रह-रहकर उसका शरीर सिहर उठता। तभी झट से दरवाजा खोल कर उसका दोस्त रमेश भीतर दाखिल हुआ और उसे पर गुस्से से चिल्लाते हुए बोला।
"क्यों बे साले मोनालिसा कहां है ? अकेले-अकेले मजा लूटना चाहता है ? तेरी सारी हरकत में डॉक्टर साहब को बता दूंगा। नौकरी चली जाएगी, देख ले।"
अजय को सामने देख वो खुशी के मारे पागल हो गया।
"अजय तू जिंदा है ? "
" जिंदा हूं का क्या मतलब ? मुझे क्या हुआ है ?"
" मैं... मैंने अभी-अभी तुझे पोस्टमार्टम रूम में टेबल पर सफेद कपड़े में देखा था।''
'' मतलब तूने शराब भी अकेली ही पी ली।"
'' नहीं , मैं शराब नहीं पी । यह देख , बोतल अभी भी मेरे पास है।''
और टेबल के नीचे रखी उस बोतल को उठाकर अजय को दिखाई।
''अबे वह शराब के नहीं, पानी की बोतल है । उसमें पानी है। शायद तेरा दिमाग खराब हो गया है। बोतल का पानी अपने सर पर डाल और ठंडा हो जा। और बता मोनालिसा कहां है ?''
उसे काफी गुस्सा आया उसने सचमुच वह बोतल अपने सर पर डालकर खाली कर के बोला।
''मुझे सच में नहीं पता मोनालिसा कहां है, मैं खुद उसे ढूंढ रहा हूं। और खून से सने मेरे हाथ देख। ''
इतना कहकर उसने अपने खून से सने हाथों को सामने करके अजय को दिखाया पर। उस कमरे में उसका दोस्त नहीं था। वह अकेला ऑफिस के कमरे में खड़ा था। और अजीब सी स्मेल उसे अपने कपड़ों से आ रही थी। उसने जमीन पर पड़ी उस बोतल को देखा तो वह अति ज्वलनशिल द्रव था। कुछ देर पहले वह शराब की बोतल समझ कर वो बोतल उठा ले आया था। और अब उसने अपने उपर उस ज्वलनशील द्रव को डाल दिया था। तभी उसे अपने पीछे किसी की आहट महसूस हुई। मोनालिसा की गूंजती हंसी उसके कानों में किसी तपते लाव्हा की तरह घुलने लगी।
" मुझे माफ़ कर दो ! मैं दोबारा कीसी के साथ ऐसी हरकत नहीं करूंगा।"
वो रोता बिलखता हाथ जोड़कर अपनी जान की भिख मांगने लगा। तभी उसे एक कार का हॉर्न सुनाई दिया। उसकी आंखें चमक उठी । दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। क्योंकि यह हॉर्न डॉक्टर साहब की कार का था। मतलब वे आ चुके थे। वह उस कमरे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा और मोनालिसा धीरे-धीरे उसके करीब आती महसूस हुई। तभी मोनालिसा की हल्की आवाज उसकी कानों में गूंजने लगी
"क्या हुआ ? डर लग रहा है ?"
