Ishq - 17 in Hindi Short Stories by om prakash Jain books and stories PDF | इश्क. - 17

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इश्क. - 17

सिम्मी को रजनी मेहता अमेरिका वाली लड़की सहज संयोग से  मिल ही जाता है ।शेखर दोपहर को सिम्मी के घर आता है ।आज सिम्मी घर में  है ,रविवार के दिन सिम्मी मां के  घरेलु काम में हाथ बटा  रही है।सिम्मी के पिता जी अपने गरीबी को ले कर  चिंचित रहते हैं।वह चपरासी के बेटे को अपना दामाद बनाने में लगे है और सिम्मी की शादी कर उनके हाथ पीले कर देना चाहता है । वह सोचता है आज कल का समय और परिवेश बहुत तेजी से बदल रहा है।और वह यह भी मन ही मन सोचने लगता है मेरी इकलौती बेटी सिम्मी इस गरीब घर की देहरी से विदा हो कर जाएगी तो हम जुदाई शायद सहन कर पाएंगे।और बुदबुदाते हुए अपने आप से कहता है हम गरीब है न अपने बराबरी से रिश्ता बनाना ठीक होगा ।सिम्मी अपने पिताजी के अंतरिक भाव को भाप लेती है । पिताजी आप क्या सोच रहे हैं, आपके चेहरे में उदासी दिखाई दे रहा  है ,आप किसी गंभीर सोच में लगे हैं ।
     नहीं बेटी मै कुछ नहीं सोच रहा हूं।तुम्हारे विदाई के बारे में ही तो सोच रहा था।
    क्या हो गया मैं घर छोड़ कर कहीं जाने वाली नहीं। मां अकेली हो जाएगी उनकी तबियत भी आए दिन ठीक नहीं रहती। उनके देखभाल कौन  करेगा। हां घर का राशन पानी भी तो मुझे देखना होता है। आप  सोचते हैं कि मैं चपरासी के बेटे के साथ शादी कर लूं । पिताजी इतनी जल्दी क्या है ।
      बेटी तेरा बाप हूं एक  बेटी के दर्द के मर्म को समझता हूं ।आज का समय ठीक नहीं है।इसी समय शेखर का आगमन होता है।सिम्मी के पिता जी शेखर को देख कर –कैसे हैं बेटा शेखर ।
    अच्छा हूं बाबूजी सिम्मी बहन को खुशखबरी देने आया हूं ।
      क्या ?....
    कुछ खास नहीं ,उनकी अमेरिका वाली सहेली सिम्मी को अपने घर मिलने बुलाई है। वह कल ही तो वॉशिंगटन अमेरिका से अपने घर स्वदेश लौटी है ।
   अच्छा ठीक है,हम गरीब लोग हैं बड़े घराना से दूरी बनाना उचित है।
      बाबू जी ऐसे नहीं सोचते ,सिम्मी में बहुत  टैलेंट है ।उसे अमीर घर में जन्म लेना था।आप अपना काम कीजिए मै सिम्मी को ले कर जा रहा हूं ।उसी समय सिम्मी आती है शेखर भैया को देख कर प्रसन्न होती है ।और कहती है –आप बैठिए मैं तैयार होकर आती हूं। इतना कहकर सिम्मी तैयार होने के लिए चली जाती है। सिम्मी अपने अलमारी में ड्रेस देखती है कौन सी  पहनू ।वेदांत के द्वारा अपने जन्म दिन में दिए हुए सलवार शूट उन्हें बहुत पसंद आता है।और कहती है– ये शूट बहुत ब्यूटीफुल है।शेखर के पास आ कर चलो भैया ,मैं रेडी हूं।
    शेखर तेज गति से कार चला रहा है। सिम्मी शेखर भैया को कार धीरे  चलाने के लिए कहता है।शेखर सिम्मी से तुम बहुत सुंदर लग रही हो। सिम्मी, शेखर भैया मेरे ऊपर किसी का नजर न लगे।अरे! नहीं लगेगा किसी के नजर मेरे रहते तुम टेंशन न लो।ओके।रजनी के घर चलो।चलेंगे एक मिनट उस लफंगे वेदांत से मिलते चलते है ।तुम्हारे सपने दिन में देखा करता है।पगला गया है।सिम्मी वेदांत पागल नहीं है।एक सच्चा इंसान है इतना बड़ा आदमी हो के उसमें कोई इगो नहीं है।मै भाग्यशाली हूं।
