Tere Mere Darmiyaan - 64 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 64

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तेरे मेरे दरमियान - 64

शमिका :- तुम सच बोल रहे हो ।

विक्की :- हां शमिका , मैं तुमसे झुट क्यों बोलूगां । बेचारी पैसे हाथ मे लेते ही रो पड़ी ।

शमिका विक्की की बातो पर भरोसा करने लगी , क्योकी जब मोनिका जा रही थी तब वो रो रही थी । और निक्की ने भी ऐसा ही कहा ।

शमिका :- चलो , जल्दी से तैयार हो जाओ ।

विक्की :- कहां , मुझे आफिस जाना है । काम है बहोत , अगर ऑफिस नही जाउगां तो नोकरी चली जाएगी ।


शमिका अपना फोन निकालती है और आदित्य को लगाती है उधर से आदित्य की आवाज आती है --

आदित्य : - हेय शमिका , आज अचानक से मुझे कैसे याद किया ।

शमिका : - आदि , तुमसे एक फेवर चाहिए ।

आदित्य : - हां मैं सुन रहा हूँ, बोलो ना क्या बात है ।

शमिका :- वो मैं कल ही वापस आई हूँ , इतने दिनो से विक्की से भी दूर रही तो आज सोच रही थी उसे लेकर कही बाहल जाउ ।

आदित्य :- अरे तो इसमे मैं क्या मदद कर सकता हूँ , तुम दोनो जाओ इंज्वाई करो ।

शमिका :- बात ये है के विक्की बोल रहा है के ऑफिस मे इंपोर्टेंट काम है , नही गया तो नौकरी चली जाएगी ।

आदित्य: - ओ तो इतनी सी बात है । बताओ किस कंपनी मे काम करता है वो , मैं अभी उनसे बात करता हूँ ।

शमिका :- वो अगर किसी और कंपनी मे काम करता तो तुम्हें क्यों कॉल करती पागल ।

आदित्य :- मतलब , मेरी कंपनी मे काम करता है ।

शमिका :- हां ।

आदित्य : - वाह , अपने आपको मेरा दोस्त कहती हो , और मुझे अभी तक उस इंसान से मिलाया तक नही ।

शमिका :- अरे वाह , उल्टा चौर कोतवाल को डांटे , तुम ही अपनी आईडेंटिटी छुपा कर रह रहे हो , किसी से मिल नही रहे हो, कहां हो क्या कर रहे हो , कोई नही जानता , और मुझे गलत बता रहे हो । 

आदित्य के पास शमिका के बातो का कोई जवाब नही था , तब शमिका फिर कहती है --
शमिका :- इस आऊगी तो अब की बार पक्का मिलाउगी ।

आदित्य :- अच्छा ठिक है , पर इस बार अगर नही मिलाई ना तो अब माफ नही करुगां ।

शमिका :- पक्का इस बार मिलाउगी 

आदित्य :- ठिक है फिर मैं बोल देता हूँ , मेरी कंपनी मे चार विक्की है , तुम्हें जिस विक्की के साथ जाना है लेकर चली जाओ ।

शमिका :- तुम संभाल लेना ठिक है , मैं मेरे विक्की को लेकर जाती हूँ ।

आदित्य :- कोई बात नही , तुम दोनो बिंदास जाओ । तुम कुछ बोलो और मैं वो ना करु ऐसा हो सकता है भला ।

शमिका :- थैंक्स आदि ।

आदित्य :- वेलकम डियर । अब जाओ दैर मत करो , इंज्वाय योर डे।

आदित्य के इतना कपने के बाद शमिका खुश हो जाती है और विक्की हैरान हो जाता है ।

विक्की: - शमिका , तुम जो भी बोलोगी आदित्य सर वही करेगा क्या ।

शमिका :- हां , वो मेरा बहोत अच्छा फ्रेंड है । अब चलो ।

विक्की :- हां , चलो ।

दोनो ही वहां से चला जाता है । इधर काली अपना फोन निकालता है और विकास को लगाता है पर विकास बार बार फोन काट देता है , विकास काली का कॉल दैखकर कहता है --

विकास :- ये काली बार बार कॉल क्यों कर रहा है।

 काली गुस्से से कहता है --

काली :- ये तु बहोत गलत कर रहा है विकास , साले ने बहोत बुरी तरह से फंसाया , अगल पहले पता होता के ये तिवारी फैमिली का मामला है तो मैं ये हाथ मे लेता ही नही । काली से पंगा , कर देगा तुझे पुरा का पुरा नंगा । तु रुक मैं ही आ रहा हूँ ।



