EPISODE 6
हवेली का विद्रोह और राजसी फ़रमान
अभिमान का जुनून उसके अपने ही परिवार में विरोध पैदा करता है। उसकी हुक़ूमत ही उसकी एकमात्र ढाल है, पर वह ढाल भीतर से दरक रही है।
[शुरुआत: राठौड़ हवेली, मीटिंग हॉल। पिछली रात - 11:30 बजे]
राठौड़ हवेली का 'विजय स्तंभ' (मीटिंग हॉल) हमेशा की तरह ठंडा और विशाल था। हॉल की संगमरमर की फ़र्श पर प्राचीन राजपूत राजाओं के पोर्ट्रेट की परछाइयाँ तैर रही थीं, जो एक सदी के इतिहास का बोझ महसूस करा रही थीं। इस समय, हॉल में बिजली के तीव्र प्रकाश में भी एक गहरी, असहज उदासी छाई हुई थी।

अभिमान राठौड़ (30), जिसने अभी-अभी एक अजनबी लड़की अन्वेषा पट्टनायक के साथ जबरन विवाह का समझौता किया था, मेज़ के सामने खड़ा था। वह एक ग्रे रंग के बंदगले सूट में था, जिसकी फिटिंग बताती थी कि यह आदमी नियम नहीं बनाता, बल्कि उन्हें लागू करता है। उसके चेहरे पर कोई इमोशन नहीं था—सिर्फ़ सत्ता और एक थकावट थी, जिसे उसने अपनी लोहे जैसी इच्छाशक्ति के पीछे छिपा रखा था।
रात के इस पहर में, उसने अपने परिवार के छह सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों को वहाँ बुलाया था।
सामने की ओर, महोगनी की नक्काशीदार कुर्सी पर दादी सा (राजेश्वरी देवी, 70) बैठी थीं। उनकी आँखें अब भी दुनिया को आदेश देने की क्षमता रखती थीं, पर उनकी पीठ थोड़ी झुकी हुई थी, जैसे कि वह परंपराओं का बोझ उठा रही हों। उनके बगल में, चाचा सूरज मल राठौड़ (45) बैठे थे, जिनके चेहरे पर एक सधी हुई मुस्कान थी—वह मुस्कान जो बताती थी कि वह अभिमान से हर चीज़ में प्रतिस्पर्धा करते हैं: राजनीति, व्यापार और परिवार की नज़र में। बाकी सदस्य सिर्फ़ दर्शक थे, पर उनके चेहरों पर आने वाले तूफ़ान की बेचैनी साफ़ झलक रही थी।
हॉल में एक भारी, दम घोटने वाला सन्नाटा छाया हुआ था। हर कोई समझ गया था कि यह बुलावा किसी साधारण बात के लिए नहीं है; यह एक 'फ़रमान' होगा।
अभिमान ने अपने हाथ मेज़ पर रखे, और हॉल में गूँजती हुई अपनी आवाज़ में बोला:
अभिमान (गहरी, ताक़तवर आवाज़ में): "आप सबको मैंने इस वक़्त, इस हॉल में बुलाया है। कारण स्पष्ट है। मैंने एक ज़रूरी फ़ैसला लिया है, और मैं वह आप सबको बताने जा रहा हूँ।"
उसने अपनी बात को थोड़ा रोका, अपनी नज़रों से सबकी प्रतिक्रिया भांपता हुआ, फिर अंतिम शब्द बोले:
अभिमान: "मेरा फ़ैसला यह है कि कल मेरी शादी हो रही है।"
पूरे हॉल में एक बिजली सी दौड़ गई। अविश्वास, निराशा, और एक छिपी हुई संतुष्टि (सूरज मल के चेहरे पर) की लहरें दौड़ गईं।
दादी सा (गुस्से और पीड़ा से खड़ी होती हैं): "यह क्या बकवास है, अभिमान?! शादी? वह भी इतनी जल्दबाजी में? तुम कौन हो? तुम इस राठौड़ खानदान के वारिस हो! तुम उस कुर्सी पर बैठे हो जिसका फ़ैसला सदियों की परंपरा से होता है! क्या तुमने हमसे, अपने परिवार से, अपनी दादी सा से पूछना ज़रूरी नहीं समझा? कौन है वह लड़की?"
