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सभी हनुमान जी एवं शनिदेव जी भक्तों को शुभ संध्या वंदन शनिवार, शनिवार संध्याकाल रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
ॐ हं हनुमते नमः- ब्रह्मदत्त
ॐ नीलांजनसमाभासं
रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं
नमामि शनैश्चरम्

हनुमान जी.... जय जय जय शनिदेव महाराज जी..... आपको संध्या
बारंबार
प्रणाम नमन नमस्कार है
हनुमान जी....... जय जय जय शानदेव महाराज जी...... आपको
संध्या
वंदन
नमन
नमस्कार
संध्याकाल संध्यावंदन
ब्रह्मदत्त त्यागी का नमस्कार स्वीकार करें
"ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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मुझे लगा कि ग्रुप मेंबर्स को यह अच्छा लगेगाMata Durga ke Navratri
Shubh Sandhya vandan
Mata Chandraghanta
मां चंद्रघंटा
आरती ब्रह्मदत्त
Shubh Navratri
Shubh Navratri
जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम आरती देवी चन्द्रघण्टा को समर्पित है। देवी चन्द्रघण्टा माता
पार्वती के नौ अवतारों में से एक हैं और नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा की जाती है। जय
माता पार्वती दुर्गा की जय........
मां दुर्गा के सभी भक्तों को संध्या वंदन की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी
॥ आरती देवी चन्द्रघण्टा जी की ॥
जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम ॥
चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
मन की मालक मन भाती हो।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो ॥
सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली ॥
हर बुधवार को तुझे ध्याये।
श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए ।
मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगत दाता॥
कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
कर्नाटिका में मान तुम्हारा ॥
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी ॥
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
BrhamduttaTyagi Hapur
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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मां दुर्गा पार्वती आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का आज माता दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा देवी आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का....... मां दुर्गा के सभी भक्तों को ग़ौरी नन्दन महादेव महाकाल पुत्र श्री गणेश जी को नमन नमस्कार है श्री गणेश एवं मां दुर्गा भक्तों को शुभ बुधवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई आज सितंबर माह का 28 वां दिन अर्थात 28/09/2022
तीसरा नवरात्रि मां चंद्रघंटा नवरात्रि पर्व व्रत है । माता चंद्रघंटा देवी के विषय में संपूर्ण जानकारी...... विस्तार पूर्वक ➖ ब्रह्मदत्त
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माता का तीसरा रूप मां चंद्रघंटा शेर पर सवार हैं। दस हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
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मंत्र
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पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
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वस्त्र-
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मां चंद्रघंटा की पूजा में उपासक को सुनहरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
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पुष्प-
मां को सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण करें।............ ➖ ब्रह्मदत्त
मां दुर्गा को आज किस प्रकार भग भोज अर्पित करें ब्रह्मदत्त त्यागी
भोग-

मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए।

मां चंद्रघंटा की करें इन शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 ए एम से 05:24 ए एम।
विजय मुहूर्त- 02:11 पी एम से 02:59 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 05:59 पी एम से 06:23 पी एम
अमृत काल- 09:12 पी एम से 10:47 पी एम
रवि योग- 05:52 ए एम, सितम्बर 29 से 06:13 ए एम, सितम्बर 29.............. ➖ ब्रह्मदत्त
आज मां दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा देवी की स्तुति करें और मां दुर्गा को अपनी भक्ति भेंट कर मां से आशीर्वाद प्राप्त करें ब्रह्मदत्त ........
तीसरा नवरात्रि पर्व
व्रत सभी भक्तों को शुभ हो मंगलमय हो
ब्रह्मदत्त त्यागी
ॐ गं गणपते नमः जय श्री गणेशाय नमः
-ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़.
श्री गणेश जी मंत्र ब्रह्मदत्त
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ!
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा !!
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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द्वितीय नवदुर्गा माँ ब्रह्मचारिणी➖ एवं बजरंगबली हनुमान जी का शुभ दिन मंगलवार है
शास्त्रों में हनुमान जी को शिव का ही अवतार माना गया है➖ ब्रह्मदत्त
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।।
➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
हनुमान जी मंत्र ➖मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
.....ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
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जय माता पार्वती-दुर्गा जय माता भवानी जग कल्याणी आपको बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का, आज मां दुर्गा का दूसरा नवरात्र पर्व है सभी भक्तों को दूसरे नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से आओ स्तुति करें मां ब्रह्मचारिणी की............
आज शारदीय नवरात्र पर्व में मां दुर्गा के दूसरे रूप से हम परिचित हो रहें हैं अर्थात मां ब्रह्मचारिणी से....ब्रह्मदत्त त्यागी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा रूप है। इस रूप में, दुर्गा दो भुजाओं वाली, श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और एक रुद्राक्ष माला और पवित्र कमंडल धारण करती हैं। वह अत्यधिक पवित्र और शांतिपूर्ण रूप में है या ध्यान में है। दुर्गा का यह रूप सती और पार्वती द्वारा अपने-अपने जन्मों में भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए की गई घोर तपस्या से संबंधित है। महिलाओं द्वारा भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले कुछ सबसे महत्वपूर्ण व्रत ब्रह्मचारिणी की कठोर तपस्या पर आधारित हैं। उन्हें तपस्याचारिणी के नाम से भी जाना जाता है और नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा की जाती है।
ब्रह्मचारिणी का इतिहास
यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद, सती ने पर्वत-राजा हिमालय की बेटी के रूप में मैना को जन्म दिया। उनके शुभ लक्षणों को ध्यान में रखते हुए, उन्हें 'पार्वती' नाम दिया गया था। जब वह एक सुंदर युवती के रूप में विकसित हुई, तो आकाशीय ऋषि नारद घूमते हुए राजा हिमालय के दरबार में पहुँचे।
पहाड़ों के भगवान ने नारद का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद हिमालय और मैना ने ऋषि नारद से उनकी हथेलियों को पढ़कर पार्वती के भविष्य की भविष्यवाणी करने की प्रार्थना की। ऋषि नारद उनके अनुरोध पर सहमत हुए। देवी पार्वती को देखकर, ऋषि नारद खड़े हो गए और उन्हें बड़ी श्रद्धा से प्रणाम किया। ऋषि नारद के इस तरह के असामान्य व्यवहार पर पर्वत-राजा हिमालय और रानी मैना चकित थे।

इस प्रकार देवी पार्वती ने अपनी तपस्या से भगवान शिव को पति के रूप में जन्म दिया। उन्होंने ब्रह्मचारिणी होने की प्रतिष्ठा अर्जित की।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा तप, त्याग, पुण्य और कुलीनता के लिए अनुकूल है। उनके भक्त शांति और समृद्धि के साथ संपन्न होते हैं।
देवी ब्रह्मचारिणी के लिए मंत्र
Om देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः (इस मंत्र का 108 पाठ)
दधाना कर पदभ्यामक्षमाला कमंडल | देवी प्रसादती माई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
जिसका अर्थ है, हे देवी ब्रह्मचारिणी, जिनके हाथों में माला और कमंडल हैं, मुझ पर कृपा करें ।
जो भक्त भगवान को जानने के लिए उत्सुक है, जो ज्ञान चाहता है, उसे नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए।➖ प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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प्रथम नवरात्र शैलपुत्री माता का प्रथम पहर ढल चुका है और संध्या काल हो चला है, इस संध्याकाल में सभी माता भक्तों को इस संध्या की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
प्रथम नवरात्र संध्याकाल संध्या वंदन ब्रह्मदत्त त्यागी
महामृत्युंजय मंत्र ब्रह्मदत्त
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम उवारुकमिव बधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्- ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
मां दुर्गा मंत्र शैलपुत्री मंत्र ➖ ब्रह्मदत्त
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ । वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥ ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
मां दुर्गा स्तुति मंत्र ➖ ब्रह्मदत्त
या देवी सर्वभूतेषु
शक्तिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
जय माता पार्वती दुर्गा
जय माता भवानी
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
दुर्गा मां मंत्र ब्रह्मदत्त
सर्वमंगल मांगल्ये सर्व शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते ।
प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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आज सितंबर 26 है
स्तुति................….................……............…...............….........….....….......….....….…..….....…....….........… ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

