सुबह की हल्की धूप
Shreya balcony में खड़ी हल्की हवा महसूस कर रही है।
आँखों के नीचे हल्की थकान — रात भर की जागी हुई।
कप में हल्की चाय।
Karan धीरे-धीरे चुपचाप आता है, उसके पास खड़ा होता है।
जैसे बिना आवाज़ किए उसकी हालत समझ गया हो।
Karan (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
रात भर सोई नहीं ना ?
Shreya चौंकती नहीं—
उसे पता है Karan उसे observe करता है quietly.
Shreya (धीमे से) बोली -
डर लग रहा था…और आप दोनों सो रहे थे।
Karan उसके हाथ से कप लेता है और चाय की चुस्की लेता है।
Karan बोला -
तुम्हारे डरने का reason मैं हूं.... तो तुम्हारा थोड़ा सा डर काट भी सकता हूं।
Shreya हल्का सा शर्मा जाती है।
Shreya भारी फाइलें ले जा रही है।
Kabir कहीं और मीटिंग में फंसा है।
Karan उसे दूर से struggle करते देख लेता है।
वो कुछ नहीं कहता… बस उसके हाथों से पूरी फाइल ले लेता है।
Shreya (धीमे से) बोली -
Karan जी… मैं —
Karan बोला -
तुम्हें कुछ नहीं उठाना है जब तक मैं पास हूं।
फिर करण (गजल भरे अंदाज में ) बोला -
"तू बस मुस्कराती रह, वक़्त की हर आंधी मैं रोक लूँगा,
मुसीबतें चाहे जितनी आएँ… पर मैं तुझे कभी अकेला न होने दूँगा."
Shreya उसके कदमों के साथ चलती है।
पहली बार… उसे एक अजीब सा comfort महसूस होता है।
Shreya अपना computer का एक सॉफ्टवेयर ठीक करने के लिए एक chemical लाई थी।
Shreya डेटा डालते हुए गलती से glass beaker गिरा देती है।
Chemical थोड़ा-सा table पर छिटकता है।
वो घबरा जाती है।
Karan बिजली की तरह उसके पास आ जाता है।
उसके हाथ पकड़कर उसे पीछे खींचता है।
Karan (तेज लेकिन care से) बोला -
Shreya! पहले पीछे हट जाओ। तुम्हे चोट लग सकती थी।
Shreya उसके चेस्ट से टकरा जाती है…
दोनो कुछ पल के लिए freeze हो जाते हैं।
उसके हाथ अभी भी Karan के chest पे होते हैं।
दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते हैं। Shreya बहुत करीब से पहली बार अपने पति को देख रही थी।
Shreya (सांस रोककर) बोली -
…sorry.
Karan (धीमी आवाज़ में) बोला -
तुम्हारी safety के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं।
फिर karan एक और गजल बोलता है -
"तू बेफ़िक्र चल, हर तकलीफ़ में मैं तेरा हमसफ़र बन खड़ा रहूँगा,
दुनिया चाहे जैसे बदले, मैं तेरे साथ ही हर इम्तिहान में अड़ा रहूँगा."
उसके शब्द Shreya के दिल में कहीं उतर जाते हैं।
शाम को वो घर आए।
घर जाते हुए बारिश शुरू हो जाती है।
Karan बिना कुछ बोले अपनी जैकेट उतारकर Shreya के कंधों पर डाल देता है।
Shreya बोली -
Karan जी… आप भीग जाओगे…।
Karan (शांत तौर पर) बोला -
तुम पर एक बूंद भी गिरना मुझे पसंद नहीं।
वो एक और गजल बोला -
*"बरसात की वो बूंदें जब तेरी ज़ुल्फ़ों से फिसल कर गिरती हैं,
तो लगता है जैसे ख़ुद आसमाँ भी तुझ पर मेहरबानी करता है।
मगर दिल में एक हल्की सी जलन भी जाग उठती है,
कि इन नर्म बूंदों को भी तुझसे मिलने की क्यूँ इजाज़त मिलता है।
तू भीगती है तो मौसम में एक रौशन-सी ख़ुशबू भर जाती है,
और मैं सोचता रह जाता हूँ—
किस-किस को तेरी इन हँसती लम्हों पर हक़ मिलता है."*
Shreya रुक जाती है।
पहली बार वो उसे असली “पति” की तरह देखती है…
एक protector, एक silent guardian।
बारिश में Karan की शर्ट भीग रही है—
Shreya चाहकर भी नजरें नहीं हटा पाती।
Bedroom में हल्की awkwardness
Kabir सो रहा है।
Shreya बीच में है।
Karan बाई ओर चुपचाप लेटा है।
Shreya करवट बदलकर Karan की ओर मुड़ती है।
Karan भी जाग रहा है… दोनों की नजरें मिलती हैं।
Shreya (धीमे से) बोली -
Karan जी… आप इतनी care क्यों करते हैं?
