Tere Mere Darmiyaan - 60 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 60

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तेरे मेरे दरमियान - 60

आदित्य :- कृतिका , छोड़ो , चुप हो जाओ ।

कृतिका :- क्या चुप हो जाओ । ये अपने आपको समझती क्या है , ये जो बोलेगी वही सही और हम सब गलत । ऑफिसर आप उस विकास को अभी अरेस्ट किजिये और उससे पूछताछ किजिये जब तक वो सच ना बोल दे उसे इतना मारीए के वो सच बोल दे ।

इंस्पेक्टर :- हम उसे जल्द ही पुछताछ करेगें । अच्छा अब मैं चलता हूँ ।

इंस्पेक्टर इतना बोलकर वहां से चला जाता है । जानवी अपने कमरे मे चली जाती है और मन ही मन सौचती है --

जानवी :- ये कैसे हो सकता है , भला विकास मुझे कैसे किडनैप करा सकता है , हम दोनो तो एक दुसरे से प्यार करते है । नही नही विकास ऐसा नही कर सकता । ये मैं क्या सौच रही हूँ । कही इसमे भी आदित्य का हाथ तो नही । नही नही आदित्य तो मेरा हर वक्त मदद कर रहा है , जानवी ये तु क्या सौच रही है । तु सौच तेरी किडनेपिंग से विकास को क्या फायदा होगा , हम तो शादी करने वाले है । पर अगर विकास को पुलिस ने उठा लिया या मैं विकास को छोड़ देती हूँ तो इसमे आदित्य को फायदा होगा । कही आदित्य ये सब जानबूझकर तो नही कर रहा है । वरना कल आदित्य को फिर से कैसे पता चला के मैं कहीं पर हूँ । हां ये आदित्य का ही काम होगा । और कितना निचे गिरेगा ये आदित्य । पर तुम कितना भी कोशिश करलो आदित्य , मुझे और विकास को कभी अलग नही कर पाओगे । इस बार तुमने अच्छी चाल चली थी , पर अब चाल मैं चलुगीं और उसमे तुम सब फसोगे ।

जानवी पुलिस स्टेशन चली जाती है , जानवी को दैखकर इंस्पेक्टर कहता है --.
इंस्पेक्टर: - अरे मेडम आप यहां , आईए बेठिए ना ।

जाववी कुर्सी पर बैठ जाती है ऑफिसर फिर कहता है --

इंस्पेक्टर :- कहीए मेडम कैसे आना हूआ ।

जानवी :- आप अभी मेरे घर गए थे । और आपने कहा के मेरे किडनेपिंग के पिछे विकास का हाथ है ।

इंस्पेक्टर: - मेडम अभी कुछ कह नही सकता । पर हमे शक है के उसमे विकास जी का हाथ हो सकता है । क्योकी आपके किडनेपिंग के पहले विकास जी और काली का काफी बार बात हूआ है । ये दैखिए कॉल डिटेल ।

जानवी कॉल डिटेल दैखती है और कहती है --

जानवी :- क्या ये रियल है ?

इंस्पेकटर : - ये क्या बोल रही हो मेडम । 

जानवी :- मैं अच्छी तरह से जानती हूँ के सब विकास को फसाने का एक चाल है , और आप ये सब उस आदित्य के कहने पर कर रहे हो ।

इंस्पेक्टर नाराज होकर कहता है --

इंस्पेक्टर :- आप आदित्य सर की पत्नी हो इसिलिए मैं आपकी बहोत सम्मान करता हूँ जानवी मेडम ।

जानवी हैरान होकर कहती है --

जानवी :- आदित्य सर की पत्नी हूँ इसिलिए तुम मेरा सम्मान करते हो । आखिर वो है कौन जो उसकी वेल्यु मुझसे भी ज्यादा है । 

इंस्पेकटर :- वो कौन है अगर आपको नही पता तो इसका मतलब उनके नजर मे आपकी कोई वेल्यु नही है ।

जानवी :- मैं आप लोगो की चाल को अच्छे से समझती हूँ । आप लोग विकास को इसिलिए झुठे केस मे फसा रहे हो ताकी मैं आदित्य के साथ हमेशा रहूँ । पर एक बात याद रखना ऑफिसर और आदित्य से भी कह देना के जानवी को हराना इतना आसान नही । विकास अकोला नही है उसके साथ जानवी खड़ी है । और जानवी के रहते विकास को कोई हाथ तक लगा नही सकता । जानवी कभी किसी के आगे नही झूकी है और ना कभी झुकेकी ।

इतना बोलकर जानवी वहां से निकल जाती है । तब इंस्पेकटर कहता है ---

इंस्पेक्टर : - ये तो वक्त ही बताएगा मेडम के कौन क्या कर सकता है , पर एक दिन ऐसा आएगा जब आपके सामने सच्चाई होगी पर आपके पास तब पछताने के अलावा और कोई रास्ता नही बचेगा ।


(पुलिस स्टेशन से निकलने के बाद)

रात हो चुकी थी। ठंडी हवा के झोंके जानवी के बालों को उड़ा रहे थे,
पर उसके दिल के भीतर एक तूफान चल रहा था।

> जानवी (मन में):

“कहीं ये सच तो नहीं... क्या सच में विकास ने मुझे किडनैप करवाया था?
नहीं! वो ऐसा नहीं कर सकता... लेकिन अगर इंस्पेक्टर झूठ बोल रहा है तो वो सबूत कहाँ से लाया ?”




