Agent Tara - 8 in Hindi Thriller by Pooja Singh books and stories PDF | Agent Tara - 8

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Agent Tara - 8

प्यार का इज़हार....

मीडिया की हलचल थम चुकी थी, केस फाइलें बंद हो रही थीं और शहर धीरे- धीरे अपनी रफ्तार में लौट रहा था, लेकिन तारा के भीतर कुछ भी सामान्य नहीं था. बाहर से सब ठीक दिख रहा था, पर अंदर एक लंबी लडाई के बाद आई खालीपन की शांति थी. वह शांति जो तब आती है जब दुश्मन हार जाता है, लेकिन यादें जिंदा रह जाती हैं.

बेस के एक कोने में तारा अकेली बैठी थी. सामने कॉफी ठंडी हो चुकी थी. वह स्क्रीन नहीं देख रही थी, फाइलें नहीं पढ रही थी. वह बस सोच रही थी—दो साल पहले की आकृति और आज की तारा के बीच कितना फासला आ गया था.
कबीर चुपचाप आया. उसने कुछ नहीं कहा, बस सामने वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया.
तुम थकी हुई लग रही हो, उसने कहा.
थकी नहीं, तारा ने जवाब दिया. खाली।
कबीर ने सिर हिलाया. वह समझता था. ऑपरेशन खत्म होने के बाद जो सन्नाटा आता है, वह सबसे ज्यादा डरावना होता है.
सब लोग तुम्हें हीरो कह रहे हैं, उसने कहा.
तारा ने हल्की मुस्कान दी. हीरो को रात में नींद नहीं आती।
कबीर कुछ पल चुप रहा. फिर बोला, तुम्हें पता है, जब तुम्हारी फोटो टेबल पर रखी गई थी. उस पल मुझे एहसास हुआ कि मैं तुम्हें सिर्फ एक एजेंट की तरह नहीं देखता।
तारा ने पहली बार उसकी तरफ देखा.
तो Kiss तरह? उसने पूछा.
कबीर ने गहरी सांस ली. एक इंसान की तरह. जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालती है, लेकिन किसी को दिखाती नहीं।
तारा ने नजरें फेर लीं. इस Mission में भावनाएँ रखना गलती होती है।
मैं जानता हूँ, कबीर ने कहा. इसलिए मैंने अब तक कुछ कहा नहीं।
कमरे में खामोशी थी, लेकिन वह भारी नहीं थी. वह ऐसी थी जिसमें सच कहे जाने का इंतजार होता है.
अगले कुछ दिन तारा को फील्ड से दूर रखा गया. आधिकारिक तौर पर यह ‘रिकवरी पीरियड’ था, लेकिन असल में यह सिस्टम का तरीका था उसे परखने का—देखने का कि वह टूट तो नहीं गई.
कबीर रोज हालचाल पूछता. कभी कॉल, कभी मैसेज. औपचारिक बातें, Mission से जुडी बातें. लेकिन हर बातचीत के बीच कुछ ऐसा होता जो अनकहा रह जाता.
एक शाम तारा देर तक बेस में रुकी रही. कबीर भी वहीं था.
चलो, उसने कहा. थोडा बाहर चलते हैं।
कहाँ? तारा ने पूछा.
जहाँ एजेंट नहीं होते, कबीर बोला. सिर्फ लोग।
वे एक छोटी सी चाय की दुकान पर रुके. साधारण जगह, साधारण लोग. तारा को अजीब सा सुकून मिला.
यही जिंदगी थी, उसने कहा. पहले।
और अब? कबीर ने पूछा.
अब मैं हर चेहरे में खतरा ढूँढती हूँ।
कबीर ने चाय का कप रखते हुए कहा, तुम्हें हर वक्त तारा बने रहने की जरूरत नहीं है।
तारा ने उसकी तरफ देखा. तुम्हें लगता है मैं आकृति बन सकती हूँ?
नहीं, कबीर ने ईमानदारी से कहा. लेकिन तुम कुछ और बन सकती हो. खुद का बेहतर वर्जन।
तारा चुप रही. यह जवाब आसान नहीं था.
कुछ दिन बाद एक इंटेल Meeting के दौरान तारा को एक छोटी सी चोट लग गई. कुछ बडा नहीं था, लेकिन कबीर तुरंत उसके पास पहुँचा.
ठीक हो? उसने पूछा.
हाँ, तारा ने कहा. यह तो कुछ भी नहीं।
कबीर ने उसकी कलाई थामी. बहुत हल्के से. हर बार ऐसा मत कहा करो।
तारा ने उसकी आँखों में देखा. वहाँ डर था. वही डर जो उसने किसी में नहीं देखा था—उसके लिए.
क्यों? तारा ने पूछा.
कबीर ने धीरे से कहा, क्योंकि अगर एक दिन तुम वापस नहीं लौटीं. तो मैं खुद को माफ नहीं कर पाऊँगा।
यह पहली बार था जब कबीर ने अपने भीतर की दीवार गिराई.
