आइए कानपुर के बारे कुछ जानकारी बताते हैं -
कानपुर उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्रसिद्ध जिला है। कानपुर का इतिहास बहुत पुराना और गौरवशाली रहा है। एक पौराणिक कथा के अनुसार ध्रुव जी ने इसी स्थान पर परमेश्वर की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। बाद में वे ध्रुव तारे के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनके नाम से जुड़ा ध्रुव टीला आज भी कानपुर के बिठूर में स्थित है।
यह एक ज्ञात तथ्य है कि ब्रिटिश शासन के दौरान कानपुर को पहले कान्हपुर के नाम से जाना जाता था। उस समय कानपुर एक बहुत बड़ा औद्योगिक केंद्र था। यहाँ कपड़ा उद्योग बहुत अधिक विकसित था, इसलिए इसे “पूर्व का मैनचेस्टर” भी कहा जाता था। इतिहास के अनुसार समय-समय पर इस शहर का नाम कई बार बदला गया। ऐसा माना जाता है कि लगभग 21 बार कानपुर के नाम में परिवर्तन हुआ।1) कन्हैयापुर / कान्हापुर
एक लोकप्रचलित कथा के अनुसार इस जिले की स्थापना एक हिंदू राजा चंदेल सिंह ने की थी। कहा जाता है कि वे भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे। राजा ने भगवान कृष्ण के जन्मदिन जन्माष्टमी के दिन इस स्थान की स्थापना की थी। इसलिए इस स्थान को “कन्हैयापुर” के नाम से जाना जाने लगा, जिसे बाद में “कान्हापुर” और फिर “कान्हपुर” के रूप में संक्षिप्त कर दिया गया।2) कर्णपुर
कानपुर का इतिहास महाभारत से भी जुड़ा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस शहर को माता कुंती के पुत्र कर्ण ने बसाया था। इसी कारण इस स्थान का नाम “कर्णपुर” पड़ा।3) खानपुर
कुछ इतिहासकारों के अनुसार कानपुर पहले छोटे-छोटे गाँवों और रियासतों का समूह था। यहाँ मुस्लिम प्रतिष्ठान की संख्या अधिक होने के कारण इस स्थान को “खानपुर” कहा जाने लगा।अंग्रेजों द्वारा दिए गए नाम
अंग्रेजों को जब इस क्षेत्र के महत्व का एहसास हुआ तो उन्होंने इस शहर को अलग-अलग नामों से पुकारा। अंग्रेजों द्वारा दिए गए कुछ नाम थे — कैनपुर, कैनपोर और अंत में कानपुर।
कानपुर में अंग्रेजों के प्रति काफी नाराजगी थी क्योंकि यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख केंद्र था। इस विद्रोह ने ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था और उस समय यहाँ बहुत अधिक रक्तपात हुआ था।औद्योगिक और व्यापारिक महत्व
पहले के समय में कपड़ा उद्योग के कारण कानपुर को भारत का “मैनचेस्टर” कहा जाता था। आज भी कानपुर को उत्तर प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी के रूप में जाना जाता है।
कानपुर गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह शहर विशेष रूप से चमड़े के सामान के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ अनाज, चीनी, रिफाइनरी, उर्वरक, वनस्पति तेल और रसायनों का भी उत्पादन होता है।प्रशासनिक इतिहास
24 मार्च 1803 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कानपुर को एक जिला घोषित किया था। 1803 से लेकर 2022 तक कानपुर को जिला घोषित हुए 219 वर्ष पूरे हो चुके हैं।वर्तमान समय
अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। कानपुर अब बहुत आगे बढ़ चुका है और इस शहर ने कई उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। शिक्षा, उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में कानपुर ने लगातार प्रगति की है।
कानपुर के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है।तो यह थी कानपुर के बारे में एक छोटी-सी ऐतिहासिक कहानी।