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khwahishh

khwahishh

@poojaahirwar021932
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"मेरी आदतों के हबाले से तूने अपने मनसूबे तमाम पुरे किये है।
तू सोबत ही सरीफ रहा ज़माने के सामने।
हम थे की तेरे खातिर दुनिया भर मैं बदनाम हुए है।
फिर भी हर दफा तेरे नापाक इरादों के शिकार हम ही किये गए है।"

- khwahishh

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"अकशर चाहे न चाहे तेरी याद से, मुलाक़ात हो जाती है मेरी।
मसलन मैं उलझन मैं रहती हूं, की बो आई क्यों है।"

- khwahishh

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"ना सांस आती मैं ना सांस जाती मैं, तेरी खुशबु अब है समाती।
खाली सा धड़के है सीने मैं दिल मेरा, धड़कन की आवाज ना अब है आती।
तेरी खुदाई का ये केसा कहर है,याद है तेरी या कोई जहर है।"

- khwahishh

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"शीशे और दर्पण मैं एक ही फर्क होता है।
शीशे से पूरी दुनिया की हकीकत दिखती है।
और दर्पण मैं खुद की।"

- khwahishh

“ जाने किन गलियों मैं बसर कर रहा है।
ये दिल आज कल कश्तीयों मैं सफर कर रहा है।
मंजिल की फ़िक्र छोड़ राहों की कद्र होने लगी है इसे।
अब थकने की सूरत ही कहाँ है,
इस्पे लहरों का असर चढ़ गया है।“️

- khwahishh

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एक लम्हा ठहरा आके मेरे दर पे ..
मेने पूंछा उससे... ऐ लम्हे!
मुद्दतों बाद तुझे ये लम्हा मिला है,
फुर्सत से बिताने को,तू क्यों आके मेरे दर पे ठहरा है।
लम्हे ने कहा... सुनो!
कितनी उम्रो की दुआओ का असर आजमाया है,
बड़ी मुद्दतों के बाद मेने मेरे महबूब के दर पे बसर पाया है।
क्यों पूंछा तूने ये सबाल,मे समझ नहीं पाया,
एक तू ही तो है।
जिसने मुझ फुर्सत – ऐ – बक्त को याद फ़रमाया है।

- khwahishh

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" दफा-ए-इश्क के तहत हम तेरे गुलाम करार किये गये है जुरम ये था... की तुझको अपने दिल का आईना बना बैठे थे। दिल तूने चुराया और गुन्हेगार हमें ठहराया गया ।“


- khwahishh

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"उफ़ ये अरमान भी क्या चीज होते है,
कितना बर्बाद करते है।
बस बेबात करते है।"
- khwahishh

अब आंखेँ भी बरसने से इंकार कर रही है।
कोई नई सुबह देखने का इंतजार कर रही है।
ये हवा ये बादल ये फिजा क्यों नहीं मिलती है,
एक दूसरे से इसकी बजह तलाश कर रही है।
ये धड़कने नये मौसम का एतबार कर रही हैं।
- khwahishh

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