तारा ने हाथ धीरे से छुडाया, लेकिन उसकी आवाज नरम थी. कबीर, मैं जानती हूँ कि तुम परवाह करते हो।
सिर्फ परवाह नहीं, उसने कहा. मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
यह शब्द भारी नहीं थे. नाटकीय नहीं थे. बस सच्चे थे.
तारा ने तुरंत जवाब नहीं दिया. वह उठी, खिडकी के पास गई.
मेरी जिंदगी में प्यार हमेशा किसी की कुर्बानी लेकर आया है, उसने कहा. मेरे सपने, मेरे पापा, मेरी पहचान।
कबीर उसके पास आया. और मैं तुमसे कुछ छीनना नहीं चाहता।
तुम नहीं, तारा बोली. यह काम करता है।
कबीर ने शांत स्वर में कहा, तो हम इसे काम की तरह नहीं लेंगे. न आज, न अभी. लेकिन जब भी तुम तैयार हो. मैं यहीं रहूँगा।
तारा मुडी. उसकी आँखों में पहली बार असुरक्षा थी.
अगर मैं कभी सामान्य नहीं हो पाई? उसने पूछा.
कबीर मुस्कुराया. तो मैं भी सामान्य बनने की कोशिश नहीं करूँगा।
तारा हँसी. हल्की, सच्ची हँसी. बहुत दिनों बाद.
रात को अपने अपार्टमेंट में तारा देर तक सो नहीं पाई. कबीर के शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे. पहली बार किसी ने उसे बचाने की नहीं, उसके साथ चलने की बात की थी.
सुबह उसने एक मैसेज भेजा.
कॉफी?
जवाब तुरंत आया.
हमेशा।
तारा ने फोन रखा. खिडकी से बाहर देखा. शहर वही था, लेकिन उसका नजरिया बदल चुका था.
वह जानती थी—आगे भी खतरे होंगे, Mission होंगे, लडाइयाँ होंगी. लेकिन अब वह अकेली नहीं थी.
एजेंट तारा अब भी सिस्टम से लडने वाली थी.
लेकिन आकृति.
आकृति ने पहली बार किसी को अपने करीब आने दिया था.
और कभी- कभी, यही सबसे बडा रिस्क होता है.
कबीर और तारा का पहला संयुक्त Mission किसी बडे ऑपरेशन की तरह घोषित नहीं किया गया था. फाइल में उसे सिर्फ“ रिकी वेरिफिकेशन असाइनमेंट” कहा गया था, लेकिन दोनों जानते थे कि यह उससे कहीं ज्यादा था. यह उनका पहला Mission था जहाँ वे सिर्फ अफसर नहीं थे, एक- दूसरे की जिम्मेदारी भी थे.
लोकेशन थी नागपुर के पास एक पुराना सरकारी क्वार्टर. वही क्वार्टर जहाँ कभी रणविजय मेहता पोस्टेड थे. वर्षों से बंद पडा था, लेकिन हाल ही में इंटेल मिला था कि किसी ने वहाँ छेडछाड की है.
तारा उस इमारत को देखते ही रुक गई. बाहर से यह एक साधारण, जर्जर सरकारी मकान लगता था, लेकिन उसके लिए यह सिर्फ एक जगह नहीं थी. यह उसके पिता की आखिरी पोस्टिंग थी. आखिरी जगह जहाँ उन्होंने किसी पर भरोसा किया था.
कबीर ने उसकी तरफ देखा. अगर तुम्हें लगे कि—”
नहीं, तारा ने कहा. यहीं से शुरू करना जरूरी है।
अंदर घुसते ही धूल और सन्नाटा मिला. दीवारों पर पुराने नोटिस चिपके थे, फर्नीचर ढका हुआ था. सब कुछ वैसा ही था जैसा सालों पहले छोडा गया था.
यहाँ किसी ने हाल ही में कदम रखा है, कबीर ने फर्श के निशान देखकर कहा.
तारा सीधे उस कमरे की तरफ बढी जो कभी उसके पिता का स्टडी Room था. अलमारी आधी खुली थी. कुछ फाइलें उलटी- पुलटी थीं, जैसे किसी ने जल्दबाजी में ढूँढा हो.
उन्हें कुछ चाहिए था, तारा ने धीमे से कहा. और शायद मिला नहीं।
कबीर ने कमरे की तलाशी शुरू की. तारा अलमारी के पीछे पहुँची. वहाँ एक पुराना लॉकर था, जो दीवार में लगभग छुपा हुआ था. कोड अब भी वही था—उसके पिता की सर्विस नंबर की आखिरी चार अंक.
लॉकर खुलते ही अंदर सिर्फ एक चीज थी.
एक पुरानी, हाथ से लिखी डायरी.
तारा ने उसे उठाया. कवर पर उसके पिता के हाथ की लिखावट थी. वही लिखावट जिससे वह बचपन में नोट्स बनाते थे.
उसके हाथ काँपने लगे.