जानवी गाड़ी में बैठ जाती है, मगर उसके हाथ काँप रहे थे।
वो मोबाइल निकालकर विकास का नंबर डायल करती है —
लेकिन सामने से फोन “स्विच ऑफ” आता है।

जानवी कहती है --

जानवी: - ये विकास ने फोन स्विच ऑफ क्यों रखा है ।
---

जानवी गाड़ी स्टार्ट करती है और वहां से घर के लिए निकल जाती है ।


(दूसरी तरफ आदित्य घर के टैरेस पर बैठा है , आदित्य का चेहरा बता रहा था के वो बहोत परेशान था , आदित्य के हाथ मे चोंट लगी थी और हाथ में पट्टी बंधी है)

रमेश नीचे से आवाज़ लगाता है —

> रमेश :- “भाई, आराम कर ले, बहुत खून निकला था तेरा , और तु यहां पर बैठा है ”


आदित्य (मुस्कराते हुए) : - “आदत है रमेश... ज़ख्म मेरा हो या किसी और का, दर्द मुझे ही होता है , अब क्या ही फर्क पड़ता है ।"



आदित्य आसमान की ओर देखता है —


फ्लैशबैक में वही पल चलता है जब जानवी ने उस पर झूठा इल्जाम लगाया था।

आदित्य के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आती है, फिर आँखों में दर्द।


जानवी अपने लैपटॉप पर पुराने कॉल रिकॉर्ड्स देखने लगती है (विकास के साथ की चैट)।

जानवी अपनी और विकास की पुरानी प्यार भरी बातो की चेट पड़ कही थी ।

तभी किसीके आने की आहट आती है वो डर जाती है।

> जानवी (धीरे से): “ इस वक्त कौन आ सकता है ।



तभी पीछे से आदित्य की आवाज़ आती है —

> आदित्य :- “किसे देख रही हो?”



जानवी घबरा जाती है, स्क्रीन बंद कर देती है।

> जानवी : - “कुछ नहीं... ऑफिस का काम। पर तुम मेरे कमरे मे कैसे । तुमसे कहा था ना के मेरे परमिशन के बगैर तुम यहां नही आ सकते ।

आदित्य :- कल जो हूआ , मुझे लगा उसके लिए तुम कुछ परेशान हो । इसिलिए मैं यहां पर आया ।

जानवी: - ओ हो । तो तुम्हें मेरी फिक्र हो रही है । अरे वाह तो अब क्या । मैं रोने लग जाऊ , और तुम्हारे बाहो मे आ जाउ , यही चाहते हो ना तुम । 

आदित्य: - नही जानवी , ऐसा नही है ।

जानवी :- तो फिर क्यों ये सब कर रहे हो , क्यों तुम मुझे विकास से अलग करना चाहते हो , मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है , अगर उस दिन तुम चुप रहते तो हम दोनो का शादी हो गया होता । पर नही , पता नही तुम किस जन्म का बदला ले रहे हो मुझसे ।


आदित्य जानवी के नजदिक जाकर कहने की कोशिश करता है पर जानवी दो कदम पिछे हट जाती है और कहती है --.

जानवी :- बस , मेरे करिब आने की कोशिश मत करना , मुझे पता है शुरु से ही तुम्हारी नजर मुझपर है । पर एक बात हमेशा याद रखना मिस्टर आदित्य, अगर तुम दुनिया के आखरी लड़के भी होगें ना तो पर भी मैं तुमसे कभी प्यार नही करुगी । मै मरना पंसद करुगी पर कभी तुमसे प्यार नही करुगीं ।

आदित्य :- ठिक है मत करो मुझसे प्यार , पर मेरा भरोसा करो , मैने जो कुछ भी किया वो तुम्हारे अच्छे के लिए किया ।

जानवी गुस्सा होकर कहती है --

जानवी :- विकास से अलग करके तुमने मेरा कौन सा भलाई किया आदित्य, तुम्हें पता ही नही है के प्यार क्या होता है शायद इसिलिए मोनिका तुम्हें छोड़कर चली गई और मुझसे भी कई बार कहा के तुमसे दुर रहूँ ।

जानवी की बात पर आदित्य चिल्लाकर कहता है --

आदित्य :- ( चिल्लाकर ) जानवी ....। मेरे प्यार को गाली मत दो । गलती मेरी ही है जो मेने तुम्हारे बारे मे सोचा । गलती मेरी ही है जो बार बार तुम्हारी फिक्र करता हूँ । पर अब नही , तुम्हें जो करना है जहां जाना है तुम दा सकती है , मैं कभी तुम्हारे पास नही आउगां जानवी ।

जानवी :- इतने सारे फसाद खड़ा करके कहते हो चली जाओ , अब जब तक तुमसे डिवोर्स नही हो जाता मैं विकास से शादी भी नही कर सकती । सब तुम्हारा वजह से हो रहा है ये । जबसे तुमसे शादी हूआ है तभी से ये सब हो रहा है , मेरा किडनेप होना , मेरे पिछे गूडें आना , और अब ये क्लब मे भी । ये सब क्यों और कौन करा रहा है मैं अच्छी तरह से समझती हूँ । इससे पहले तो ये सब मेरे साथ कभी नही हुआ ।

आदित्य: - तुम्हें जो समझना है तुम समझो , मुझे उससे कोई लेना देना नही है , बस तुमसे एक रिक्वेस्ट है , मुझे मेरे विकास से अलग मत करो । मैं उसके बिना नही रह सकती । ये पुलिस का खेल खेलना बंद करो । विकास को छोड़ दो और हमे जिने दो । अगर तुमने मोनिका से जरा सा भी प्यार किया है तो तुम्हें इस प्यार ती कसम , हमे एक नही कर सकते तो हमे अलग मत करो प्लिज आदित्य । मैं तुम्हारी कभी नही बन सकती , ये सोचना बंद कर दो आदित्य । I love vikash .


To be continue....453