और एक खौफनाक हंसी चारों तरफ गुंजने लगी।
वो डरावनी हंसी सुनकर तेज कदमों से दरवाजे की तरफ भागा और दरवाजा खोल कर बाहर दौड़ पडा पर बाहर हाथ में सिगरेट जलाकर चलते डॉक्टर साहब के साथ आये एक और आदमी से टकरा गया और टॉर्च गीर कर बरामदे में गोल गोल घुमाते जाने लगी। सिगरेट की आग उसकी कपड़ों में लग गई और देखते ही देखे उसे आग की लपटों ने घेर लिया। पलक झपकते घटी उस घटना से वो दंग रह गए। आग की लपटों में घिरा वह जोर-जोर से चीखने लगा चिल्लाने लगा और बाहर की तरफ भागने लगा। पर कमरे की दीवार से टकराकर वह जमीन पर गिर गया और फिर ना उठ सका। देखते ही देखते वह बुरी तरह से जलकर तड़पने लगा। डॉक्टर साहब और उनके साथ आये उस दुसरे आदमी ने जैसे तैसे उसकी आग बुझाई और उसे स्ट्रेचर पर लाद कर एक कमरे में ले गए ।
डॉक्टर साहब ने उसकी हालत देखकर कहा।
" इसे अस्पताल लेकर जाना होगा। "
तभी उनके साथ आया आदमी बोला।
" नहीं , पहले मोनालिसा को ठिकाने लगाओ।"
" पर तब तक मर जायेगा।"
" मर जाने दो, मुझे परवाह नहीं। पर मोनालिसा बच गई तो मैं जरूर मर जाऊंगा। "
" अरे वो पागल है, और अदालत ने भी उसे पागल करार दिया है।"
" अदालत ने वो फैसला कीया जिसके सबुत और गवाहों को खरीद कर हमने सामने रखा। तु भी जानता है कि वो पागल नहीं है । और ये बात जबतक वो जिंदा है तबतक कैसे भी बाहर जा सकती है। कल वो न्युज रिपोर्टर इसकी हालत देखने आने वाली है। गलती से उसे कुछ ऐसा पता चल गया जो इसकी दिमागी हालत को सही बता सके तो मैरी जिंदगी बर्बाद हो जायेगी। तुझे काम करना ही होगा। तुझे और पैसे चाहिए , दुंगा। पर पहले उसे खत्म कर। मुझे उसकी लाश देखनी है।"
इतना कहकर वो दोबारा जाने लगा, तभी पीछे से डॉक्टर ने कहा।
"तुम्हें भी यह जान लेना चाहिए कि अगर मैं इस केस में फस गया तो मुझे सिर्फ कुछ दिनों की जेल होगी पर तुम जिंदगी भर बाहर की दुनिया नहीं देख सकोगे। इसलिए बेहतर होगा कि अपने दोस्तों को बुलाकर या जो परेशानी खड़ी हुई हैं उसे सुलझाने के कोशिश करो ।"
डॉक्टर की बात सुनने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं था। अपनी कार में बैठते हुए उसने अपने बाकी साथियों को कॉल लगाया।
डॉक्टर ने भी मुठ्ठी भींचते हुए जमीन पर पड़ी टॉर्च उठाई और मोनालिसा के कमरे की तरफ जाने लगे। उनके जुतों की आवाज उस सन्नाटे को चीरते हुए पुरे अस्पताल में गुंजने लगी। दरवाजा खोलकर उन्होंने भीतर रौशनी डालकर देखा, तो वहां मोनालिसा की लाश नहीं थी ना ही सुनिता थी। अब वह सुनीता को आवाज लगाकर गलियारे में घूमने लगे।
''सुनीता कहां हो तुम , अजय, सुनिता कहां हो तुम लोग।''
और तभी वह एक जगह रुक गये। उन्होंने देखा की तहखाने की तरफ उतरती उन सीढ़ियों से कोई नीचे जा रहा है। उन्होंने हाथ में पकड़ी टोर्च की रोशनी डाली पर तब तक वह जो कोई भी था पोस्टमार्टम कमरे के भीतर जा चुका था। उन्होंने सीढ़ियां उतरना शुरू की और पोस्टमार्टम कमरे के बाहर खड़े होकर दरवाजा पीटने लगे।
