कोई भी इंसान इतना बेख़ौफ़,कैसे हो सकता है
की खुद को कानून से ऊपर,समझे।
एक इंसान इतना निर्दयी अकेले के दम पर नहीं बनता।
जरूर इसके पीछे बहुत ही बड़ी तागत का हाथ होता है।
ये सब बाते कार्तिक को रात भर सोने नहीं देती।
कमरे की लाइट बंद थी,
मोबाइल की स्क्रीन हल्की-सी चमक रही थी।
कार्तिक चुपचाप..
आर्यन की सोशल प्रोफ़ाइल देख रहा था —
पुरानी तस्वीरें,
इवेंट्स,
शादियाँ,
राजनीतिक चेहरों के साथ खिंचवाए गए फ़ोटो।
और तभी उसे पहली बार एहसास हुआ—
आर्यन की ताक़त उसके दोस्तों से नहीं आती।
वह उसके परिवार से आती है।
अगर उसे आर्यन को मिटाना है तो, पहले उसे उसके परिवार में घुसना होगा।
अगले कुछ दिन कार्तिक ने बहुत धीरे से खेल चालू किया।उसने बस एक सवाल पूछा तुम मुझे अपने परिवार के बारे में कुछ क्यों नहीं बताते, ऐसा तो नहीं है कि ,में तुम्हारे लिए टाइम पास हूं। जब तुम्हारा मन भर जाएगा मुझसे फिर तुम मुझे छोड़ दोगे ।
उसके बाद उसने आर्यन से कभी कुछ नहीं बोला।
वह आर्यन से सवाल कोई नहीं पूछता था —
नहीं आर्यन पर कोई दवाब डालता।
उसने अपने अपनी चाल चुप चाप चली ,इससे आर्यन के दिल मे एक हल चल पड़ा कर दी ।
कार्तिक मुस्कराते हुए बोला ..आर्यन ऐसा नहीं है , कि में तुम पर विश्वास नहीं करता ।
पर उन कई लोगों की तरह नहीं बनना चाहता, जो सिर्फ .....उसने जब बुझ कर तोड़ा सा धीरे बोला ।
इस एक बात ने आर्यन के दिल में हाल चल करदी, उसे लगा जैसे कार्तिक को उसके पुराने कारनामे पता हो ।
उसके बाद कार्तिक ने फिर कभी इस बात का जिक्र नहीं किया।
वो तब तक इंतजार करता रहा जब तक आर्यन उसे खुद नहीं बताता ।
कुछ दिनो तक ये सिलसिला चलता रहा ।
उसके बाद वो आर्यन की हर एक बात सुनता था।
पर कोई सवाल नहीं पूछता । ओर एक दिन आर्यन ने बोलना शुरू किया।
जब आर्यन ने अपने पिता की बात की ,
कार्तिक चुपचाप सुनता रहा —बिना राय दिए,बिना सवाल उठाए,।
“पापा बहुत स्ट्रिक्ट हैं.....“पर शहर में उनका नाम चलता है।”
कार्तिक ने बस इतना कहा—“शायद इसीलिए लोग तुम्हें कुछ कहने से डरते हैं।”
यह वाक्य .-आर्यन के अहंकार को छू गया।
उसे अच्छा लगा और उसने और बोलना शुरू किया।
धीरे-धीरे वह अपने परिवार की बाते बताने लगा।
बह अपने पिता के बारे में बताता है
आर्यन खिड़की के पास खड़ा था।
बाहर शाम उतर रही थी,
पर उसके चेहरे पर अजीब-सी गंभीरता थी।
वह पलटा,
कार्तिक की तरफ देखा और धीमे से बोला—
“तुम जानते हो…
लोग मेरे पापा को क्या कहते हैं?बिज़नेस टायकून
वह हल्का-सा मुस्कुराया,पर वह मुस्कान गर्व और सावधानी का मिश्रण थी।
“वो ऐसे आदमी हैं जिन्हें चिल्लाने की जरूरत नहीं है।
उनकी खामोशी ही काफी होती है लोगों को सीधा बैठाने के लिए।”
कार्तिक चुप रहा।
आर्यन आगे बोला
“मीटिंग में जब वो बोलते हैं न,तो लोग बीच में टोकते नहीं है और नहीं कोई सवाल उठते ।
क्योंकि उन्हें पता होता है—आख़िरी फैसला उन्हीं का होगा।
उनकी आवाज़ ऊँची नहीं होती, पर उनकी आवाज में बजन होता है।”
उसने जेब में हाथ डाला,जैसे कोई पुरानी याद टटोल रहा हो।
“बाहर की दुनिया उन्हें, एक सफल बिज़नेसमैन समझती है—
बड़ी गाड़ियाँ, बड़े कॉन्ट्रैक्ट, हर जगह उनका नाम ही काफी होता हैं ।
