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nidhi mishra

nidhi mishra

@nidhimishra705356
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ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा।
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गँवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए।
तिरंगा लहरा रहा है शान से, हम सब झुकें इसके सम्मान में,
यही है हमारी पहचान, बसा है जो हर हिंदुस्तानी की जान में।
गणतंत्र का ये पर्व हमें, एकता का पाठ पढ़ाता है,
भारत माँ के वीरों का, बलिदान याद दिलाता है।
ना जियो धर्म के नाम पर, ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियो वतन के नाम पर।
देश की मिट्टी की खुशबू, रगों में लहू बनकर बहती है,
ये गणतंत्र की गूँज, हर दिल में 'जय हिंद' कहती है।
लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज़ आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा।
मैं रहूँ या न रहूँ, पर ये वादा है मेरा तुझसे,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, मौत से शर्त लगाये बैठे हैं।
सलाम है उन वीरों को, जिनकी वजह से हम आज़ाद हैं,
गणतंत्र दिवस की शान में, हम सर झुकाये बैठे हैं।

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नये दौर की चाह में, क्यों पुरानी नींव को भूल गये?
लिबास बदले मगर क्यों हम, अपनी तहजीब को भूल गये?
मॉडर्न होना जिस्म की नुमाइश का नाम नहीं होता,
संस्कारों को छोड़ देना, कोई बड़ा काम नहीं होता।
असली मॉडर्न वो है, जिसके ख्याल नये और नेक हों,
भीड़ में भी खड़े हों तो, अपने किरदार से एक हों।
कपड़ों से नहीं, अपने लहज़े से अपनी पहचान बनाइये,
मगर उसमें अपने पूर्वजों की, थोड़ी झलक भी दिखाइये।
ये धरती है उनकी, जहाँ मर्यादा ही सबसे बड़ा गहना है,
हर रंग में ढल कर भी, हमें भारतीय ही रहना है।
विदेशी चमक-धमक में, क्यों अपनी रूह को खोना?
संस्कृति को साथ रखना ही है, असली 'मॉडर्न' होना।
सुंदर बनो पर इतना नहीं, कि सादगी ही खो जाये,
आगे बढ़ो पर ऐसे नहीं, कि पीछे का रास्ता भूल जाये।
गर्व से पहनो नये लिबास, पर संस्कारों की चादर मत उतारो,
अपनी विरासत से ही तुम, इस नये दौर को संवारो।

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हर बच्चे का बचपन आसान नहीं होता,
यह कलयुग है यहाँ हर मंदिर में भगवान नहीं होता,
सबका घर आबाद नहीं होता,
कुछ डरते हैं स्कूल से वापस आने में, हर बच्चे का डर मोटी-मोटी किताब नहीं होता,
सबके दूर-दूर तक रिश्तेदार नहीं होते,
सबके वो तीन खास यार नहीं होते,
सबकी माँ प्यार नहीं कर पाती, सबके पिता ज़िम्मेदार नहीं होते,
कुछ लोगों के घर में भी अजनबी रहते, हर किसी के घर वाले परिवार नहीं होते।
जिसने पेट भरा हो माँ के बलिदानों से, जिसने बाप का गुस्सा पिया होगा,
जिसने हर महीने अपनी परवरिश का आँसुओं से किराया दिया होगा,
उस बच्चे ने भला कैसा बचपन जिया होगा?
पर बचपन उसे भी याद रहता है जो भुलाना चाहता है,
इतिहास दोहराता होगा कभी-कभार, बचपन बार-बार दोहराता है।"

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Gulab Ka Sabak
Ek gulab ne mujhse kaha, tu kyun darti hai kaanton se,
Zindagi ki asli pehchan hoti hai, inhi imtihanon se.
Dekh mera surkh rang, ye junoon ki nishani hai,
Par in kaanton ke beech hi, meri har kahani hai.
Log kehte hain gulab ho toh kaante bhi jhelne honge,
Par main kehti hoon, kaante hi toh humein ladna sikhate hain.
Bina kaanton ke toh phool bhi murjha jaye jaldi,
Ye chubhan hi toh hai, jo jeene ka jazba jagate hain.
Maana ki raahon mein kaante bichhe hain hazaar,
Par tu dekh us khushbu ko, jo hai behisaab aur apaar.
Gulab tabhi banta hai, jab dhoop aur tufaan se ladta hai,
Insaan bhi wahi hai, jo mushkilon mein hi nikharta hai.
Tu ban ja wahi gulab, jo har haal mein muskuraye,
Chahe kismat kitne bhi kaante, teri raah mein bichhaye.
Kaante teri hifazat hain, teri kamzori nahi,
Teri jeet ki dastaan mein, ye rukawat koi nahi!

