Hindi Quote in Poem by Chandervidya urf Rinki

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कविता

एक लट जो बिखर जाती है तुम्हारे ललाट पर,
पानी से भीगे तुम्हारे मस्तक पर कुछ बूंदें मोतियों-सी दमकतीं।

अधरों पर अनायास ही कुछ शब्द लपके,
मगर फिर खुलकर चुप हो गए।
मुझे लगा तुम कुछ कहोगी,
मगर शब्दों की पहली आहट भीतर ही रह गई।

तुम कह नहीं पाती हो,
लेकिन मैंने देखा है तुम्हारी आँखों का कहना,
और सीख लिया है उनमें बह जाना।
सच कहूँ तो सीखा नहीं,
मगर जब डूब जाता हूँ और हाथ-पाँव चलाता हूँ,
तो तैरते हुए तुम्हारी आँखों से दिल को समझने की कोशिश करता हूँ।

मुझे लगा था—स्त्रियाँ उलझी होती हैं,
मगर तुम भावुक हो और मासूम।
कठोर हो सुरक्षा के लिए,
कोमल हो ममता से भरी।

तुम्हारे भीतर है प्यार सबके लिए,
इसलिए समझ पाना तुम्हें शायद मुश्किल रहा
मगर आसान तो कुछ भी नहीं।

तुम बहल जाती हो मीठी दो-टूक बातों से,
समेट लेती हो, संवार लेती हो हर काम इन दो हाथों से।
पल्लुओं में संसार समेटे, मोह-पाश का आधार समेटे

तुम चल देती हो एक मुस्कान लिए,
मैंने लाखों हृदय थाम लिए।

#स्त्रीएवंस्त्रीत्व #अनकही_सी_बात ✍️चंद्रविद्या उर्फ रिंकी

Hindi Poem by Chandervidya urf Rinki : 112024296
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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