अध्याय 26: संकल्प की वापसी
पहाड़ियों की उन ऊँचाइयों पर जहाँ हवा भी जम जाती है, वहां सिर्फ एक चीज़ जीवित थी—कैसियन का दर्द। उसकी चीखें, जो कुछ देर पहले तक चट्टानों से टकराकर वापस आ रही थीं, अब एक भारी सन्नाटे में बदल चुकी थीं। इज़ोल्ड के पीले पड़ चुके चेहरे पर अपनी उंगलियाँ फेरते हुए कैसियन को लगा जैसे उसका अपना जीवन रुक गया हो। लेकिन तभी उसके भीतर कुछ टूटा... या शायद कुछ नया जुड़ा।
"एक प्रेमी हार सकता है, इज़ोल्ड... लेकिन एक सम्राट नहीं," उसने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अब विलाप नहीं, बल्कि एक ठंडी और घातक दृढ़ता थी। उसने अपने आँसू पोंछे, जो उसकी गालों पर बर्फ की तरह जमने लगे थे। उसकी आँखों में छाई धुंध छँट गई और वहां एक साफ़, कड़वा लक्ष्य उभर आया। मौत को इज़ोल्ड के पास से गुजरने के लिए पहले कैसियन के संकल्प को कुचलना होगा।
उसने खुद को झकझोरा। 'यह किला मौत का घर है, मुझे इसे जीवन की ओर ले जाना होगा,' यह विचार उसके दिमाग में किसी बिजली की तरह कौंधा।
शक्ति का संचार
कैसियन ने अपनी आँखें बंद कीं और अपने शरीर के भीतर उस जादुई ऊर्जा को महसूस करने की कोशिश की जो इज़ोल्ड ने उसे सौंपी थी। वह शक्ति उसके सीने में एक दबी हुई राख की तरह थी। उसने उसे जगाया। जैसे-जैसे ऊर्जा उसकी नसों में दौड़ने लगी, उसके घावों का दर्द एक मंद खुजली में बदल गया। उसने इज़ोल्ड को बहुत सावधानी से अपनी गोद में उठाया—इतनी कोमलता से जैसे वह कांच की बनी कोई प्राचीन प्रतिमा हो, जिसे एक छोटा सा झटका भी चकनाचूर कर सकता था।
उसने अपने फटे हुए लबादे को उतारा और इज़ोल्ड के ठंडे शरीर को उसमें लपेट दिया। "धैर्य रखो, इज़ोल्ड। मैं तुम्हें उस अंधेरे में वापस नहीं जाने दूँगा जहाँ से तुम मुझे लाई हो," उसने उसके माथे को चूमा। उसकी ठंडी त्वचा का स्पर्श कैसियन के दिल को चीर गया, लेकिन उसने अपने कदम नहीं डगमगाने दिए।
घाटी की परीक्षा
उसे याद आया... पूर्वजों की उन धूल भरी किताबों में एक 'प्राचीन औषधीय झरने' (Ancient Healing Spring) का ज़िक्र था। वह झरना, जिसके बारे में कहा जाता था कि वह धरती के हृदय से निकलता है और जिसमें स्वयं प्रकृति का जादुई रक्त बहता है। वह यहाँ से बहुत दूर, बर्फीली घाटी के सबसे निचले हिस्से में छिपा था।
महल तक पहुँचना नामुमकिन था, और इज़ोल्ड के पास वक्त की भारी कमी थी। हर बीतता सेकंड उसके जीवन की लौ को कम कर रहा था। कैसियन ने एक गहरी सांस ली और ढलान की ओर दौड़ना शुरू किया।
पहाड़ों की नुकीली चट्टानें और फिसलन भरी बर्फ उसके रास्ते का कांटा बन रही थीं। हवा के थपेड़े किसी कोड़े की तरह उसके ज़ख्मों पर पड़ रहे थे, लेकिन वह नहीं रुका। उसके पैरों में अब उसकी अपनी ताकत नहीं, बल्कि वह जादुई ऊर्जा थी जो उसे गिरने नहीं दे रही थी। वह ऊँचाइयों से ऐसे नीचे उतर रहा था जैसे कोई शिकारी बाज अपने शिकार की रक्षा के लिए झपट रहा हो।
प्यास और जादुई स्पर्श
दौड़ते हुए उसने गौर किया कि इज़ोल्ड के होंठ सूखकर सफेद पड़ गए हैं। शरीर में जान फूँकने के लिए उसे पानी चाहिए था। कैसियन के पास रुकने का समय नहीं था। उसने दौड़ते हुए ही अपने खाली हाथ को हवा में लहराया। उसने हवा की नमी को अपनी जादुई इच्छाशक्ति से बांधा और उसे पानी की बूंदों में बदल दिया।
उसने बड़ी कोमलता से उन बूंदों को इज़ोल्ड के होंठों पर टपकाया। उन बूंदों के स्पर्श से इज़ोल्ड के गले में एक हल्की सी हरकत हुई। यह बहुत छोटी सी उम्मीद थी, लेकिन कैसियन के लिए यह दुनिया जीतने जैसा था।
"बस थोड़ा और, मेरी जान... हम पहुँचने ही वाले हैं," वह खुद से और उससे वादा करते हुए अंधेरी घाटी की गहराइयों में उतर गया, जहाँ उस प्राचीन झरने की चमक उसका इंतज़ार कर रही थी।
अध्याय 27 का विस्तारित स्वरूप (Sample Expansion):
कैसियन के हर बढ़ते कदम के साथ बर्फ पर खून की एक लकीर खिंचती जा रही थी। यह खून केवल उसके ज़ख्मों का नहीं था, बल्कि उसके पुराने 'अहंकारी सम्राट' के अंत का प्रतीक था। उसने इज़ोल्ड को अपने सीने से इस तरह लगा रखा था मानो वह उसके शरीर की आखिरी धड़कन हो।
कैसियन का संवाद और पश्चाताप:
उसने इज़ोल्ड के कान के पास झुककर बहुत धीमी आवाज़ में कहा, "इज़ोल्ड, क्या तुम्हें याद है? जब हम पहली बार मिले थे, मैंने तुमसे कहा था कि सम्राट कभी झुकते नहीं। आज देखो... तुम्हारा यह सम्राट न सिर्फ झुक गया है, बल्कि वह तुम्हारे लिए अपनी रूह तक का सौदा करने को तैयार है। मेरी नादानी ने तुम्हें इस हाल में पहुँचाया, लेकिन मेरा संकल्प तुम्हें वापस लाएगा।"
प्रकृति की बाधा (विस्तार):
अचानक, घाटी की हवाओं ने अपना रुख बदला। वे अब सिर्फ ठंडी नहीं थीं, वे किसी पैने खंजर की तरह कैसियन की खाल को चीर रही थीं। पहाड़ों से गिरते पत्थर उसका रास्ता रोक रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो यह पहाड़ इज़ोल्ड की बलि मांग रहे हों।
कैसियन चिल्लाया, उसकी आवाज़ उन वादियों में गूँज उठी— "आज रास्ता छोड़ दो! आज एक प्रेमी अपनी दुनिया को बचाने निकला है। अगर आज मौत भी सामने आई, तो उसे खाली हाथ वापस जाना होगा!"
