Quotes by Abha Dave in Bitesapp read free

Abha Dave

Abha Dave

@daveabha6


विश्व रंगमंच दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

अभिनय
-------------

विशाल धरा पर अपने -अपने किरदार सभी निभा रहे हैं
पर रंगमंच पर आकर कलाकार अपना अभिनय दिखा रहे हैं
रंगमंच पर हर एक भाव को बड़ी ही खूबी से पेश करते हैं
अपने हावभावों से सभी को वो अपना बना रहें हैं।

इतना आसान नहीं होता है रंगमंच पर अभिनय करना
अपने आप को भूलकर किरदारों को आत्मसात करना
तन -मन में कितना ही दुख दर्द छुपा हो करते हैं ये अभिनय में कमाल
ये ठान लेते हैं अपने आप को भूलकर शानदार अभिनय है करना।

विश्व रंगमंच दिवस समर्पित है सभी कलाकारों को
जो नयी शक्ति भरता है नये अभिनय के जानकारों को
सभी बधाई के पात्र हैं अपने अभिनय के जो साथ हैं
इसी तरह आगे बढ़ते हुए आकषिर्त करतें रहें सभागारों को।

आभा दवे
मुंबई

Read More

आज विश्व गौरैया दिवस है । हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शहरीकरण के कारण लुप्त हो रही गौरैया और अन्य छोटे पक्षियों के प्रति जागरूकता फैलाना है। भारत की 'नेचर फॉरएवर सोसाइटी' और फ्रांस के इको-सिस एक्शन फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से 2010 में पहली बार विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत की गई।

इस दिन को मनाने का मुख्य कारण लोगों को लुप्त हो रही गौरैया के प्रति सचेत करना है। गौरैया हमारी सबसे प्यारी घरों की साथी है और पर्यावरण की हितैषी भी।


गौरैया पर प्रस्तुत है मेरी कुछ पंक्तियां 🙏

गौरैया
----------
घरों की रौनक है गौरैया
हिल मिलकर रहती गौरैया
कद छोटा लगती प्यारी
चीं चीं कर प्रीत जगाती गौरैया।


चिड़िया
-----------------
चीं -चीं करती चिड़िया
दाना चुगती चिड़िया
फुदक -फुदक कर उड़ती
सबको भाती चिड़िया।

सब के घरों में जाती है
सबको अपना पाती है
तिनका चुन - चुन कर
अपना घर बनाती है।

भेदभाव वो जाने न
शत्रु किसी को माने न
हर आँगन उसका घर
बनती किसी की अनजाने न।

आभा दवे
मुंबई

Read More

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🙏

होलिका दहन
---------------------

फाल्गुन मास की पूर्णिमा
लेकर आई होली का त्यौहार
छुपा हुआ है इसमें पौराणिक कथा का सार
होलिका -प्रहलाद की कहानी बन गई अमिट निशानी
बुराई पर अच्छाई की विजय सुनाती ये कहानी
मनाते सभी होलिका दहन का त्यौहार
थाली में सजा के सिंदूर रंग ,गुलाल
और अग्नि को अर्पण करते फूल, माला ,अनाज
सूत , रोली, अक्षत , बताशे, मीठे पकवान
सभी को प्रेम से गले लगा कर करते सबका सम्मान
ईश्वर पर रख आस्था करते उसका गुणगान
होलिका दहन की बात ही निराली है
उसकी खुशी में ही होली मतवाली है ।

आभा दवे
मुंबई

Read More

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

मातृभाषा
--------------
मातृभाषा कराती है एक अलग ही पहचान
छुपा हुआ जिसमें परंपरा - संस्कृति का ज्ञान
माँ की ममता सा आभास कराती खुद से मिलाती
सदा ही होता रहे यूँही अपनी मातृभाषा का सम्मान।

માતૃભાષા કરાતી હૈ એક અલગ હી પહેચાન
છુપા હુવા જિસમેં પરંપરા - સંસ્કૃતિ કા જ્ઞાન
માં કી મમતા સા આભાસ કરાતી ખુદ સે મિલાતી
સદા હી હોતા રહે અપની માતૃભાષા કા સમ્માન.

