आते हुए रस्ते
से मैंने पुछा
घर कब आएगा
यह सुन रास्ता
मंद सी मुस्कान
छोड़ कर यह बोला
हे नव राही
तूने की है शुरुआत
अभी ही थक गया
तू इतनी जल्दी
मै जाने कब से
बढ़ता ही जा रहा हूँ
चलता ही जा रहा हूँ
कितने ही रहगुजर
करते है साथ
चलने का वादा
फिर जाने कहाँ
हो जाते ग़ुम
और मै ग़ुम सुम जान न सका अभी तक
"घर कब आएगा "
जब आ जायेगा
तब थम कर
कह दूंगा ऐ राही
तेरा आ गया
कोई दूसरा मिलेगा
तब शायद
मेरा भी आ जायेगा
आशीष जैन.