Adhura Pyar - 1 in Hindi Horror Stories by Pooja Singh books and stories PDF | अधूरा प्यार - 1

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अधूरा प्यार - 1

मुंबई की चमकती ऊँची इमारतों में से एक — “नव्या ग्लोबल कॉर्प” का हेडक्वार्टर।
शीशे की दीवारों से ढका वो टॉवर शहर की ताकत और महत्वाकांक्षा का प्रतीक था।
और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पर बैठी थी — नव्या मल्होत्रा।
सिर्फ अट्ठाईस साल की उम्र में वो देश की सबसे तेज़ी से उभरती बिजनेस वीमेन बन चुकी थी।
उसकी आँखों में अब सपने नहीं — सिर्फ लक्ष्य थे।
दिल में अब मोहब्बत नहीं — सिर्फ रणनीतियाँ थीं।
लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था।
दो साल पहले…
नव्या प्यार में डूबी हुई एक साधारण लड़की थी।
उसके लिए दुनिया का मतलब था — ऋषभ।
ऋषभ कपूर।
वो लड़का जो उसकी मुस्कान का कारण था…
जिसने उसे यकीन दिलाया था कि प्यार हमेशा साथ निभाता है।
लेकिन एक रात… सब खत्म हो गया।
ऋषभ बिना कुछ कहे, बिना विदा लिए… गायब हो गया।
न कोई कॉल।
न कोई मैसेज।
न कोई स्पष्टीकरण।
बस एक ख़ामोशी… जो नव्या के दिल को तोड़ गई।
उसने समझ लिया —
वो धोखा देकर चला गया।
उस दिन के बाद नव्या मर तो नहीं गई…
लेकिन उसकी मोहब्बत मर गई।
आज…
“मैम, सिंगापुर डील फाइनल हो गई है।”
उसकी सेक्रेटरी ने कहा।
नव्या ने हल्की सी मुस्कान दी।
“अच्छा है। अगला टारगेट दुबई।”
उसकी आवाज़ में ठंडापन था।
लेकिन उसी पल…
ऑफिस की लाइट्स एक पल के लिए झिलमिलाईं।
एसी की ठंडी हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई।
नव्या ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“जनरेटर चेक करवाओ।”
“मैम, सब ठीक है,” सेक्रेटरी ने स्क्रीन देखते हुए कहा, “कहीं कोई फॉल्ट नहीं।”
नव्या ने फिर अपने लैपटॉप की तरफ देखा।
स्क्रीन अपने आप ब्लैंक हो गई।
फिर धीरे-धीरे उस पर कुछ शब्द उभरे —
“मैं वापस आ गया हूँ, नव्या।”
उसका दिल एक पल के लिए रुक गया।
उसने झटके से स्क्रीन बंद की।
“किसने हैक किया मेरा सिस्टम?” उसकी आवाज़ सख्त हो गई।
आईटी टीम तुरंत भागी चली आई।
लेकिन…
“मैम, सिस्टम में कोई लॉग-इन हिस्ट्री नहीं है। किसी ने कुछ एक्सेस नहीं किया।”
नव्या का गला सूख गया।
वो नाम…
वो अहसास…
उसे लगा जैसे किसी ने उसके कानों में फुसफुसाया —
“मैंने कहा था ना… मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”
उसने पलटकर पीछे देखा।
कोई नहीं था।
उसी रात…
नव्या अपने पेंटहाउस में अकेली खड़ी थी।
शहर की रोशनी नीचे चमक रही थी।
लेकिन उसके कमरे में अजीब सा सन्नाटा था।
उसने खुद से कहा —
“ये सब मेरे दिमाग का वहम है। ऋषभ मर चुका है… या शायद जिंदा भी हो तो मेरे लिए मर चुका है।”
लेकिन क्या वो सच में मर चुका था?
शहर के दूसरे कोने में…
एक पुरानी, बंद पड़ी फैक्ट्री के अंदर।
चार आदमी एक लड़की को पकड़कर खींच रहे थे।
“नव्या मल्होत्रा को मैसेज देना है। उसकी कंपनी बंद नहीं की तो अगली बारी उसकी होगी।”
अचानक…
हवा भारी हो गई।
दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
लाइट्स फट गईं।
चारों आदमी घबराकर इधर-उधर देखने लगे।
“क… कौन है?”
अंधेरे में एक आकृति उभरी।
लंबा कद।
काली परछाईं।
आँखों में हल्की नीली चमक।
“जिसे तुम छूने की सोच भी नहीं सकते…”
एक गूंजती हुई आवाज़ फैली।
“नव्या तक पहुँचने के लिए… पहले मुझसे गुजरना होगा।”
उनमें से एक ने डरते हुए पूछा —
“तू… तू कौन है?”
परछाईं आगे बढ़ी।
“उसकी मौत… जो अभी बाकी है।”
अगले ही पल फैक्ट्री में चीखें गूँज उठीं।
लेकिन कोई खून नहीं…
कोई हथियार नहीं…
बस चारों आदमी जमीन पर बेहोश पड़े थे।
और लड़की… सुरक्षित।
जब वो होश में आई, तो उसके हाथ में एक चिट्ठी थी —
“उसे बताना… वो अकेली नहीं है।”
साइन…
सिर्फ एक अक्षर —
R
अगली सुबह।
नव्या को खबर मिली कि उसके दुश्मन विक्रम अरोड़ा की टीम के चार आदमी रहस्यमयी तरीके से अस्पताल में भर्ती हैं।
डॉक्टरों का कहना था —
उनके शरीर पर कोई चोट नहीं…
लेकिन जैसे किसी ने उनकी आत्मा को छू लिया हो।
नव्या के दिमाग में वही शब्द गूँजे —
“मैं वापस आ गया हूँ।”
उसने गुस्से में खुद से कहा —
“अगर ये कोई गेम खेल रहा है… तो मैं उसे बर्बाद कर दूँगी।”
लेकिन उसे क्या पता था —
ये कोई इंसान का खेल नहीं था।
रात के दो बजे।
नव्या के कमरे का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।
वो गहरी नींद में थी।
हवा उसके बालों को हल्के से छू रही थी।
बिस्तर के पास एक साया खड़ा था।
उसने हाथ बढ़ाया…
लेकिन छू नहीं पाया।
उसकी आवाज़ फुसफुसाई —
“काश तुम जान पाती… मैं गया नहीं था।”
उसकी आँखों में दर्द था।
हाँ…
वो ऋषभ था।
लेकिन ज़िंदा नहीं।
दो साल पहले जिस रात वो गायब हुआ था…
वो दरअसल मारा गया था।
नव्या के ही दुश्मनों ने।
उसकी मौत को हादसा बना दिया गया।
लेकिन मरते वक्त उसने एक वादा किया था —
“जब तक नव्या सुरक्षित नहीं होगी… मैं नहीं जाऊँगा।”
और शायद उसी वादे ने उसे लौटा दिया।
अब वो इंसान नहीं रहा था।
वो एक शक्ति था।
अधूरी मोहब्बत की शक्ति।
अधूरी मौत की शक्ति।
और अब…
वो लौट आया था।
अपने प्यार को बचाने।
और अपने दुश्मनों को खत्म करने।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था —
अगर नव्या को सच्चाई पता चली…
तो क्या वो उस पर भरोसा करेगी?
या फिर उसे भी डर लगेगा…
उससे…
जो मरकर वापस आया है?