Karan (धीमी, almost फुसफुसाती आवाज़ में) बोला -
पता नहीं…।
बस… तुम्हारी तरफ खिंच जाता हूं…।
शायद मैं तुमसे…।
समझ नहीं आ रहा।
Shreya की सांसें रुक जाती हैं।
दिल अचानक तेज धड़कने लगता है।
वो पास नहीं आती, न छूती…
बस शांत होकर उसकी ओर देखती रहती है।
एक गहरी, बिना बोले वाली नज़दीकी पैदा हो रही है—
Kabir को बिना बताए…।
Shreya और Karan के दिलों के बीच कुछ हलका सा बदलने लगा है।
अगली सुबह, Kitchen में हल्की शरारत
Karan ऑफिस के लिए निकल चुका है।
Kabir अभी जागा ही है—बाल उलझे हुए।
Shreya kitchen में पराठे बेल रही है—बाल खुले, चेहरा मासूम।
Kabir धीरे से पीछे आता है और उसका हाथ पकड़ लेता है।
Shreya (चकित होकर) बोली -
Kabir जी! डरा क्यों रहे हो आप?
Kabir (हँसते हुए) बोला -
क्या करूं… तुम kitchen में इतनी cute लगती हो कि control नहीं होता ।
Shreya हथेली छुड़ाती है… पर उसके गाल गुलाबी हो जाते हैं।
Shreya बोली -
आप सुबह - सुबह शुरू मत हो जाइए।
Kabir (मासूम सा मुंह बनाकर) बोला -
मैं क्या करूं?
तुम… मेरी favourite हो।
वैसे एक शायरी मेरी तरफ से केवल तुम्हारे लिए —
*"तेरी मौजूदगी से ही मेरी ज़िंदगी में रंग उतरते हैं,
वरना ये दिन-रात तो बस यूँ ही गुज़रते हैं।
तू मेरी पसंद नहीं… तू मेरी ज़ेहनी राहत है,
मेरे हर सफ़र की वजह, मेरी हर दुआ की इनायत है।"*
(Shreya चुप हो जाती है। उसके अंदर हल्की सी गर्माहट महसूस होती है।)
ऑफिस का कॉरिडोर, Kabir की केयर
Shreya सीढ़ियों से उतर रही होती है। उसका पैर फिसलता है।
पर इससे पहले कि वो गिरे—Kabir एकदम पकड़ लेता है।
उसका हाथ Kabir के कंधे पर टिक जाता है।
Kabir (soft, थोड़ा serious) बोला -
ध्यान कहां रहता है तुम्हारा, Babu?
Shreya उसे देखती रह जाती है…
Kabir के चेहरे का मासूम seriousness उसे छू जाता है।
Shreya (धीमी आवाज़ में) बोली -
Thank you…kabir जी।
Kabir (हँसकर) बोला -
तुम गिरती हो… और मुझे heart attack आ जाता है।
कबीर ( शायरी भरे अंदाज में ) बोला -
*"तुझे गिरते देखा तो दिल की धड़कन एक लम्हा थम-सी गई,
मैंने थाम लिया तुझे… वरना ये दुनिया भी क्या समझती कोई।
तेरी साँसों की हल्की सी लरज़िश ने मुझे यूँ डरा दिया,
जैसे मेरी रूह को ही किसी ने छू कर गुज़र गया हो।
अब तू बेफ़िक्र चलना… मैं हर मोड़ पर तेरे साथ रहूँगा,
क्योंकि तेरा ज़रा-सा भी दर्द हो, तो मेरे सीने में तूफ़ान उतर आता है."*
Shreya हँस देती है।
Kabir उसकी हँसी देखता रहता है—जैसे दिन बन गया उसका।
Lunch Break, Kabir की possessiveness
Shreya कैफेटेरिया में बैठी है। दो लड़के उससे बात करने आते हैं।
Kabir दूर से देखता है।
उसका चेहरा बदल जाता है।
Kabir आता है और दोनों लड़कों के बीच में ऐसे खड़ा हो जाता है जैसे Shreya की दीवार हो।
Kabir (हल्की मुस्कान, पर टोन में warning) बोला -
Shreya lunch मेरे साथ करती है।
तुम लोग अपना table देख लो।
लड़के उलझकर चले जाते हैं।
Shreya (थोड़ा नाराज़ + थोड़ा shy होकर) बोली -
Kabir जी! आपको क्या ज़रूरत थी?