बलिदान का क्षण:
उसने महसूस किया कि इज़ोल्ड का शरीर धीरे-धीरे पत्थर की तरह ठंडा हो रहा है। कैसियन ने अपनी आँखें मूँद लीं। उसने अपनी जादुई ऊर्जा (Mana) को, जो उसके अपने घावों को भर सकती थी, मोड़कर इज़ोल्ड की ओर प्रवाहित करना शुरू कर दिया। उसके अपने हाथ नीले पड़ने लगे, उसके घाव फिर से रिसने लगे, लेकिन इज़ोल्ड के गालों पर एक हल्की सी गुलाबी रंगत वापस आने लगी।
अध्याय 27: संकल्प की परीक्षा और काँटों भरी राहकैसियन ने इज़ोल्ड को अपनी बाहों में और कस लिया। उसका हर कदम अब एक युद्ध था। बर्फीली पहाड़ियों से नीचे उतरना किसी मौत के कुएं में झांकने जैसा था, जहाँ एक भी गलत कदम उन दोनों को गहरी खाइयों में धकेल सकता था।1. प्रकृति का पहला प्रहार: बर्फीला अंधड़जैसे ही वह घाटी के मध्य पहुँचा, अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान से गिरती बर्फ अब रुई के फाहों जैसी नहीं, बल्कि कांच के टुकड़ों की तरह चुभ रही थी। हवा की गति इतनी तेज़ थी कि कैसियन का भारी-भरकम शरीर भी डगमगाने लगा।उसकी आँखों के सामने सब कुछ धुंधला हो गया। "तुम मुझे नहीं रोक सकते!" वह चीखा। उसने अपनी जादुई ऊर्जा का उपयोग करके अपने चारों ओर एक छोटी सी 'अदृश्य ढाल' बनाने की कोशिश की, लेकिन उसकी शक्ति इज़ोल्ड को गर्म रखने में खर्च हो रही थी। उसने ढाल नहीं बनाई, बल्कि अपना सिर झुका लिया ताकि बर्फ के थपेड़े इज़ोल्ड के चेहरे पर न लगें। उसके अपने कान और नाक जमने लगे थे, लेकिन उसकी पकड़ इज़ोल्ड पर कमज़ोर नहीं हुई।2. खून से सनी राह: शारीरिक टूटनरास्ते में नुकीली चट्टानों का एक सिलसिला शुरू हुआ। कैसियन के जूते पहले ही फट चुके थे। बर्फीली सतह के नीचे छिपे धारदार पत्थर उसके पैरों को चीर रहे थे। हर कदम के साथ बर्फ पर लाल रंग के धब्बे छूटते जा रहे थे।एक पल ऐसा आया जब उसका पैर फिसला और वह घुटनों के बल गिर पड़ा। दर्द की एक लहर उसके रीढ़ की हड्डी तक दौड़ गई। उसे लगा कि अब वह नहीं उठ पाएगा। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। लेकिन तभी उसने इज़ोल्ड के शांत चेहरे को देखा। उसकी बंद आँखें जैसे कैसियन से कह रही थीं— 'क्या तुम हार मान लोगे?'कैसियन ने अपने दाँत भींचे और अपने ज़ख्मी घुटनों के बल ही घिसटते हुए आगे बढ़ने लगा, जब तक कि उसे दोबारा खड़े होने का सहारा नहीं मिल गया।3. 'शापित छाया' का भ्रम (जादुई बाधा)घाटी के उस हिस्से में, जहाँ सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुँचती थी, वहां से 'शापित छायाएं' (Shadow Wraiths) उभरने लगीं। ये छायाएं उन योद्धाओं की थीं जो कभी इस पहाड़ पर लालच में आकर मरे थे। वे कैसियन के चारों ओर मंडराने लगीं, फुसफुसाते हुए:"इसे छोड़ दो, कैसियन... यह मर चुकी है। अपनी जान बचाओ। तुम एक सम्राट हो, एक लाश के पीछे अपनी सल्तनत क्यों गँवा रहे हो?"कैसियन के दिमाग में उन छायाओं का असर होने लगा। उसकी बाहें भारी होने लगीं। लेकिन तभी उसे याद आया कि इज़ोल्ड ने उसके लिए क्या कुछ नहीं सहा था। उसने अपनी जादुई आवाज़ में गर्जना की, "वह लाश नहीं, मेरी रूह है! और एक सम्राट अपनी रूह के बिना अधूरा है!" उसकी इस गर्जना से वे जादुई परछाइयां तितर-बितर हो गईं।4. प्यास और आखिरी उम्मीदघाटी के अंत तक पहुँचते-पहुँचते कैसियन का गला सूखकर काँटा हो गया था। उसे खुद पानी की सख्त ज़रूरत थी, लेकिन उसके पास जो भी जादुई नमी बची थी, उसने उसे इज़ोल्ड के होंठों को गीला करने में लगा दिया। उसका शरीर अब जवाब दे रहा था। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था, पर दूर कहीं... उसे उस 'प्राचीन झरने' की हल्की सी नीली चमक दिखाई दी।"बस थोड़ा और... इज़ोल्ड... हम पहुँच गए," वह लड़खड़ाते हुए कदमों से उस चमक की ओर बढ़ता रहा।
अध्याय 28: रक्षक का आगमन (विस्तृत दृश्य)कैसियन की चेतना जवाब दे रही थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी पकड़ इज़ोल्ड पर ढीली पड़ रही है, और यही उसका सबसे बड़ा डर था। सामने मौत का तांडव नाच रहा था—दुश्मन सैनिक, जिनकी आँखों में दया का नामोशान नहीं था, अपनी ठंडी तलवारें लिए उसकी ओर बढ़ रहे थे। कैसियन ने एक आखिरी बार इज़ोल्ड के चेहरे को देखा, अपनी आँखें मूँद लीं और अपने भीतर से वह पुकार निकाली जो शायद ब्रह्मांड के अंत तक सुनी जा सकती थी।1. जादुई तलवार का तांडव (The Sentinel's Blade)अचानक, वातावरण का तापमान गिर गया। हवा में एक ऐसी सनसनाहट हुई जैसे खुद समय रुक गया हो। आसमान की ओर से एक नीली रोशनी की लकीर नीचे आई। यह कोई बिजली नहीं थी, बल्कि एक प्राचीन तलवार थी जो शुद्ध प्रकाश से बनी लग रही थी।वह तलवार किसी अदृश्य योद्धा के इशारे पर नाचने लगी। दुश्मन सैनिकों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। वह तलवार एक 'अग्नि-चक्र' की तरह उनके बीच से गुजरी। किसी के गले को छूती, किसी के सीने को पार करती—न कोई खून की बूंद बर्फ पर गिरी, न कोई चीख हवा में गूँजी। वह मौत का एक पवित्र और खामोश नृत्य था। पल भर में, जो मौत का साया कैसियन को घेरे हुए था, वह बर्फ में दफन हो चुका था।2. सफेद अश्व और अलौकिक शांतिधुंध के पीछे से एक आकृति उभरने लगी। एक सफेद घोड़ा, जिसके खुरों से बर्फ नहीं उड़ रही थी, बल्कि रोशनी की छोटी-छोटी चिंगारियां निकल रही थीं। उस पर सवार था—एक नकाबपोश। उसका चोगा (Cloak) हवा में इस तरह लहरा रहा था जैसे वह खुद बादलों का हिस्सा हो।कैसियन, जो घुटनों के बल गिर चुका था, ने धुंधली आँखों से देखा कि वह अजनबी घोड़े से उतरा। उसकी हर हरकत में एक राजसी गरिमा थी। जब वह अजनबी इज़ोल्ड के पास पहुँचा, तो कैसियन ने आखिरी ताकत बटोरकर इज़ोल्ड को अपनी ओर खींचा। "नहीं... उसे नहीं..." उसकी आवाज़ हलक में ही फंस गई।