Teri meri Kahaani - 3 in Hindi Love Stories by smita books and stories PDF | तेरी मेरी कहानी - 3

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तेरी मेरी कहानी - 3

उस दिन के बाद से सिया कई दिनों तक ऑफिस नहीं आई। अर्शित रोज़ अपने केबिन में बैठकर सिया की डेस्क की ओर देखता रहता और उसका इंतज़ार करता। फिर एक दिन उसने अपने पी.ए. को बुलाया और पूछा,
“ये मिस शर्मा ऑफिस क्यों नहीं आ रही हैं?”
पी.ए. ने जवाब दिया,
“सर, उन्होंने आवेदन पत्र दिया है और कारण व्यक्तिगत बताया है।”
यह सुनकर अर्शित ने सख़्त आवाज़ में कहा,
“उनसे कहो कि जल्द से जल्द ऑफिस जॉइन करें। उनका काम पेंडिंग पड़ा है। अगर वह जल्दी नहीं आईं, तो हम उनकी जगह किसी और इंटर्न को काम पर रख लेंगे।
पी.ए. के जाते ही अर्शित फिर से कुर्सी पर टिक गया। उसकी नज़र अनजाने में सिया की खाली पड़ी डेस्क पर चली गई। न जाने क्यों, आज वह खाली कुर्सी उसे और ज़्यादा चुभ रही थी। उसने फ़ाइल खोलने की कोशिश की, लेकिन ध्यान बार-बार भटक रहा था।
उधर सिया अपने कमरे में बैठी थी। हाथ में फोन था, लेकिन स्क्रीन बार-बार लॉक हो जा रही थी। ऑफिस से आए मैसेज उसने पढ़ तो लिए थे, पर जवाब देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। जो कुछ हुआ था, उसके बाद वापस जाना उसके लिए आसान नहीं था।
अगले दिन सुबह ऑफिस में हलचल थी। अचानक लिफ्ट से सिया बाहर निकली। चेहरा थका हुआ, लेकिन उसका मन ऑफिस के तमाशे से भारी था वह सीधे अपनी डेस्क की ओर बढ़ी। हर कोई बस उसको देखे जा रहा था लेकिन सिया किसी चीज पर ध्यान नहीं दे रही थी। जैसे ही अर्शित की नज़र उस पर पड़ी, वह कुछ पल के लिए ठिठक गया।
सिया ने फ़ाइलें उठाईं और बिना कुछ कहे काम में लग गई। थोड़ी देर बाद अर्शित ने इंटरकॉम उठाया,
“सिया, मेरे केबिन में आओ।”
सिया ने गहरी सांस ली और केबिन की ओर बढ़ गई। दरवाजा बंद हुआ और फिर दोनों के बीच वो बात हुई जो शायद बहुत पहले हो जानी चाहिए थी।........
"मिस शर्मा आप इतने दिनों तक ऑफिस से गायब क्यों थी?" 
  अर्शित ने घमंड से पूछा, ........
सिया घबराती हुई बोली —
“स… सर, मेरी तबियत ठीक नहीं थी…”
“तबियत ठीक नहीं थी या फिर कोई और कारण था, मिस शर्मा?” — अर्शित ने शक भरी निगाहों से सिया से पूछा।
सिया पहले थोड़ी हिचकिचाई, फिर बिना किसी भाव के बोली —
“नहीं सर, कोई बात नहीं है। मेरी तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए मैंने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ली थी।"
अर्शित ने पूछा —
“और आपकी माँ? ऑफिस में आकर इतना बड़ा तमाशा करने का क्या कारण था,? आप उनकी बेटी है फिर भी आपके चरित्र को गलत कैसे बता दिया उन्होंने?” मिस शर्मा मेरे ऑफिस में पहली बार ऐसा तमाशा हुआ है।"
सिया कुछ देर सोचती रही, फिर रोते हुए बोली —
"सर मै माफी चाहती हूं उस दिन के लिए लेकिन वो औरत मेरी माँ नहीं है।”
और फिर वह वहाँ से चली गई।
“मिस सिया…” — अर्शित ने रोकने की कोशिश की, लेकिन सिया रुकी नहीं।
अर्शित को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर सिया ने ऐसा क्यों कहा कि “वो मेरी माँ नहीं है।” क्या बात है…
ऑफिस का काम खत्म करके सभी कर्मचारी अपने-अपने घर जा रहे थे, लेकिन सिया कुछ देर तक ऑफिस में रुकी रही और अपना काम कर रही थी। तभी अर्शित वहाँ आया और उसे कॉफ़ी देने के बहाने उससे बात करने की कोशिश की।
“मिस सिया, इतना काम कर रही हैं, थोड़ी ब्रेक ले सकती हैं आप?” — अर्शित मुस्कुराते हुए बोला।
“सर, मैं कॉफ़ी नहीं पीती,” यह बोलकर सिया वहाँ से वापस चली गई।
अर्शित भी उसके पीछे-पीछे गया, यह सोचकर कि शायद उसे सिया के घर से कुछ पता चले। वह उसके पीछे-पीछे उसके घर तक गया। जैसे ही सिया घर के अंदर गई, उसकी सौतेली माँ ने उसे जोरदार थप्पड़ मारा।
“बेशर्म! इतनी रात को आ रही है, कहाँ थी तू इतनी देर तक?” — सिया की माँ ने गुस्से में पूछा।
“माँ, मैं ऑफिस में थी। काम ज्यादा था, इसलिए घर आने में देर हो गई।”
 — सिया रोते हुए बोली।
“तू ऑफिस में थी या कहीं और? सच-सच बता, कहाँ थी?” — उसकी माँ गुस्से में पूछती रही।
बाहर खड़ा अर्शित सब कुछ सुन रहा था। वह कुछ देर के लिए सोच में पड़ गया कि कोई माँ अपनी बेटी के बारे में ऐसे कैसे बोल सकती है। और बिना देर किए वह तुरंत सिया के घर के अंदर चला गया। 
"मिस शर्मा ऑफिस में ही थी" — अर्शित ने सिया की मां को गुस्से में जवाब दिया
"स.. सर आप यहां कैसे?" — सिया ने डर से पूछा 
तभी सिया की मां ने ताने मारे —"लो एक तो इतनी देर रात को घर आ रही है , ऊपर से अपने साथ लड़कों को लेकर घूम रही है " 
अर्शित ने घमंड से कहा— "जी नही आप गलत समझ रही है , ऑफिस में काम ज्यादा था क्योंकि मिस शर्मा काफी दिनों से छुट्टी पर थी इसलिए मैंने ही उनसे कहा था काम खत्म करके घर जाने को"....... और यहां मुझे मिस शर्मा लेकर नहीं आई है मैं खुद यहां आया हूं क्योंकि रात बहुत हो गई थी और मिस शर्मा अकेली घर आ रही थी......
तभी सिया की मां तिलमिलाती हुई बोली— " हो गया न काम खत्म, छोड़ दिए घर अब निकलो यहां से और दुबारा कभी यहां नजर मत आना ".....
ये बोलकर सिया की मां ने अर्शित का हाथ पकड़ा और उसे घर से बाहर निकाल कर दरवाजा बंद कर दिया.....
सिया सब कुछ देख कर भी कुछ नहीं बोल पा रही थी.........

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