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देखकर पहले भी आँखें भरती थी आज आँखों के साथ हृदय भी ... तु पल - पल पर बता -समझा रही हो जैसे छोड़ उसे वहां कुछ अपना नहीं है,, तु किसी और पर नाहक अधिकार जमा रही है, पाया है क्या है खोने से डरती है जो नाहक व्यर्थ पीड़ा से खुद को भर्ती है,,, - Ruchi Dixitक्यों
लौटा देना उन्हें वह सबकुछ जिन्होंने खोया है , देने के अफसोस तलेें प्रेम भला कब पनपा है, लेने के बोझ से प्रेम भला जीवित कब बचा है?? - Ruchi Dixit
... - Ruchi Dixit
...... - Ruchi Dixit
परा से प्रार्थना हे ईश्वर पार ब्रह्म परमेश्वर जगजननी जगदम्बा इस संसार में कोई किसी से घृणा न करें, कोई किसी केे अधिकारों का हनन न करे , किसी में कोई आभाव न हो ,सब आनन्द से परिपूर्ण हो , सब प्रेम से परिपूर्ण हो ,सारा जगत सुगंध से भरा सबकी चेतना जागृत हो सभी आपकी भक्तिविलास से परिपूर्ण हो सब द्वैत को पोषित किन्तु चेतनता एकाग्र और जाग्रत हो - Ruchi Dixit
..... - Ruchi Dixit
अंधेरा रोशनी खोजता रहा उम्रभर खत्म न हुआ यह सफर,,,,, - Ruchi Dixit
...…..
खुद की कमियों से वाकिफ थी इसीलिए खुद के द्वारा किये वादे पर एक कुण्डी लगाई थी यही मेरी प्रतिबद्धता थी वादो के प्रति । खुद में झाँक लेना एक बार तुम भी क्या सबकुछ वहीं है जो था वैसा ही रहा ,,, - Ruchi Dixit
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