3. वह रहस्यमयी आवाज़ और पहचान का संकटउस नकाबपोश ने इज़ोल्ड के ठंडे पड़ चुके माथे पर अपना हाथ रखा। उस स्पर्श से एक सुनहरी लहर इज़ोल्ड के शरीर में दौड़ गई। कैसियन ने महसूस किया कि उस अजनबी की शक्ति में कोई शत्रुता नहीं, बल्कि एक 'पुरातन ममता' और रूहानी सुकून है।जब उस अजनबी ने अपना नकाब थोड़ा हटाकर कैसियन की आँखों में झाँका, तो उसकी आवाज़ किसी मंदिर की घंटी की तरह गूँजी:"कैसियन... तुमने इतनी देर क्यों कर दी?"वह आवाज़... वह कोई अजनबी आवाज़ नहीं थी। वह आवाज़ कैसियन के बचपन की धुंधली यादों, उसके पूर्वजों की कहानियों और इज़ोल्ड के प्रति उसके शापित प्रेम के बीच कहीं छिपी हुई थी। उस आवाज़ में एक अधिकार था, एक शिकायत थी और एक गहरा दर्द भी।4. चेतना का अंत और समर्पणकैसियन का दिमाग उस आवाज़ को पहचानने की कोशिश कर रहा था। 'क्या यह वह है? क्या यह मुमकिन है?' लेकिन शरीर ने अब साथ छोड़ दिया था। जैसे ही उसे यकीन हुआ कि इज़ोल्ड अब उस सुरक्षित और शक्तिशाली घेरे में है, उसके हाथ इज़ोल्ड के लबादे से छूट गए।अंधेरे में डूबने से पहले उसने देखा कि वह नकाबपोश इज़ोल्ड को उठाकर अपने सफेद घोड़े पर रख रहा है। कैसियन के चेहरे पर एक अंतिम संतोष की लकीर आई और वह बर्फ की चादर पर निढाल होकर गिर पड़ा।
अध्याय 29: एक सुरक्षित पनाहगाह की ओर (विस्तृत ड्राफ्ट)कैसियन की चेतना किसी डूबते हुए सूरज की तरह थी—धुंधली, कमजोर और लुप्त होती हुई। लेकिन उस घने अंधेरे में भी उसे एक स्पर्श का अहसास था। उसे महसूस हुआ कि उसे और इज़ोल्ड को किसी ऊंचे और ताकतवर घोड़े पर बड़ी कोमलता से बिठाया गया है। वह रहस्यमयी घुड़सवार, जिसका वजूद ही किसी पहेली जैसा था, उसने घोड़े की लगाम थामी।जैसे ही घोड़े ने कदम बढ़ाए, पहाड़ों के बीच की बर्फीली दीवारें किसी जादुई दरवाज़े की तरह खुलने लगीं। वह कोई आम रास्ता नहीं था; वह सदियों पुराना एक 'मार्क' (Mark) था जिसे केवल वही देख सकता था जिसके पास प्राचीन रक्त की शक्ति हो।1. मौत और जीवन के बीच का संवादहवा में वह चमकती हुई जादुई तलवार अभी भी उनके चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाकर नाच रही थी, जैसे कोई वफादार रक्षक हो। कैसियन का सिर पीछे की ओर लुढ़कने लगा, तभी उस घुड़सवार ने अपनी लोहे जैसी मज़बूत हथेली उसकी पीठ पर रखी।"हिम्मत मत हारना, कैसियन," वह आवाज़ फिर से गूँजी, इस बार उसमें एक चेतावनी थी। "अगर तुम सो गए, तो इज़ोल्ड को जगाने वाली वह आखिरी ऊर्जा भी खत्म हो जाएगी जो तुम्हारी धड़कनों से जुड़ी है। तुम्हें उसके लिए होश में रहना होगा। एक सम्राट अपनी जंग के बीच में आँखें नहीं मूँदता।"कैसियन ने अपनी सूखी हुई जीभ को तालू से सटाया। उसका गला जैसे आग से जल रहा था। उसने बस इतना ही फुसफुसाया, "उसे... बचा... लो... मेरी जान ले लो... पर उसे..." उसके शब्द हवा में विलीन हो गए, लेकिन उस अजनबी की आँखों में एक अजीब सी चमक कौंधी।2. 'भूलभुलैया की घाटी' का जादुई प्रवेशअचानक, कानों को फाड़ देने वाली हवा का शोर थम गया। कुछ ही पलों में मंजर बदल गया। बर्फ का वह सफेद और बेरहम साम्राज्य पीछे छूट चुका था। उनके सामने एक ऐसी घाटी थी जो प्रकृति के नियमों को चुनौती दे रही थी। यहाँ बर्फ की जगह ऊँचे और विशाल देवदार के पेड़ थे, जिनकी पत्तियों से सुनहरी रोशनी छनकर आ रही थी। हवा में चमेली और किसी अज्ञात जंगली फूल की खुशबू थी जो फेफड़ों में जाते ही ज़ख्मों को सुकून दे रही थी।यह 'भूलभुलैया की घाटी' थी—एक ऐसी जगह जहाँ समय अपनी गति भूल जाता था। यहाँ के पेड़ जीवित थे और आगंतुकों के इरादों को भांप लेते थे।3. प्राचीन मठ और संतुलन की शक्तिघाटी के ठीक बीचों-बीच एक विशाल मठ खड़ा था। उसकी दीवारें काले पत्थरों और सफेद संगमरमर के अद्भुत मिलन से बनी थीं। यह 'साया-शक्ति' (Shadow Power) और 'प्रकाश-शक्ति' (Light Power) के संतुलन का केंद्र था। मठ की दीवारों पर उकेरे गए चिन्ह धीरे-धीरे चमक रहे थे, जैसे वे सांस ले रहे हों।जैसे ही घोड़ा मठ के भारी दरवाज़ों के पास पहुँचा, वहां पहले से ही कुछ नकाबपोश सेवक कतार में खड़े थे। उनके चेहरों पर कोई भाव नहीं था, लेकिन उनकी ऊर्जा बहुत शुद्ध थी।4. जीवन का जल (Waters of Life)घुड़सवार बिजली की फुर्ती से नीचे उतरा। उसने इज़ोल्ड को अपनी बाहों में ऐसे उठाया जैसे वह कोई नवजात शिशु हो। वह मठ के मुख्य द्वार की ओर बढ़ा और गरजती हुई आवाज़ में आदेश दिया:"इसे तुरंत 'जीवन के जल' (Waters of Life) के पास ले जाओ। इसकी आत्मा का धागा बहुत बारीक रह गया है।" फिर उसने मुड़कर ज़मीन पर गिरते हुए कैसियन की ओर देखा और सेवकों को इशारा किया, "और इस योद्धा को भी संभालो। इसके घावों को 'नील-कमल' के लेप से ठीक करो। इसका ज़िंदा रहना इज़ोल्ड की रूह की पूर्णता के लिए ज़रूरी है। अगर यह टूटा, तो वह कभी नहीं जाग पाएगी।"कैसियन ने धुंधली नज़रों से देखा कि इज़ोल्ड को उस जादुई मठ के भीतर ले जाया जा रहा है। एक आखिरी सुकून भरी सांस लेकर, उसने खुद को पूरी तरह अंधेरे के हवाले कर दिया।
