विरोध करती है आँखे साथ देता है दिल
छलकते हुए शिकायती अंदाज बिना शिकायत के ,
मगर फिर भी ! जानता है तु जो करती है सब अच्छा करती है
जो जिस लायक है उसे वहीं देती है ।मगर इल्तज़ा तुझसे है
तेरी कजा से शिकायत न हो कभी बस तेरी रजा में रहना आ जाये,,,
- Ruchi Dixit