Quotes by Dr Mahendra pawar in Bitesapp read free

Dr Mahendra pawar

Dr Mahendra pawar Matrubharti Verified

@pawarmahendrabhai58g
(1.2m)

हमारी महान न्यायिक व्यवस्था ।
' एक मजदूर ने सारा जीवन जेल में काट दिया
 फिर सालों  बाद  पता चला की वो निर्दोष था
 कई बुजुर्गों  को सलाकों  के पीछे धकेल दिया 
वजह यह थी की वो कभी जवानी में गुनहगार थे
सारे गुंडे मवाली सरेआम घूम रहे हैं बाजार में
सिर्फ़ दो दिन में पता चल जाता है की वो बेगुनाह थे
एक गरीब की चंपल घिस जाती है चौखट पर
न्यायालय देता रहता है सिर्फ़  तारीख पर तारीख 
धनी के लिये आधी रात में कोर्ट खुल जाती हैं
और  निर्धन बेचारा न्याय का भिखारी बन जाता हैं 
यहीं बातों से महान देश का महान न्यायालय 
' माहि ' मुझे इतना गुनहग़ार क्यों नजर आता हैं '

Read More

पुरानी गर्लफ्रेंड

अरसे बाद मिलि थी मुझे अचानक बाजार में
हम भी थे अपनी पत्नी के साथ भीड़भाड़ में

मेरे सामने से गुजरी थी वो अनजान बनकर
सोचता रहा था मैं उसकी ये हालात देखकर

वो पोपकोर्न ले रही थी अपनी बच्ची के लिये
चेहरा उतरा हुआ था और थोडी मोटी हो गयी थी

कभी हम भी साथ चले थे उसका हाथ पकड़कर
पर उसने मेरा हाथ छोड़ा था कभी गरीब समझकर

उसे कैसे भूल सकता हूं मैं , वो पहला प्यार था मेरा
उन्हें पछतावा होगा पर पछतावा अब किस काम का

किसी बेहतर की तलास में निकली थी हमें छोड़कर
उसका पति सामने ही बैठा था,बाजार में ठेला लगाकर

Read More

અહીં પ્રેમમાં ડુબી કિનારે નિકળનારા કેટલાય શાયર થાય છે.
અહીં તલવારના ઘા થી પણ ઘાયલ ન થનારા કાયર થાય છે.

શોધ બધાને હોય છે ખૂણે ખાંચરે ક્યાંકથી મળી જો જાય તો
અહીં પ્રેમનો ધંધો કરનાર પણ ક્યારેક ક્યારેક છેતરાય જાય છે

જે ને ખોઈને દારુડીયા બની પાગલની જેમ ગામમાં રખડી ખાય છે.
અહીં ઘણાં ખરા મધરાતે સપનામાં જોઇને પણ હરખાઈ જાય છે.

શરુઆત કરનાર થોડા સમય પછી જો બેવફાઇનો શિકાર થાય
તેમના સંતાનોને પહેલેથી જ તકેદારીના પાઠ ભણાવાય જાય છે.

રણ મેદાને એ બન્ને વિજેતા થાય જેના લક્ષણો સરખા ભેગા થાય
બાકી અડધેથી પાછા વળનારા કેટલાય ઘરે પહોંચવા ગોતા ખાય છે.

જો મળ્યું તો નસિબદાર નહીં મળે તો નવા અનુભવનો ઉમેરો થાય
'માહિ' આવો વિચાર કરીને પડનારા કેટલાય ડૂબીને મરી જાય છે.

Read More

पुरुष

पुरुष का अपना परिवार होता है
परिवार चलाने यहाँ वहाँ फिरता है
जेब तो पहली तारीख भर लेता है
बांटते बांटते फिर खाली हो जाता है
फोन पर घर का हालचाल पूछ लेता है
अपना बेहाल अक्सर छूपा लेता है
घर की शिकायतें सुलझाता रहता है
खूद की शिकायतें दफ़न कर देता है
सस्ता खाना खाकर महिना गुजार लेता है
गरम ठंडा पसंद नापसंद सब भूल जाता है

Read More

ईश्वर का यह स्वरूप तो देखो
सपनों को पूरा करते करते
अपनों को दूर करता जायेगा
नये नये लोगो के साथ जुड़ेगा
नये नये सपनों को जुड़ता जायेंगा
तुम बहुत अभिमान करते रहते थे उसे
धीरे धीरे किसी वजह से दूर करता जायेगा
मजबूर करेगा तुम्हें अकेलापन महसूस करने का
मंजूर करेगा की दुनिया में अकेले हो तूम अब
चलना है तुम्हें उस रास्ते पर जहाँ अकेले हो तुम
धीरे धीरे तुम्हें कोमल से पत्थर जायेगा
सिखे नहीं थे कभी नफ़रत करने का तरिका
इस कदर तुम्हें पटक पटककर सीखायेगा
नफ़रतो का सैलाब तुम्हारे बदन मे दौड़ायेगा
प्यार नफरत सूख दुख का सब अनुभव होगा
इस दुनिया में जब अनुभवों से पारंगत जब हो जाओगे
तब ईश्वर तुम्हें अनुभव के तौर पर अपने पास बुला लेगा