अध्याय 30: प्रतिशोध की ज्वाला और गलतफहमी (विस्तार)मठ की वह अलौकिक शांति, जो सदियों से कायम थी, एक पल में चकनाचूर हो गई। इज़ोल्ड के फेफड़ों से निकली वह चीख केवल एक पुकार नहीं थी, वह एक घायल आत्मा का विलाप था जो ब्रह्मांड को चीर देने की ताकत रखता था।"कैसियन!!!"उसकी आँखें खुलीं, तो वे वैसी नहीं थीं जैसी पहले थीं। उनमें अब इज़ोल्ड की वह कोमलता नहीं थी, बल्कि एक गहरा, काला और अनंत शून्य था। उसकी चेतना अभी भी उसी बर्फीले किले की बुर्ज पर अटकी थी, जहाँ उसने कैसियन को गिरते देखा था। उसके दिमाग में बार-बार वही दृश्य 'रिप्ले' हो रहा था—कैसियन का लहूलुहान चेहरा और उसकी बंद होती आँखें।1. साया-शक्ति का अनियंत्रित विस्फोटजैसे ही इज़ोल्ड ने अपने आसपास उन सफेद दीवारों और अनजान नकाबपोशों को देखा, उसके भीतर का डर 'ज्वाला' बनकर फूट पड़ा। उसे लगा कि इवान के सैनिकों ने उसे कैद कर लिया है और यह मठ केवल एक सुंदर जेल है।"पीछे हटो!" वह गरजी। उसके हाथों से निकली काली परछाइयाँ मठ की दीवारों पर किसी विषैले सांप की तरह रेंगने लगीं। जब सेवक उसे शांत करने के लिए आगे बढ़े, तो इज़ोल्ड ने अपनी उंगलियों के एक इशारे से साया-शक्ति के कोड़े बनाए। हवा में 'तड़-तड़' की आवाज़ हुई और पास की कीमती कलाकृतियाँ और जादुई दीये मिट्टी में मिल गए।"तुमने उसे मार दिया! तुमने मेरे कैसियन को मुझसे छीन लिया!" उसकी आवाज़ में पागलपन की हद तक दर्द था। उसकी शक्ति के कारण मठ की खिड़कियों के कांच हज़ारों टुकड़ों में टूटकर बारिश की तरह गिरने लगे।2. मौत की गलियों में दौड़ती एक रूहवह नंगे पैर मठ के ठंडे संगमरमर के फर्श पर दौड़ी। उसकी फटी हुई पोशाक और उलझे हुए बाल उसके भीतर के तूफान की गवाही दे रहे थे। जो भी सेवक उसे रोकने की कोशिश करता, इज़ोल्ड की जादुई लहरें उन्हें तिनके की तरह हवा में उड़ा देतीं।"मुझे उसके पास जाना है! वह बर्फ में अकेला है... वह ठंडा पड़ गया है! उसे मेरी ज़रूरत है!" वह पागलों की तरह बड़बड़ा रही थी। उसका दुख इतना गहरा था कि उसे अपनी शारीरिक पीड़ा का अहसास भी नहीं हो रहा था। उसे बस वह बर्फीला किला दिख रहा था, जहाँ उसका प्यार आखिरी सांसें गिन रहा था।3. नकाबपोश रक्षक और सत्य का टकरावतभी, गलियारे के अंत में वही रहस्यमयी नकाबपोश घुड़सवार एक दीवार की तरह खड़ा हो गया। इज़ोल्ड रुकी नहीं। उसने अपनी पूरी जमा की हुई 'साया-ऊर्जा' को एक गोले में बदला और उस अजनबी की ओर उछाल दिया। "हट जाओ! वरना मैं इस पूरी घाटी को कब्रगाह बना दूँगी!"लेकिन वह अजनबी अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। उसने अपनी जादुई तलवार म्यान से निकाली और एक ही झटके में इज़ोल्ड के उस विशाल वार को हवा में ही सोख लिया। वातावरण में एक अजीब सी गूँज हुई और इज़ोल्ड की शक्ति फीकी पड़ गई।"इज़ोल्ड, शांत हो जाओ," घुड़सवार का स्वर शांत था, लेकिन उसमें एक ऐसी ताकत थी जिसने इज़ोल्ड के कदमों को रोक दिया। "तुम जिसके लिए पूरी दुनिया को राख करने पर तुली हो, वह मरा नहीं है। वह यहीं है, इसी छत के नीचे।"4. अविश्वास का ज़हरइज़ोल्ड की आँखों से अब लहू जैसे आँसू बहने लगे। उसने अपना सिर ज़ोर-ज़ोर से हिलाया। "झूठ! तुम सब झूठ बोल रहे हो! मैंने उसे अपनी बाहों में दम तोड़ते देखा है! यह सब एक छलावा है... तुम इवान के भेजे हुए जादूगर हो, जो मुझे भ्रम में डालना चाहते हो!"उसकी आवाज़ टूट गई और वह घुटनों के बल बैठ गई। उसकी 'गलतफहमी' इतनी गहरी थी कि सत्य उसके सामने खड़ा था, फिर भी वह उसे देख नहीं पा रही थी। उसका प्रेम उसे जितना शक्तिशाली बना रहा था, उसका शोक उसे उतना ही अंधा कर रहा था।
अध्याय 31: प्रतिशोध की ज्वाला बनाम सत्य की ढाल (विस्तृत ड्राफ्ट)मठ के गलियारों में हवा का दबाव इतना बढ़ गया था कि वहां सांस लेना दूभर था। इज़ोल्ड की आँखों में अब वह नीलापन नहीं था जो कैसियन को सुकून देता था; वहां सिर्फ दहकते हुए अंगारों जैसी लालिमा थी। उसे घुड़सवार के 'सत्य' में केवल 'षड्यंत्र' दिखाई दे रहा था।"तुम सब मिले हुए हो!" वह दहाड़ी, और उसकी आवाज़ पत्थर की दीवारों को चीरती हुई गूँजी। "तुमने उसे मुझसे छीना है! तुमने उसकी आखिरी पुकार को अनसुना किया और अब मुझे यहाँ कैद करके उसके साम्राज्य पर राज करना चाहते हो! हटो मेरे रास्ते से, वरना यह मठ आज तुम्हारी कब्र बनेगा!"1. शक्तियों का तांडव (The Shadow War)इज़ोल्ड ने अपनी हथेलियाँ मठ के ठंडे फर्श पर दे मारीं। एक पल के लिए सन्नाटा छा गया, और फिर फर्श की दरारों से काली परछाइयों के विशाल, डरावने हाथ निकलकर घुड़सवार की ओर लपके। ये हाथ किसी साधारण जादू के नहीं थे, ये इज़ोल्ड के गहरे शोक और क्रोध से पैदा हुए थे।घुड़सवार ने फुर्ती से अपनी चमकती तलवार हवा में घुमाई। तलवार की रोशनी ने अंधेरे को काट दिया और उसके चारों ओर एक 'स्वर्ण-कवच' बना लिया। "इज़ोल्ड, रुक जाओ! तुम अपनी बची-कुची जीवन-शक्ति ज़ाया कर रही हो!" उसकी आवाज़ में एक पिता जैसी चिंता थी, "वह मरा नहीं है! उसका इलाज ठीक बगल वाले कक्ष में चल रहा है! वह तुम्हारी धड़कन के लिए तरस रहा है!""झूठ! सब झूठ है!" इज़ोल्ड ने हवा में छलांग लगाई, उसका चोगा किसी फटे हुए काले पंख की तरह लहरा रहा था। उसने अपनी जादुई ऊर्जा को हज़ारों छोटे-छोटे खंजरों का रूप दिया और उन्हें घुड़सवार पर बरसा दिया। घुड़सवार ने उसे ज़ख्मी नहीं करना चाहा, इसलिए वह बस बचाव करता रहा, लेकिन इज़ोल्ड अब एक बेकाबू चक्रवात बन चुकी थी। उसने मठ के प्राचीन खंभों को अपनी साया-शक्ति से लपेटकर उखाड़ना शुरू कर दिया।2. संदेह की गहरी खाईइज़ोल्ड का हमला इतना तीव्र था कि उस शक्तिशाली घुड़सवार को भी घुटनों के बल आना पड़ा। इज़ोल्ड के बाल चेहरे पर बिखरे थे और वह किसी प्रतिशोधी देवी की तरह लग रही थी। "अगर वह ज़िंदा है, तो वह मेरे पास क्यों नहीं है? क्यों मुझे इस अनजान जगह पर होश आया? तुमने उसे मार दिया है और अब मेरी शक्तियों का सौदा करना चाहते हो!"