अध्याय 1: प्रतिज्ञा और पुराना घर
भविष्य की चकाचौंध और अत्याधुनिक तकनीक से लैस शहर की ऊँची इमारतों के बीच, सिया का मन अशांत था। वह एक माहिर गेमर था, लेकिन आज उसके सामने ज़िंदगी का सबसे कठिन लेवल था—अपने लापता भाई को ढूँढना।
उसकी बहन, रिया, उसे समझाने की कोशिश कर रही थी, "सिया, बाहर खतरा है, हमें पुलिस की मदद लेनी चाहिए।"
सिया ने गुस्से में पास पड़ी मेज पर जोरदार मुक्का मारा, जिससे कांच के गिलास खनखना उठे। "पुलिस? वे महीनों से बस फाइलें देख रहे हैं, रिया! बस अब बहुत हुआ। वह मेरा भाई है, और मैं उसे ढूँढकर ही रहूँगा, चाहे इसके लिए मुझे पाताल ही क्यों न नापना पड़े!"
रिया ने उसकी आँखों में वह जुनून देखा जिसे रोकना नामुमकिन था। सिया अपनी जैकेट उठाकर पुराने घर की ओर निकल पड़ा, जहाँ उनके बचपन की यादें और शायद कुछ राज दफन थे।
पुराने घर की धूल भरी हवा में एक अजीब सी खामोशी थी। अलमारी के पीछे उसे एक पुरानी पारिवारिक तस्वीर दिखी। जैसे ही उसने उसे हटाया, उसके पीछे एक गुप्त ताख में एक पीतल की चाबी रखी थी। तभी अचानक, छत की सीलिंग से एक भारी लकड़ी का बक्सा धड़ाम से नीचे गिरा। सिया ने चाबी लगाई, बक्सा खुला और उसके अंदर से एक चर्मपत्र का नक्शा निकला। यह शहर के नीचे दबे एक प्राचीन मंदिर का रास्ता था।
अध्याय 2: भूलभुलैया और रहस्यमयी वस्तु
नक्शे के निशानों का पीछा करते हुए सिया शहर के सबसे पुराने और वीरान इलाके में पहुँचा। वहाँ एक विशाल पत्थर का द्वार था, जिस पर अजीबोगरीब आकृतियाँ बनी थीं। सिया ने जोर लगाया और भारी दरवाजा चरमराते हुए खुल गया।
अंदर का नजारा किसी डरावनी फिल्म जैसा था। वह एक-एक कर कमरों को पार करने लगा। हर कमरे में प्राचीन जाल बिछे थे। जैसे ही उसने आठ कमरों की बाधाओं को पार किया, नौवें कमरे में उसकी सांसें थम गईं।
सामने एक बहुत ऊँचे चबूतरे पर एक नीली रोशनी वाली वस्तु हवा में तैर रही थी। वह बिना किसी सहारे के ऊपर-नीचे हो रही थी। सिया सावधानी से चबूतरे पर चढ़ा। उसने जैसे ही उस वस्तु को अपने हाथों में लिया, एक जोरदार बिजली कड़की।
अचानक, मंदिर की दीवारें फटने लगीं। "धत्त! यह तो टूटने वाला है!" सिया चिल्लाया।
अध्याय 3: सैया का उदय और भागम-भाग
पूरा मंदिर ताश के पत्तों की तरह गिर रहा था। सिया ने उस वस्तु को अपने बैग में डाला और दौड़ लगा दी। पत्थर उसके ठीक पीछे गिर रहे थे। वह खंभों पर कूदता हुआ और मलबे से बचता हुआ मुख्य द्वार की ओर भागा। वह जैसे ही बाहर निकला, पूरा मंदिर जमींदोज हो गया। धूल के गुबार में उसे महसूस नहीं हुआ कि एक काली, धुएँ जैसी परछाईं—'सैया'—उसके साये से चिपक गई है।
सिया हाफते हुए घर पहुँचा। रिया उसे देखते ही बरस पड़ी, "तुम पागल हो? अपनी जान जोखिम में डालकर कहाँ गए थे? देखो अपनी हालत, धूल से लथपथ हो! तुम्हें अंदाजा भी है मैं कितनी टेंशन में थी?"
सिया ने बैग से वह चमकती वस्तु निकाली। "रिया, शांत हो जाओ। देखो इसे! यह साधारण चीज़ नहीं है। यह एक सुराग है, एक चाबी है जो हमें भाई तक ले जाएगी। मुझे यकीन है वह यहीं कहीं है।"
रिया की आँखें अचानक फैल गईं। उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया। "सिया... तुम्हारे पीछे... वह क्या है?"
