🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
लिखने बैठा हूँ, आज फिर वही
किस्सा पुराना,
पर कलम कागज़ से पहले ही
ठिठक जाती है,
तुमने तो अलविदा कह कर
लकीर खींच दी,
पर मेरी रूह आज भी उस
लकीर पर ठहर जाती है,
तुम कहते थे, कि हम एक
मुकम्मल किताब हैं,
पर गौर से देखो तो सिर्फ पन्ने
बिखरे पड़े हैं,
वो जो 'क' था 'करीब' होने का
एहसास,
अब वो 'कांच' बनकर आँखों
में गड़े हैं,
मेरी हथेली पर जो नसीब की
लकीर थी,
वो तुम्हारे नाम के, पहले अक्षर
पर आकर थम गई,
जैसे कोई बहता हुआ दरिया
अचानक ठहर जाए,
मेरे जज्बातों की रवानी, बस
वहीं पर जम गई,
अजीब है ये सन्नाटा जो तुमने
विरासत में दिया,
अब लफ्ज़ तो हैं, पर उनकी
आवाज़ खो गई है,
मैंने चाहा था कि हम एक नज़्म
बन जाएँ,
पर अफ़सोस, वो महज़ एक
नज़ारा, होकर रह गई है…🔥
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh ☜
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