तुम्हे पता है उनकी ताक़त पैसे से नहीं आती…उनके पास वफादार लोग हैं,जो उनका हर आदेश पूरा करते है।
आर्यन ने कार्तिक की आँखों में देखा। “घर में भी वही हाल है।
वो ज़्यादा बोलते नहीं,पर उनकी ‘हाँ’ या ‘न’ पूरे दिन का रुख बदल देती है।
हम उनसे बहस नहीं करते…ज़रूरत भी नहीं पड़ती।”
एक पल को वह चुप हुआ,फिर थोड़ा गर्व, थोड़ा सच मिलाकर बोला—
“मेरे पापा भावनाओं से फैसले नहीं लेते।
उनके लिए हर चीज़ एक चाल, एक हिसाब होती है।
गलती माफ़ कर देंते है,पर धोखा…वो कभी नहीं भूलते।”
उसने हल्की साँस छोड़ी।
“लोग उनसे इसलिए नहीं डरते ,कि वो क्या कर सकते हैं…
बल्कि इसलिए कि वो कब क्या कर देंगे,कोई नहीं जानता।”
फिर अचानक उसके चेहरे पर वही पुरानी सहज मुस्कान लौट आई।
“बस…ऐसे हैं मेरे पापा। सीधे नहीं,पर मजबूत।
और जब वो कमरे में होते हैं न—तो लगता है
कमरा थोड़ा छोटा हो गया।
”एक दिन में उनकी तरह ही सबपर राज कर सकूं इसलिए में हमेशा उनके जैसा बनने की कोशिश करता हूँ।
और मेरी मां आर्यन सोफ़े की बैक पर हाथ टिकाकर बैठा गया।
चेहरे पर हल्की मुस्कान थी,पर आँखों में एक अलग-सी नरमी आ गई थी।
“तुम जब मम्मी को देखोगे ,तो वह “पहली नज़र में वो बहुत साधारण लगती हैं—
उसने धीरे से कहा उसके चेहरे पर शांत, मुस्कान थी।
जैसे उन्हें किसी बात की जल्दी ही नहीं।”वह हल्का हँसा।
“पर सच बताऊँ? घर में अगर कोई सच में सब जानता है न…तो वो वही हैं।”
कार्तिक ने चुपचाप उसकी तरफ देखा।
आर्यन आगे बोलता गया—“पापा फैसले लेते हैं,
पर मम्मी समझ लेती हैं
कौन सा फैसला क्यों लिया गया।
किसने झूठ बोला,किसने छुपाया,किसके चेहरे पर डर है—
उन्हें बताने की ज़रूरत नहीं पड़ती।”
उसने याद करते हुए कहा—“डाइनिंग टेबल पर अगर आवाज़ ज़्यादा हो जाए, तो वो बस ‘एक शब्द कहती हैं…और पूरा कमरा शांत हो जाता है।
वो चिल्लाती नहीं, पर सब सुन लेते हैं।”
आर्यन की आवाज़ में अब गर्व था।“बाहर की दुनिया उन्हें बहुत दयालु और सलीकेदार महिला मानती है।
और वो हैं भी…पर घर के अंदर वो रिश्तों को पकड़कर रखती हैं।
कौन किससे दूर जा रहा है, कौन किसके खिलाफ सोच रहा है—
सब उनकी नज़रो से कुछ नहीं छुपता है।”
वह थोड़ा झुककर और कार्तिक का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास बिठा लिया।
“सबको लगता है पापा इस घर की ताक़त हैं…पर सच ये है कि वे घर की बंध कर रखती है ।
फिर हल्की मुस्कान के साथ जोड़ा—
“उनकी मुस्कान मीठी है, पर आँखों में हमेशा हिसाब चलता रहता है।
प्यार भी करती हैं, और सीमा भी खींच देती हैं—बिना आवाज़ ऊँची किए।” ही उनकी हर बात मान्य होती है।
आर्यन ने आख़िर में बस इतना कहा—“अगर पापा दीवार हैं,
तो मम्मी वो धागा हैं जो सबको बाँधकर रखता है।
और उस धागे को कोई देख नहीं पाता…बस महसूस करता है।”
आर्यन कुर्सी से पीठ टिकाकर बैठ जाता है और कार्तिक को अपने करीब खींचता है।
वो कार्तिक की आँखों में देखता है ,चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।
“मेरे चाचा…उन्हें लोग कम आँकते हैं,”
वह धीरे से बोला,“क्योंकि वो पापा जितने सामने नहीं रहते।
पर असली काम…अक्सर वही सँभालते हैं।”