सिया ने पीछे मुड़कर देखा। दीवार पर उसका अपना साया अजीब तरह से हिल रहा था। धीरे-धीरे वह साया जमीन से ऊपर उठा और एक डरावने आकार में बदल गया। 'सैया' ने एक डरावनी गूँज के साथ उन पर हमला किया।
"भागो रिया!" सिया चिल्लाया। वे दोनों अपनी जान बचाने के लिए घर के पिछले दरवाजे से रात के अंधेरे में भाग निकले, जबकि वह खौफनाक साया साये की तरह उनके पीछे लगा था।
अध्याय 4: पाताल की प्रयोगशाला और पिता का संदेश
सिया और उसका बहना अपनी जान बचाकर वहां से ऐसे भागे जैसे साक्षात मौत उनका पीछा कर रही हो। उनके फेफड़े हवा के लिए तरस रहे थे, लेकिन रुकने का मतलब था—मौत। वे सीधा अपने अंकल रॉबर्ट के घर की ओर दौड़े।
जैसे ही वे रॉबर्ट के पोर्च पर चढ़े, उनका पूरा शरीर पसीने से लथपथ था। अंकल रॉबर्ट उस समय अपने बगीचे में कुछ काम कर रहे थे। उन्होंने जब दोनों को इस हालत में देखा—घबराए हुए, कपड़े अस्त-व्यस्त और चेहरे पर दहशत—तो वे सब कुछ छोड़कर उनकी ओर लपके।
"अरे! तुम दोनों... क्या हुआ?" रॉबर्ट ने चिंता से पूछा, "तुम लोग ऐसे क्यों हांफ रहे हो? और तुम्हारे चेहरे पर ये खौफ कैसा है?"
"अंकल... अभी... अभी समझाने का वक्त नहीं है," सिया का भाई, जो हमारा हीरो है, मुश्किल से सांस लेते हुए बोला। उसकी आवाज कांप रही थी। "पहले... पहले दरवाजा बंद कर लो। जल्दी!"
वे तीनों अंदर गए। हीरो ने तुरंत मुख्य दरवाजा लॉक किया, फिर खिड़कियों के भी पर्दे गिरा दिए। जब उसे तसल्ली हो गई कि बाहर कोई नहीं देख रहा, तब वह सोफे पर धम्म से बैठ गया। सिया ने कांपते हाथों से पानी का गिलास पिया और फिर उन्होंने अंकल को सब कुछ बताया—कैसे उन्होंने उस 'साये' को चकमा दिया और वह नीली रोशनी वाली प्राचीन वस्तु चुराकर भाग निकले।
अंकल रॉबर्ट ने उस वस्तु को गौर से देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई, जैसे कोई पुरानी याद ताज़ा हो गई हो।
"यह... यह तो नामुमकिन है," रॉबर्ट बड़बड़ाए। "तुम्हारे पिता... मेरे भाई... वे अक्सर ऐसी ही एक चीज का जिक्र किया करते थे।"
"पिताजी?" सिया चौंक गई।
रॉबर्ट ने गहरी सांस ली और बताया, "हाँ। गायब होने से कुछ दिन पहले, तुम्हारे पिता ने मुझसे कहा था कि उन्हें एक ऐसी प्राचीन शक्ति का पता चला है जो न केवल हमारा 'आज' बदल सकती है, बल्कि पूरे ब्रह्मांड को मिटाने की ताकत रखती है। उन्होंने कहा था कि यह भविष्य की घटनाओं और छिपी हुई वस्तुओं का पता बता सकती है। और उन्होंने एक जगह का नाम भी लिया था..."
