जिम के काम निपटाने के बाद वंशिका भारी मन से शबनम के बताए पते पर पहुँची। यह शहर की जानी-मानी एडवोकेट महिमा का दफ्तर था। महिमा अपनी तीखी बुद्धिमत्ता और पारिवारिक विवादों को सुलझाने की अपनी अनूठी शैली के लिए प्रसिद्ध थीं।
दफ्तर के भीतर पहुँचते ही वंशिका ने अपनी पूरी कहानी कह सुनाई—भूपेंद्र का विश्वासघात, काया की घुसपैठ और मनोरमा की चुप्पी। महिमा ने बड़े गौर से सब सुना और फिर एक गहरी नज़र वंशिका पर डाली।
"वंशिका, पहली गलती तुम्हारी है," महिमा ने सपाट लहजे में कहा। वंशिका ठिठक गई। महिमा ने आगे कहा, "तुम्हें उसे घर पर रखना था, तो अपनी आँखों के सामने रखना था। पति को नियंत्रण में रखना तुम्हारी ज़िम्मेदारी थी। तुम्हारी इसी ढील और अत्यधिक भरोसे का नतीजा है कि आज बात यहाँ तक पहुँच गई।"
वंशिका ने नीची गर्दन करके अपनी गलती स्वीकार की। "हाँ, मुझे लगा था कि मेरा रिश्ता इतना कमज़ोर नहीं है कि कोई तीसरा इसे हिला सके।"
महिमा मुस्कुराई, "अपनी गलती मानना बहादुरी है, लेकिन तुम्हारे पति की गलती तुमसे कहीं बड़ी है। अगर तुम अपना फर्ज़ नहीं निभा पा रही थीं या व्यस्त थीं, तो यह उसकी ज़िम्मेदारी थी कि वह तुम्हें टोकता, तुम्हारा फर्ज़ याद दिलाता। तुम्हें व्यस्त देख बाहर मुँह मारना किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि चरित्रहीनता है। और रही बात तुम्हारी सास की, तो उन्होंने अपने बेटे को न रोककर इस पाप में बराबर की हिस्सेदारी की है।"
महिमा ने फिर बारीकी से भूपेंद्र के बारे में पूछना शुरू किया। "क्या वह हमेशा से ऐसा था? या काया के आने के बाद बदला?"
वंशिका ने लंबी सांस ली। "मैम, दुनिया की नज़रों में वह एक मर्यादा पुरुषोत्तम और आदर्शवादी व्यक्ति है। लेकिन वास्तव में वह वैसा नहीं है। एक बार उसका मोबाइल गलती से लॉगिन रह गया था, तब मैंने उसकी चैट पढ़ी थी। मैं दंग रह गई। वह लड़कियों को आपत्तिजनक और अश्लील मैसेज भेजता था। उसने कई फेक अकाउंट्स बना रखे थे—सिर्फ लड़कों के नाम से ही नहीं, लड़कियों के नाम से भी।"
महिमा की भौहें तन गईं। "लड़कियों के नाम से फेक अकाउंट?"
"जी," वंशिका ने बताया। "उन अकाउंट्स पर वह लड़कियों की भद्दी और आपत्तिजनक तस्वीरें पोस्ट करता था, भड़काऊ बातें लिखता था। जब मैंने उसे रंगे हाथों पकड़ा, तो वह बहुत नाराज़ हुआ। उसने झूठ कहा कि ये अकाउंट उसके किसी दोस्त के हैं, जो उसने मुझे दिखाने के लिए लॉगिन किए थे।"
महिमा ने अपनी कलम मेज पर रखी और ठंडी मुस्कान के साथ कहा, "यह बहुत आम बात है वंशिका। इस देश के 80 प्रतिशत पुरुष ऐसा ही दोहरा जीवन जी रहे हैं। बाहर वे नैतिकता और मर्यादा का चोला ओढ़ते हैं, लेकिन भीतर उनके एक गहरी वासना और विकृति छिपी होती है जो वे इंटरनेट की गुमनामी में ज़ाहिर करते हैं। तुम्हारा पति बस उन फेक अकाउंट्स की दुनिया से निकलकर अब असल ज़िंदगी में काया के साथ वही गंदगी कर रहा है।"
वंशिका की पूरी बात सुनने के बाद, एडवोकेट महिमा ने कागज़ पर कुछ पॉइंट्स लिखे और उसे ठोस कानूनी सुझाव दिए.... "सबसे पहले, तुम्हें उन फेक अकाउंट्स और उन चैट्स के स्क्रीनशॉट या सबूत जुटाने होंगे। अगर तुम साबित कर सको कि वह पहले से ही इस तरह की विकृतियों में लिप्त था, तो कोर्ट में उसका आदर्शवादी मुखौटा गिर जाएगा। काया के साथ उसके संबंधों के फोटो या वीडियो भी बहुत काम आएंगे। उसने जिस तरह से तुम्हारे सामने, तुम्हारे ही घर में दूसरी औरत के साथ अश्लीलता की, वह मानसिक क्रूरता के अंतर्गत आता है। हम इसी आधार पर तलाक और भारी हर्जाने का केस फाइल करेंगे। चूँकि वह घर पर बैठकर अपनी नौकरी दांव पर लगा रहा है और घर में एक गैर-औरत को रखा हुआ है, ऐसे में बच्चों के लिए वह माहौल सुरक्षित नहीं है। कोर्ट बच्चों की कस्टडी तुम्हें ही देगा। साथ ही, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए हमें उसकी संपत्ति और सैलरी से हिस्से की माँग करनी होगी। हम कोर्ट से स्टे ऑर्डर या