Kabir (कंधे उचकाकर) बोला -
क्या करूं।
कोई तुम्हारी तरफ देखे मुझे पसंद नहीं।
कबीर एक और शायरी बोला -
*"जब उन लड़कों को तेरे आसपास बातें करते देखा,
तो दिल में एक अजीब सी बेक़रारी जाग उठी।
मैंने उन्हें कुछ कहे बिना ही वहाँ से जाने दिया,
मगर मेरी आँखों ने बता दिया कि तू मेरी कितनी अमानत है।
कभी-कभी मोहब्बत भी अपनी ही तरह का हक़ माँग लेती है,
और मैं क्या करूँ…
तू है ही ऐसी कि दिल को तेरे सिवा कुछ और बरदाश्त नहीं होता."*
Shreya का दिल… एक धक्का खाता है।
हल्की Emotional Night
रात में Karan सो रहा है।
Shreya बीच में है।
Kabir अपने side पर आंखें खुली रखकर ceiling को देख रहा होता है।
Shreya करवट बदलकर Kabir की ओर मुड़ती है।
Shreya (धीमे स्वर में) बोली -
Kabir जी… क्या हुआ?
Kabir धीरे से मुस्कुराता है।
Kabir बोला -
बस…तुम्हारी आदत सी हो गई है।
Shreya का दिल धीमे से पिघलता है।
Shreya बोली -
कैसी आदत?
Kabir धीरे-धीरे पास आता है, लेकिन respectful distance पर रुकता है।
Kabir (धीमे, soulful tone में शायरी बोलने के अंदाज में ) बोला -
*"सबसे ज़्यादा असर तुम पर नहीं…
तुम्हारे उस ‘Thank you Kabir ji’ पर होता है,
जिसमें एक अनकही सी लज़्ज़त छुपी होती है।
तुम्हारा ग़ुस्सा भी अजीब है—
जलाता नहीं,
बल्कि दिल के किसी कोने में
एक मीठी सी बेचैनी छोड़ जाता है।
और जब तुम मुझे ज़रूरत से ज़्यादा देर तक देख लेती हो…
तो उस नज़र में ऐसा जादू उतर आता है
कि मैं ख़ुद भी भूल जाता हूँ—
मैं क्या कह रहा था,
और किसलिए जी रहा था."*
Shreya की सांसें रुक जाती हैं।
वो Karan से भी जुड़ी है…।
पर Kabir के साथ दिल की धड़कन कुछ अलग चलती है—
मासूम, चुलबुला, पर बहुत सच्चा।
Shreya महसूस करती है—
वो सच में दोनों से बराबर प्यार करने लगी है।
शायद…
इसीलिए किस्मत ने उसे दो साथी दिए थे।
अगली सुबह दोनों भाई Shreya के पास आते हैं—
Kabir हमेशा की तरह शरारती,
Karan शांति से देख रहा है।
Karan समझ रहा है कि Kabir और Shreya का bond गहरा रहा है—
पर उसकी आँखों में jealousy नहीं,
बस एक शांत स्वीकृति है।
Kabir Shreya के सामने आकर पूछता है—
Kabir बोला -
Babu… आज office में मेरे साथ चलोगी?
Karan मुस्कुराता है—
Karan बोला -
Shreya जिसके साथ comfort feel करे… उसके साथ जाए।
Shreya दोनों को देखती है—
दोनों उसे चाहते हैं…।
और दोनों उसे लेकर कभी नहीं लड़ेंगे।
Shreya की आँखें नम हो जाती हैं…
रात का टेरेस, हल्की हवा… तीनों की उलझन भरी ज़िंदगी
टेरेस पर चाँदनी फैली है। Shreya रेलिंग पर झुकी बाहर देख रही है। उसके चेहरे पर उलझन, प्यार और डर… सब कुछ है। कदमों की आहट सुनाई देती है।
करन (धीरे से) बोला -
Shreya… फिर से अकेली बैठी हो?
Shreya हल्का-सा मुस्कुराती है लेकिन उसकी आँखों में सवाल हैं।
Shreya बोली -
बस… मन नहीं था अंदर जाने का।
करन धीरे से उसके बगल में खड़ा हो जाता है। बिना कुछ कहे, उसकी उंगलियाँ shreya की उंगलियों को छू जाती हैं। शरेया का दिल जोर से धड़कता है।
करन बोला -
तुम जानती हो… मैं क्या महसूस करता हूँ तुम्हारे लिए।
Shreya उसकी तरफ देखती है—उसके चेहरे पर सच्चाई, प्यार और अपनापन है।
Shreya (धीरे से) बोली -
पता है करन जी…।
तभी पीछे से कदमों की आवाज़। दोनों मुड़ते हैं। कबीर वहीं खड़ा है—गंभीर, पर पूरी तरह से टूटा हुआ नहीं… बल्कि shreya को देखकर नरम पड़ जाता है।
कबीर का दर्द और confession
कबीर: (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -
तुम दोनों यहां हो… सोचा ढूंढ लूँ।
करन थोड़ा संभल कर खड़ा हो जाता है। Shreya समझ जाती है—आज कुछ बोलने वाले हैं।
कबीर बोला -
Shreya… करन भैया… मैं कुछ कहना चाहता हूँ।
दोनों चुप हो जाते हैं।
कबीर बोला -
Shreya…
*"श्रेया…
मैं लाख कोशिश करूँ तुमसे दूर जाने की,
मगर मोहब्बत की ये डोर है
जो हर बार मुझे तुम्हारी ही तरफ खींच लाती है।
शायद ये दिल जानता है
कि मेरी हर राह का मंज़िल
तुम ही हो…
और मैं चाहे जितना भटकूँ,
आकर ठहरता बस तुम्हारी नज़रों में हूँ."*
Shreya की आँखें भर आती हैं।
कबीर बोला -
मैं जानता हूँ करन भैया तुम्हें कितना चाहते हैं ।
और मैं भी…।
कबीर आगे बढ़कर श्रेया के बहुत करीब आ जाता है। दोनों की साँसे तेज़ हैं।
कबीर (धीरे से, टूटती आवाज़ में) बोला -
मैं भी तुम्हें खो नहीं सकता,shreya।
Shreya की आँखों से आँसू गिर जाते हैं। वह एक कदम आगे बढ़ती है और दोनों हाथ बढ़ाकर कबीर और करन—दोनों की उंगलियाँ पकड़ लेती है।
Shreya (रोते हुए) बोली -
मैं किसी एक को क्यों चुनूँ?
जब मेरा दिल दो हिस्सों में बँट चुका है…।
और दोनों हिस्से… आप दोनों हो?
करन और कबीर एक-दूसरे की तरफ देखते हैं—पहली बार ईर्ष्या और प्यार दोनों एक साथ महसूस करते हुए।
Shreya बोली -
मैं तुम दोनों को पसंद करती हूँ…।
नहीं…
मैं तुम दोनो से प्यार करती हूँ।
पूरा वातावरण भारी हो जाता है। हवा भी जैसे रुक जाती है।
करन धीरे से श्रेया के पास आता है और उसके आँसू पोंछता है।
करन बोला -
प्यार कभी गलत नहीं हो सकता…।
जब वो इतना सच्चा हो।
कबीर पास आकर श्रेया के कंधों पर हाथ रखता है।
कबीर बोला -
हम दोनों से तुम्हें कोई छीनने की कोशिश नहीं करेगा…
पर एक बात तय करनी होगी।
Shreya सांस रोककर दोनों को देखती है। करन और कबीर एक-दूसरे को सिर हिलाकर इशारा देते हैं।
करन बोला -
हम दोनों तुम्हें प्यार करते हैं…।
और अगर तुम हमारे साथ रहना चाहती हो…।
हम तैयार हैं।
श्रेया की सांस अटक जाती है।
कबीर (धीरे से) बोला -
पर ये फैसला… तुम्हारा होगा।
हम मजबूर नहीं करेंगे।
Shreya दोनों के हाथ पकड़कर अपने दिल पर रख देती है।
Shreya बोली -
दिल का फैसला तो काफी पहले हो चुका था…।
मैं आप दोनों को चाहती हूँ।
और मैं आप दोनों के करीब…आना भी चाहती हूँ।
करन हल्के से उसकी कमर पकड़ता है। कबीर उसके बालों को कान के पीछे करता है। श्रेया के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती है।
तीनों एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े हैं। Shreya की धड़कनें तेज़… दोनों लड़कों की साँसे उसके चेहरे पर महसूस हो रही हैं।
करन बोला -
तो आज से…हम तीनों…एक साथ।
कबीर बोला -
ना छुपकर…ना डरकर।
Shreya हिम्मत करके एक हाथ से कबीर का चेहरा पकड़ती है, दूसरे हाथ से करन की गर्दन… पहली बार वो खुद आगे बढ़ रही है।
Shreya बोली -
तो फिर…मुझे पास आने दीजिए।
लाइट्स धीमी… तीनों की उंगलियाँ एक-दूसरे में उलझती हैं… और कहानी एक नए, नज़दीकी सफर में प्रवेश करती है।