"क्या नाम था?" हीरो ने उत्सुकता से पूछा।
"'द मिरर' (The Mirror)," रॉबर्ट ने याद करते हुए कहा। "उन्होंने एक नक्शे की भी बात की थी जो हमें अमेज़न के जंगलों में एक खास जगह ले जा सकता है। शायद तुम्हारे पिता के गायब होने का राज वहीं दफन है।"
बिना एक पल गंवाए, तीनों ने फैसला किया। वे उस नक्शे के आधार पर अमेज़न के घने और रहस्यमई जंगलों की ओर निकल पड़े।
सफर लंबा और थका देने वाला था। अमेज़न का जंगल किसी हरी भूलभुलैया जैसा था, जहाँ हर कदम पर खतरा था। नक्शे का पीछा करते हुए वे एक विशाल, प्राचीन पहाड़ के पास पहुँचे। पहाड़ के पत्थरों पर अजीबोगरीब चित्र बने थे।
"नक्शे के मुताबिक, जवाब इसी पहाड़ के अंदर हैं," रॉबर्ट ने कहा।
वे पहाड़ की खड़ी ढलान पर चढ़ने लगे। कुछ दूर ऊपर जाने पर उन्हें एक गुफा का मुहाना दिखाई दिया। गुफा के अंदर गहरा अंधेरा था। जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा, सिया को लगा कि जमीन कुछ अजीब है।
"रुको!" सिया चिल्लाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
उनके पैरों के नीचे की जमीन—जो दरअसल पत्थर की एक बहुत पतली परत थी—चरमरा कर टूट गई।
"आआआह!" तीनों चीखते हुए अंधेरे में नीचे गिरे।
धड़ाम! वे एक ठंडी भूमिगत नदी में जा गिरे। पानी के तेज बहाव ने उन्हें किनारे पर धकेल दिया। जब वे भीगते हुए बाहर निकले, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
यह कोई साधारण गुफा नहीं थी। यह एक प्राचीन हाई-टेक प्रयोगशाला थी। दीवारों पर वही चित्र बने थे जो उस नीली वस्तु पर थे। सामने एक बड़ा कंसोल था। हीरो ने जैसे ही उस कंसोल के एक बटन को दबाया, एक तेज रोशनी हुई और हवा में एक होलोग्राम तैरने लगा।
वह चेहरा... वह उनके पिता थे।
"सिया... मेरे बेटे..." होलोग्राम से पिता की आवाज गूंजी। सिया की आँखों में आंसू आ गए।
"मुझे पता था," पिता की डिजिटल परछाई ने कहा, "मुझे पता था कि तुम एक न एक दिन अपने भाई को ढूंढते हुए यहाँ तक जरूर पहुंचोगी। यह संदेश तुम्हारे लिए ही है। यह वस्तु, जिसे तुम अपने हाथों में लिए हो, यह पृथ्वी की नहीं है। यह प्रशांत महासागर की गहराइयों में मिली थी, लेकिन इसकी तकनीक इंसानी समझ से परे है।"
होलोग्राम ने एक नक्शा दिखाया जिसमें ब्रह्मांड के कई ग्रह चमक रहे थे।
"अगर तुम इसके सिर पर लगे बटन को दबाओगी, तो यह तुम्हें ब्रह्मांड की उन सभी जगहों का पता बताएगी जहाँ एलियंस और दूसरी प्रजातियां रहती हैं। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है..." पिता का चेहरा गंभीर हो गया, "यह बताती है कि एक बेहद उन्नत प्रजाति किसी और ग्रह पर नहीं, बल्कि पृथ्वी पर ही मौजूद है। और वे दोस्त नहीं हैं।"
सिया और रॉबर्ट सन्न रह गए।
"मेरी खोज के अनुसार," पिता ने आगे कहा, "अगला सुराग भारत में है। हिमालय पर्वत की ऊंचाइयों में एक छिपी हुई गुफा है। वहाँ एक रास्ता है जो... जो शायद किसी दूसरी दुनिया को जाता है। मैं वहीं जा रहा हूँ। मेरी खोज यहीं खत्म होती है, इसके आगे का सफर तुम्हें तय करना होगा। गुड लक, मेरे बच्चों।"
होलोग्राम झिलमिलाया और बंद हो गया।
"लेकिन..." सिया का भाई हताश होकर बोला, "पिताजी ने भाई के बारे में तो कुछ बताया ही नहीं? क्या वे हिमालय में हैं?"
अभी वे इस पहेली को सुलझा ही रहे थे कि गुफा के प्रवेश द्वार से एक भारी, गूंजती हुई आवाज आई।
"तुम मुझसे नहीं बच सकते!"
वह 'साया' उन्हें ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुँचा था। उसकी लाल आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।
"भागो!" रॉबर्ट चिल्लाया।
तीनों पीछे की ओर भागे, लेकिन रास्ता बंद था। वे फंस चुके थे। घबराहट में, सिया के हाथ में पकड़ी उस प्राचीन वस्तु (रोबोटिक डिवाइस) पर उसकी उंगलियां कस गईं।
क्लिक!
गलती से सिया का अंगूठा उसी बटन पर दब गया जिसके बारे में पिता ने चेतावनी दी थी।
अचानक, उस वस्तु से एक blinding (अंधा कर देने वाली) नीली रोशनी निकली। उनके आस-पास का दृश्य—गुफा, प्रयोगशाला, जंगल—सब कुछ पिघलने लगा। उनके पेट में एक अजीब सी ऐंठन हुई, जैसे वे बहुत तेज गति से खिंच रहे हों।
वूश!