उसने अपनी जादुई ऊर्जा को इकट्ठा किया और एक विशाल 'शैडो वेव' (परछाईं की लहर) छोड़ी। मठ की नींव हिल गई। छत से धूल और कंकड़ गिरने लगे। घुड़सवार ने अपनी तलवार पूरी ताकत से ज़मीन में गाड़ दी ताकि वह उस प्रलयंकारी लहर के झोंके से बच सके।"मूर्ख लड़की! होश में आओ!" घुड़सवार चिल्लाया, उसका नकाब हवा के दबाव से हटने ही वाला था। "अगर मैं दुश्मन होता, तो तुम्हें बेहोशी में ही खत्म कर चुका होता! मैं उसे और तुम्हें बचाने के लिए ही अपनी रूह को दांव पर लगाकर यहाँ लाया हूँ!"3. मौत का फंदा और आखिरी सत्यलेकिन इज़ोल्ड अब सुनने की क्षमता खो चुकी थी। उसे केवल वह खून दिख रहा था जो कैसियन की छाती से बह रहा था। उसने अपनी परछाइयों को एक फंदे में बदला और बिजली की गति से घुड़सवार के गले पर कस दिया। उसने उसे हवा में उठा लिया।"मुझे उसके पास ले चलो, या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ!" इज़ोल्ड के चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान थी।घुड़सवार का चेहरा नीला पड़ने लगा। उसका दम घुट रहा था, लेकिन उसकी आँखों में इज़ोल्ड के लिए गुस्सा नहीं, बल्कि एक असीम दया थी—जैसे वह इज़ोल्ड के भीतर की उस नन्ही बच्ची को देख रहा हो जो डर के मारे ये सब कर रही थी। उसने अपनी पूरी आत्मशक्ति को बटोरकर एक अंतिम बार फुसफुसाया:"अगर तुम मुझे मार दोगी... तो उसे... कौन बचाएगा? उसका ज़ख्म साधारण नहीं है, इज़ोल्ड... वह 'शापित' है। उस ज़ख्म को केवल तुम्हारा 'प्रेम-स्पर्श' ही भर सकता है... वह मर रहा है, क्योंकि तुम यहाँ मुझसे लड़ रही हो..."इज़ोल्ड के हाथ अचानक कांपने लगे। फंदे की पकड़ थोड़ी ढीली हुई। "तुम्हारा... स्पर्श..." शब्द उसके दिमाग में हथौड़े की तरह लगे। क्या वह सच कह रहा था? क्या कैसियन वाकई बगल वाले कमरे में अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था?
अध्याय 32: तूफ़ान के बाद की खामोशी (विस्तृत ड्राफ्ट)
मठ की छत से गिरती धूल और पत्थरों के बीच इज़ोल्ड एक टूटी हुई प्रतिमा की तरह लग रही थी। उसके कानों में घुड़सवार के शब्द किसी शोर की तरह चुभ रहे थे। वह सत्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि सत्य को स्वीकार करने का अर्थ था—उस भयानक दर्द का सामना करना जो उसने कैसियन को गिरते देख महसूस किया था।
"चुप हो जाओ! मुझे कुछ नहीं सुनना!" इज़ोल्ड ने चिल्लाते हुए अपने कानों को अपनी हथेलियों से ढँक लिया। उसका शरीर बिजली के झटके की तरह कांप रहा था। उसने एक अनियंत्रित जादुई प्रहार किया, साया-शक्ति की एक काली लकीर मठ की ऊंची छत को चीरती हुई आसमान की ओर निकल गई। "तुम सब झूठ बोल रहे हो... वह मुझे छोड़कर चला गया... तुम सबने उसे मुझसे छीना है! अब तुम मेरी उम्मीदों के साथ खेल रहे हो!"
1. शक्ति का त्याग: घुड़सवार का जुआ
घुड़सवार ने महसूस किया कि इज़ोल्ड इस समय एक ऐसी जलती हुई मशाल है जिसे फूँक मारकर नहीं बुझाया जा सकता। उसने एक बहुत बड़ा जोखिम लेने का फैसला किया। उसने अपनी जादुई तलवार, जो उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा थी, उसे वापस म्यान में डाल दिया। यह इस युद्ध का अंत और पूर्ण समर्पण का संकेत था।
वह निहत्था होकर, अपने हाथों को हवा में फैलाए हुए, धीरे-धीरे उस काली धुंध की ओर बढ़ा जो इज़ोल्ड के चारों ओर मंडरा रही थी। इज़ोल्ड की साया-शक्ति किसी आरी की तरह उसे काट रही थी। उसके कीमती चोगे पर कट लगने लगे, उसके हाथों से खून की बूंदें टपकने लगीं, लेकिन उसके कदम नहीं डगमगाए। वह जानता था कि इज़ोल्ड को इस समय एक योद्धा की नहीं, बल्कि एक 'सहारे' की ज़रूरत है।
2. पिता तुल्य स्पर्श और शांत होती अग्नि
वह इज़ोल्ड के ठीक सामने, मलबे और कांच के टुकड़ों के बीच घुटनों के बल बैठ गया। इज़ोल्ड ने अपना हाथ उठाया, उसकी उंगलियों के पोरों से साया-शक्ति की चिनगारियां निकल रही थीं, वह उसे खत्म करने ही वाली थी। लेकिन घुड़सवार ने न तो बचाव किया और न ही पीछे हटा। उसने इज़ोल्ड की उन पागली आँखों में अपनी स्थिर, गहरी और शीतल नज़रों से देखा।
"इज़ोल्ड... मेरी आँखों में देखो," उसकी आवाज़ में अब वह सम्राट वाली कड़क नहीं थी, बल्कि एक पिता की लोरी जैसी कोमलता थी। "तुम्हारी यह शक्ति केवल विनाश लाएगी, यह कैसियन के उखड़ते प्राणों को नहीं थाम पाएगी। तुम्हारी यह नफरत उसे वापस नहीं लाएगी। लेकिन तुम्हारी शांति... तुम्हारी आत्मा की गहराई, उसे मौत के मुँह से खींच सकती है।"
इज़ोल्ड की तेज़ चलती सांसें, जो किसी दौड़ते हुए घायल घोड़े की तरह थीं, अचानक रुक गईं। घुड़सवार ने बहुत धीरे से, जैसे किसी डरे हुए पंछी को सहलाया जाता है, अपना हाथ इज़ोल्ड के बिखरे हुए बालों पर रखा। उसके स्पर्श में एक अलौकिक 'ठंडक' थी। यह ठंडक इज़ोल्ड के भीतर धधक रहे ज्वालामुखी को धीरे-धीरे शांत करने लगी।
3. सत्य का अहसास और सुबकती रूह
"शशश... शांत हो जाओ," घुड़सवार ने बहुत करीब आकर फुसफुसाया। "वह यहीं है। क्या तुम अपनी रूह के उस हिस्से को महसूस नहीं कर पा रही हो जिसे तुमने उसे सौंपा था? जिस प्यार के लिए तुम इस मठ को खंडहर बनाने पर तुली हो, वह तुम्हें पुकार रहा है। अगर तुम यहाँ सब कुछ तबाह कर दोगी, तो वह जो आखिरी सांसें ले रहा है, उन्हें भी खो देगा।"
इज़ोल्ड के कांपते हुए हाथ धीरे-धीरे नीचे गिर गए। उसकी आँखों में छाया हुआ वह भयानक काला रंग अब फीका पड़ने लगा। क्रोध की आग को आँसुओं के सैलाब ने बुझा दिया था। वह एक छोटे बच्चे की तरह सुबकने लगी, उसका सारा अहंकार और ताकत एक पल में ढह गई। "क्या... क्या वह वाकई ज़िंदा है? तुम... तुम मुझे धोखा तो नहीं दे रहे? मैं उसे दोबारा खोते हुए नहीं देख सकती..."
