Safar-e-Dil - 7 in Hindi Drama by Abantika books and stories PDF | सफ़र-ए-दिल - जब नफ़रत जुनून में बदल जाए.. - 7

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सफ़र-ए-दिल - जब नफ़रत जुनून में बदल जाए.. - 7

EPISODE 7

​एक और रिश्तेदार (डरते हुए): "अभिमान, आपकी राजनीति ठीक है, पर आप अपनी राजनीति के लिए खानदान का नाम ख़राब नहीं कर सकते। एक ज़िलाधिकारी, वह भी गैर-राजस्थानी? लोग क्या कहेंगे?"

​अभिमान ने देखा कि उसका परिवार, जिसे वह अपनी ताकत मानता था, अब उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन रहा था। उनका विरोध सच्चा था, और इसने उसके घावों को फिर से कुरेद दिया था। उसके दिमाग में अन्वेषा का अड़ियल चेहरा घूम गया—उसने इस शादी को अपने अभिमान और सत्ता के लिए स्वीकार किया था, अब वह इसे अपने परिवार के डर से कैसे छोड़ सकता था?

​अभिमान का अंतिम और कठोर फ़रमान

​अभिमान का धैर्य जवाब दे चुका था। उसे अब एक राजा की तरह बर्ताव करना था, एक पुत्र की तरह नहीं।

​वह ज़ोर से मेज़ पर हाथ मारता है। आवाज़ इतनी तेज़ थी कि हॉल की दीवारों में गूँज उठी। मेज़ पर रखे काँच के गिलास काँप उठे।


​अभिमान (आवाज़ पूरे हॉल में गूँजती है, स्थिर, पर बेहद ख़तरनाक): "बस! यह आख़िरी बार है जब मेरे फ़ैसले पर किसी ने सवाल उठाया है! मैं यहाँ सलाह लेने नहीं, हुक़ूम सुनाने आया हूँ!"

​वह सीधे अपनी दादी सा को देखता है। उसकी आँखें लाल थीं, पर यह ग़ुस्सा नहीं, बल्कि जुनून था।


​अभिमान: "दादी सा, अन्वेषा मेरी पसंद है। हाँ, वह एक अफ़सर है, पर मैं आपको बता दूँ—वह सबसे ईमानदार है। उसकी यही ईमानदारी मेरे नए राजनीतिक गठबंधन के लिए शुभ है। मैं इस शादी को कल कर रहा हूँ। मेरा फ़ैसला पत्थर की लकीर है।"

​उसकी आवाज़ काँपी नहीं, बल्कि वह इस्पात की तरह मज़बूत थी।

​अभिमान (पूरे परिवार को घूरता है): "जिसे भी इस रिश्ते से एतराज़ है, वह अभी इसी वक़्त हवेली छोड़कर जा सकता है! लेकिन याद रहे, जो यहाँ से गया, उसके लिए हवेली के दरवाज़े हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। मैं साफ़ कर दूँ—इस शादी में कोई नाटक, कोई राजनीति नहीं होगी।"

​वह सूरज मल की तरफ़ मुड़ा, उसकी नज़रों में एक भयानक चेतावनी थी।


​अभिमान (सूरज मल को चेतावनी देता है, धीरे, पर ज़हरीले अंदाज़ में): "और चाचा जी, अगर मुझे पता चला कि आपने इस शादी को रोकने की ज़रा भी कोशिश की, या अन्वेषा के ख़िलाफ़ कोई साज़िश की... तो मैं आपको राजनीति और बिज़नेस, दोनों से ख़त्म कर दूँगा। मैं आपको ऐसी जगह पर ले आऊँगा जहाँ से आप कभी खड़े नहीं हो पाएंगे।"

​वह अपने हाथों को मेज़ पर दबाता है।


अभिमान (अंतिम हुक़्म): "यह मेरी हुक़ूमत है, और मेरी हुक़ूमत में सिर्फ़ मेरा फ़ैसला चलता है। मैं इस खानदान का मुखिया हूँ। और मुखिया के फ़ैसले पर सवाल नहीं किया जाता, सिर्फ़ पालन किया जाता है।"

​अभिमान के रौब और उसकी ताक़त के सामने, पूरा परिवार मजबूर हो गया। वे जानते थे कि अभिमान जब जुनूनी हो जाता है, तो वह किसी की नहीं सुनता—वह अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