Read More

'कडवे शब्द '
खाली पडी है पुस्तकालयें
मंदिर-मस्जिदोंमे भीड पडी

खाली पडी है नौकरीयां
चुनाव समय से हो पडी

कागज पे बन गया रास्ता
खीस्से देखके जमीं रो पडी

गुन्हेगार तो नेतागीरी करता
आम आदमीसे जेल भर पडी

लोग विकास को युं ढुंढते रहे
'माहि' विकास तीजोरी मे बंद पडा

-पवार महेन्द्र
-१९/११/२०

-Pawar Mahendra

Read More

" सोच समझकर बुनना"
कोई कमल खिलाता हेै,कोई हाथ दिखाता है
यारो यह मत देखो तुम,कोई सहद खिलाता है
मत चूनो निशाना तुम,कोई जहर खिलाता है
कोई झाड़ू दिखाता है,कोई हाथी दौडाता है
यारो पठे लिखे हो तुम,अपनठ ठेंगा दिखाता है
बिना सोचे बिना परखे,क्युं नेत‍ा चुनते हो तुम!
यारो छोडो पक्षपात तुम,अच्छा नेतृत्व चुनना है
कोई वादा निभाता है,कोई हवा उडाता है
कोई घर घर लडवाता है,कोई बेघर हो जाता है
नेता महल बनाता है,दात‍ा चुनौती लडता है
यारो पठे लिखे हो तुम,अपना भविष्य चुनना है
जरा सोच समझकर तुम,अपनां वोट डालना तुम
यारो यहीं गिरगिट रहता है,पलभर में रंग बदलता है
तुम बिको मत कौडी में,वह यहीं से वसूल करता है
बिना बिके बिन‍ा बके,तुम्हें किंमती वोट डालना है
'माहि'यह राजनीति है,गंदी है पर तुम्हीं से बंधी है
-पवार महेन्द्र

-Pawar Mahendra

Read More

"થોડી અસર થવા લાગી છે"

ઘણી નહીં પણ થોડી થોડી અસર થવા લાગી છે
ઘણી નહીં પણ થોડી થોડી કદર થવા લાગી છે

કોણ માંગે છે! વહાલનો દરીયો! આટલું જ બહું
ઘણી નહીં પણ થોડી થોડી સફળ થવા લાગી છે

એક પળ છાયો ઘડીભર તડકા છે મારા જીવનમાં
ઘણી‍ નહીં પણ થોડી થોડી સફર થવા લાગી છે

પ્રેમ નથી કે નથી નફરત આ સંબધનું નામેય નથી
ઘણી નહીં પણ થોડી થોડી મિઠાસ થવા લાગી છે

લોકોને સાબિતી આપવાની જરૂર નથી હે! માહિ
ઘણી નહીં પણ થોડી થોડી અસર થવા લાગી છે

-પવાર મહેન્દ્ર

-Pawar Mahendra

Read More

"मानवता खत्म हो गई "

चंद्र,मंगल पे पहुंचने की बडी बात हो गई
स्वर्ग की भूमि आज सच मे ग्रहण हो गई

देश में बलात्कार की घटना सामान्य हो गई
शोक में दिया बत्ती जलाने की फेशन हो गई

कोई कहता है घटना की कडी निंदा करता हुं
देश की इज्जत यूंही दिन बदिन लुटाती गई

यूं शब्दो से निंदा मत कीजिए मेरे जनाब
मौत भी कांप उठे ऐैसी सजा फरमा दिजीेए

फेसबुक,वोट्सअेप पर खबर फोरवर्ड हो गई
दूसरे दिन जस्टीस फोर करके खत्म भी हो गई

यह सब छोडो कबतक चुडियांँ पहनोगे तुम
जाग्रत हो जाओ वरना समझो बडी देर हो गई

यह महाभारत नहीं जो चीर हरण देख सको
यह नया भारत है कहदो शिर कलम हो गई

अब तो जरा शर्म करो हर बात में राजनीति
"माहि" कलम उठा वरनां मानवता खत्म हो गई


-पवार महेन्द्र

Read More

" प्यासा समंदर "

समंदर में रहकर हम इतने प्यासे थे
एक लब्ज पें जां न्योछावर कर देते थे

हर शक्स के पास उम्मीदें ले जाते थे
जैसे किनारा मिला छूटी नांँव हम थे

जैसे रातो में रोता चांद वैसे हम थे
सूबह में जाने हम खिलते सितारे थे

हमसे कोई सिखता था खूश रहना
दिल में तो हमारे दु:खो के भंवरें थे

बूरे वक्त में किसी के टाईम पास थे
'माहि' अच्छे वक़्त में कहाँ याद थे
-पवार महेन्द्र

-Pawar Mahendra

Read More