4. पनाहगाह का द्वार
घुड़सवार ने बहुत कोमलता से उसे सहारा दिया और खड़ा किया। उसकी अपनी चोटों से खून बह रहा था, लेकिन उसने उसकी परवाह नहीं की। उसने अपनी उँगली से उस भारी चंदन के दरवाज़े की ओर इशारा किया, जहाँ से 'जीवन के जल' की हल्की सुगंध आ रही थी।
"उस दरवाज़े के पीछे, वह हर धड़कन के साथ तुम्हारा नाम ले रहा है। जाओ इज़ोल्ड, उसे वैद्य की नहीं, तुम्हारी ज़रूरत है।"
इज़ोल्ड ने उस दरवाज़े की ओर देखा। उसके पैरों में अभी भी कमजोरी थी, लेकिन अब उसके दिल में प्रतिशोध की ज्वाला नहीं, बल्कि मिलने की तड़प थी।
अध्याय 33: सत्य का सामना और रूह का मिलन (विस्तृत ड्राफ्ट)
इज़ोल्ड के कदम डगमगा रहे थे, लेकिन उसका इरादा फौलाद की तरह सख्त था। उसने घुड़सवार की ओर मुड़कर देखा, उसके चेहरे पर बिखरे बाल और आँखों में लहू जैसी लाली अभी भी कायम थी। उसने अपनी उंगली उठाकर हवा में एक अदृश्य रेखा खींची और बर्फीली आवाज़ में अपनी आखिरी चेतावनी दी।
"मैं अंदर जा रही हूँ... लेकिन याद रखना अजनबी, अगर उस दरवाज़े के पीछे मुझे कैसियन की ठंडी लाश मिली, या अगर यह तुम्हारा कोई नया जादुई जाल हुआ, तो इस मठ की एक भी ईंट अपने स्थान पर नहीं रहेगी। मैं प्रकृति के नियमों को पलट दूँगी। मैं इस पावन स्थान को एक शापित कब्रिस्तान में बदल दूँगी और तुम्हारी रूह को उन परछाइयों के पाताल में कैद कर दूँगी जहाँ मौत भी जाने से डरती है।"
घुड़सवार ने कोई उत्तर नहीं दिया। उसने बस अपनी आँखें झुका लीं, जैसे वह इज़ोल्ड के इस अपार दुख और शक्ति को सम्मान दे रहा हो।
1. दरवाज़े का ध्वंस और सन्नाटा
इज़ोल्ड के पास अब सभ्यता या शिष्टाचार के लिए समय नहीं था। उसका धैर्य उसी क्षण खत्म हो गया था जब उसने कैसियन को गिरते देखा था। उसने अपनी हथेली में अपनी बची-कुची 'साया-शक्ति' और 'प्रकाश-शक्ति' का एक हिंसक मिश्रण तैयार किया।
धड़ाक!
उसने अपनी हथेली दरवाज़े के बीचों-बीच दे मारी। वह सदियों पुराना भारी चंदन का दरवाज़ा, जिस पर प्राचीन सुरक्षा चिन्ह उकेरे गए थे, कागज़ की तरह फट गया। लकड़ी के टुकड़ों की बारिश हुई और दरवाज़ा अपनी चौखट छोड़कर सामने की दीवार से जा टकराया। कमरे के भीतर से प्राचीन औषधियों और 'जीवन के जल' की एक तीखी गंध बाहर आई।
2. कैसियन का दीदार: मौत और जीवन के बीच की पतली लकीर
जैसे ही कमरे की धूल और धुंध छँटी, इज़ोल्ड की धड़कनें जैसे एक पल के लिए रुक गईं। उसकी साँसें उसके गले में ही अटक गईं। सामने एक नक्काशीदार पत्थर के बिस्तर पर कैसियन लेटा हुआ था।
वह कैसियन नहीं लग रहा था जो युद्ध के मैदान में गरजता था। सफेद मलमल की पट्टियों ने उसके शक्तिशाली कंधों और सीने को ढँक रखा था, लेकिन उन पट्टियों के नीचे से अभी भी ताज़ा, गहरा लाल खून रिसकर उभर रहा था। उसका चेहरा संगमरमर की तरह पीला और निर्जीव लग रहा था। इज़ोल्ड का दिल डूबने लगा, लेकिन तभी... उसने देखा।
कैसियन के सीने पर रखी उसकी बेजान उंगलियों में एक हल्की सी हरकत हुई। उसका सीना बहुत धीमी गति से, जैसे कोई अंतिम संघर्ष कर रहा हो, ऊपर-नीचे हुआ। वह साँस ले रहा था। वह जीवित था।
3. पागलपन और मिलन का स्पर्श
इज़ोल्ड की आँखों के सामने एक पल के लिए अंधेरा छा गया। यह खुशी थी या सदमा, वह समझ नहीं पाई। वह किसी जंगली बिल्ली की तरह झपटकर उसके बिस्तर के पास घुटनों के बल गिर पड़ी।
"कैसियन! कैसियन!" उसकी आवाज़ में एक ऐसा कंपन था जो मठ की दीवारों को कँपा रहा था। उसने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों के प्याले में भर लिया। उसकी त्वचा बर्फीली ठंडी थी, लेकिन इज़ोल्ड को उसमें अपनी दुनिया की गर्माहट महसूस हो रही थी। वह पागलों की तरह उसे चूमने लगी—उसके माथे पर, उसके गालों पर, उसकी बंद आँखों पर।
"तुम ज़िंदा हो! तुम मुझे छोड़कर नहीं गए!" वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। उसके ये आँसू अब प्रतिशोध के नहीं, बल्कि उस बोझ के उतरने के थे जो उसे अंदर ही अंदर मार रहा था। "उठो कैसियन! अपनी आँखें खोलो! देखो, तुम्हारी इज़ोल्ड आ गई है। अब तुम्हें कोई छू भी नहीं पाएगा। मैं इस दुनिया को राख कर दूँगी, मैं सितारों को आसमान से गिरा दूँगी... बस तुम एक बार मेरा नाम पुकारो!"
4. जादुई रूपांतरण (The Healing Aura)
अचानक, कमरे का तापमान बढ़ने लगा। इज़ोल्ड की जादुई ऊर्जा, जो अब तक केवल विनाश और काली परछाइयों के रूप में निकल रही थी, एक अद्भुत बदलाव से गुजरी। उसका शोक अब 'करुणा' में बदल गया था। उसके शरीर से एक सुनहरी-नीली रोशनी निकलने लगी, जिसने कैसियन के शरीर को एक रेशमी कोकून की तरह चारों ओर से घेर लिया।
कैसियन के ज़ख्मों से रिसता खून रुकने लगा। पट्टियों के नीचे उसकी त्वचा में एक नई जान फूँकने वाली हलचल होने लगी। इज़ोल्ड का प्यार अब एक वैद्य बन चुका था, जो प्रकृति के नियमों को तोड़कर अपनी रूह का हिस्सा अपने प्रेमी को दान कर रहा था।
अध्याय 34: इंतज़ार की तपस्या और रहस्य से पर्दा (विस्तृत ड्राफ्ट)
मठ की दीवारों के भीतर समय जैसे ठहर सा गया था। बाहर बर्फीले तूफान आए और चले गए, देवदार के पेड़ों ने अपनी पुरानी पत्तियां गिरा दीं, लेकिन इज़ोल्ड के लिए दुनिया का केंद्र केवल वह पत्थर का बिस्तर था जिस पर कैसियन बेसुध लेटा था। दिन हफ्तों में बदल गए, पर इज़ोल्ड की स्थिति नहीं बदली। उसने अपने शाही लिबास, अपनी 'साया-शक्ति' का अहंकार और यहाँ तक कि अपनी नींद का भी त्याग कर दिया था।
वह हर पल कैसियन के ठंडे हाथों को अपनी हथेलियों में थामे रहती। वह उसकी उंगलियों के पोरों को सहलाती, इस डर से कि कहीं वह उसे छूना छोड़ दे और कैसियन की आत्मा हमेशा के लिए भटक जाए। मठ की खामोशी में अब इज़ोल्ड की चीखें नहीं थीं, बल्कि एक गहरा, शांत और तपस्वी जैसा धैर्य था।
1. प्रेम का नया पाठ (शक्ति बनाम शांति)
एक शाम, जब कमरे में ढलते सूरज की नारंगी किरणें कैसियन के चेहरे पर पड़ रही थीं, वही रहस्यमयी घुड़सवार साये की तरह कमरे में दाखिल हुआ। इज़ोल्ड ने अब उसे मारने के लिए हाथ नहीं उठाया, न ही उस पर संदेह किया। उसने बस अपनी थकी हुई, सूजी हुई आँखों से उसकी ओर देखा—उन आँखों में अब केवल एक ही सवाल था।
"वह अभी भी नहीं जागा," इज़ोल्ड की आवाज़ खुरदरी और धीमी थी। "मेरी जादुई ऊर्जा उसे बचाने के लिए काफी क्यों नहीं है? मैंने अपनी रूह का हिस्सा उसे सौंप दिया है, फिर भी वह खामोश क्यों है?"