​दादी सा, न चाहते हुए भी, सिर झुका लेती हैं। उनका चेहरा पीला पड़ चुका था। उन्होंने देखा कि उनका पोता, जिसे उन्होंने राज करने के लिए तैयार किया था, अब उन्हीं को कुचल रहा था।

​अभिमान (माहौल को हल्का करते हुए, पर आवाज़ में अब भी आदेश था): "कल सुबह, अन्वेषा के माता-पिता आ रहे हैं। इस शादी में ओडिया संस्कृति का भी उतना ही सम्मान होगा, जितना राजस्थानी का। कोई उन्हें बाहरी महसूस नहीं कराएगा। हर कोई खुशी-खुशी इस शादी में शामिल होगा। अब आप लोग जा सकते हैं!"


​पूरा परिवार, अपमान और गहरे विरोध के साथ, हॉल से बाहर निकलता है। उनकी चाल में निराशा थी, जैसे वे एक हारे हुए युद्ध से लौट रहे हों।

​सूरज मल सबसे आख़िर में निकला। उसके होंठ एक पतली रेखा में सिकुड़ गए थे। वह गुस्से से काँपते हुए, अभिमान को देखता है।

​सूरज मल (मन में, धीमी फुसफुसाहट): "एक ओडिया अफ़सर? तूने मुझे जो नीचा दिखाया है, अभिमान... तूने जो यह बाहरी कमज़ोरी घर में लाई है... मैं तेरी इसी कमज़ोरी को तेरी मौत बनाऊंगा। तूने हवेली पर फ़ैसला थोपा है, अब देख मैं तेरी ज़िंदगी पर क्या थोपता हूँ।"

​अभिमान अकेला हॉल में खड़ा था। उसने धीरे से अपने बंदगले के गले को ढीला किया। उसके माथे पर पसीने की बारीक बूँदें थीं—सत्ता को बनाए रखने की एक क़ीमत होती है। उसने परिवार को दबाव से तो राजी कर लिया, पर वह जानता था कि यह सिर्फ़ एक शुरुआत है। असली जंग तो अब शुरू होगी—एक तरफ़ उसकी अन्वेषा (जिसका विरोध अभी आना बाक़ी था) और दूसरी तरफ़ उसका परिवार। और इन सबके बीच, उसका अभिमान।

​वह जानता था कि कल का दिन आसान नहीं होगा।


क्रमशः 

Thank you 😊 🌸❤️‍🔥

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​मेरी की कलम से... ✍️✨

​"अक्सर कहानियों में नायक अपनी नायिका के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाता है, लेकिन यहाँ... यहाँ नायक ने अपनी नायिका को ही 'दुनिया' से लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है।

"अभिमान ने हवेली पर तो अपनी हुक़ूमत चला दी, पर क्या वो अन्वेषा के बागी दिल पर राज कर पाएगा? 🏚️🔥


​अभिमान की 'हुकूमत' ने हवेली के दरवाज़े तो खोल दिए हैं, पर क्या वो अन्वेषा की रूह तक पहुँच पाएगा? एक तरफ राजपूती आन है, तो दूसरी तरफ ओडिशा की गहरी आस्था। यह शादी सिर्फ दो इंसानों का मिलन नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं का एक ऐसा एक्सीडेंट है जहाँ से कोई भी सलामत नहीं निकलेगा।


​एक सवाल आप सब से: क्या किसी को 'जीत' लेना ही प्यार है? या अपनी 'जीत' के लिए किसी को पूरी तरह तोड़ देना ही जुनून है?


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​अभिमान और अन्वेषा के इस जहरीले और जुनूनी सफ़र में मेरे साथ बने रहें। आपकी Rating और Comment ही इस कहानी की जान हैं। ♥️







About novel ♥️ 

ABHIMAN RATHOUR ×ANWESHA PATTNAIK 

ARRANGE MARRIAGE × FORCED 

राजस्थान ×ओडिशा 

MLA × GOVT OFFICER 

मेरी कहानी अलग ही दुनिया में ले जाएगी आपको l 

इस journey में आप different cultures , नफ़रत से जुनून तक का सफ़र तय करेंगें l और suspense, romance ♥️, family drama ka full package 📦 हे ये कहानी SAFAR-E-DIL : जब नफ़रत जुनून में बदल जाए ...