श्री नवदुर्गा स्तोत्र : श्री नवदुर्गा स्तोत्र


श्री नवदुर्गा स्तोत्र : श्री नवदुर्गा स्तोत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्।
वृषारुढां शूलधरं शैलपुत्री यशस्विनीम्॥1

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमंडलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा॥2

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैरुता।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टाति विश्3

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिरप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपथ्माभ्यं कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥4

सिन्गता नित्यं पद्माश्रितकरद्वय।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥5


चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दु लवर वाहना|
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दिवसव धातिनि ||6


एकवेणी जपाकर्णपूरा अग्न खरास्थिता,
लंबष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्य शरीर शरीरी।
वामपादोलसल्होहलताकण्टकविंफा,
वर्धन मर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रि.भयङ्करी॥7

श्वेते वृषे समरुझा श्वेतांबरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघनमहादेवप्रमोददा8

सिद्धगन्धर्वयक्षेघैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धायिनी॥9



श्री नवदुर्गा स्तोत्र : श्री नवदुर्गा स्तोत्र
देवी शैलपुत्री:
वंदे वंचित लभाय, चंद्रार्धकृतशेखरम |
वृषरुधम शूलधरम शैलपुत्रीम यशस्विनीम ||

अर्थ: मैं अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए देवी शैलपुत्री की पूजा करता हूं, जो सिर पर अर्धचंद्राकार हैं, बैल पर सवार हैं, त्रिशूल लिए हुए हैं और महान हैं।

देवी ब्रह्मचारिणी:
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमंडलू |
देवी प्रसीदातु माई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

अर्थ: हे देवी ब्रह्मचारिणी, जिनके हाथों में माला और कमंडल हैं, मुझ पर कृपा करें।

देवी चंद्रघंटा:
पिंडज प्रवारुध चन्दकोपास्त्रकैरियुता |
प्रसादम तनुते मध्यम चंद्रघण्टेती विश्रुता ||

अर्थ : शत्रुओं पर क्रोधित व्याघ्र की सवारी करने वाली, दस हाथों में अनेक शस्त्र धारण करने वाली, हे देवी चंद्रघंटा, मुझ पर कृपा करें।

देवी कुष्मांडा:
सुरसंपूर्ण कलाशम रुधिराप्लुतामेव चा |
दधाना हस्तपद्माभ्यं कुष्मांडा शुभदास्तु में ||

अर्थ: देवी कूष्मांडा, जो अपने कमल के हाथों में मदीरा और रक्त से भरे दो घड़े रखती हैं, मेरे लिए शुभ हैं।

देवी स्कंदमाता:
सिंहसंगतां नित्यं पद्मांचित कर्दवेया |
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ||

अर्थ: कार्तिकेय के साथ सिंह पर सवार स्कंदमाता, अपने दोनों हाथों में कमल और एक हाथ में वरमुद्र धारण करती हैं, मेरे लिए शुभ हो।

देवी कात्यायनी:
चंद्रहासोज्वल करा शार्दूलवरवाहन |
कात्यायनी शुभम दडियाद देवी दानवघाटिनी ||

अर्थ: देवी कात्यायनी, जो अपने दस हाथों में चंद्रहास तलवार और अन्य हथियार रखती हैं, सिंह पर सवार हैं, और राक्षसों को नष्ट कर रही हैं, मेरे लिए अनुकूल हो।

देवी कालरात्रि:
एकवेणी जपाकर्णपुर नगना खरास्थिता |
लम्बोष्ठी कर्णिका करनी तैलाभयक्तशारिरीनी ||
वाम पादोल्लासल्लोहलता कंटकभूषण |
बर्धन मोरधाम ध्वज कृष्ण कालरात्रिभयंकारी ||

