क्या करेंगे?”

योगेश्वर ने गहरी साँस ली—
“अब…
हिमालय जाना पड़ेगा।”

रथौड़ चिल्लाया—
“क्या आप पागल हो गए हैं? वहाँ कौन है, आपको पता है?”इंसान है या कोई आतंकी संगठन या कोई अन्य दुश्मन। मै सही बोल रहा सर क्यों इसके चक्कर में समय बर्बाद कर रहे हो जरूर ये किसी देश की साजिश है जो हमारे सिस्टम को क्रैश करना चाहता है ।

योगेश्वर ने शांत स्वर में कहा—

“हाँ…
वहाँ एक युग इंतज़ार कर रहा है।” लेकिन अभी वो बाते तुम्हारे दिमाग के लिए केवल है । 

समित चौहान::

बस करो राठौड़,, (शांत करते हुए ) योगेश्वर हमे जल्दी करनी होगी जैसे हमें इसका इंतजार था कोई ओर भी है जिसको इसकी खबर पहुंच गई होगी ,,।


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लेखक भगवत सिंह नरूका ✍️