घुड़सवार खिड़की के पास खड़ा हो गया। बाहर 'भूलभुलैया की घाटी' में चाँद उग रहा था। उसने शांत स्वर में कहा, "प्यार में शक्ति से ज़्यादा 'शांति' की ज़रूरत होती है, इज़ोल्ड। तुम एक सम्राट की तरह उसे अपनी ताकत से जगाना चाहती हो, उसे मजबूर करना चाहती हो कि वह वापस आए। लेकिन उसका शरीर अभी उस जादुई तीव्रता को सहने के काबिल नहीं है। प्रेम किसी फूल की तरह होता है, उसे खिलने के लिए समय और अनुकूल वातावरण चाहिए होता है, ज़बरदस्ती नहीं। तुम्हारी व्याकुलता ही उसकी नींद में बाधा बन रही है।"
इज़ोल्ड ने पहली बार उसकी बात को हृदय से सुना। उसे अहसास हुआ कि उसका 'डर' कि वह कैसियन को खो देगी, वास्तव में कैसियन के चारों ओर एक भारी दीवार बना रहा था।
2. रक्षक का खुलासा (The Legacy of the Shadow)
"तुम कौन हो?" इज़ोल्ड ने हिम्मत जुटाकर वह सवाल पूछा जो हफ्तों से उसके गले में अटका था। "हमें कैसे पता चला कि हम उस नरक में मर रहे हैं? और यह प्राचीन मठ... यह सब क्या है?"
घुड़सवार ने अपना नकाब थोड़ा ढीला किया। उसकी ठुड्डी पर एक पुराना ज़ख्म चमक उठा, लेकिन उसका पूरा चेहरा अब भी सायों के रहस्य में लिपटा था।
"मैं इस 'शापित प्रेम की छाया' का रक्षक हूँ, इज़ोल्ड," उसकी आवाज़ में सदियों पुरानी थकान थी। "सदियों पहले, तुम्हारे और कैसियन के पूर्वजों ने एक 'पवित्र संधि' की थी। एक वादा... कि प्रकाश और साया मिलकर इस दुनिया को संतुलित करेंगे। लेकिन वेलेरियस और इवान जैसे लोगों ने उस वादे को अपनी नफरत और सत्ता की भूख से एक 'शाप' में बदल दिया।"
उसने इज़ोल्ड की आँखों में सीधे झाँकते हुए कहा, "जब तुम्हारी साया-शक्ति अपनी चरम सीमा पर जागी और कैसियन ने एक सम्राट होकर भी अपना सिर मौत के सामने झुका दिया, तो उस पुराने वादे की गूँज ने मुझे पुकारा। कैसियन को बचाने के लिए मैंने अपनी 'सेन्टिनल स्वॉर्ड' (Sentinel Sword) की उस प्राचीन ऊर्जा का इस्तेमाल किया जो केवल तब सक्रिय होती है जब कोई अपना सर्वस्व—अपना राज्य, अपना अहंकार और अपनी जान—अपने प्रेम की वेदी पर चढ़ा देता है। कैसियन ने वही किया, इज़ोल्ड। उसने सम्राट बनकर नहीं, बल्कि एक प्रेमी बनकर तुम्हें पुकारा था।"
3. उम्मीद की एक नई किरण
इज़ोल्ड की आँखों से आँसू गिर पड़े। उसे अब समझ आया कि कैसियन ने उसके लिए क्या किया था। उसने मुड़कर कैसियन के शांत चेहरे को देखा। अब उसके मन में घुड़सवार के प्रति कोई नफरत नहीं थी, बल्कि एक गहरा सम्मान था।
"तो वह कब जागेगा?" उसने धीरे से पूछा।
घुड़सवार ने दरवाज़े की ओर कदम बढ़ाते हुए कहा, "जिस दिन तुम पूरी तरह से उसे 'जाने देने' का साहस जुटा लोगी और यह विश्वास कर लोगी कि वह तुम्हारा है, उसी क्षण वह वापस लौट आएगा। समर्पण ही अंतिम उपचार है।"
अध्याय 36: अंतिम जागृति और बलिदान की गूँज (सीज़न 1 समापन)
मठ के उस शांत कक्ष में, जहाँ समय की गति भी धीमी पड़ गई थी, इज़ोल्ड अभी भी उस स्तब्धता में थी जो घुड़सवार के खुलासे ने उसे दी थी। उसे कैसियन के शरीर पर लगे हर ज़ख्म में अब एक कहानी नज़र आ रही थी—वह कहानी जो कैसियन ने कभी ज़ुबान से नहीं कही। वह अंगूठी जो कैसियन ने पहनी थी, वह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक 'खामोश जल्लाद' था जो इज़ोल्ड का सारा दर्द कैसियन की नसों में उतार रहा था।
"तुमने यह सब अकेले कैसे सहा, कैसियन?" इज़ोल्ड ने कांपते हुए स्वर में पूछा, जबकि उसकी उंगलियाँ कैसियन के ठंडे गालों को सहला रही थीं। उसे वह हर पल याद आया जब उसने कैसियन को 'पत्थर दिल' कहा था, जबकि वह पत्थर दरअसल उसकी रक्षा करने वाली एक ढाल थी।
वह चमत्कारी पल
तभी, कमरे की जादुई रोशनी अचानक मद्धम पड़ गई। हवा में एक भारी दबाव महसूस हुआ। इज़ोल्ड ने देखा कि कैसियन की पलकों के नीचे एक हलचल हुई। उसकी उंगलियाँ, जो हफ़्तों से बेजान थीं, अचानक मुड़ीं और उन्होंने इज़ोल्ड की हथेली को हल्के से भींचा।
इज़ोल्ड की साँसें रुक गईं। "कैसियन...?"
बहुत धीरे से, जैसे सदियों की नींद से कोई जाग रहा हो, कैसियन ने अपनी आँखें खोलीं। लेकिन वे आँखें वैसी नहीं थीं। उनमें वह सम्राट वाली चमक नहीं थी, बल्कि एक अथाह थकान और इज़ोल्ड के लिए एक बेपनाह तड़प थी। जैसे ही उसकी नज़र इज़ोल्ड पर पड़ी, उसकी सूखी हुई आँखों के कोनों से आँसू की एक बूंद लुढ़क गई।
पहला संवाद और आत्मग्लानि
"इज़ोल्ड..." कैसियन की आवाज़ इतनी धीमी थी कि उसे सुनने के लिए इज़ोल्ड को उसके होंठों के पास झुकना पड़ा। "तुम... तुम सुरक्षित हो?"