अगले ही पल, जंगल की उमस गायब हो गई।
सिया ने जब आँखें खोलीं, तो उसने देखा कि वे अब गुफा में नहीं थे। तेज, बर्फीली हवा उनके चेहरों को काट रही थी। चारों तरफ सफेद बर्फ की चादर थी और सामने एक विशाल पर्वत खड़ा था।
वे टेलीपोर्ट होकर सीधा हिमालय पहुँच चुके थे, ठीक उसी गुफा के पास जिसका जिक्र उनके पिता ने किया था।
लेकिन क्या वे सुरक्षित थे? या वे खतरे के और करीब आ गए थे?
अध्याय 5: बर्फ में छिपा द्वार और रक्षक
हिमालय की बर्फीली हवाएं किसी चाबुक की तरह उनके शरीर पर लग रही थीं। सिया, हीरो और अंकल रॉबर्ट कांपते हुए उस विशाल गुफा की ओर भागे, जो सामने अंधेरे में किसी दैत्य के खुले मुंह जैसी दिख रही थी।
"जल्दी करो! यहाँ बाहर रहे तो ठंड से ही जम जाएंगे!" रॉबर्ट चिल्लाया।
वे तीनों लड़खड़ाते हुए गुफा के अंदर घुस गए। अंदर पहुंचते ही बाहर के तूफान का शोर कम हो गया, लेकिन यहाँ एक डरावनी खामोशी थी। गुफा प्राकृतिक नहीं थी। उसकी दीवारें एकदम सीधी और चिकनी थीं, जैसे उन्हें किसी मशीन से काटा गया हो।
सिया ने अपने हाथ में पकड़ी उस प्राचीन वस्तु (डिवाइस) को देखा। वह अब नीली नहीं, बल्कि गहरी लाल रोशनी में धड़क रही थी।
"यह हमें रास्ता दिखा रही है," सिया ने कहा।
वे गुफा की गहराई में चलते गए। करीब आधे घंटे चलने के बाद, उनका रास्ता एक विशाल धातु के दरवाजे ने रोक लिया। यह दरवाजा किसी आम धातु का नहीं था, बल्कि काले रंग के किसी ऐसे पदार्थ से बना था जिसमें तारे जैसे कण चमक रहे थे। उस पर वही अजीब भाषा लिखी थी जो उन्होंने अमेज़न की लैब में देखी थी।
"यह बंद है," हीरो ने दरवाजे को धक्का देते हुए कहा, "और इसे हिलाया भी नहीं जा सकता।"
तभी गुफा में एक भारी, यांत्रिक आवाज गूंजी।
"अनधिकृत प्रवेश वर्जित है। पहचान बताएं।"
अचानक, दीवारों में से दो विशाल पत्थर हिले और उनके पीछे से दो विशालकाय यन्त्र-मानव बाहर निकले। वे पत्थर और धातु के मिश्रण से बने थे और उनकी आँखों में लेजर जैसी रोशनी थी।
"पीछे हटो!" अंकल रॉबर्ट ने दोनों को अपने पीछे खींचा।
गार्डियन उनकी तरफ बढ़े। हमला होने ही वाला था कि सिया को पिता की बात याद आई—"यह वस्तु बहुत प्राचीन और एडवांस है।"
उसने डरते-डरते उस चमकती हुई डिवाइस को ऊपर उठाया और उन गार्डियन्स की तरफ कर दिया। डिवाइस से एक तेज किरण निकली और सीधे दरवाजे के बीच में बने एक खांचे पर जा लगी।
दरवाजे पर बने प्रतीक घूमने लगे। एक तेज गड़गड़ाहट हुई, जिससे पूरी गुफा हिल गई।
गार्डियन्स अपनी जगह रुक गए और घुटने के बल झुक गए, जैसे उन्होंने अपने मालिक को पहचान लिया हो।
"पहचान स्वीकार की गई," मशीन ने कहा।
धीरे-धीरे, वह विशाल काला दरवाजा बीच से खुलने लगा। अंदर से एक ऐसी सुनहरी रोशनी आई जिसने उनकी आँखों को चुंधिया दिया।
अध्याय 6: दूसरी दुनिया की आहट
जैसे ही उनकी आँखें उस रोशनी की आदी हुईं, वे तीनों सन्न रह गए। दरवाजे के उस पार बर्फ नहीं थी। वहां ठंड भी नहीं थी।
वे एक कांच की सुरंग में खड़े थे जो बादलों के ऊपर तैर रही थी। नीचे देखने पर उन्हें धरती नहीं, बल्कि एक उन्नत शहर दिखाई दे रहा था। वहां की इमारतें हवा में तैर रही थीं और आकाश में उड़ने वाली गाड़ियां किसी पंछी की तरह घूम रही थीं।