अर्थ: यह मंत्र उनके रूप का वर्णन करता है। वह नग्न है, गधे पर सवार है, लंबी जीभ, चमकदार शरीर, पैरों में बिजली जैसे गहने पहने हुए, काले रंग में, खुले बाल, बड़ी आंखें और कान और बहुत खतरनाक दिखने वाली है। कालरात्रि के इस रूप का ध्यान करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और साथ ही दूसरों द्वारा बनाए गए सभी जादुई प्रभावों को भी दूर करता है।

देवी महागौरी:
श्वेते वृषसमरुधा श्वेतांबरधारा शुचिः |
महागौरी शुभम ददियानमहादेव प्रमोददा ||

भावार्थ : श्वेत बैल पर सवार, शुद्ध श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, सुख देने वाली देवी महागौरी मुझ पर कृपा करने वाली हैं।

देवी सिद्धिदात्री:
सिद्ध गंधर्व
सेव्यामन सदाभुयत सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||

अर्थ: सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, देवताओं, दानवों आदि द्वारा पूजी जाने वाली देवी सिद्धिदात्री, अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण करती हैं, सभी सिद्धियों की दाता और सभी पर विजय प्राप्त करती हैं।

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मां दुर्गा पार्वती, हर हर महादेव, जय महाकाल, भोलेनाथ, शंकर शंभू, मां दुर्गा अपने पति के साथ कल सभी घरों में आगमन हो रहा है आपका, सोमवार में अर्थात २६ सितंबर दिन सोमवार सन् २०२२ 26/09/2022 को, सभी शिव भक्तों को मां दुर्गा पार्वती भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से
आपको.......
नमस्कार है मां, नमस्कार है, आपको करोड़ों नमस्कार है,
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
भगवान श्री शिव महादेव महाकाल भोलेनाथ शंकर शंभू एवं मां दुर्गा पार्वती नमस्कार है ब्रह्मदत्त त्यागी का
आपको..............
फूल बिखेरों, पलके बिछा दो, माता के सत्कार में, आगमन
हो रहा है मेरी मैया का, सब घरों के आंगन, मन, और
जीवन संचार में ...... प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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मान्यताओं के अनुसार, आप सभी तिथियों के श्राद्ध का पुण्य सिर्फ इस एक तिथि पर श्राद्ध के माध्यम से पा सकते हैं, इसलिए आश्विन अमावस्या पितरों के तर्पण की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण तिथि कहलाती है।

आज हम इस तिथि के महत्व और इससे जुड़ी हुई महत्वपूर्ण बातों के बारे में विस्तार से बताएंगे, इसलिए लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ें। और इस लेख को दूसरों को सुनाएं, सांझा करें, वितरित करें, शेयर करें ब्रह्मदत्त त्यागी
आश्विन अमावस्या की तिथि

इस वर्ष आश्विन अमावस्या 25 सितम्बर, यानिकि आज रविवार को मनाई जा रही है।
यूं तो आश्विन अमावस्या का
आरंभ: 24 सितम्बर को मध्यरात्रि 03:12 बजे से शुरू हो चुका है..... और इसका,समापन: 25 सितम्बर, रविवार यानिकि आज मध्यरात्रि 03:23 बजे तक होगा।

सोलह श्राद्ध के समापन के रूप में मनाई जाने वाली, आश्विन अमावस्या के दिन उन पितरों का तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या या पूर्णिमा तिथि पर हुई थी। यदि आपको किसी पितृ के मृत्यु की तिथि के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो आप इस दिन एकत्रित रूप से अपने कुटुंब के सभी पितरों का श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।

आश्विन अमावस्या की तिथि में रौहिण, कुतुप और अपराह्न काल को पूजा और तर्पण विधि के लिए सबसे उचित माना जाता है। अपराह्न काल के समाप्त होने तक आपको श्राद्ध-तर्पण की हर विधि को पूरा कर लेना चाहिए, क्योंकि इन तीनों काल में श्राद्ध करने से आपके पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और आपको अपने पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

तो चलिए अब देखें कि इस वर्ष रौहिण, कुतुप और अपराह्न काल की अवधि कब से कब तक होगी-

