लिव-इन
कमल चोपड़ा
अरुण उसे रास्ते में अचानक मिल गया था। पहले वह एक ऑफिस में उसके साथ ही काम करता था। इधर-उधर की बातों के बाद उसने पूछा- "आजकल कहाँ रह रहे हो?" रोहन ने टालना चाहा पर उसके बार-बार पूछने पर उसे बताना पड़ा कि आजकल वह दो कमरों वाले एक फ्लैट में रितिका नाम की लड़की के साथ डेढ़ साल से लिव-इन में रह रहा है। वह भी एक दूसरे ऑफिस में काम करती है। दोनों का टाईम मज़े से पास हो रहा है।अरुण हैरान था- "उसे पता है कि तुम पहले से शादीशुदा हो और एक बच्चे के पिता भी।" लापरवाही से हँसा था रोहन- "पता चल जायेगा तो क्या धरती पलट जायेगी? क्या होगा? वह अपने घर, मैं अपने। जैसे यात्रा में कोई साथी मिल गया हँसी-खुशी वक्त निकाला फिर वह अपने रास्ते हम अपने रास्ते। ऐसे होता ही है। रास्ते में भूख लगी सामने होटल दिखा। वहाँ रुककर खाना खाया फिर आगे चल दिये। यही आज की सोच है। यही आज की ज़रूरत भी।""लेकिन साथ रहते-रहते स्नेह प्यार लगाव कुछ तो होता है। इंसान जानवर भी पालता है तो उससे भी लगाव हो जाता है। अगर किसी में भावनाएँ संवेदनाएँ नहीं है तो वह अपने आप को इंसान कैसे कह सकता है? हमारे भी ऑफिस की एक लड़की एक बॉयफ्रेंड के साथ दो साल से लिव-इन-रिलेशन में थी। एक दिन उसे पता चला जिस बन्दे के साथ वह रह रही है वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। बस क्या था.... उसने सुसाइड कर लिया। लड़की का बॉयफ्रेंड जो दो-दो जगह का मज़ा ले रहा था अब 'लिव-इन जेल' है।"घर लौटते हुए वह सोचने को विवश था- 'अरुण ठीक ही कह रहा है। रितिका कहीं ऐसा कदम ना उठा ले। वैसे भी औरतें ज़्यादा भावुक होती हैं। मुझे कुछ फैसला तो लेना ही पड़ेगा। पहली पत्नी या रितिका! रितिका के लिये मेरा दिल धड़कता है। लेकिन मैं अपनी बीवी-बच्चों को नहीं छोड़ सकता।'डिनर के बाद रोहन ने सहमते-सकुचाते हुए पूरी बात रितिका को कह दी। रितिका ने बात को एकदम सहजता से लिया था– "फिर क्या हुआ? मुझे दो-तीन महीने पहले ही पता चल गया था कि तुम पहले से शादी-शुदा हो। बहुत दिल दुखा था। मैंने सुसाइड करने की सोची थी पर पहले की नारी की तरह टूट जाना बेकार की बेवकूफी लगा। मैंने अपने आप को संभाला और अब मेरा अफेयर किसी और लड़के से चल रहा है। एक कंपनी में वह बहुत बड़े पैकेज पर काम कर रहा है। एक लम्बी सी गाड़ी और बहुत बड़े अपार्टमेंट का मालिक है। तुम से बैटर ही है। मैं भी तुम्हें बताना ही चाहती थी। मैं कल यहाँ से जा रही हूँ।"एकाएक रोहण का दिल अफसोस, ग्लानि, कचोट और दुख से भर गया था कि आँखों में आँसू आने को हो गये। भर्राई आवाज़ में रितिका से कहा– "अपना ध्यान रखना। तुम बहुत भोली हो। वह लड़का तुम्हें धोखा न दे जाये।"बच्चे की तरह पिटे हुए उसके चेहरे को रितिका चुपचाप देखने लगी। रोहण को लगा कि वह कहेगी– "और खुद तुमने जो धोखा दिया और शुभचिंतक बन रहे हो?"लेकिन रितिका ने ऐसा कुछ नहीं कहा। कुछ क्षण चुप रहने के बाद बोली– "मुझे लगा कि मेरा अफेयर दूसरे लड़के से चल रहा है इसे लेकर तुम भड़क उठोगे। लेकिन तुम...?" ❑