ना कोई गिला है, ना कोई शिकवा, तेरे जाने से मुझे,
ना कोई चाह है, ना कोई आस, तेरे आने से मुझे।
जो कहना था, वो कह न सके, हालात की मजबूरी थी,
सुकून मिला है सारी बातें दिल में ही दबाने से मुझे।
तेरी ख़ामोशी कभी बोझ नहीं बन पाई दिल पर,
समझ आ गया है रिश्ता किस तरह बचाने से मुझे।
हम दोस्त ही थे, और यही सच सबसे भारी ठहरा,
बहुत कुछ बच गया वक़्त र हते आगे बढ़ जाने से मुझे।
प्रसंग अब किसी नाम से दिल में हलचल नहीं होती,
रास्ता मिल गया है ख़ुद में ही ठहर जाने से मुझे।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर