अपनी ख्वाहिशों के बोझ तले मेरी खुशियां छिन ली तुमने...
अपनी इज्जत के खेल में इतना मशगूल हुए कि
मेरे सपनों की आह भी न सुनाई दी तुम्हें।
हां जानती हूं ...🙂
बेशकीमती है तुम्हारे अरमान
सिर्फ इसलिए मेरे पंखों को नोच लिया तुमने
होली पसंद नहीं है न तुम्हें
तो कहो.😇
कैसे रंग लिए अपने हाथ
मेरे मासूम सपनों के खून से🙂
चलो मैं तो कर लूंगी माफ
पर
क्या जवाब दोगे उस परमात्मा को
जब वो पूछेंगे
"क्यों एक मासूम सी जिंदगी छीन ली तुमने
क्यों अपनी चाहत के चक्रव्यूह में उसे इतना उलझाया
की जो सांसे उधार दी थी
को भी समय से पहले लौटा दी मुझे"🙂
ArUu ✍️