Quotes by Krishna singh in Bitesapp read free

Krishna singh

Krishna singh

@krishnagurjar917182


बड़े अंजान लगते हो इस फरेबी दुनिया से
बड़े अंजान लगते हो इस फरेबी दुनिया से।

लगता है कदम रखा है अभी तुमने मोहब्बत की दुनिया में
कदम रखा है अभी मोहब्बत की दुनिया में

पुराने होते तो तुम्हे पता होता कि यहां अपने भी छोड़ जाते है राह में। थोड़ी मासूमियत कम ही रखना कलियाँ रौंद दी जाती है तितलियों की चाह में।

मन के अल्फ़ाज शब्दों में
krishna singh

Read More

जानते हो क्या तुम प्रेम कि परिभाषा?
या दुनिया में रहते हुए हो गई तुम्हारी मति भी दुनियां की भांति।
तुम भी स्वार्थ को प्रेम समझने लगे हो या अब भी मानते हो तुम्हारे दिल के कोने में छिपी उस भावना का सच।
रौंद दिया क्या तुमने उस प्यार की कली को अपने अभिमान तले।
या लेश मात्र भी बचा है तुममे स्वार्थ से दूर सच्चे प्रेम को अभिमान से पहले रख पाने का धैर्य।
बताओ! क्या तुम अपने अभिमान के आगे उस प्रेम को रख पाओगे
या तुम्हारा अभिमान ले जाएगा तुम्हे प्रेम से दूर स्वार्थ की अंधेरी गलियों में।
तुम कहते हो न अभिमान नहीं है ये तो फिर प्रिय स्वाभिमान भी तो नहीं है तुम्हारा ये व्यवहार।
बोलो जानते हो क्या तुम सच्चे प्रेम की परिभाषा?

krishna singh

Read More