     लो आ गया लफंगा के घर ।दोनों कार से नीचे उतरते हैं । सिम्मी अंदर जाती है और शेखर उल्टा को गायब हो जाता है। वेदांत सिम्मी को देखकर  तुम अकेली आई हो शेखर कहां है। मेरे पीछे ही तो था उल्टे पांव कहीं गायब हो गया। उस लल्लू को मैं अच्छी तरह जानता हूं, बहुत ड्रामा बाज़ है। गया होगा डाली के पीछे चक्कर लगाने। नहीं शेखर भैया ऐसे नहीं है। बैठो क्या लोगी चाय कॉफी और कुछ। चाय कॉफी पीने नहीं आई हूं रजनी मेहता से मिलने जाना है। हम साथ चलते हैं टेंशन मत लो। वेदांत रामू काका को आवाज देता है सिम्मी आई है।रामु काका सिम्मी को घर में देख कर बहुत खुश होता है।फटा फट दो प्याली चाय बिस्कुट लाकर रख कर चला जाता है।
     सिम्मी और वेदांत की रोमांस की चरम सीमा बढ़ने लगता है उसी वक्त शेखर पहुंच जाता है।शेखर कहता है लगे रहो मुन्ना भाई मैने कुछ नहीं देखा न सुना हूं।जा रहा हूं कल की शूटिंग के शेड्यूल बनाना है।तुम तो भुलक्कड़ हो गए हो।अरे जा मेरा दिमाग मत खा ।जा भाई जा तुम्हें जैसा करना है कर ।तू आजाद है समझे उल्लू कहीं के ।काका –अरे क्यों लड़ते हो सिम्मी बेटी की लाज रखो।कैसे समझाऊं तुम दोनों को ।काका से दोनों माफ़ी मांगते है।शेखर और वेदांत में दोस्ती की अटूट प्रेम है।जब भी देखो बच्चों के तरह लड़ते झगड़ते हैं।यही तो केमिस्ट्री है दोनों के।
     वेदांत सिम्मी को अपने मर्सडीज कार से घटी की ओर चले जाते है ।सिम्मी कहती है–वेदांत मुझे रजनी से मिलने जाना है।वेदांत कल तुम चॉइस सेंटर आओगे तब चले जाएंगे ।एक घंटे के लिए अपने असिस्टेड को काम संभालने रख देना।सिम्मी ओके बाबा।
    वेदांत सिम्मी को लेकर अटारी पार्क की ओर जाते है बीच में एक पत्थर से टकरा कर सिम्मी गढ्ढे में गिरती  रहती वेदांत सिम्मी को पकड़ कर बचा लेता है । और दोनों आलंगित हो जाते हैं।वेदांत ,सिम्मी के ओंठो की चुम्बन लेता है।सिम्मी अपने आप को सम्भल नहीं पाती ,जैसा तैसा अपने आप को काबू कर वेदांत से दूर हटती है।दोनों के शरीर से पसीने निकलने लगता है।वेदांत सिम्मी से घबराओ मत मै सब सम्भल लूंगा आओ मेरे बाहों में हम अतीत में खो जाना चाहते है।
    सिम्मी गुस्से से –नहीं आऊंगी ,चलो घर मुझे छोड़ दो ,कोई अनर्थ न हो जाए। हम कब तक ये प्यार को छुपा कर रखेंगे ।मैं अपने गरीब मां –बाप को धोखा नहीं दे सकता ।
      ठीक है सिम्मी चपरासी के बेटे से शादी कर लो नहीं रोकूंगा ।
     तुम पागल हो गए हो क्या ,तुम मुझ से प्यार नहीं करते मेरे जिस्म के मजा लेना चाहते हो।
   नहीं ,मैने सच्चा प्यार किया है।मैं समझता हूं शादी के पहले हमें इतना नजदीकी नहीं करना चाहिए।मैंने गलती तो किया है तुम से माफ़ी मांगता हूं ।
   नहीं ,तुम्हारी गलती नहीं है गलती मेरी है ।और गलती किसी के हो दो लिंग के जवानी में इसे रोक पाना भूकंप और ज्वाला मुखी के तरह ही है।आप मेरे बाबूजी से जल्दी हांथ मांगने आ जाएंगे।ओके बेबी कहते हुए गाड़ी स्टार्ट करता है।उसी वक्त राज सर का बॉम्बे से कॉल  आता है हैलो वेदांत  ...