वे दोनों बाहर आकर गाडी में बैठे. कबीर ने बिना बोले इंजन स्टार्ट किया, लेकिन तारा की हालत देख रुक गया.
हम यहीं पढते हैं, उसने कहा.
तारा ने डायरी खोली.
पहले कुछ पन्ने सामान्य थे—ड्यूटी नोट्स, ट्रांसफर डिटेल्स, सिस्टम की खामियों पर टिप्पणियाँ. लेकिन जैसे- जैसे पन्ने आगे बढे, लिखावट बदलने लगी. तेज, सख्त, और चिंतित.
एक पेज पर मोटे अक्षरों में लिखा था:
दो गैंग. नाम अलग, काम एक. सिस्टम के भीतर तक पहुँचे हुए।
तारा ने पढना शुरू किया.
पहला नाम था — ब्लैक एशेस.
एक गैंग जो दिखावे में फाइनेंशियल कंसल्टेंसी और चैरिटी ट्रस्ट्स के जरिये काम करता था. उनका असली काम था—पुलिस और ब्यूरोक्रेसी के भीतर इंटेल बेचना, केस मोडना और अफसरों को Blackmail करना.
दूसरा नाम था — नागवृत्त.
यह गैंग ज्यादा क्रूर था. डायरेक्ट एन्फोर्समेंट. किडनैपिंग, हिट्स, और“ दुर्घटनाएँ” वे वही लोग थे जो तब एक्टिव होते थे जब कोई अफसर बहुत ज्यादा जानने लगता था.
डायरी में लिखा था:
ब्लैक एशेस सोचते हैं कि वे दिमाग हैं.
नागवृत्त हथियार हैं.
लेकिन दोनों का कंट्रोल एक ही हाथ में है।
कबीर ने चौंककर पूछा, नाम?
तारा ने अगले पन्ने पलटे.
वहाँ नाम नहीं था.
सिर्फ एक लाइन थी.
अगर यह डायरी किसी और के हाथ लगी. तो समझ लेना, मैं गलत साबित नहीं हुआ।
तारा की आँखें नम हो गईं.
पापा जानते थे, उसने कहा. उन्हें पता था कि उनकी जान को खतरा है।
अगले पन्ने पर लिखा था:
मैं आधिकारिक चैनल से नहीं जा सकता. बहुत गंदगी है.
अगर मैं रुका. तो ये गैंग और मजबूत होंगे।
यही वजह थी.
रणविजय मेहता मारे नहीं गए थे.
उन्हें हटाया गया था.
कबीर ने डायरी बंद की. उसकी आवाज में गुस्सा था. यह जानकारी आज तक किसी फाइल में नहीं थी।
क्योंकि पापा ने इसे सिस्टम से बाहर रखा, तारा ने कहा. उन्हें पता था कि सिस्टम सुरक्षित नहीं है।
कुछ देर तक गाडी में सन्नाटा रहा.
फिर तारा ने गहरी साँस ली.
अब मैं समझ गई हूँ, उसने कहा.
क्या? कबीर ने पूछा.
पापा ने खुद को खो दिया. ताकि यह सच बाहर आ सके. और मैं अगर अब रुक गई, तो उनकी मौत बेकार हो जाएगी।
कबीर ने उसकी तरफ देखा. तुम क्या करना चाहती हो?
तारा ने डायरी को कसकर पकडा. मैं उनका छोडा हुआ Mission पूरा करूँगी।
यह ऑफिशियल नहीं होगा, कबीर ने कहा. यह युद्ध होगा।
मुझे पता है, तारा ने शांत आवाज में जवाब दिया. लेकिन अब यह सिर्फ मेरा केस नहीं है. यह उन सबका है जिन्हें इन दो गैंग्स ने चुप करा दिया।
कबीर कुछ पल चुप रहा. फिर बोला, तो यह हमारा पहला Mission नहीं है।
तो? तारा ने पूछा.
यह हमारी लडाई की शुरुआत है, कबीर ने कहा.
रात को बेस में उन्होंने डायरी की हर लाइन स्कैन की. हर नाम, हर तारीख, हर संकेत. सिया ने कहा, अगर यह सच है, तो ब्लैक एशेस अभी भी एक्टिव है।
और नागवृत्त भी, कबीर ने जोडा. वे कभी खत्म नहीं होते, सिर्फ छुप जाते हैं।
तारा ने स्क्रीन की तरफ देखा. तो हम उन्हें ढूँढेंगे।
एक- एक करके, कबीर ने कहा.
तारा ने डायरी बंद की. उसकी आवाज में अब दर्द नहीं था.
सिर्फ संकल्प था.
आकृति मेहता ने अपने सपनों के लिए लडना छोडा था.
एजेंट तारा ने सिस्टम से लडना सीखा था.
और अब.
रणविजय मेहता की बेटी अपने पिता का अधूरा युद्ध पूरा करने जा रही थी.
यह Mission किसी फाइल में दर्ज नहीं होगा.
लेकिन इसका असर.
पूरे सिस्टम पर पडेगा.