( આભા દવે )
आभा दवे

અતીત
----------
અતીતની યાદો આવીને બેઠી છે દ્વાર,
વીતેલી પળો કરી રહી હતી ઈંતઝાર.
માસૂમ બાળપણની એ હસીન યાદો,
દાદીમાની વાર્તાઓનો એવો ખુમાર.
રાજા-રાણીની એ અનોખી કહાણી,
રોજ સાંભળતા અમે દાદીમાની જુબાની.
દરેક વાર્તાની શૈલી હતી નિરાલી,
છુપાયેલી રહેતી એમાં મહાનતાની નિશાની.
થઈ જતી જ્યારે અચાનક વીજળી ગુલ,
સાથે બેસીને વાતો કરતા સૌ હળી-મળી ગુલ.
વીજળી પાછી આવતા એ હોબાળો ને શોર,
મળતો હતો સૌને આનંદ અતુલ.
દરેક નાની ખુશીઓ આંગણું મહેકાવતી,
દોલતની દીવાલ ક્યારેય વચ્ચે ન આવતી.
પોતાના-પારકાનો ભેદ સમજતા નહોતા,
અતીતની યાદો આજે વર્તમાન સાથે અથડાતી.

આભા દવે

Read More

शिवाजी जयंती (19 फरवरी )
-----------------------------------
मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। उनकी देशभक्ति और वीरता को बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। शिवाजी महाराज की जयंती पर सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है शिवाजी महाराज और गुरु रामदास जी की एक कहानी 🙏🙏

शिवाजी- रामदास
------------------------
बहुत समय पहले की बात है शिवाजी महाराज रामदास जी के पास विद्या अभ्यास करते थे। एक दिन शिवाजी महाराज ने गजानंद नाम के लड़के को उठाकर पटक दिया। इस कार्य को देखकर गुरु रामदास शिवाजी से अप्रसन्न हुए । उन्होंने शिवाजी महाराज को बुलाकर कहा कि, "आज मैं तुमसे अप्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने गजानन को पटक दिया है उसे चोट पहुँची है।" शिवाजी महाराज ने कहा कि, "गुरु जी , इसमें मेरा क्या दोष है? आप ने ही सिखाया है कि निर्बलों की रक्षा करनी चाहिए। गजानंद कमजोर बाल गोपाल को बुरे शब्द कह रहा था । बेचारे बाल गोपाल रो रहे थे । इसमें मेरा क्या अपराध है?" तब रामदास जी ने कहा कि पाठशाला में सब की रक्षा का भार मेरे ऊपर है। तुम्हें गजानंद को सजा देने का अधिकार नहीं है , यह अनुचित बात है। शिवाजी महाराज ने गुरु रामदास से माफी माँगी और भविष्य में ऐसा कार्य न करने की प्रतिज्ञा की। इस पर गुरु रामदास ने कहा कि, "मैं तुम पर प्रसन्न हूँ। मुझे तुमसे बड़ी आशाएँ हैं कि तुम देश की सेवा के लिए तन , मन, धन, कुर्बान करोगे। सारा जीवन देश के लिए अर्पण करोगे।" यह सुनकर शिवाजी महाराज ने गुरु के चरण छू कर प्रतिज्ञा की कि , "मैं जीवन भर अपना सब कुछ देश के लिए अर्पण करुँगा ।" यह सुनकर रामदास जी खुश हुए और उसे अपनी शुभकामनाएँ दी।

शिवाजी महाराज ने जीवन पर्यंत इस प्रतिज्ञा का पालन किया और अपना सर्वस्व देश पर न्यौछावर कर दिया।

संकलन/ प्रस्तुति
आभा दवे
मुंबई

Read More