"क्या हम अभी भी पृथ्वी पर हैं?" हीरो ने अविश्वास से नीचे देखते हुए पूछा।
"हाँ," रॉबर्ट ने अपनी घड़ी देखते हुए कहा, "लेकिन लगता है कि हम पृथ्वी के किसी ऐसे आयाम या छिपी हुई जगह पर हैं जिसे इंसानों से हजारों साल छिपाकर रखा गया था।"
सुरंग के अंत में एक बड़ा प्लेटफॉर्म था। वहां पहुंचते ही उन्होंने कुछ ऐसा देखा जिसने उनके रोंगटे खड़े कर दिए।
वहां एक पुराना, फटा हुआ बैग पड़ा था।
सिया दौड़कर उस बैग के पास गई। "यह... यह तो भाई का बैग है!" उसने कांपती आवाज में कहा। उसने बैग खोला—अंदर उसका पुराना डायरी और एक पानी की बोतल थी।
"वह यहाँ आया था," हीरो की मुट्ठियाँ भिंच गईं। "वह जिंदा है।"
लेकिन तभी, पूरे शहर में एक सायरन बजने लगा। वह आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें अपने कान बंद करने पड़े।
हवा में तैरते हुए कई छोटे-छोटे ड्रोन उनकी तरफ तेजी से आने लगे। उन ड्रोनों के पीछे एक उड़ने वाला यान था, जिस पर एक अजीब सा चिन्ह बना था—एक काली आँख।
"हमें छिपना होगा!" रॉबर्ट चिल्लाया।
लेकिन वहां छिपने की कोई जगह नहीं थी। वह यान उनके ठीक सामने आकर रुका। उसमें से कुछ आकृतियाँ बाहर निकलीं। वे इंसान ही दिख रहे थे, लेकिन वे सामान्य नहीं थे। वे बहुत लंबे थे, उनकी त्वचा चांदी जैसी चमक रही थी और उन्होंने हाई-टेक कवच पहन रखा था।
उनमें से एक, जो उनका लीडर लग रहा था, आगे आया। उसने अपना हेलमेट हटाया।
उसका चेहरा बिल्कुल इंसानों जैसा था, लेकिन उसकी आँखें... उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं, जिनमें कोई सफेदी नहीं थी।
उसने सिया के हाथ में वो प्राचीन डिवाइस देखी और मुस्कुराया—एक ऐसी मुस्कान जिसमें स्वागत नहीं, क्रूरता थी।
"स्वागत है," उसने एकदम शुद्ध हिंदी में कहा, लेकिन उसकी आवाज में धातु की खनक थी। "हम सदियों से उस 'चाबी' का इंतजार कर रहे थे जो तुम्हारे हाथ में है। और तुम्हारे भाई ने हमें बताया था कि तुम आओगे।"
सिया, हीरो और रॉबर्ट के पैरों तले जमीन खिसक गई।
"हमारा भाई... उसने तुम्हें बताया?" सिया ने हकलाते हुए पूछा।
"हाँ," उस लीडर ने कहा। "क्योंकि वह अब हमारा मेहमान नहीं... हमारा कैदी है।"
उसने अपनी उंगली से इशारा किया और दर्जनों सैनिकों ने उन तीनों को बंदूकों के निशाने पर ले लिया।
कहानी का स्टेटस:
अब वे तीनों उस रहस्यमई दुनिया में पहुंच चुके हैं, लेकिन वे उस 'एडवांस प्रजाति' के जाल में फंस गए हैं। सबसे बड़ा झटका यह है कि उनके भाई को भी पकड़ लिया गया है
किताब का अंतिम पृष्ठ (Epilogue)
सिया की मुट्ठी में वह प्राचीन डिवाइस अब भी चमक रही थी, लेकिन उसके सामने खड़ी चुनौती किसी भी तकनीक से बड़ी थी।
भाई मिल तो गया था, लेकिन वह आजाद नहीं था। और वह 'काली आँख' वाले लोग सिर्फ उस शहर तक सीमित नहीं थे—उनकी नजर पूरी पृथ्वी पर थी।
जंग अभी शुरू नहीं हुई थी... यह तो बस एक चेतावनी थी।
क्या सिया, हीरो और रॉबर्ट उस दूसरी दुनिया से जिंदा वापस आ पाएंगे?
क्या वे अपने भाई को उस कैद से छुड़ा पाएंगे?
या पृथ्वी का भविष्य उन काली आँखों के अंधेरे में खो जाएगा?
सफर जारी रहेगा...
अगली किताब में: The Hiding Truth - Part 3