एक लम्हा ठहरा आके मेरे दर पे ..
मेने पूंछा उससे... ऐ लम्हे!
मुद्दतों बाद तुझे ये लम्हा मिला है,
फुर्सत से बिताने को,तू क्यों आके मेरे दर पे ठहरा है।
लम्हे ने कहा... सुनो!
कितनी उम्रो की दुआओ का असर आजमाया है,
बड़ी मुद्दतों के बाद मेने मेरे महबूब के दर पे बसर पाया है।
क्यों पूंछा तूने ये सबाल,मे समझ नहीं पाया,
एक तू ही तो है।
जिसने मुझ फुर्सत – ऐ – बक्त को याद फ़रमाया है।
- khwahishh