"मैं कर्जदार हूँ उसका"
मैं हमेशा उस माँ की बेटी का कर्ज़दार रहूँगा... जिसने मुझे अपना शरीर छुने दिया था... उसने मुझ पर भरोसा किया था...
वो जब पहली बार मेरे सामने बैठी थी ना... तो उसकी आँखों में शर्म भी थी... डर भी था... और कहीं न कहीं एक यकीन भी था कि "मैं उसे कभी टूटने नहीं दूँगा..."
उसने अपना हाथ मेरे हाथ में रखा था... जैसे कोई अपना पूरा भरोसा किसी के हवाले कर देता है...
उस दिन समझ आया था-
किसी लड़की का पास आना सिर्फ पास आना नहीं होता...
वो अपनी इज़्ज़त, अपना विश्वास, अपनी पूरी दुनिया साथ लेकर आती है...
आज चाहे वो बदल गई हो...
या किस्मत उसे मुझसे दूर ले गई हो...
लेकिन सच कहूँ-
मैं आज भी उसके उस भरोसे के सामने सिर झुका कर खड़ा हूँ...
क्योंकि हर किसी को इतना सच्चा भरोसा नहीं मिलता, और जिसे मिल जाए...
वो उम्रभर उसका कर्ज़दार ही रहता है..