आश्विन अमावस्या के दिन कुतुप मूहूर्त-

आरंभ: सुबह 11:48 बजे
समापन:दोपहर 12:37 बजे

इसके बाद रौहिण मुहूर्त-

इसके बाद रौहिण मुहूर्त-
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आरंभ: दोपहर 12:37 बजे
समापन: दोपहर 01:25 बजे
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अपराह्न काल-
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आरंभ: दोपहर 01:25 बजे
समापन: दोपहर 03:50 बजे
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इस दिन किए जाने वाले अनुष्ठान-
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अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, इसलिए अगर संभव हो पाए तो इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान ज़रूर करें।
इसके बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
इस दिन गाय के गोबर से बने उपले को जलाकर उस पर लोबान और घी डालकर घर की चौखट पर रखें और इससे घर में धूप दें।
साथ ही, शाम के समय दो, पांच या सोलह दीप भी जलाकर घर की चौखट पर रखें।
श्राद्ध भोग के लिए पुड़ी-सब्जी, खीर और विभिन्न तरह के पकवान बनाकर पत्तल पर सजाएँ और पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ता, कौआ, देव और अंत में चींटियों को अर्पित करें।
इसके अलावा इस दिन ब्राह्मण, या किसी जरूरतमंद को दान अवश्य करें।
इस तरह आश्विन अमावस्या पर विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण करने से आपको पितरों का आशीर्वाद मिलता है और वे आपके घर पर आने वाली किसी भी तरह की बाधा से आपकी रक्षा करते हैं।
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तो यह थी आश्विन अमावस्या की संपूर्ण जानकारी, ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ जानना चाहता है आपको यह जानकारी कैसी लगी

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सभी शिव महादेव महाकाल भैरव एवं हनुमान जी शनिदेव जी भक्तों को शुभ संध्या वंदन शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
संध्याकाल संध्या वंदन शनिवार
मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।
ॐ शं शनैश्चराय नमः शिवाय नमः हर हर महादेवय्
नमः महाकालय्, भैरव नमोस्तुते नमः ब्रह्मदत्त
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम
पुष्टि वर्धनम उर्वारुकमिव
बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
ॐ शं शनैश्वराय नमः
ब्रहमदत्त त्यागी हापुड़
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम
पुष्टि वर्धमेन उर्वारुकमिव
बंधनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूर्ति रूप .......
राम लखन सहित सीता सहित हृदय बसेउ सुर भूप.......
बोलों पावन पुत्र हनुमान की जय
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम
पुष्टि वर्धनम उर्वारुकमिव
बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम
पुष्टि वर्धनम उर्वारुकमिव
बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
शनिदेव मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः
प्रस्तुतकर्ता ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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सभी हनुमान जी एवं शनिदेव जी भक्तों को शुभ शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त भक्तों की तरफ से आप सभी को. आज सितंबर माह की 24 तारीख है शुभ शनिवार आओ स्तुति करें हनुमान जी एवं शनिदेव जी की
हनुमान जी एवं शनिदेव जी मंत्र — मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्वरम् ॥
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
कल दिन रविवार इतवार संडे है, शनिदेव के पिता एवं साक्षात दर्शन देने वाले भगवान श्री सूर्य देव का शुभ दिन रविवार इतवार संडे अवकाश एवं छुट्टी का दिन है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी सूर्य देव भक्तों की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई

हनुमान जी मंत्र
मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।
....ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
शुभ शनिवार २४/24/सितंबर दिन शनिवार सन्-२०२२/2022 सितंबर
माह का आखिरी शनिवार ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
Saturday, 24 September,
Sun- Mon- Tue- Wed- Thu- Fri- Sat
सोमवार -मंगलवार-बुधवार-बृहस्पतिवार-शुक्रवार-शनिवार
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शनिदेव जी मंत्र ॐ
नीलांजनसमाभास रविपुत्र
यमाग्रजम, छायामार्तण्डसम्भूतं ते
नमामि शनैश्वरम् ॥
त्यागी हापुड़
शनिदेव जी मंत्र ==ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम, छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्वरम् ॥ प्रस्तुतकर्ता.....ब्रह्मदत्त त्यागी
-
हापुड़

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