अंधी परी और भिखारी का रहस्य

एक पिता अपनी अंधी बेटी को बोझ समझकर एक भिखारी से उसका विवाह कर देता है।
लेकिन उस अंधी लड़की को नहीं पता कि उसकी किस्मत जल्द ही एक अद्भुत मोड़ लेने वाली है।
आयशा ने कभी दुनिया को देखा नहीं था,
लेकिन उसकी कठोरता वह हर साँस के साथ महसूस करती थी।
वह जन्म से अंधी थी, एक ऐसे परिवार में जहाँ सुंदरता को ही सब कुछ माना जाता था। उसकी दो बहनें अपनी बड़ी-बड़ी आँखों और सलीकेदार रूप के लिए सराही जाती थीं, जबकि आयशा एक बोझ थी घर के पीछे के कमरों में छिपा दी गई एक शर्मनाक सच्चाई।
जब वह सिर्फ पाँच साल की थी, उसकी माँ का इंतकाल हो गया। उसके बाद उसके पिता बदल गए। वे कड़वे, रूखे और बेरहम हो गए खासकर उसके साथ। वे कभी उसे नाम से नहीं बुलाते थे; बस कहते, “वह चीज़।”
खाने के समय उसे मेज़ पर बैठने की इजाज़त नहीं थी, और मेहमान आते तो उसे घर के अंदर बंद कर दिया जाता। उनका मानना था कि वह अपशकुन है।
जब आयशा इक्कीस साल की हुई, उसके पिता ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने उसके पहले से टूटे दिल को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया।
एक सुबह वह उसके छोटे से कमरे में आए, जहाँ आयशा चुपचाप ब्रेल में लिखी एक पुरानी किताब पर उँगलियाँ फेर रही थी। उन्होंने उसके घुटनों पर कपड़े का एक मुड़ा हुआ टुकड़ा फेंक दिया।
कल तुम्हारी शादी है उन्होंने ठंडे स्वर में कहा।
आयशा सन्न रह गई। शब्द समझ में ही नहीं आए। शादी? किससे?
मंदिर के पास रहने वाला एक भिखारी है पिता बोले। तुम अंधी हो, वह गरीब है। बिल्कुल सही जोड़ी।
उसका चेहरा सुन्न पड़ गया। वह चीखना चाहती थी, लेकिन आवाज़ गले में ही मर गई।
उसके पास कभी कोई विकल्प नहीं रहा था।
अगले दिन जल्दी-जल्दी एक सादी सी शादी कर दी गई।
उसने अपने पति का चेहरा कभी नहीं देखा और किसी ने उसे बताने की हिम्मत भी नहीं की। पिता ने उसे उस आदमी की ओर धकेला और आदेश दिया कि वह उसका हाथ पकड़ ले। आयशा ने आज्ञाकारी परछाईं की तरह ऐसा कर लिया।
लोग आपस में हँस रहे थे।
अंधी लड़की और भिखारी।
शादी के बाद पिता ने उसके हाथ में कपड़ों की एक छोटी सी पोटली दी और फिर उसे उसी आदमी की ओर धकेल दिया।
अब यह तुम्हारी ज़िम्मेदारी है कहकर वे बिना पीछे देखे चले गए।
भिखारी का नाम इरफ़ान था। वह उसे चुपचाप कच्चे रास्ते से ले गया। काफी देर तक उसने कुछ नहीं कहा।
वे गाँव के किनारे बनी एक जर्जर सी झोपड़ी में पहुँचे। वहाँ मिट्टी और लकड़ी के धुएँ की गंध थी।
यह कोई खास जगह नहीं है इरफ़ान ने नरम आवाज़ में कहा लेकिन यहाँ तुम सुरक्षित रहोगी।
आयशा फटे हुए चटाई पर बैठ गई, आँसू रोकते हुए।
यही अब उसकी ज़िंदगी थी: एक अंधी लड़की, एक भिखारी की पत्नी, मिट्टी की झोपड़ी में कैद।
लेकिन उसी रात कुछ अजीब हुआ।
इरफ़ान ने अपने हाथों से उसके लिए चाय बनाई बहुत सावधानी से। अपनी इकलौती रज़ाई उसे दे दी और खुद दरवाज़े के पास लेट गया, जैसे कोई पहरेदार अपनी रानी की रखवाली कर रहा हो।
वह उससे ऐसे बात करता था जैसे उसकी कोई कीमत हो उससे पूछता कि उसे कौन-सी कहानियाँ पसंद हैं, उसके सपने क्या हैं, कौन-सा खाना उसे खुश करता है।
किसी ने उससे पहले कभी ये सवाल नहीं पूछे थे।
दिन हफ्तों में बदल गए।
हर सुबह इरफ़ान उसे नदी के घाट तक छोड़ता, रास्ते में सूरज, पक्षियों और पेड़ों का ऐसा वर्णन करता कि आयशा को लगता, जैसे वह उन्हें देख पा रही हो।
वह गुनगुनाता रहता जब वह कपड़े धोती, और रात को तारों और दूर-दराज़ की जगहों की कहानियाँ सुनाता।
कई सालों बाद आयशा हँसी।
धीरे-धीरे उसका दिल खुलने लगा।
और उस अजीब सी छोटी झोपड़ी में, कुछ अनहोनी हुई
आयशा को उससे प्यार हो गया।
एक शाम उसने उसका हाथ ढूँढते हुए धीमे से पूछा:
क्या तुम हमेशा से भिखारी थे?
वह कुछ पल चुप रहा।
नहीं उसने नरमी से कहा हमेशा नहीं।
और फिर कुछ नहीं बोला।
आयशा ने भी ज़ोर नहीं दिया।
लेकिन एक दिन…
वह अकेली सब्ज़ी खरीदने बाज़ार गई। इरफ़ान ने उसे रास्ता बहुत ध्यान से समझाया था, और उसने हर मोड़ याद कर लिया था।
लेकिन आधे रास्ते में किसी ने उसका हाथ ज़ोर से पकड़ लिया।
अंधी चूहिया! एक ज़हरीली आवाज़ फुफकारी।
यह उसकी बहन समीरा थी।
अभी तक ज़िंदा हो?
अब भी भिखारी की बीवी बनने का नाटक कर रही हो?
आयशा की आँखों से आँसू छलकने को थे, लेकिन उसने खुद को सँभाला।
मैं खुश हूँ उसने कहा।
समीरा हँस पड़ी कठोर, निर्दयी हँसी।
तुम्हें पता ही नहीं कि वह असल में क्या है।
वह कुछ भी नहीं है।
बिल्कुल तुम्हारी तरह।
फिर उसने कुछ ऐसा फुसफुसाया जिसने आयशा को अंदर तक तोड़ दिया:
वह भिखारी नहीं है, आयशा।
तुमसे सच छुपाया गया है।
आयशा लड़खड़ाते कदमों से घर लौटी घबराई हुई, उलझी हुई।
रात होने तक इंतज़ार किया। जब इरफ़ान लौटा, उसने इस बार दृढ़ स्वर में पूछा:
मुझे सच बताओ।
तुम असल में कौन हो?
इरफ़ान उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया, उसके हाथ थाम लिए।
तुम्हें यह अभी नहीं जानना चाहिए था उसने कहा लेकिन अब मैं तुमसे झूठ नहीं बोल सकता।
आयशा का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
इरफ़ान ने गहरी साँस ली…