इधर जानवी गार्डन पर बैठी तभी जानवी के फोन पर इंस्पेक्टर का फोन आता है , जानवी फोन रिसिव करती है तो इंस्पेक्टर कहता है ---

इंस्पेक्टर :- मेडम मैं इंस्पेक्टर विक्रम बोल रहा हूँ , आपको पुलिस स्टेशन आना होगा ।

जानवी :- पुलिस स्टेशन पर क्यों ।

इंस्पेक्टर : - उस रात क्लब मे जो आपके साथ हूआ था , हमने कुछ बदमाश लड़को को उसी क्लब से गिरफ्तार किया है आप एक बार आके इनका पहचान करना है ।

इंस्पेक्टर की बात को सुनकर जानवी खुश हो जाती है और कहती है --

जानवी :- ठीक है ऑफिसर, मै अभी आती हूँ ।

इतना बोलकर जानवी फोन काट देती है और मन ही मन खुश होकर कहती है--- 

जानवी :- अब पता चलेगा आदित्य को , जब मैं उन बदमाशो का पहचान कर लूंगी और फिर वो इंस्पेक्टर उन बदमाशो को पिट - पिट कर उन सबके मुह से आदित्य का नाम निकलवा लेगा , तब उस आदित्य का असली चेहरा आएगा सबके सामने ।
आदित्य अब तुम्हारा खेल खत्म हूआ ।

इतना बोलकर जानवी पुलिस स्टेशन की और चली जाती है ।

उधर मोनिका हाथ मे पैसो का बेग लिए रास्ते पर उदास मन से पैदल चल रही थी , मोनिका के मन मे बस यही चल रहा था को अब वो क्या करेगी , मोनिका ये बात किसी को बता नही सकती थी।


 मोनिका को कुछ भी समझ मे नही आ रहा था के वो क्या करे , मोनिका को अपनी भूल का एहसास हो हया था , यही सौचते सौचते वो चल रही थी के तभी एक गाड़ी मोनिका की और आता है मोनिका को गाड़ी अचानक से दिखता है और मोनिका हक्का बक्का रह जाती है ।


गाड़ी सामने आ चुकी थी के तभी आदित्य आ के मोनिका को बचा लेता है , मोनिका आदित्य को दैखकर हैरान हो जाती है और आदित्य को दैखती रहती है।

तभी वही से जानवी अपनी कार लेकर जा रही थी , जानवी मोनिका और आदित्य को दैखकर वही पर रुक जाती है और उन दोनो को दैखती रहती है ।

आदित्य मोनिका से कहता है --

आदित्य :- क्या कर रही हो मोनिका , तुम्हारा ध्यान किधर है , अभी वो गाड़ी. ...!

इतना बोलकर आदित्य चुप हो जाता है , तभी मोनिका आदित्य के गले लग जाती है , मोनिका आदित्य को कस के पकड़ लेती है ।

आदित्य मोनिका के इस तरह से पकड़ने पर एकदम से हैरान था , आदित्य को कुछ समझ मे नही आ रहा था के वो क्या करे । तभी मोनिका रोती हूई आदित्य से कहती है --

मोनिका :- मुझे माफ कर दो आदित्य , मैने तुम्हारे साथ बहोत गलत किया , मैं पैसो के लालच मे आ गई थी , मुझे माफ कर दो ।

मोनिका इतना बोलतर रोने लगती है , जानवी मोनिका के आदित्य को ऐसे हग करने से बहोत गुस्सा हो जाती है । आदित्य मोनिका से कहती है --

आदित्य :- क्या हूआ है तुम्हें , तुम रो क्यों रही हो ?

 मोनिका :- मुझे मेरे किए की सजा मिली है आदित्य । अब मैं जीना नही चाहती , मुझे मर जाने दो ।

आदित्य :- ये क्या बोल रही हो तुम , पागल हो गई हो क्या , क्यू ऐसा बोल रही हो , क्या हूआ है तुम्हें ।

मोनिका : - वो विक्की , विक्की ने मुझे धोका दिया है आदित्य ।

आदित्य: - क्या धोका , पर क्यों ?

