Hindi Quote in Blog by Parmar Mayur

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कोई एक व्यक्ति से हमें बुरा अनुभव होता है,

फिर हम सभी इंसानों को बूरा समझने लगे,
तो फिर गलतियां हमसे ही होगी।

हर एक इंसान में अच्छाई या बुराई ही पनपतीं है,
वह ग़लत बात है।

किसी में अच्छाई भी पनपतीं है तो किसी में बुराई।

अच्छे इंसानों पर भी आप भी बूरे होगे,
वह प्रश्न कब पैदा होता है।

मालूम है?
जब बुराई अच्छाई का नक़ाब पहनकर पहले पास आती है,
फिर वह अपने वास्तविक रूप में आकर असली रूप दिखलातीं है।

तब वह पीड़ित इंसान,
सभी अच्छे इंसानों को भी बूरा समझने लगता है।

किन्तु कुछ विवेक शक्ति भी होनी चाहिए,
अच्छाई और बुराई को समझने की।

एक बार धोखा खाए हुए इंसान में वह समझ अच्छी तरह आ जानी चाहिए।

रावण ने सीतामाता का हरण,
साधु वेश धारण करके किया,

वह रावण की नियत और सोच खराब थी,
साधु और साधुत्व नही।

इसलिए जिंदगी में नक़ाब पहनें मिलते रहते हैं चहेरे,
आज़मा लेना चाहिए जरुर, असलियत के दिख जाते है चहेरे।

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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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