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*पारस जइसन प्रेम* भरल वसंत में बरसल सारस जइसन, प्रेम होखे ना सबके पारस जइसन। मोह वास और काम के इच्छा भरल बा सबमें पैतृक जायदाद के जइसन, होखे ना लोगवा प्रेम से परिचित, कऽ देला सब कुछ मवाद के जइसन। जे जियेला उहे जानेला अमृत के हाल, मीरा से पूछऽ काहे लागेला अवसाद के जइसन। softrebel
_मौन की चीख_ तल्फ़त मन के भार से, जठराग्नि हुई है अब तो तृप्त, सेवा-मेवा कुछ भी, मन के आगे सब भीख। अशक्त हो गए हैं अश्रु मेरे, जब भाव भरे हैं मुझमें रिक्त, स्तब्ध है जब हृदय की स्पंदन, फिर कानों में कैसी ये चीख। - softrebel
आँख के तेज चेहरा के चमक देख, हमार गुस्सा हो जाला फिका। कद काठी मे हमरा से लमहर बाड़े, पर बाड़े जइसे गोदी मे छोटहन लइका। हिया से हुलसत दिया से अँजोर, भईल बा कौनो जादू टोना बेजोड़। अब तूँ न जनबऽ तऽ का जनहिहे माई कमइछा! - softrebel
शीर्षक: स्वतंत्र भारत हम स्वतंत्र भारत में नेताओं द्वारा पारित किए गए गणतंत्र के गुलाम हैं जहाँ आज़ादी एक तमाशा है और गुलामी एक सुव्यवस्था। बधाई हो स्वतंत्र भारत के नागरिकों आपकी चुप्पी से ही चलती है भारत की सत्ता। Softrebel #UGC
बहल बयार अईसन बसंत बहार भइल बा पीयर सरसो खिलऽल जइसे प्रीत के फूल पियऽराइल बा बाग भईल बा मन के अंगना जियरा नेह नहाइल बा पोर पोर उठेला सिहरन हियरा हुल्लसाइल बा असो फगुआ ई रंग मे रंगाइल बा... - softrebel
हर काश यदि तय हकीकत होती, तो इंसान इंसान न रहकर भगवान हो चुका होता… इंसान की इंसानियत सदैव इंसान बने रहने में है; भगवान बनने की हर कोशिश उसे भीतर से विचलित और बाहर से बोझिल कर देती है। और शायद मैं इन इंसानों की दुनिया में रहने वाली एक विचलित आत्मा हूँ, जिसका आत्म–शरीर कहाँ जा छूटा, मुझे स्वयं भी ज्ञात नहीं — और इन भगवानों की श्रेणी में कदाचित मेरा कोई स्थान नहीं। 🥀 - softrebel
हुए हैं इश्क़ से खफ़ा खफ़ा हम तुमसे तो नहीं, तुम्हारी जिंदादिली हो तुम दोनों को मुबारक हमारे पास तुम्हारे सिवा कुछ नहीं इंतज़ार की घड़ी टिक टिक करके चल रही है यहीं कहीं शायद तुम जहां से निकल आए या शायद जहां मै खड़ी रह गई वहीं। - softrebel
चिता सजे, मंत्र हों, अग्नि जले— पर प्रतीक्षारत आँखें बंद मत कीजिए। अंतिम संस्कार की एक ही परंपरा, आज आप परिवर्तित कर दीजिए। 🫂🌚✨ - softrebel
शीर्षक: एहसासों में जिता इश्क़ इश्क़ ऑनलाइन या ऑफलाइन नहीं होता, इश्क़ तो बस इश्क़ होता है। मीलों की दूरी को जो पल भर में मिटा दे, वही उसके जज़्बातों का जोश होता है। किसी की उपस्थिति से नहीं, किसी के एहसासों में डूबकर जो हो जाए कोई मदहोश वही दो प्रेमियों का सच्चा आगोश होता है। और मैं तुम्हारे एहसासों में जीती हूं तुम्हारी उपस्थिति इस अभागन के भाग्य में ही कहां..? @softrebel #matrubharti #wrritting #writer #online #onlinelove #love
शीर्षक: मैं तुलसी, तेरे आँगन की। अपने स्नेह की आगर से स्वयं सींचोगी रोज तुम मुझे, क्योंकि इसके बाद जब-जब भी जन्म लूँगी मैं— पनपती रहूँगी उसके हृदय में सदा, जैसे पनप जाती है तुलसी बिना खाद, बिना पानी के। और बना देती है सर्वस्व मिट्टी से भरी धरती के हृदय को पावन— ठीक वैसे ही लौट कर आऊंगी, बनकर मैं तुलसी, तेरे आँगन की। @softrebel #matrubharti #love #tulsi #writer #writting
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