Yashaswini - 40 in Hindi Fiction Stories by Dr Yogendra Kumar Pandey books and stories PDF | यशस्विनी - 40

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यशस्विनी - 40

द फोर्थ जेंडर:- 

चौंकते हुए स्वामी अक्षयानंद ने कहा,"यह अटपटा तो नहीं हो जाएगा और इससे कई गहरे प्रश्न खड़े हो जाएंगे।यह विचारणीय तथ्य है और अत्यंत गहरा सूत्र आप लोगों के हाथ लगा है।आज नारी केवल घर की चहारदीवारी तक सीमित नहीं है।अनेक नारियों को अपने कार्य क्षेत्र में कार्य पूरा कर देर रात्रि को घर लौटना पड़ता है।"

प्रज्ञा ने कहा,"अनेक नारियां तो बाहर क्या, घर में भी सुरक्षित नहीं रहती हैं।घर के बाहर तो युवतियों की बात ही क्या,अनेक बच्चियां और वृद्धाएं भी कुछ कुत्सित पुरुषों के यौन हमलों का शिकार हो जाती हैं और ऐसे नर पिशाच उन्हें खून से लथपथ छोड़ जाते हैं या उनका गला घोंट देते हैं।"

  नेहा ने कहा,"मैंने स्वयं यह दंश सहा है और उन घिनौने दंशों की पीड़ा से आज भी उबरने का प्रयत्न कर रही हूं।च्यवन ऋषि और सुद्युम्न द्वारा अपने कायाकल्प और शरीर परिवर्तन की घटना से मुझे एक समाधान सूझ रहा है।"

"वह क्या?"रोहित ने पूछा।

"जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मनुष्य के गुणसूत्र पर प्रयोग और महिलाओं में फोर्थ जेंडर क्षमता का विकास करना।"नेहा ने बताया।

   यह सुनकर सभी आश्चर्यचकित हो गए। प्रज्ञा ने कहा,"यह फोर्थ जेंडर है क्या और इससे महिला सुरक्षा में क्या सहायता मिलेगी?"

नारी सुरक्षा के संबंध में नेहा ने एक अलग ही अवधारणा प्रस्तुत की।

प्रज्ञा के प्रश्न का नेहा कोई उत्तर देती इससे पहले स्वामी मुक्तानंद ने कहा,"यह फोर्थ जेंडर कैसे कार्य करेगा, एक वैज्ञानिक की दृष्टि से तुमने क्या सोचा है?"

नेहा ने अपनी योजना बताते हुए कहा,"हम तीन जेंडर के संबंध में जानते हैं। स्त्रीलिंग,  पुल्लिंग और उभयलिंग  ……..”

रोहित ने पूछा, "इन तीन जेंडर से यह चौथा जेंडर कितना और कैसे अलग होगा?"

नेहा ने स्पष्ट करते हुए बताया, "यह प्राकृतिक नहीं होगा बल्कि इसे जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से प्रयोगशाला में विकसित किया जाएगा। जो लक्षण प्राकृतिक रूप से किसी जीव में नहीं पाए जाते हैं, उन लक्षणों को किसी जीव में नए डीएनए के रूप में जोड़ना ही जेनेटिक इंजीनियरिंग है।मैं इसके माध्यम से स्त्रियों की एक विशेष श्रेणी तैयार करना चाहती हूं जो किसी संकट और विशेष रूप से यौन हमले के समय अपने आप को फिफ्थ जेंडर में परिवर्तित कर ले और आक्रमण करने वाला उसका यौन शोषण न कर सके।"

स्वामी अक्षयानंद ने पूछा,"लेकिन अगर इस फोर्थ जेंडर में आक्रांता से अधिक शक्ति नहीं रहेगी तो यह किस काम का रहेगा?"

नेहा ने स्पष्ट करते हुए बताया,"खतरे के समय यह स्त्रियों की केवल शारीरिक यौन संरचना में ही परिवर्तन नहीं करेगा, बल्कि ऐसे शक्तिशाली डीएनए भी उसके शरीर में साथ ही प्रविष्टि किए जाएंगे, जो उसे हमलावर से अधिक शक्तिशाली बना दे।"

स्वामी मुक्तानंद के चेहरे पर बल पड़ गए। उन्होंने कहा,"वैसे तुम्हारा यह अनुसंधान कहां तक पहुंचा है बेटी?"

नेहा ने बताया," स्वामी जी लगभग 80% अनुसंधान पूरा हो गया है और मैं आगे कुछ व्यावहारिक चीजों पर अनुसंधान के लिए यूनिवर्सिटी आफ कोलंबिया,अमेरिका जाना चाहती हूं।वहां से लौटने के बाद भारत की धरती में ही यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।"

प्रज्ञा ने पूछा,"क्या इस प्रोजेक्ट के संबंध में तुमने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से अनुमति ली है?"

नेहा ने बताया,"जब मैंने प्रारंभ में कार्य शुरू किया था, तो मुझे यह नहीं पता था कि मेरी खोज इस दिशा में मुड़ जाएगी। अतः इस कार्य के लिए अनुमति का तो प्रश्न ही नहीं था।अब मैंने मेरी खोज के नए आयाम के संबंध में संकेत करते हुए एक आवेदन भेजा है और इस संबंध में मुझे मंत्रालय से चर्चा के लिए अगले महीने बुलाया गया है।मैंने अपने इस उद्देश्य का खुलासा आज से पहले कभी नहीं किया है और मैं स्वामी जी की अनुमति लेकर ही अमेरिका जाना चाहूंगी अन्यथा इस योजना को आगे इस रूप में नहीं बढ़ाऊंगी।"

       गंभीर होते हुए स्वामी मुक्तानंद ने कहा,"मानवता के कल्याण के लिए तुम्हारी सोच अति उत्तम है नेहा, लेकिन इसके अपने खतरे बहुत अधिक हैं।मुझे इस बात की आशंका अधिक है कि अगर तुम्हें आगे अनुसंधान की अनुमति मिल जाएगी और तुम फोर्थ जेंडर विकसित कर लोगी तो फिर इस दुनिया में फेमिनिन जेंडर अर्थात स्त्रियों की संख्या कम हो जाएगी और अधिकांश यह फोर्थ जेंडर ही बनना चाहेंगी।"

स्वामी मुक्तानंद की बात से सहमति व्यक्त करते हुए स्वामी अक्षयानंद ने कहा,"आपकी आशंका अपनी जगह सही है। इस यथार्थ के बाद भी कि स्त्रियां आज अबला नहीं,बल्कि सबला हैं और वे घर तथा बाहर दोनों क्षेत्रों में कुशलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।आज महिलाएं संतति को जन्म देने के प्राकृतिक दायित्व के साथ-साथ उनके पालन - पोषण में भी महती जिम्मेदारी निभा रही हैं।वे अवसर मिलने पर बाहर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर प्रशासन, चिकित्सा और यहां तक कि कठोर शारीरिक श्रम वाले क्षेत्र में भी देश को अपना श्रेष्ठतम योगदान कर रही हैं।"

विवेक ने बताया,"जब वर्ष 2035 तक इसरो द्वारा भारत का पहला अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित हो जाएगा, इसके पूर्व ही मुझे आशा है कि हमारे देश की कोई महिला अंतरिक्ष यात्री गगनयान के माध्यम से अंतरिक्ष में पहुंच चुकी होगी। मैं तो यही चाहता हूं कि 2027 में किसी महिला को ही गगनयान के माध्यम से प्रथम गगन यात्री बनने का अवसर मिले।"

    प्रज्ञा ने कहा,"मेरे जनवाणी टीवी चैनल की ओर से मुझे हमास और इजरायल के बीच चल रहे मौजूदा युद्ध की रिपोर्टिंग के लिए चयनित किया गया था, लेकिन मैंने इस आश्रम में आना आवश्यक समझा और मैं यह चाहती हूं कि जब वर्ष 2040 तक इसरो के लक्ष्य के अनुरूप पहला भारतीय चंद्रमा की सतह पर कदम रखे,तो वह कोई स्त्री ही हो।"

प्रसन्न होते हुए स्वामी मुक्तानंद ने कहा, "अवश्य ऐसा हो सकता है।"ऐसा कहकर स्वामी मुक्तानंद मौन हो गए। नेहा के अनुसंधान के संबंध में आखिरी निर्देश क्या हो, यह जानने के लिए सब स्वामी मुक्तानंद की ओर देखने लगे।कुछ क्षण कक्ष में निस्तब्धता रही।स्वामी जी ने रोहित की ओर देखा। रोहित की आंखें बंद थीं।ध्यान की अवस्था में ही रोहित समाधिस्थ हो चुके थे। उनके चेहरे की भाव भंगिमाएं बदल रही थीं। स्वामी जी के चेहरे पर एक क्षण को चिंता की रेखाएं दिखाई दीं,फिर अगले ही पल वे प्रसन्न हो उठे और अपने आसन से उठकर रोहित के पास जा पहुंचे।उन्होंने रोहित के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,"आंखें खोलो रोहित! अब तुम वह ज्ञान प्राप्त कर चुके हो जिसकी सहायता से बिना मोह के बंधनों में बंधे, जनकल्याण और ईश्वर की सेवा का कार्य कर सकते हो।"

क्रमशः 

योगेंद्र