"अजय, सुनीता क्या तुम दोनों अंदर हो ? देखो तुम्हारे अफेयर से मुझे कोई लेना-देना नहीं है । पर इस वक्त हम एक बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे हैं । जल्दी से बाहर निकलो और मेरी मदद करो।"
पर अंदर से कोई जवाब नहीं आया। वह दरवाजे पर दस्तक देने ही वाले थे पर तभी दरवाजा खुद ब खुद भीतर की तरफ खुलने लगा।
वह भीतर दाखिल हुए तो टॉर्च की रोशनी में उनकी नजर पोस्टमार्टम टेबल पर गई जहां सफेद कपड़े में एक लाश रखी हुई थी। वे हैरान हो गए।
"ये किस की लाश हैं ? और यहां किसने रखी ? ये पोस्टमार्टम कमरा तो कई सालों पहले ही बंद किया गया है।"
वे धीरे धीरे भीतर की तरफ जाने लगे , तभी पीछे से दरवाजा बंद होने की आवाज आई । उन्होंने झट से मुड़कर देखा पर बीना कुछ सोचे वह उस लाश की तरफ चलने लगे। गहरे सन्नाटे में आवाज आ रही थी तो बारीश की बूंदों की, वे धीरे धीरे लाश के करीब पहुंचे। और लाश के उपर ढका कपड़ा हटाकर देखा तो वे सन्न रह गए। क्योंकी उस टेबल पर मोनालिसा की लाश थी।
" इसकी लाश यहां लाने की क्या जरूरत थी। यह दोनों मुझे एक दिन बूरी तरह फंसा देंगे "
गुस्से में उन्होंने जेब से मोबाइल निकाला और अपने दुसरे कर्मचारी अजय को फोन करने लगे, पर मोबाइल की आवाज उसी कमरे से आ रही थी। वे चौंक गए। उन्होंने आवाज की दिशा में चलना शुरू किया। मोबाइल की रिंग की आवाज अब बढ़ती हुई सुनाई दी।
आवाज का पीछा करते हुए वे पोस्टमार्टम कमरे की दांई तरफ बने बाथरूम के पास पहुंचे। हांथ में पकड़ी टॉर्च की लाईट की रोशनी अब भी आंख मिचौली खेल रही थी। उन्होंने धीरे से बाथरूम का दरवाजा खोला। और भीतर मोबाइल के टॉर्च की रौशनी डालते हुए देखने लगे और उनके पैरों के नीचे से जमीन सरक गई। कांपते हाथों पकड़ी टॉर्च की रोशनी में भीतर उनका वही आग में झुलसा हुआ कर्मचारी डर के मारे अपना बदन सिकुड़ कर बैठा दरवाजे की तरफ देख कर दर्द से कराह रहा था। जैसे ही डॉक्टर को देखा वो और जोर से कराहते हुए रोने लगा ।
" तुम.... तुम यहां क... कैसे..?"
डॉक्टर की जबान लड़खड़ा रही थी। पर तभी उस कर्मचारी की आंखें बड़ी हो गई थी। चेहरे पर मौत का डर साफ़ साफ़ नज़र आने लगा। क्योंकी डॉक्टर के पीछे उसने एक बेहद ही डरावनी हंसी में मुस्कुराता साया देखा था। मौत का साया। मोनालिसा की डरावनी मुस्कराहट उसके दिल को चीर रही थी। डॉक्टर ने धीरे धीरे अपनी गर्दन घुमाई और पीछे मुड़कर देखा तो पीछे मोनालिसा खड़ी थी। उसकी आंखों में देख डॉक्टर के दिल की धड़कन ही मानो रूक गई।
******
बाहर तेज बारिश हो रही थी। तभी एक और कार मेंटल एसाइलम के उस बड़े से आंगन में आकर पहले से खड़ी कार के पास आकर रुक गई। अपनी गाड़ी से उतर कर तीनों लोग उस गाड़ी में जाकर बैठ गए । गाड़ी में बैठा वह शख्स हाथ में सिगरेट लिए मोबाइल पर एक वीडियो देख रहा था। उसकी तरफ देखते हुए घबराए हुए दूसरे शख्स में पूछा
"क्या बात है.? हमें यहां क्यों बुलाया.?"