मोनिका :- वो किसी और से प्यार करता है और उससे शादी भी करने वाला है । अब तुम ही बताओ , मैं अब जी कर क्या करुगी ।

आदित्य :- मरना ही सब चिज का Solution नही होता है मोनिका , मुझे दैखो , मुझे भी तो प्यार मे धोका मिला था ना , फिर भी मैं जी रहा हूँ ना । 

आदित्य की बात को सुनकर मोनिका चुप हो जाती है , आदित्य मोनिका के गाल को छुकर कहता है --

आदित्य : - तुम अभी घर जाओ और जाके आराम करो , इन सब बातो को ज्यादा मत सोचो , हम मिलकर विक्की से बात करेगें ।

मोनिका :- वो अब किसीकी नही सुनेगा ।

आदित्य और मोनिका को ऐसे ूात करते देख जानवी कहती है --

जानवी :- ये दोनो क्या बातें कर रहा है , जिस तरह से दोनो को दैख रही हूँ , उससे तो लगता है के इन दोनो के बिच अब भी कुछ चल रहा है , अच्छा तो इसका मतलब ये दोनो ही मिले हूए है , आदित्य मेरे साथ रहकर मेरे पैसे पर हक जमाएगा और मोनिका विक्की के पैसो पर , फिर दोनो हम दोनो को लूट कर एक साथ रहने का प्लानिंग कर रहा है , क्या कमाल का प्लानिंग है और मैं अब तक कुछ और ही सौच रही थी ।

जानवी अपना फोन निकालती है और उन दोनो का पिक्चर क्लिक कर लेती है और वहां से चली जाती है । आदित्य मोनिका से कहता है --

आदित्य :- क्यों नही सुनेगा वो , तुम टेंशन मत लो अगर वो तुमसे शादी नही किया ना तो मैं उसे नौकरी से मिकलवा दूगां ।

आदित्य से इतना सुनकर मोनिका हैरान हो जाती है , मोनिका आदित्य से पूछती है --

मोनिका :- नौकरी से कैसे निकालोगे , वो तो तिवारी ग्रुप मे काम करता है ना ?

आदित्य :- हां तो क्या हूआ , मेरी अनय से और विद्युत सर से अच्छी पहचान है ।

मोनिका :- छोड़ो ये सब और चले जाओ यहां से , मुझे मेरे हाल मे छोड़ दो ।

मोनिका मन गी मन कहती है --

" क्या इसे अपनी प्रेगनेंसी की बात बताऊ , नही नही , इसका और जानवी का रिस्ता ठिक नही चल रहा है , अगर मैं इसे फिर से अपना बना सकु तो मुझे आदित्य और मेरे बच्चे को पिता दोनो ही मिल जाएगा । हां इसे और इमोशनल ब्लैकमेल करती हूँ ।" 

मोनिका अब झुट मुट का रोने लगती है । आदित्य मोनिका के आंशु को दैखकर कहता है --


आदित्य :- ये क्या कर रही हो मोनिका , ऐसे रो मत , मैं हू ना तुम्हारे साथ ।

मोनिका :- सच मे आदित्य , तुम हो मेरे साथ ?

आदित्य अब चुप हो जाता है मोनिका मौके का फायदा उठाती है और फिर कहती है --

मोनिका :- ये सब बस बोलने की बात है , जो मैने तुम्हारे साथ किया है उसके लिए तुम कभी मेरे साथ नही रहोगे , और फिर तुमने तो जानवी से शादी भी करली । 

आदित्य :- ऐसी बात नही है मोनिका ।

मोनिका :- अब जाओ भी रहने दो , झुठा दिलासा मत दो मुझे । अब तो तुम उस जानवी से प्यार करने लगे हो ना , अब जाऔ तु यहीं से और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो , मैं जिऊ या मरु उससे तुम्हें क्या ।

इतना बोलकर मोनिका अपनी आंशु पोंछती है और वहां जाने लगती है , आदित्य परेशान हो चुका था आदित्य मोनिका को रोकना चाहता था पर रोका नही , मोनिका हल्की मुस्कान के साथ धीमी आवाज मे कहती है --

मोनिका :- अब तो मैं तुम्हें अपना बनाकर कर ही दम लूगीं मेरे भोले आदित्य । 

मोनिका अब वहां से चली जाती है ।

इधर जानवी पुलिस स्टेशन पहूँच जाती है और अंदर चली जाती है जहां पर इंस्पेक्टर विक्रम जानवी को दैखकर कहता है --

इंस्पेक्टर :- आईए मेम । ( अपने सिपाही से कहता है ) कदम उन लोगो को मेम के पास लेकर आओ ।

कदम :- जी सर ।


 To be continue....492