Bengali Quote in Poem by SOHAN GHOSH

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আয়রে আয়।
সোহন ঘোষ।
রচনাকাল:– ১৩ জানুয়ারি ২০২৬।
২৮ পৌষ ১৪৩২।

আয়রে বাদল,
বাজিয়ে মাদল!
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে বেহারা,
বাজিয়ে সেতারা!
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে কানাই,
বাজিয়ে সানাই!
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে মীনা,
বাজিয়ে বীণা!
আয়রে হেথা আয়। ‌
আয়রে কাশি,
বাজিয়ে বাঁশি !
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে অলোক,
বাজিয়ে ঢোলক!
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে ভোলা,
বাজিয়ে তবলা!
আয়রে হেথা আয়।
আয়রে কালা,
বাজিয়ে থালা!
আয়রে হেথা আয়।

আয়রে তোরা আয়–
পাখিরা যেথা,
নিশ্চিন্তে গান গায়!
পশুপাখি যেথা,
বাংলায় কথা কয়!
বাঘে–গোরুতে যেথা,
একঘাটে জল খায়!
‌‌ সবাই যেথা
সবার বন্ধু হয়।
মানুষ যেথা,
গান গেয়ে কাজ করে।
বাউল যেথা,
দোতারা বাজিয়ে গান গায়।

দুঃখ কষ্ট যন্ত্রণা–
যে দেশে নাই।
স্বপ্নের সেই দেশে–
চলো ভেসে যায়।

Bengali Poem by SOHAN GHOSH : 112013870
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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