    जी सर ....
     तुम अगले महीने बॉम्बे पहुंच जाओ ,नई बॉलीवुड  फिल्म की शुरूआत करनी है जिसका डायरेक्शन आप को करना है कहानी भी आप की ।मैं सारा डॉक्यूमेंट ईमेल कर दे रहा हूं।
     जी...
     सिम्मी ,वेदांत को भींच कर अपने ओर खींचती है।अरे सिम्मी गाड़ी एक्सीडेंट हो जाएगा ।सिम्मी गाना गाने लगती है । बम्बई की सपना देखती है ।
    सिम्मी, आप मुम्बई मुझे शादी कर लो चलो।चपरासी के बेटा भाड़ में जाए।वेदांत कल तुम मेरे हांथ मांगने मेरे घर आ जाओ।साथ में काका शेखर भैया को भी लेते आना बाबूजी मान जाएंगे।निर्दई नहीं हैं । मां हम दोनों के प्रेम लीला कुछ –कुछ जान रही है।पूरी सच्चाई हम बता देंगे ।कब तक हम गुमराह करने में लगे रहेंगे। समय पता नहीं चला ।मर्सडीज कार सिम्मी के गांव के गलियों से गुजरते हुए सिम्मी के घर के सामने रुकती है।सिम्मी ,वेदांत को घर चलने को कहती है ।वेदांत मना कर देता है।सिम्मी बाय करती है। मां की धुंधली नजर वेदांत पर और महंगी कार पर पड़ती है ।
   मां –कौन साहब था ,इतनी महंगी कार में उनके साथ अकेली।लड़का पहचाना सा लगा ।अपने मस्तिष्क में जोर दे कर ये तो शायद वेदांत छालीवुड के निर्माता,निर्देशक है ।बेटी ओ बहुत बड़े आदमी है नाम भी बच्चा बच्चा जनता है।
      नहीं मां आप को भ्रम हुआ।वेदांत नहीं है।
      तो कौन है।
      मुझे नहीं मालूम उन से ही पूछ लीजिए।
      कैसी बात कर रही है।एक गांव के काका आकर कहता है हमारे गांव में वेदांत सर आया था मैने देखा हूं ।बहुत हेंडसम स्मार्ट है ।सुपर हीट छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाता है बेटी सिम्मी ।भाभी ,वेदांत किसके घर आया था।      
    मुझे नहीं मालूम सिम्मी ही बता सकती है।रात को मम्मी ,सिम्मी से जोर दे कर पूछती है वेदांत से तुम्हारा क्या संबंध है।सिम्मी रोते हुए कहती है –वेदांत से मैं प्यार करती हूं ।ओ भी मुझसे बहुत प्यार करते है।
    उनका प्यार झूठा  है, तुम जैसे ग़रीबन की बेटी से ओ प्यार ।ओ करोड़ पति आदमी है एक फिल्म में 50– 50 करोड़ कमाता है।तुम से शादी करेगा।पागल मुझे बना रही है।चपरासी के बेटा का क्या होगा मंगनी पक्की हो गई है ।समाज में हमारी नाक कटवाऐगी।
    नहीं मन वेदांत कल मेरा हाथ मांगने आएगा देख लेना।चपरासी के बेटे से मर जाऊंगी शादी नहीं करूंगी।