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बेटी और बाप की बातचीत के बोल
कलेक्टर जो खरीदा आपने कर्ज लेकर,
बन तो मैं भी सकती थी अगर आप मुझे पढ़ाते तो।
अपने हक़ के झोपड़े में ही रहती मालकिन की तरह,
अगर आप मुझे किसी महल के आंगन में यूँ नहीं दफनाते तो।
और मुझे परहेज़ थोड़ी है रसोई घर के तकलीफों से,
ज़रा सा ज़र्क़ अगर आप अपने बेटों को भी सिखाते तो।
और ज़माने से हारे आप और आपसे हारी मैं,
मज़ा तो तब था जब हम मिलके हराते ज़माने को।
और बाबा, आप क्या कहते थे?
आँगन की चिड़िया होती है बेटियाँ।
फिर मुझे यूँ खूँटे से क्यूँ बाँधा?
क्यों नहीं दिया आसमान, ऐसे ही उड़ जाने को?

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वो मैदान जंग था, और तुम थी महारानी,
हर गेंद पर लिखी, जीत की एक कहानी।
दो नवंबर, पच्चीस का, वो दिन अमर हुआ,
पहला विश्व कप लाकर, हर सपना सच हुआ।
चुनौतियों को चीरा, इरादों को साधा,
हर हार को भुलाकर, खुद को ही वादा।
नज़रें थीं ट्रॉफी पर, दिल में थी आग,
तिरंगे की शान में, तुम खेलीं बेदाग।
शेफाली की धमक, दीप्ति का कमाल,
हरमनप्रीत की कप्तानी, हर चाल बेमिसाल।
ये सिर्फ खेल नहीं, ये है हिम्मत का नाम,
दुनिया ने देखा है, भारत का मुकाम।
तुम शक्ति हो, तुम साहस, तुम हो विश्वास,
हर बेटी के लिए, अब नया आकाश।
ये जीत गूँजेगी, हर कोने हर द्वार,
नारी शक्ति को हमारा, शत-शत नमस्कार!
जय हिन्द! 🇮🇳

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✨ जीत का हल्ला
मेरी सफलता धूम मचाएगी,
जब मेरी कड़ी मेहनत के आगे किस्मत झुक जाएगी।
मैंने जो पसीना बहाया है, वही काम आएगा,
मेरा हर प्रयास एक दिन रंग लाएगा।
मैंने खुद ही अपनी राह बनाई है,
हर मुश्किल को मैंने हँसकर अपनाया है।
रातों की नींद मैंने त्याग दी है,
बस अपने सपने को पाने की धुन में लगी हूँ।
दुनिया देखेगी एक नया सवेरा,
जब चमकेगा नाम सिर्फ मेरा।
किस्मत के भरोसे अब मैं नहीं रहूँगी,
अपनी ताकत से मैं सब कुछ कहूँगी।
काम ही मेरा दोस्त है,
इच्छाशक्ति मेरी रौशनी है।
सब्र ही मेरी बड़ी शक्ति,
इसी में मेरी खुशी है।
जब नतीजा सबके सामने आएगा,
मेरी लगन का फल सबको दिखलाएगा।
तब मेरी खामोशी की बात होगी,
और मेरी जीत की हर जगह शुरुआत होगी।
मेरी सफलता धूम मचाएगी,
जब मेरी कड़ी मेहनत के आगे किस्मत झुक जाएगी।

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My happiness is not a grand design,
Nor hidden in a treasure chest's gold shine.
It's in the quiet whispers of the breeze,
That dances softly through the tall green trees.
It's in the first bright ray of morning light,
That chases shadows from the darkest night.
It's in the laughter, clear and true,
Of friends who see the world anew.
A warm embrace, a shared sweet cup of tea,
The gentle rhythm of the restless sea.
The simple fact of waking up and knowing,
That love and kindness in my life are flowing.
It doesn't ask for much, this peace I find,
A grateful heart, a calm and open mind.
It’s in the beauty that the moment brings,
My joy is found in all the little things.

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मैं चाहे कितने ही लोगों की भीड़ में रहूँ, मेरा तुझ पर ही विश्वास रहेगा
और तू अलग शहर में रहे या अलग देश में, तू खास था, है और हमेशा खास रहेगा।

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कोई तुझे छीन कर ले जाए, तो क्या ही ले जाएगा;
अगर वो तेरी किस्मत का होगा, तो तुझ तक चलकर आएगा 🌙💫