वन्दे बोधमयं नित्यं
गुरुं शङ्कररूपिणम् ।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि
चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
बोधमयं – ज्ञानस्वरूप / पूर्णतः चेतना से युक्त
नित्यं – सदा / हमेशा
गुरुं – गुरु को / आध्यात्मिक शिक्षक को
शङ्कररूपिणम् – शंकर (भगवान शिव) के स्वरूप वाले
यम् – जिसको / जिसे
आश्रितः – आश्रय लिया / शरण लिया
हि – निश्चय ही / वास्तव में
वक्रः – टेढ़ा / टेढ़े स्वभाव वाला
अपि – भी
चन्द्रः – चंद्रमा
सर्वत्र – हर जगह / सर्वत्र
वन्द्यते – पूजित होता है / सम्मानित होता है
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सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उस गुरु की वंदना करता हूँ, जो ज्ञानस्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं, और शंकर (भगवान शिव) के समान हैं।
जिनका आश्रय लेकर टेढ़ा (दाग वाला) चंद्रमा भी सर्वत्र पूजनीय बन गया।