मोबाइल पर उस वीडियो को देखते हुए सिगरेट का एक कश लेकर वह शख्स धीरे से बोला।
"मजा मिलकर किया था ना, तो बाकी बातों से मैं अकेला क्यो निपटू।"
तभी कार के सामने की कांच पर टॉर्च की रौशनी पड़ती दिखाई दी। उसने व्हायपर शुरू कर के देखा तो डॉक्टर वर्मा इशारे से बुला रहे थे।
" चलो , सबकुछ निपटाकर आते हैं "
मोबाइल गाड़ी में रखकर चारों अस्पताल के भीतर जाने लगे। बारिश और तेज हो गई। और वो मेंटल असायलम पूरी तरह से रात के घने अंधेरे में खो गया।
दुसरे दिन।
न्युज चैनल पर लगातार एक न्युज चल रही थी। न्यूज़ एंकर चिल्ला चिल्लाकर वह न्यूज़ बता रही थी।
"क्या अपने उपर हुए अत्याचार की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करना गुनाह है ? आज हम ये सवाल इसलिए उठा रहे हैं , क्योंकि उसने अदालत से इंसाफ की उम्मीद की थी। पर उसे कहां पता था कि इंसाफ के लिये पैसे की चादर बिछानी पड़ती है। उस मासुम का रेप तो एक बार हो गया। पर भरी अदालत में उन गुनहगारों को बचाने के लिए उनके चार चार वकील उस पिडिता को ही दोषी साबित करते रहे। उसे बदचलन, जिस्म बेचने वाली, धंधा करने वाली कह कर उसका मानसिक रेप किया गया ! और इससे भी एक कदम आगे जाकर इसी को उसका पेशा दिखाया. वो चिखती रही , चिल्लाती रही तो उसे मानसिक तौर पर बीमार साबित किया गया। अदालत ने उसे मेंटल असायलम भेज कर गुनहगारों को बाइज्जत रिहा कर दिया। और पिछले डेढ़ महीने से वो मेंटल असायलम में शॉकट्रिटमेंट झेल रही थी। पर हम आज ये क्यो बता रहे हैं ?
क्योंकी कल उसकी हत्या हो गई। जी हां सही सुना आपने, उसकी हत्या की गई। और सिर्फ उसकी ही नहीं , उस अस्पताल में काम करने वाले दो ओर कर्मचारीयों की भी हत्या कर दी गई और यह हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उन्हीं चार दरिंदों ने की है। जिसके पक्के सबुत पुलिस के पास है। पुलिस ने बताया के रात के समय मोनालिसा को खत्म करने चारों दरिंदे अस्पताल पहुंचे। पहले सुनीता नाम की महिला कर्मचारी ने विरोध किया । तो उसके सिर में डंडा मारकर बेहोश कर दिया , पर जब दो कर्मचारी उसे बचाने आए तो इन चारों ने उन में से एक को तेज धार वाले हथियार से काट दिया और दूसरे को जिंदा जला दिया। पर जिसे जिंदा जलाया उस कर्मचारी ने मरते वक्त डॉक्टर को फोन करके इसकी जानकारी दी। उन दरिंदो ने डॉक्टर पर भी जानलेवा हमला किया। डॉक्टर को दिल का दौरा पड़ने की वजह से वे आय.सी.यु. में भर्ती है और महिला कर्मचारी पर अस्पताल में इलाज चल रहा है । और पुलिस ने चारों दोषियों को गिरफ्तार कर लिया है जिनके पास मिले मोबाइल के भीतर वह वीडियो भी मिल गई जिसमें साफ-साफ नजर आ रहा है कि मोनालिसा का रेप इन्हीं चारों ने मिलकर किया था। मोनालिसा तो मर चुकी हैं, पर क्या अब यह इंसाफ उसके लिए कुछ मायने रखता है ? "
तभी वो महिला एंकर एकदम से चूप होकर कुछ सुनने लगती है। शायद उस के पास कोई ब्रेकिंग न्यूज पहुंच गई थी। उसकी आंखें आश्चर्य से बड़ी हो गई। और थोड़ा गुस्से में वो वह न्युज बताने लगती है।
" बेहद शर्मनाक न्युज । पोस्टमार्टम कमरे से मोनालिसा का शव गायब हो चुका है, यह बेहद ही शर्मनाक घटना है। इतनी लापरवाही, एक पीड़िता का शव पोस्टमार्टम कमरे से गायब हो चुका है। "
और इधर बेड पर पड़ी सुनिता अपने सामने चल रही उस न्यूज़ को देखकर खुद से बुदबुदाई।
" अब वो खुद फैसला करेगी । कब , किसे , कहां और किस तरह की मौत देनी है, इसका। "
Story by Sanjay Kamble
समाप्त....