इज़ोल्ड का बांध टूट गया। वह फूट-फूटकर रोने लगी। "मूर्ख सम्राट! तुम अपनी जान की बाजी लगा रहे थे और मैं तुम्हें अपना दुश्मन समझती रही! तुमने क्यों नहीं बताया कि वह अंगूठी मेरा ज़हर पी रही थी? तुमने मुझे अपने से दूर क्यों किया?"
कैसियन ने बहुत मुश्किल से अपना एक हाथ उठाया और इज़ोल्ड के आँसू पोंछने की कोशिश की। उसके चेहरे पर एक कमज़ोर लेकिन सच्ची मुस्कान आई। "क्योंकि... सम्राट का काम रक्षा करना होता है, इज़ोल्ड... दर्द बांटना नहीं। अगर मैं तुम्हें बता देता, तो तुम मुझे वह बलिदान नहीं करने देतीं जो तुम्हें आज़ाद करने के लिए ज़रूरी था।"
वह काला सच (सीजन समापन का मोड़)
तभी कैसियन के चेहरे पर अचानक दर्द की एक लहर दौड़ी। उसकी गर्दन के पास वही 'काली नस' फिर से उभरी, जो किसी ज़िंदा सांप की तरह रेंग रही थी। इज़ोल्ड ने घबराकर उसे देखा। वह समझ गई कि घुड़सवार सही कह रहा था—शाप अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, उसने बस अपना ठिकाना बदल लिया है।
कैसियन ने इज़ोल्ड का हाथ और ज़ोर से पकड़ा। उसकी आँखों में एक चेतावनी थी। "इज़ोल्ड... मेरी वसीयत... वह गुफा... तुम्हें वहां जाना होगा। इवान केवल एक मोहरा था। असली साया... वह अभी भी..."
इससे पहले कि वह अपनी बात पूरी कर पाता, उसका शरीर एक झटके के साथ बिस्तर पर गिर पड़ा और वह फिर से अचेत हो गया। लेकिन इस बार वह शांत नहीं था; उसके माथे पर पसीना था और वह 'काली नस' अब उसके दिल की ओर बढ़ रही थी।
इज़ोल्ड का नया संकल्प
इज़ोल्ड कमरे के बीचों-बीच खड़ी हुई। उसकी 'साया-शक्ति' और 'प्रकाश-शक्ति' अब एक साथ उसके चारों ओर नाच रही थीं। उसने खिड़की के बाहर देखा, जहाँ चाँद अब पूरी तरह से 'ग्रहण' की चपेट में आ रहा था।
"मैं तुम्हें मरने नहीं दूँगी, कैसियन। चाहे मुझे उस गुफा के पाताल में जाना पड़े या खुद मौत से सौदा करना पड़े। तुमने मुझे बचाने के लिए अपनी रूह दांव पर लगाई थी, अब मैं तुम्हारी रूह को उस साये से छीनकर लाऊँगी।"
मठ की दीवारों के बाहर वही रहस्यमयी घुड़सवार अंधेरे में खड़ा यह सब देख रहा था। उसने अपनी तलवार म्यान में डाली और बुदबुदाया— "खेल अब शुरू हुआ है, इज़ोल्ड। महायुद्ध तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है
समझ गया लेखिका जी! आपको एक ऐसा 'महायुद्ध क्लिफहैंगर' चाहिए जो पाठकों की धड़कनें रोक दे और उन्हें सीजन 2 के लिए तड़पने पर मजबूर कर दे। यहाँ भावनाओं और युद्ध का वह चरम बिंदु है जहाँ सब कुछ दांव पर लगा है।
सीजन 1 समापन: महायुद्ध और शापित क्लिफहैंगर
मठ की वह शांति अब एक श्मशान की खामोशी में बदल चुकी थी। इज़ोल्ड, कैसियन का हाथ थामे बैठी थी, जब अचानक पूरा पहाड़ किसी भयानक भूकंप की तरह कांपने लगा।
1. सायों का आक्रमण
बाहर से हज़ारों चीखें सुनाई दीं। वह रहस्यमयी घुड़सवार कमरे में बिजली की गति से दाखिल हुआ। उसका नकाब अब खून से सना था। "इज़ोल्ड! हमें अभी निकलना होगा! इवान तो बस एक मोहरा था, असली 'साया-सम्राट' (Shadow Emperor) जाग चुका है। उसने तुम्हारी जादुई गूँज सुन ली है और वह अपनी पूरी सेना के साथ इस मठ को घेर चुका है!"
इज़ोल्ड ने खिड़की से बाहर देखा—आसमान काला पड़ चुका था और हज़ारों 'शापित योद्धा' (Wraiths) आग के गोलों की तरह नीचे गिर रहे थे। यह कोई साधारण लड़ाई नहीं थी, यह 'महायुद्ध' की शुरुआत थी।
2. कैसियन की भयानक स्थिति
तभी कैसियन के शरीर ने एक ज़ोरदार झटका खाया। वह बिस्तर पर छटपटाने लगा। वह 'काली नस' जो उसकी आँखों के नीचे थी, अब फैलकर उसके पूरे चेहरे को एक मकड़ी के जाले की तरह ढँक चुकी थी। कैसियन ने अपनी आँखें खोलीं, लेकिन वे आँखें कैसियन की नहीं थीं—वे पूरी तरह काली थीं।
"इज़ोल्ड... भागो..." कैसियन की आवाज़ किसी दानव की तरह भारी और डरावनी हो गई थी। "वह... वह मेरे अंदर आ रहा है... मैं उसे रोक नहीं पा रहा हूँ!"
3. वह खौफनाक क्लिफहैंगर
इज़ोल्ड ने कैसियन को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन तभी कैसियन के सीने से काली ऊर्जा का एक भयानक विस्फोट हुआ जिसने इज़ोल्ड को दीवार से दे मारा।
मठ का दरवाज़ा टूटकर गिरा और बाहर खड़े हज़ारों शापित योद्धाओं ने एक साथ अपने घुटने टेक दिए। वे इज़ोल्ड के लिए नहीं, बल्कि कैसियन के लिए झुके थे।
कैसियन धीरे-धीरे बिस्तर से उठा। उसकी पीठ से धुएँ के विशाल काले पंख निकल आए थे। उसने इज़ोल्ड की ओर देखा—उसकी नज़रों में अब प्यार नहीं, बल्कि एक प्राचीन भूख थी। उसने अपना हाथ हवा में लहराया और वही 'प्राचीन जादुई तलवार' अब उसके हाथ में थी, लेकिन उसका रंग अब खूनी लाल हो चुका था।
"कैसियन? यह तुम नहीं हो!" इज़ोल्ड चिल्लाई, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
कैसियन (या वह चीज़ जो उसके अंदर थी) ने एक क्रूर हँसी हँसी और अपनी तलवार इज़ोल्ड के गले की ओर तान दी। तभी घुड़सवार ने इज़ोल्ड को खींचकर एक जादुई पोर्टल (Portal) में धकेल दिया।
इज़ोल्ड की आखिरी चीख गूँजी— "नहीं! कैसियन!"
जैसे ही इज़ोल्ड उस पोर्टल में गायब हुई, उसने देखा कि कैसियन ने उस जादुई मठ पर अपनी तलवार से वार किया और पूरी घाटी एक भीषण धमाके के साथ काली आग में जलने लगी।
सीजन 1 समाप्त
क्या इज़ोल्ड उस 'वसीयत' के ज़रिए असली कैसियन को वापस ला पाएगी?
या कैसियन अब दुनिया का सबसे बड़ा विलेन (Shadow King) बन चुका है?
कौन था वह घुड़सवार जिसने इज़ोल्ड की जान बचाई?