इंजेक्शन की माँग करेंगे कि काया उस घर में नहीं रह सकती। चूँकि वह घर तुम्हारी और उसकी संयुक्त मेहनत का है, तुम उसे कानूनी तौर पर वहां से निकलने के लिए मजबूर कर सकती हो। अगर वह नहीं मानती, तो हम पुलिस की मदद लेंगे। अगर वह आसानी से नहीं मानता, तो हम उस पर और उसकी माँ पर उत्पीड़न का मामला दर्ज कराएंगे। मनोरमा ने जिस तरह काया को शह दी है, वह भी अपराध में शामिल मानी जाएगी।"
महिमा ने अंत में कहा, "वंशिका, अब भावना का नहीं, दिमाग का खेल है। वह तुम्हें कमजोर समझ रहा है, उसे नहीं पता कि तुम उसे सड़क पर लाने की पूरी तैयारी कर चुकी हो। घर जाओ, लेकिन अब एक पत्नी की तरह नहीं, एक जासूस की तरह रहो। हर सबूत को सहेज लो।"
वंशिका जब महिमा के दफ्तर से बाहर निकली, तो उसकी आँखों में एक नई चमक थी। उसे अब पता था कि उसे भूपेंद्र को कहाँ से और कैसे चोट पहुँचानी है।
वंशिका एडवोकेट महिमा के दफ्तर से निकलकर भारी कदमों से घर की ओर लौट रही थी। उसका मन कानूनी दांव-पेंचों में उलझा था, लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं था कि उसके अपने ही बेडरूम में इस वक्त उसकी गृहस्थी की आखिरी ईंटें उखाड़ी जा रही हैं।
बेडरूम के भीतर हवा भारी और उत्तेजक थी। भूपेंद्र का विवेक पूरी तरह काया की देह के आकर्षण में भस्म हो चुका था। वह पागलों की तरह काया के होंठों को चूम रहा था, जैसे वह अपनी पूरी उम्र की प्यास आज ही बुझा लेना चाहता हो। लेकिन काया, जो एक शातिर शिकारी की तरह अपना जाल बुन रही थी, उसने अचानक भूपेंद्र को ज़ोर से धक्का देकर खुद से अलग कर दिया।
भूपेंद्र, जो मदहोशी के चरम पर था, इस अचानक आए अवरोध से तिलमिला उठा। "क्या हुआ काया? क्यों रुक गई?" उसकी आवाज़ में एक अजीब सी घबराहट और तड़प थी।
काया ने चादर को अपने बदन से लपेटा और बिस्तर के कोने पर जाकर बैठ गई। उसकी आँखों में बनावटी आँसू तैरने लगे। "साहब, आप मुझे यहाँ ले तो आए, इस बेडरूम में पटक भी दिया, लेकिन किस हक से? कल जब समाज पूछेगा, तो मैं क्या कहूँगी? दुनिया की नज़रों में तो आपकी पत्नी वही वंशिका रहेगी। मैं तो बस एक दूसरी औरत बनकर रह जाऊँगी, जिसका इस्तेमाल सिर्फ बिस्तर तक सीमित है।"
भूपेंद्र उसकी ओर बढ़ा और उसके हाथ पकड़कर बोला, "ऐसा मत कहो काया! हम दोनों को अब कोई अलग नहीं कर सकता। वह सिर्फ कागजों पर पत्नी है, मेरे दिल और इस जिस्म पर सिर्फ तुम्हारा हक है।" वह फिर से उसकी ओर झपटा, लेकिन काया फुर्ती से पीछे सरक गई।
काया ने सिसकियाँ लेते हुए अपनी आवाज़ को और भी बेबस और भोली बना लिया। "नहीं साहब, ये गलत है। कल को आपके बच्चे, आपकी माँ और ये समाज मुझे गालियाँ देगा। मुझे घर तोड़ने वाली कहा जाएगा। मैं यह कलंक लेकर नहीं जी सकती। अगर आप मुझे सच में चाहते हैं, तो मुझे वह सम्मान दीजिये जो एक पत्नी का होता है।"
भूपेंद्र की तड़प अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी। काया की देह का सामीप्य उसे वहशी बना रहा था। उसने काया के कंधे मज़बूती से पकड़े और दहाड़ा, "जुबान खींच लूँगा उसकी जो तुम्हें दूसरी औरत कहेगा! तुम मेरी हो, सिर्फ मेरी!"
काया ने उसकी आँखों में आँखें डालकर आखिरी वार किया, "सिर्फ कहने से क्या होता है साहब? क्या आप मुझसे शादी करेंगे? क्या आप मुझे वो मंगलसूत्र पहनाएंगे जो अभी वंशिका के गले में है?"
भूपेंद्र, जो उस वक्त सिर्फ काया को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था, उसने बिना सोचे-समझे चिल्लाकर कहा, "हाँ! मैं करूँगा शादी! मैं उसे तलाक दूँगा और तुम्हें इस घर की असली मालकिन बनाऊँगा। बस अब और दूर मत रहो मुझसे!" उसने काया को झटके से बिस्तर पर लिटा दिया और अपना पूरा वज़न उसके ऊपर डाल दिया। काया के चेहरे पर एक छद्म संतुष्टि की लहर दौड़ गई। उसे पता था कि उसने मछली को जाल में फंसा लिया है। जैसे ही उसे भूपेंद्र से शादी का वादा मिला, उसने अपनी प्रतिरोध की दीवारें गिरा दीं और खुद को भूपेंद्र के हवाले कर दिया।
क्रमशः
ज्योति प्रजापति
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