Yayawar जिसे कही आराम नहीं... जो बस भटकना जानता है अब ठेहेर ना सिख रहा है... लिखना सिख रहा है... उस्मे छिपी awargi को पेहचान के yayawargi बनके जीना सिख रहा है... for more follow me on insta... with name yayawar.gi

https://youtu.be/GnC_s5fmWsg

imagica vlog Yayawargi vlog

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So this is just another experiment of rap ,after poetry , writing and #storytelling again I am not at all professional rapper or trained one, I just do write but this much sound like rap, so I convert this in rap... and perform on stage of Glimmers of Gujarat

The beats copyright belong to there respective creator


Thank you

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My journey from Divangi joshi to Yayawargi , a writer a open mic artist

The Untold story, tap on the link

https://youtu.be/cr2Os5h77EM

एक दिन तालियों कि गुन्ज मे , ताने घुल जायेंगे

मेरी कामयाबियों के आगे सब सवाल भुल जायेंगे

नाकारी मेरी जब सन्घर्ष बनेगी ना

मुझे सताने वालो के भी हर पाप धुल जायेंगे

बस अब हल्का सा इन्तज़ार...

@यायावरगी





@yayawargi


#openmic #hindi

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"स्कूल के दिन" by Yayawargi (Divangi Joshi) read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19925753/days-of-school


स्कूल के दिन

तो आख़िरकार चाहे या अनचाहे कल से मेरा रजत वर्ष शुरू हो गया
सालो से एक लाइन बोहोत बोती थी
''बुढ़ापा आ रहा है''
और बस ये आखरी वर्ष है बुढ़ापा आने में।
पच्चीस,
वेसे मेरे लिए सिर्फ एक नंबर नहीं था एक डेड ताइन थी.
मेरा मानना है के २५ के बाद का जीवन फिक्स है
पहले से ही तय किआ हुआ , जिसे गृहस्थ जीवन कहते है जिसमे कुछ नए की उम्मीद न के बराबर होती है, हाँ हाँ अपवाद हर जगह है, में मना नहीं कर रही पर वो गाना है न
''हम होंगे कामयाब एक दिन पर वो एक दिन कोनसा ?''
कोई तोह एन्ड डेट होनी चाहिए ने तो मेरे
जीवन में थी 27th मार्च 2023

बस ऐसा लग रहा है जैसे जीवन का एक साल बाकि है, फिर शायद कुछ बदलेगा नहीं जो जैसा हे वेसा ही रहेगा
मतलब उम्मीद कुछ बड़ा होने की ख़तम हो जाएगी इस दावे पे के २५ साल में नहीं हुई वो अब क्या होगा

इस मृत लकीर पे पोहचने से पहले जितना सफर तय करना था न उसका आधा भी अभी तक तय नहीं हुआ है मुझसे। ना आवक के आकड़ों में ना ही रिस्तो के मायनों में ।

पर सुकून भी है के उन रास्तों पे में एक बार ही सही चली तो हूँ वो रास्ते मेरे कदमों को पहचानते है भले ही, मंजिल का मंजर इन आँखों ने नहीं देखा।

आधा ना सही पर थोड़ा तो थोड़ा किआ है वो सब जो करना था।

हाँ जहा से शुरू किआ था ना वहां से तो काफी आगे हूँ में,
पर मेरा रास्ता लम्बा निकला और में कभी बिच रास्ते थक गई तो कभी बैठ गई कोई मिला तो बात करने रूक गई तो कभी किसी को साथ ले लेने कि चाहत हो गई शायद यही
कही मंजिल का मंजर दूर रह गया।

हाँ इच्छा तो रजत वर्ष के बाद भी पूरी हो सकती है, जिसके अनेक उदहारण आप क्या में भी दे सकती हूँ पर फिर भी डेड लाइन की उनसेरटेनिटी की सर्टिनिटी तो तय ही है

कोई ना अभी जो एक साल बचा है ना उसे एक जश्न की तरह मानना है।

जैसे बाल रंगवाये है बिना बालों की डैमेज का सोचे, वैसे ही अब जीवन के बचे कुचे रंगों को भी जी ले ना हे

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लोग पढ़ते रहे हम लिखते रहे, पर पूछें आके मुझे ये तेरी अपनी कहानी तो नहीं , मैंने कहा नहीं बस लिख दिया वो सब जो किसी से कहा नहीं

wish you happy poetry day from immature poetess Yayawargi

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