Free Hindi Microfiction Quotes by Bhavika Gor | 111582148

कल... सुबह से लेके शाम हो गई,
कोई अंजानी ख़ुशी मिलने वाली थी!
इंतज़ार में गुफ्तगू चांद से हो गई!!
तो बातें कुछ पुर

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