Hindi Quote in Poem by RTJD

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गुनाहों का पुतला


गुनाह मेरा बस इतना था
कि मैंने ख़्वाब देखे।

ख़्वाब,
जो वास्तविकता के उलट थे।
ख़्वाब,
जो परंपरा के उलट थे।
ख़्वाब,
जिन्होंने मुझे मेरे दोस्तों से अलग कर दिया।

नतीजा यह हुआ—

दोस्त सारे आगे निकल गए,
अब उनके नए दोस्त बन चुके हैं,
उनके जैसे।

वो अब कमाने लगे हैं
पैसे और खुशियां,
कमाने लगे हैं
सम्मान और शोहरत।

अब वे खरीद सकते हैं
सुख और सुविधाएं,
खरीद सकते हैं
प्यार और दवाइयां।

इन सबके बीच
मैं…

कहीं बहुत पीछे छूट गया,
पहचान से भी,
और अभिमान से भी।

मैं अब ख़्वाबों के भी
ख़्वाब देखने लगा हूं।

पहले जो
थोड़ा-सा नाखुश हुआ करता था,
अब वही मिल जाने पर भी
नाज़ करने लगा हूं।

मैं उलझ गया हूं
अपने ही भीतर।

तरसता हूं
दो खुशी के पलों के लिए,
मैं तो अब
जागता हूं सपनों में।

आर्थिक स्थिति मेरी खराब है,
मानसिक स्थिति भी कमजोर है,
और खराब होने लगे हैं
रिश्ते।

घुट-घुट कर ज़िंदा हूं,
अब मौत भी
मेरे नसीब में नहीं है।

मैं अपने गुनाह का प्रायश्चित
किस्तों में चुका रहा हूं।

सब कुछ हार चुका हूं,
लेकिन अभी भी
उम्मीद नहीं हारी है।

उम्मीद इस बात की—
एक दिन
ये सारे ज़ख्म,
ये सारे दुःख
ख़्वाबों से भर दूंगा।

Hindi Poem by RTJD : 112022401
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