दादी सा का राजसी अंदाज़ पूरी तरह से जाग चुका था। उनकी आँखें लाल थीं, पर आवाज़ में अब भी कड़क थी।
अभिमान (शांत, पर नज़रों में एक भयानक आग): "दादी सा। मैं आपका सम्मान करता हूँ। पर यह फ़ैसला मेरा व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक है। और हाँ, वह लड़की..."
अभिमान ने इस बार जानबूझकर लंबा विराम लिया, जैसे वह जानता हो कि आगे क्या होने वाला है। उसने उस नाम को हवा में फेंका, जो उनके राजसी माहौल को चीर देगा।
अभिमान (नाम बताता है): "...उनका नाम अन्वेषा पट्टनायक है। वह ओडिशा से हैं, और पेशे से सरकारी अफ़सर हैं—सटीक कहें तो, एक ज़िलाधिकारी।"
राजसी परिवार का भयानक रिएक्शन
यह नाम हॉल में एक बम की तरह फूटा। 'ओडिशा' और 'सरकारी अफ़सर'—ये दोनों शब्द उनके राजसी कानों के लिए एक अपमान थे।
सूरज मल राठौड़ (ज़ोर से बनावटी हंसी हंसता है): "हा हा हा! आह, मुझे लगा ही था कि हमारे अभिमान को अब कोई बड़ी चीज़ ही पसंद आएगी! पर एक ओडिया अफ़सर? एक बाहरी! अभिमान, क्या तुम सचमुच पागल हो गए हो? हमें किसी बड़े शाही ख़ानदान की लड़की चाहिए, जो हमारे नियम माने! यह 'पूरब की लड़की' हमारी हवेली में? हमारी परंपरा? हमारा मान-सम्मान कहाँ जाएगा, अभिमान?"
सूरज मल की हंसी में जलन और ख़ुशी का मिश्रण था। यह अभिमान पर वार करने का एक मौक़ा था, और वह इसे नहीं छोड़ना चाहता था।
दादी सा (क्रोधित, पर उनकी आवाज़ में दुख था): "नहीं! यह नहीं हो सकता! हमारे खानदान में हमेशा राजपूती और बड़े घरों की लड़कियाँ आई हैं, जिन्होंने इस हवेली को पूजा है, जो हमारे नियम मानती हैं। यह सरकारी दफ़्तरों वाली लड़की, जो नियम-कानून जानती है, वह हमारे घर में नहीं टिकेगी! वह इस हवेली को 'सरकारी दफ़्तर' बना देगी! हम यह रिश्ता मंज़ूर नहीं करते!"
दादी सा की आँखों में आँसू आ गए थे। उनके लिए, यह सिर्फ़ शादी नहीं, बल्कि खानदान के पतन की शुरुआत थी।
सूरज मल तुरंत दादी सा के साथ विरोध में खड़ा हो जाता है, बाक़ी रिश्तेदारों को भी उकसाता है l
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अभिमान और अन्वेषा के इस जहरीले और जुनूनी सफ़र में मेरे साथ बने रहें। आपकी Rating और Comment ही इस कहानी की जान हैं। ♥️
About novel ♥️
ABHIMAN RATHOUR ×ANWESHA PATTNAIK
ARRANGE MARRIAGE × FORCED
राजस्थान ×ओडिशा
MLA × GOVT OFFICER
मेरी कहानी अलग ही दुनिया में ले जाएगी आपको l
इस journey में आप different cultures , नफ़रत से जुनून तक का सफ़र तय करेंगें l और suspense, romance ♥️, family drama ka full package 📦 हे ये कहानी SAFAR-E-DIL : जब नफ़रत जुनून में बदल जाए ...
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