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"टूटे हुए पत्ते और टूटे हुए लोग, अक्सर बिखर ही जाते हैं..."
“तमाशा देखिए इस दौर के इंसानों का साहब, दुआएँ लंबी मांगते हैं और छुरी तेज़ रखते हैं। मशहूर हैं जो महफ़िलों में अपनी शराफ़त के लिए, वही अपनी थाली में किसी की मौत सजा कर रखते हैं।” Jay mahakal 🙏🏻🙏🏻 _ A singh
“कहने को तो बड़े गर्व से कहते हैं कि 'हिंदू' हैं हम, सीना ठोक कर बोलते हैं कि 'सनातनी' हैं हम… पर जब बात अपनी जीभ के स्वाद पर आती है, तो थाली से मांस-मछली छोड़ते नहीं हम… हाथों में कलावा और माथे पर तिलक तो सज जाता है, पर दिल में बेजुबानों के लिए तरस क्यों नहीं आता है? ग्रंथों के श्लोक और दया की बातें बस दोहराने के लिए हैं, क्या 'अहिंसा परमो धर्म' का पाठ बस किताबों के लिए है? मूर्तियों के आगे जो सिर श्रद्धा से झुक जाता है, वही इंसान किसी मासूम जीव की चीख सुन क्यों नहीं काँपता है? कैसा यह खोखला धर्म और कैसी यह तुम्हारी भक्ति है, जहाँ बेकसूर का खून बहाने में ही मिलती तुम्हें तृप्ति है? माना कि हर कोई एक सा नहीं, यहाँ सच्चे दिल वाले भी रहते हैं, जो जीव-दया की इस पावन राह को पूरी निष्ठा से जीते हैं… पर जो लोग धर्म का चोला ओढ़ कर भी यह क्रूरता करते हैं, सच तो ये है कि वो इस समाज के नाम पर एक गहरा कलंक हैं… वाह रे इंसान! तेरा यह कैसा दोहरा किरदार है, नाम सनातन का लेता है, पर कर्मों में सिर्फ शिकार है…” _ A singh Jay mahakal 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
“बड़ी चालाकी से हम अपने गुनाहों को छुपा लेते हैं, दूसरों के आँसू देखकर खुद को नेक बता लेते हैं। ये कैसी खुदगर्ज़ी है इस दौर के इंसानों की, जो अपनी ही खुशी के लिए किसी का वजूद मिटा देते हैं।”
हर सुबह तेरी याद आना भी इश्क़ है, और तुझे बिना बताए मुस्कुराना भी इश्क़ है… 🌹
“तुम बदले तो मजबूरी रही होगी, हम बदले तो मशहूर हो गए।”
“कुछ यादें काँच की तरह होती हैं, दिखती ख़ूबसूरत हैं… मगर छुओ तो चुभ जाती हैं।”
कुछ एहसास भी खास होते हैं, और उन एहसासों में तुम सबसे पहले हो, जान।
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