उसने कार्तिक के होठों को हल्के से छुआ, जैसे कोई पुराना हिसाब याद कर रहा हो।
“वो ज़्यादा बोलते नहीं , बस सुनते हैं।
मीटिंग में पापा के बगल वाली कुर्सी पर बैठ कर उनकी नज़र हर एक छोटी बात पर रहती है।
किससे कब मिलना है, किसे कब टालना है—उन्हें बिना नोट्स के याद रहता है।”
कार्तिक चुप था।
आर्यन ने उसके होठों को देखा एक पल के लिए उसका ध्यान उसपर टिक गया ।
कार्तिक ने जब ये देखा उसकी दिल में एक घृणा का सैलाब उमड़ पड़ा।
पर उसने खुद को संभाला फिर हल्के से खांसा जिससे आर्यन का ध्यान टूट गया, फिर उसने कहा।
“घर में भी वो सीधे आदेश नहीं देते, बस एक लाइन बोलते हैं—और लोग समझ जाते हैं किस तरफ़ हवा बह रही है।”
फिर वह हल्का-सा मुस्कुराया—“और चाची…
उन्हें देखो तो लगेगा बस घर सँभालने वाली साधारण महिला हैं।
पर सच में? इस घर की ख़बरें सबसे पहले उन्हीं तक पहुँचती हैं।”
वह थोड़ा झुककर बोला—
“
कौन किससे ज़्यादा करीब हो रहा है, कौन क्या छुपा रहा है—
उनकी नज़र से कुछ नहीं बचता।
वो बस दो मीठे वाक्य बोलती हैं…और सामने वाला खुद बता देता है।”
आर्यन ने साँस छोड़ी—“चाचा-चाची सामने से शांत लगते हैं,
पर घर की कई डोरियाँ उनके हाथ में रहती हैं।
पापा दीवार हैं,मम्मी धागा हैं—तो चाचा-चाची
वो गाँठ हैं। जो धागे को ढीला भी कर सकती है
और कस भी सकती है।”
आर्यन कुछ पल चुप रहा, जैसे शब्द चुन रहा हो।
फिर हल्की साँस लेकर बोला—“और… मेरी चचेरी बहन।
उसे हल्के में मत लेना।”वो मुझसे कुछ साल बड़ी है पर खुदको मेरी अम्मा समझती है।
उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी,
पर तुम बस सावधानी रहना “वो घर में सबसे कम बोलती है,
पर सबसे ज़्यादा देखती है।
लोग समझते हैं। उसे दिलचस्पी नहीं, पर सच में
उसे सब पता रहता है।” उसे मेरे बारे मे सबकुछ पता रहता है ।
मेरे हर राज को वो जानती है ,मेरे हर रिश्ते को बो परखती है ।
अगर तुमने उसे इम्प्रेस किया तो समझो पूरा घर तुम्हारे हाथो में होगा। वह जोर से हँसा... फिर कहा मुझे तो डर है कही वो तुम्हे मुझसे न छिन ले ।
तुम इतने सुंदर हो कि कोई भी तुम पर अपना दिल हार देगा।
कार्तिक ने ध्यान से सुना। आर्यन आगे बोला—
“वो किसी से सीधे सवाल नहीं करती।
वो तो लोगो को अपने जाल में फसती है ।
अगर तुम उससे मिलो तो जरा संधान रहना वो बहुत ही खतरनाक है।
ओर घर में आखरी बचा में , मेरे बारे में तो तुम सब जानते ही हो ।
उसने कार्तिक की आँखों में देखा कहा .. कार्तिक मुझे आज घर से बुलावा आया है , और मैं तुमको अपने परिवार से मिलवाना चाहता हूँ।
क्या तुम मेरे साथ चलोगे?:
वो कुछ देर रुका फिर गोर से कार्तिक को देखा कही उसकी आँखो में कोई डर तो नहीं है, पर उसे उनमें सिर्फ सच्चाई नजर आई।
कार्तिक आज ने तुमसे कुछ मांगना चाहता हूँ ,घर जाने से पहले क्या तुम मुझे वो दोगे।
कार्तिक थोड़ा सा मुस्कराया उसे पता था आर्यन आज उससे क्या मगना चाहता है।
उसने जब से इस खेल में कदम रखा था ,उसे तब से पता था ।
अगर उसे आर्यन को पूरी तरह से बस में करना है तो उसे एक न एक दिन ऐसा करना होगा ।
वो मानसिक रूप से तो तैयार था पर दिल का क्या जो उसे ऐसा करने से रोक रहा था।
