देखकर पहले भी आँखें
भरती थी आज आँखों के
साथ हृदय भी ...
तु पल - पल पर
बता -समझा
रही हो जैसे छोड़ उसे वहां कुछ
अपना नहीं है,, तु किसी और
पर नाहक अधिकार जमा रही है,
पाया है क्या है खोने से
डरती है जो नाहक व्यर्थ
पीड़ा से खुद को भर्ती है,,,
- Ruchi Dixitक्यों