“बच्चों की खामोशी को भी समझ लिया करो…
हर शरारत के पीछे सिर्फ बचपना नहीं, कभी-कभी डर भी छुपा होता है।” 🌿
आज गांव में बच्चों और लोगों से मिलकर दिल थोड़ा भारी भी हुआ और बहुत कुछ सीखने को भी मिला…
हम अक्सर सोचते हैं कि बच्चों को क्या समझ होगा,
पर सच ये है कि वो हर चीज़ बहुत जल्दी सीख लेते हैं—
चाहे अच्छी आदत हो या गलत।
कई जगह आज भी बुखार, जुखाम या दर्द होने पर
घर में रखी कोई भी दवाई बच्चों को दे दी जाती है।
पर हर medicine हर उम्र के लिए सही नहीं होती।
कभी-कभी बड़ों की दवाई बच्चों के छोटे शरीर पर बहुत गलत असर कर सकती है।
इसलिए हाथ जोड़कर बस इतनी request है—
बिना doctor advice या prescription के कोई भी medicine बार-बार ना लें और ना बच्चों को दें।
अगर घर में किसी को पढ़ना-लिखना या medicine समझना मुश्किल लगता है,
तो किसी educated इंसान, अच्छे medical staff या pediatric doctor से जरूर पूछ लें।
पूछने में शर्म नहीं होनी चाहिए…
क्योंकि एक छोटी सी सावधानी किसी बच्चे की जिंदगी बचा सकती है।
और कृपया घर में पुरानी रखी दवाइयाँ check जरूर करें।
Expired medicine या बहुत समय से रखी हुई दवा बिना देखे इस्तेमाल ना करें।
उन्हें ऐसे जगह रखें जहाँ छोटे बच्चों के हाथ ना पहुँचें।
एक और जरूरी बात…
बच्चे वही बनते हैं जो वो अपने घर में देखते हैं।
अगर घर में धूम्रपान या गलत आदतें normal होंगी,
तो बच्चे भी धीरे-धीरे उन्हें सही समझने लगते हैं।
बच्चों को सिर्फ खाना और कपड़े नहीं,
एक ऐसा घर चाहिए जहाँ वो बिना डर अपनी बात कह सकें।
Please…
अपने आसपास के गांव के लोगों को, बुजुर्गों को, और उन parents को भी प्यार से समझाइए जिन्हें ये बातें नहीं पता।
क्योंकि awareness भी एक तरह की दुआ होती है…
जो किसी मासूम की जिंदगी बेहतर बना सकती है। 🌿💙