पर उसने दिल की न सुनकर अपने दिमाग की सुनी । उसका दिमाग कार्तिक ये तेरा इंतहा है, अगर बदला लेने के लिए जान भी देनी पड़े तो
पीछे मत हटना।
तुझे आर्यन का भरोसा जितना है।
उसके घर में घुसकर उसे मारना है।
कार्तिक ने कुछ नहीं कहा पर अपना सर हल्का सा जा में हिलाया।
ये देखकर मानो उसे कोई खजाना मिल गया जो उसके होठों पर बड़ी सी मुस्कान थी।
उसने बिना समय गंवाये अपने होठों को कार्तिक के कोमल लाल होंठों से मिला दिये ।
कुछ समय तक वे ऐसे ही रहे जहाँ आर्यन बहुत खुश था।
ब्याही कार्तिक को दिल में कड़ौ परने सा महसूस हुआ।
उसका दिल कड़वाहट से भर गया ।
वो हमेशा सोचता था ,जब वो अंश से मिलेगा तो उसे कैसे चूमेगा ।
पर अब उसे ये सब अपने सबसे बड़े दुश्मन के साथ करना पड़ रहा है ।
उस आदमी के साथ जिसने उसका प्यार ,उसकी उम्मीद,उसका पूरा बाजूद ही मिटा दिया था।
आर्यन के हाथ कार्तिक के नाजुक गालों को हल्के से सहला रहे थे ।
उसने कार्तिक की आँखों में देखते हुए कहा ,में इस रिश्ते में एक और कादम उठाना चाहता हूं।
जिससे तुम पुरी तरह से मेरे हो जाओगे।
कार्तिक के अंदर गुस्सा उमड़ रहा था ,जिससे उसका चेहरा लाल हो रहा था ।
पर उसके चाहरे पर हल्की मुस्कान थी ,उसकी आंखें बंद थी ।
जिससे वो खुद पर काबू रखता था ।
पर आर्यन को उसका चेहरा देखकर लगा ,जैसे वो उसकी बात पर शर्मा रहा हो ।
उसने कार्तिक की बंद आंखों की पंखुड़ियों पर अपने होठों से एस्परस किया।
एक पल की चुप्पी।
छाई रही फिर कार्तिक ने सिर हिलाया—बाहर से शांत, अंदर से सख़्त। आर्यन के होंठों पर संतोष की मुस्कान उभरी।
उसे लगा जैसे उसने सब पा लिया हो।
पर कार्तिक के भीतर एक ठंडी प्रतिज्ञा जन्म ले चुकी थी—
बाहर समर्पण, अंदर संकल्प। आर्यन जितना तुम मेरे करीब आयेगे में तुम्हे उतना बर्बाद करूंगा ये मेरा वादा है ।
कमरे में हल्की-सी खामोशी थी।
खिड़की से आती हवा परदे को छूकर लौट रही थी।
आर्यन ने धीरे से कार्तिक का हाथ थामा—
जैसे कोई भरोसा पकड़ रहा हो।
कार्तिक की साँस एक पल को अटक गई।
उसने नज़रें झुका लीं,
पर चेहरे पर वही हल्ल्की सी मुस्कान थी।
आर्यन थोड़ा और करीब आया।
उनके बीच की दूरी
अब सिर्फ़ एक साँस भर रह गई थी।
उसने कार्तिक के चेहरे को हल्के से छुआ,
और बिना जल्दबाज़ी के
अपने होंठ उसके होंठों से मिला दिए।
पल छोटा था,
पर समय जैसे ठहर गया।
बाहर से वह एक शांत, कोमल स्पर्श था—
पर कार्तिक के भीतर
भावनाओं का तूफ़ान उठ चुका था।
उसने आँखें बंद रखीं,
चेहरे पर समर्पण,
दिल में ठंडा संकल्प।
आर्यन के लिए यह एक जीत का पल था—
और कार्तिक के लिए
एक और कदम। कार्तिक ने अपनी साँसों को काबू में रखना सीख लिया था।
बाहर हवा चलती रही, पर कमरे के भीतर सब कुछ स्थिर था—
सिर्फ़ दो धड़कनों की आवाज़ और एक पल जो दोनों के लिए अलग-अलग अर्थ रखता था।
आर्यन ने कुछ देर चुम्मन किया , और उसने कार्तिक को अपनी बाहों में जकड़ कर बिस्तर पर गिरा दिया।
इस चाल ने एक पल के लिए कार्तिक के आत्मबिस्वास को हिला दिया ,पर उसने खुद को संभाला ।
आर्यन जो चाहता था वो करने दिया ।
और इस अध्याय में इतना ही आगे देखते है ,किसकी जीत होती है।
🙏🙏🙏